लोकसभा चुनाव: भोपाल सीट पर अब बीजेपी में मंथन, दिग्विजय सिंह के खिलाफ कौन!-Navbharat Times

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दिग्विजय सिंह के खिलाफ कौन, BJP में मंथन

भोपाल मध्य प्रदेश की भोपाल संसदीय सीट से कांग्रेस की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को उम्मीदवार घोषित कर दिए जाने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी में मंथन शुरू हो गया है। आखिर दिग्विजय जैसे दिग्गज नेता के खिलाफ मैदान में किसे उतारा जाए? यह सीट बीजेपी का गढ़ बन चुकी है। बीजेपी में भोपाल सीट से उम्मीदवारी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पार्टी के प्रदेश महामंत्री वीडी शर्मा, वर्तमान सांसद आलोक संजर और महापौर आलोक शर्मा के नाम की चर्चा है। 'कर्मचारी वर्ग अब भी दिग्विजय सिंह से नाराज' बीजेपी सूत्रों के अनुसार, भोपाल सीट को लेकर पार्टी गंभीर है और यहां से किसे उम्मीदवार बनाया जाए, इस पर गहन मंथन चल रहा है। पार्टी इस चुनाव में साधारण कार्यकर्ता के जरिए ही दिग्विजय सिंह को घेरने की कोशिश करेगी और इसके लिए वर्तमान सांसद आलोक संजर या वीडी शर्मा में से किसी एक को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। पार्टी का एक धड़ा शिवराज सिंह चौहान को दिग्विजय सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ाना चाहता है। समर्थक नेताओं का तर्क है कि शिवराज की छवि कट्टरवादी नेता की नहीं है और कर्मचारियों में भी उनकी इमेज ठीक है। जबकि कर्मचारी वर्ग दिग्विजय सिंह से अब भी नाराज है। इस स्थिति में अल्पसंख्यकों के साथ कर्मचारियों के वोट भी बीजेपी को आसानी से मिल सकेंगे। पढ़ें: दिग्विजय सिंह के खिलाफ बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने को तैयार साध्वी प्रज्ञा ठाकुर 2003 में दिग्विजय से हार गए थे शिवराज गौरतलब है कि भोपाल संसदीय क्षेत्र में साढे़ चार लाख से ज्यादा वोट अल्पसंख्यकों का है। साथ ही इस संसदीय क्षेत्र की आठ विधानसभा सीटों में से तीन पर कांग्रेस और पांच पर बीजेपी का कब्जा है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह का दावा है कि भोपाल में बीजेपी की जीत होगी, उम्मीदवार चाहे कोई भी हो। बहरहाल, बीजेपी अगर शिवराज को भोपाल में उतारती है तो 16 साल बाद उनका मुकाबला दिग्विजय सिंह से होगा। इसके पहले वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में राघोगढ़ से शिवराज को बीजेपी ने दिग्विजय के खिलाफ उतारा था लेकिन तब शिवराज को हार का सामना करना पड़ा था। कैलाश विजयवर्गीय भी लड़ने को तैयार बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने भी भोपाल से चुनाव लड़ने से इनकार नहीं किया है। उन्होंने कहा है, ‘वैसे चुनाव लड़ने का मेरा विचार नहीं है, लेकिन पार्टी कहेगी तो भोपाल से लडूंगा। भोपाल में दिग्विजय के खिलाफ चुनाव लड़ने में मजा आएगा।’ राज्य की भोपाल, विदिशा, दमोह और इंदौर संसदीय सीटों पर वर्ष 1989 से बीजेपी का कब्जा है। वहीं जबलपुर और सागर संसदीय सीटों पर कांग्रेस को वर्ष 1996 के बाद से जीत नहीं मिली है। एमपी की 29 में से ये छह सीटें सबसे कठिन मानी जाती हैं। कांग्रेस ने इन कठिन सीटों में सेंधमारी के लिए ही दिग्विजय सिंह को भोपाल से उम्मीदवार बनाया है, जहां 1989 के बाद पार्टी को जीत नहीं मिली है। बीजेपी से नहीं संघ से होगा दिग्विजय का मुकाबला! दरअसल, भोपाल ऐसी संसदीय सीट है, जिसका आसपास की तीन अन्य सीटों -विदिशा, होशंगाबाद और राजगढ़ पर भी असर पड़ता है। ये चारों सीटें बीजेपी के कब्जे में हैं। कांग्रेस को लगता है कि दिग्विजय के जरिए इन सभी सीटों पर उसका प्रभाव बढ़ेगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भोपाल में कांग्रेस का मुकाबला बीजेपी से नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से होने वाला है क्योंकि दिग्विजय सिंह लगातार संघ पर हमले करते रहे हैं। लिहाजा सिंह के भोपाल से चुनाव लड़ने की स्थिति में संघ पूरा जोर लगाएगा और किसी भी सूरत में दिग्विजय को जीतने नहीं देगा। 'टिकट उसी को जिसे संघ का समर्थन' वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक शिव अनुराग पटैरिया कहते हैं, ‘बीजेपी इस संसदीय सीट के चुनाव को हाईप्रोफाइल बनाने से बचेगी लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दिग्विजय सिंह को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। इन स्थितियों में वही व्यक्ति बीजेपी का उम्मीदवार होगा, जिसे संघ का समर्थन हासिल होगा।’.

भोपाल मध्य प्रदेश की भोपाल संसदीय सीट से कांग्रेस की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को उम्मीदवार घोषित कर दिए जाने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी में मंथन शुरू हो गया है। आखिर दिग्विजय जैसे दिग्गज नेता के खिलाफ मैदान में किसे उतारा जाए? यह सीट बीजेपी का गढ़ बन चुकी है। बीजेपी में भोपाल सीट से उम्मीदवारी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पार्टी के प्रदेश महामंत्री वीडी शर्मा, वर्तमान सांसद आलोक संजर और महापौर आलोक शर्मा के नाम की चर्चा है। 'कर्मचारी वर्ग अब भी दिग्विजय सिंह से नाराज' बीजेपी सूत्रों के अनुसार, भोपाल सीट को लेकर पार्टी गंभीर है और यहां से किसे उम्मीदवार बनाया जाए, इस पर गहन मंथन चल रहा है। पार्टी इस चुनाव में साधारण कार्यकर्ता के जरिए ही दिग्विजय सिंह को घेरने की कोशिश करेगी और इसके लिए वर्तमान सांसद आलोक संजर या वीडी शर्मा में से किसी एक को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। पार्टी का एक धड़ा शिवराज सिंह चौहान को दिग्विजय सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ाना चाहता है। समर्थक नेताओं का तर्क है कि शिवराज की छवि कट्टरवादी नेता की नहीं है और कर्मचारियों में भी उनकी इमेज ठीक है। जबकि कर्मचारी वर्ग दिग्विजय सिंह से अब भी नाराज है। इस स्थिति में अल्पसंख्यकों के साथ कर्मचारियों के वोट भी बीजेपी को आसानी से मिल सकेंगे। पढ़ें: दिग्विजय सिंह के खिलाफ बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने को तैयार साध्वी प्रज्ञा ठाकुर 2003 में दिग्विजय से हार गए थे शिवराज गौरतलब है कि भोपाल संसदीय क्षेत्र में साढे़ चार लाख से ज्यादा वोट अल्पसंख्यकों का है। साथ ही इस संसदीय क्षेत्र की आठ विधानसभा सीटों में से तीन पर कांग्रेस और पांच पर बीजेपी का कब्जा है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह का दावा है कि भोपाल में बीजेपी की जीत होगी, उम्मीदवार चाहे कोई भी हो। बहरहाल, बीजेपी अगर शिवराज को भोपाल में उतारती है तो 16 साल बाद उनका मुकाबला दिग्विजय सिंह से होगा। इसके पहले वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में राघोगढ़ से शिवराज को बीजेपी ने दिग्विजय के खिलाफ उतारा था लेकिन तब शिवराज को हार का सामना करना पड़ा था। कैलाश विजयवर्गीय भी लड़ने को तैयार बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने भी भोपाल से चुनाव लड़ने से इनकार नहीं किया है। उन्होंने कहा है, ‘वैसे चुनाव लड़ने का मेरा विचार नहीं है, लेकिन पार्टी कहेगी तो भोपाल से लडूंगा। भोपाल में दिग्विजय के खिलाफ चुनाव लड़ने में मजा आएगा।’ राज्य की भोपाल, विदिशा, दमोह और इंदौर संसदीय सीटों पर वर्ष 1989 से बीजेपी का कब्जा है। वहीं जबलपुर और सागर संसदीय सीटों पर कांग्रेस को वर्ष 1996 के बाद से जीत नहीं मिली है। एमपी की 29 में से ये छह सीटें सबसे कठिन मानी जाती हैं। कांग्रेस ने इन कठिन सीटों में सेंधमारी के लिए ही दिग्विजय सिंह को भोपाल से उम्मीदवार बनाया है, जहां 1989 के बाद पार्टी को जीत नहीं मिली है। बीजेपी से नहीं संघ से होगा दिग्विजय का मुकाबला! दरअसल, भोपाल ऐसी संसदीय सीट है, जिसका आसपास की तीन अन्य सीटों -विदिशा, होशंगाबाद और राजगढ़ पर भी असर पड़ता है। ये चारों सीटें बीजेपी के कब्जे में हैं। कांग्रेस को लगता है कि दिग्विजय के जरिए इन सभी सीटों पर उसका प्रभाव बढ़ेगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भोपाल में कांग्रेस का मुकाबला बीजेपी से नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से होने वाला है क्योंकि दिग्विजय सिंह लगातार संघ पर हमले करते रहे हैं। लिहाजा सिंह के भोपाल से चुनाव लड़ने की स्थिति में संघ पूरा जोर लगाएगा और किसी भी सूरत में दिग्विजय को जीतने नहीं देगा। 'टिकट उसी को जिसे संघ का समर्थन' वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक शिव अनुराग पटैरिया कहते हैं, ‘बीजेपी इस संसदीय सीट के चुनाव को हाईप्रोफाइल बनाने से बचेगी लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दिग्विजय सिंह को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। इन स्थितियों में वही व्यक्ति बीजेपी का उम्मीदवार होगा, जिसे संघ का समर्थन हासिल होगा।’

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