ब्रिटेन के ईयू से निकलने की शर्तें चाहे कैसी भी हों, ब्रेक्जिट के कारण यूरोपीय लोगों की आय में सालाना अरबों यूरो की कमी हो जाएगी. Brexit Europe
ब्रिटेन के ईयू से निकलने की शर्तें चाहे कैसी भी हों, ब्रेक्जिट के कारण यूरोपीय लोगों की आय में सालाना अरबों यूरो की कमी हो जाएगी. जर्मनी के बैर्टेल्समन फाउंडेशन की स्टडी दिखाती है कि ब्रेक्जिट का असर खास तौर पर तब बहुत बड़ा होगा यदि ब्रिटेन बिना किसी समझौते के ईयू से बाहर निकल जाता है.
इसे हार्ड ब्रेक्जिट कहा जा रहा है. अगर ब्रिटिश संसद में कोई फैसला नहीं होता है तो ब्रिटेन के 29 मार्च को बिना किसी तय समझौते के यूरोपीय संघ से बाहर निकल जाने का खतरा है. आय में घाटे का अनुमान इस आधार पर लगाया गया है कि ब्रेक्जिट के कारण चीजों और सेवाओं पर टैरिफ लगेगा. फिलहाल यूरोपीय संघ के सिंगल मार्केट सिस्टम में कोई टैरिफ नहीं लगता है. इस स्टडी के दो लेखकों में से एक डोमिनिक पोनाटू कहते हैं,"ब्रिटेन के ईयू में रहने से वह गुड्स एंड सर्विसेज के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा से बचा रहता है. ब्रेक्जिट के बाद चीजों के दाम ऊपर जा सकते हैं और लोगों का मेहनताना कम हो सकता है."29 मार्च की अंतिम समय सीमा के केवल कुछ ही दिन दूर होने के बावजूद अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि क्या ब्रिटेन 28 देशों के यूरोपीय संघ को किसी समझौते के साथ छोड़ेगा या बिना उसके. ब्रिटिश प्रधानमंत्री टेरीजा मे अपने सांसदों को ईयू के साथ तय हुई शर्तों के लिए मनाने में अब तक नाकाम रही हैं. एक बड़ा धड़ा ब्रेक्जिट की समय सीमा को आगे बढ़ाने के पक्ष में है. ब्रिटेन के निकल जाने पर यूरोपीय संघ के बाकी नागरिकों की आय पर भी बुरा असर होगा. स्टडी दिखाती है कि अगर ब्रिटेन बिना किसी समझौते के बाहर होता है तब हर साल उन्हें आय में करीब 40 अरब यूरो का नुकसान झेलना होगा. वहीं ब्रिटेन में रहने वालों की आय में सालाना करीब 57 अरब यूरो या प्रति व्यक्ति 873 यूरो की कमी आएगी. बैर्टेल्समन फाउंडेशन के अध्यक्ष आर्ट दे गॉयस कहते हैं,"ब्रेक्जिट के कारण दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक क्षेत्र की नींव हिल जाएगी. ब्रसेल्स और लंदन को एक समझौते पर पहुंचने की हर संभव कोशिश करनी ही होगी."निर्यात पर बहुत ज्यादा निर्भर देशों जैसे जर्मनी और फ्रांस को"हार्ड" ब्रेक्जिट से सबसे बड़ा झटका लग सकता है. स्टडी में कहा गया है कि जर्मनी के लोगों को हर साल इससे करीब 10 अरब यूरो का घाटा झेलना पड़ेगा. जर्मनी के दक्षिणी राज्यों जैसे बवेरिया, बाडेन वुर्टेमबैर्ग और पश्चिमी राज्य नार्थ राइन वेस्टफेलिया के औद्योगिक और निर्यात केंद्र बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं. साल 2017 के आंकड़े देखें, तो जर्मन कंपनियों के निर्यात के लिए चोटी के पांच देशों में ब्रिटेन भी शामिल था. यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और सबसे बड़े निर्यातक जर्मनी ने ब्रिटेन को 85 अरब यूरो से भी अधिक मूल्य का सामान भेजा. फ्रांस और इटली भी निर्यात में अरबों यूरो का घाटा झेलेंगे.अगर ब्रिटेन ईयू से परस्पर सहमति बना कर समझौतों के साथ बाहर निकलता है यानि सॉफ्ट ब्रेक्जिट होता है, तो इसके कारण सभी पक्षों पर कम बुरा असर होगा. यूरोपीय संघ के बाकी देशों को होने वाला अनुमानित घाटा तो करीब आधा हो जाएगा. इससे जर्मनों की आय में आने वाली सामान्य कमी भी घट कर पांच अरब यूरो और ब्रिटेन के नागरिकों की आय में कमी करीब 32 अरब यूरो के आसपास रहेगी. इसके कारण यूरोपीय संघ के बाहर के कुछ देशों को खास फासदा पहुंच सकता है. हार्ड ब्रेक्जिट के कारण अमेरिका के लोगों की आय में सालाना 13 अरब यूरो की बढ़त देखने को मिल सकती है. दूसरी ओर, चीन में भी इसके कारण सालाना पांच अरब यूरो आय बढ़ेगी. स्टडी के अनुसार, रूस की सालाना आय में भी करीब 26 करोड़ यूरो की बढ़ोत्तरी आ सकती है. पोनाटू व्यापार जगत पर असर को समेटते हुए कहते हैं,"ब्रेक्जिट के कारण यूरोप के साथ कारोबार करना महंगा हो जाएगा, जबकि बाकी की दुनिया के साथ ज्यादा आकर्षक." फोल्क्सवागन, बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज, ऑउडी, पोर्शे. जर्मनी की ये कारें दुनिया भर में मशहूर हैं. जर्मनी की सांख्यिकी एजेंसी के मुताबिक देश ने 2015 में 226 अरब डॉलर की कारें और उनके पुर्जे निर्यात किये.मशीनें बनाने में जर्मनों का कोई जवाब नहीं. हर काम के लिए मशीन और औजार बना देंगे. मैकेनिकल इंजीनियरिंग के बलबूते जर्मनी ने 2015 में 169 अरब यूरो कमाये.बायर और बीएएसएफ जैसी जर्मन कंपनियों की हिस्सेदारी जर्मन निर्यात में 10 फीसदी है.स्मार्टफोन, टीवी या कंप्यूटर में भले ही जापान, कोरिया और अमेरिका का दबदबा हो, लेकिन रेलवे ट्रैकों के लिए स्पेशल तार बनाना, उनके कंडक्टर तैयार करना, ये जर्मनी का इलाका है. 2015 में छह फीसदी निर्यात आय इसी क्षेत्र से हुई.स्मार्टफोन, टीवी या कंप्यूटर में भले ही जापान, कोरिया और अमेरिका का दबदबा हो, लेकिन रेलवे ट्रैकों के लिए स्पेशल तार बनाना, उनके कंडक्टर तैयार करना, ये जर्मनी का इलाका है. 2015 में छह फीसदी निर्यात आय इसी क्षेत्र से हुई.जर्मनी के दवा उद्योग की दुनिया भर में अच्छी छवि है. बीते 100 साल में कई बड़ी बीमारियों की दवाएं जर्मनी से निकली है. पेंटेट खत्म होने के बावजूद जर्मनी 70 अरब यूरो की दवाएं और मेडिकल मशीनें निर्यात करता है.शहर को साफ करने वाली गाड़ी, कूड़ा उठाने वाला खास ट्रक या फिर स्पेशल बसें. जर्मनी ने 57 अरब डॉलर यूरो की लागत वाले ऐसे वाहन दुनिया भर में बेचे.दुनिया का बेहतरीन स्टील जर्मनी में बनता है. एल्युमिनियम फॉयल और सुपर कंडक्टर मेटल जैसी धातुओं में जर्मनी की धाक है. 2015 में जर्मनी ने 50 अरब यूरो की धातुएं एक्सपोर्ट की.मेड इन जर्मनी की मुहर वाली लड़ाकू पनडुब्बियां और टैंकों की बड़ी मांग है. कई जर्मन हथियारों के निर्यात को लेकर शर्मिंदगी महसूस करते हैं. वहीं ज्यादातर निर्यात होने वाले सामान की लिस्ट में चुइंग गम और प्लास्टिक प्रोडक्ट्स भी शामिल हैं.
United States Latest News, United States Headlines
Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.
जम्मू-कश्मीर : IT विभाग की छापेमारी में आतंकियों के मददगार से करोड़ों की नगदी जब्तजम्मू-कश्मीर में Loksabha Election के दौरान कालेधन के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए छापेमारी गी गई। इस दौरान इन्कम टैक्स ऑफिसर ने करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति जब्त की गई है।
Read more »
वाईएसआर कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के लिए आंध्र प्रदेश से नौ प्रत्याशियों की सूची जारी कीपार्टी अध्यक्ष वाई एस जगनमोहन रेड्डी सभी 175 विधानसभा सीटों और शेष 16 संसदीय सीटों के लिए प्रत्याशियों की अगली सूची रविवार को जारी करेंगे.
Read more »
आम आदमी के असली 'पोस्टर बॉय' थे मनोहर पर्रिकर-Navbharat Timesमनोहर गोपालकृष्ण प्रभु पर्रिकर की जिंदगी 13 दिसंबर 1955 को गोवा के मापुसा एक मध्यमवर्गीय परिवार से शुरू हुई। सामान्य परिवेश से निकलर उन्होंने आईआईटी मुंबई से शिक्षित होने से लेकर गोवा के मुख्यमंत्री, रक्षा मंत्री और फिर गोवा के मुख्यमंत्री के तौर पर आखिरी सांस ली। पर्रिकर की जिंदगी एक आम आदमी के पोस्टर बॉय बनने की कहानी की जबरदस्त मिसाल है। आगे की स्लाइड में देखें उनकी राजनीति और जिंदगी के चमकते और संघर्ष से सफलता तक की कहानी...
Read more »
बिहार BJP में घमासान, सीटों की अदला बदली से नेताओं में अनबनबीजेपी में सबसे बडी घामासान की वजह केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की सीट नवादा एलजेडी के हिस्से में जाने से और शाहनवाज हुसैन की सीट जेडीयू को जाने की वजह से हैं. केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के पटना साहिब से सीट तय होने की खबर को लेकर उनके और राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा के बीच तनातनी जारी है. भागलपुर और बाल्मीकीनगर की सीट जेडीयू को जाने से स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ताओं में नाराजगी दिख रही है और कई मंडल अध्यक्षों ने सामूहिक इस्तीफे की पेशकश भी की है.
Read more »
रॉबर्ट वाड्रा की HC से मांग, ED की ओर से दर्ज मामला रद्द होरॉबर्ट वाड्रा ने बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया जहां उन्होंने धनशोधन के एक मामले में अपने खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दर्ज की गई प्राथमिकी रद्द करने की मांग की. जांच एजेंसी इस मामले में उनसे पूछताछ कर चुकी है.
Read more »
