आम आदमी के असली 'पोस्टर बॉय' थे मनोहर पर्रिकर via NavbharatTimes ManoharParrikar GoaCM BJP
मनोहर पर्रिकर की पत्नी की भी 2001 में कैंसर से लड़ते हुए मौत हो गई थी। उस वक्त पर्रिकर गोवा के सीएम भी थे। हालांकि, इस निजी त्रासदी से ऊबरकर न सिर्फ उन्होंने बतौर सीएम अपना दायित्व निभाया, बल्कि दोनों युवा बेटों की परवरिश भी शानदार तरीके से अकेले ही की।मनोहर पर्रिकर को देश में राजनीति के भविष्य के संकेतों को समझनेवाले के तौर पर भी देखा जाएगा। 2013 में पर्रिकर बीजेपी के पहले अग्रणी नेताओं में से थे जिन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी का नाम उस वक्त बीजेपी के पीएम कैंडिडेट के तौर पर आगे किया था। गोवा में बीजेपी की सत्ता में वापसी कराने और गठबंधन के साथ सरकार चलाने के लिए भी बीजेपी आलाकमान ने पर्रिकर पर ही भरोसा किया। 2017 में गोवा चुनाव के बाद बीजेपी के पास बहुमत नहीं था, लेकिन पर्रिकर दिल्ली से गोवा पहुंचे और आखिरकार जोड़तोड़ के बाद सरकार बनाने में कामयाब रहे।प्रधानमंत्री मोदी जिन नेताओं पर खासा विश्वास करते थे, उनमें एक मनोहर पर्रिकर भी रहे। पर्रिकर और मोदी के बीच के रिश्तों का समीकरण इससे समझा जा सकता है कि पर्रिकर न सिर्फ उन शुरुआती लोगों में से थे जिन्होंने पीएम पद के लिए मोदी का नाम बढ़ाया था। वह लगातार राफेल डील को लेकर पीएम का बचाव करते रहे।मनोहर पर्रिकर के बारे में दिलचस्प बात है कि छात्र जीवन से संघ से जुड़े रहे और ईसाई बहुल राज्य गोवा के सीएम की कुर्सी तक पहुंचे। गोवा के लोगों के बीच पर्रिकर को 'मैन विद प्लान' के नाम से लोकप्रिय हुए। पर्रिकर जब प्रदेश के विपक्ष के नेता थे तो उनके भाषण न्यू गोवा के सपनों के साथ कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार पर कठोर तंज कसनेवाले थे। बतौर विपक्षी नेता उनके भाषणों में दूरदर्शिता और जोश था और इसने उन्हें प्रदेश में लोकप्रिय बनाया। सीएम बनने के बाद उन्होंने गोवा में फैले भ्रष्टाचार, अवैध माइनिंग के आरोप में कई कांग्रेसी नेताओं पर कार्रवाई की और इसने उन्हें जनता के बीच फैसले लेनेवाला सीएम के तौर पर स्थापित किया।गोवा के ज्यादातर लोगों की तरह मनोहर पर्रिकर को भी फुटबॉल खेलना काफी पसंद था। एक फुटबॉल टूर्नमेंट के दौरान उन्होंने कहा भी था कि गोवा के लोग अब फुटबॉल को भूल रहे हैं और क्रिकेट खेल रहे हैं। खुद पर्रिकर ने एक इंटरव्यू में कहा था कि राजनीति में आने के बाद वह आईआईटी हॉस्टल की मस्ती और फुटबॉल को मिस करते हैं।बतौर सीएम गोवा में मनोहर पर्रिकर के कार्यकाल को न्यू गोवा बनाने के उनके प्रयासों के लिए याद किया जाएगा। पर्रिकर ने इन्फ्रास्ट्रक्चर के कामों और गोवा में निवेश को बढ़ाने पर काफी जोर दिया था। गोवा के सीएम का कार्यभार 2017 में संभालने के बाद उन्होंने कहा था कि गोवा हॉलिडे और शूटिंग भर की जगह नहीं है। वह गोवा को निवेश और इनफ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से देश का अव्वल प्रदेश बनाना चाहते हैं।.
मनोहर पर्रिकर की पत्नी की भी 2001 में कैंसर से लड़ते हुए मौत हो गई थी। उस वक्त पर्रिकर गोवा के सीएम भी थे। हालांकि, इस निजी त्रासदी से ऊबरकर न सिर्फ उन्होंने बतौर सीएम अपना दायित्व निभाया, बल्कि दोनों युवा बेटों की परवरिश भी शानदार तरीके से अकेले ही की।मनोहर पर्रिकर को देश में राजनीति के भविष्य के संकेतों को समझनेवाले के तौर पर भी देखा जाएगा। 2013 में पर्रिकर बीजेपी के पहले अग्रणी नेताओं में से थे जिन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी का नाम उस वक्त बीजेपी के पीएम कैंडिडेट के तौर पर आगे किया था। गोवा में बीजेपी की सत्ता में वापसी कराने और गठबंधन के साथ सरकार चलाने के लिए भी बीजेपी आलाकमान ने पर्रिकर पर ही भरोसा किया। 2017 में गोवा चुनाव के बाद बीजेपी के पास बहुमत नहीं था, लेकिन पर्रिकर दिल्ली से गोवा पहुंचे और आखिरकार जोड़तोड़ के बाद सरकार बनाने में कामयाब रहे।प्रधानमंत्री मोदी जिन नेताओं पर खासा विश्वास करते थे, उनमें एक मनोहर पर्रिकर भी रहे। पर्रिकर और मोदी के बीच के रिश्तों का समीकरण इससे समझा जा सकता है कि पर्रिकर न सिर्फ उन शुरुआती लोगों में से थे जिन्होंने पीएम पद के लिए मोदी का नाम बढ़ाया था। वह लगातार राफेल डील को लेकर पीएम का बचाव करते रहे।मनोहर पर्रिकर के बारे में दिलचस्प बात है कि छात्र जीवन से संघ से जुड़े रहे और ईसाई बहुल राज्य गोवा के सीएम की कुर्सी तक पहुंचे। गोवा के लोगों के बीच पर्रिकर को 'मैन विद प्लान' के नाम से लोकप्रिय हुए। पर्रिकर जब प्रदेश के विपक्ष के नेता थे तो उनके भाषण न्यू गोवा के सपनों के साथ कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार पर कठोर तंज कसनेवाले थे। बतौर विपक्षी नेता उनके भाषणों में दूरदर्शिता और जोश था और इसने उन्हें प्रदेश में लोकप्रिय बनाया। सीएम बनने के बाद उन्होंने गोवा में फैले भ्रष्टाचार, अवैध माइनिंग के आरोप में कई कांग्रेसी नेताओं पर कार्रवाई की और इसने उन्हें जनता के बीच फैसले लेनेवाला सीएम के तौर पर स्थापित किया।गोवा के ज्यादातर लोगों की तरह मनोहर पर्रिकर को भी फुटबॉल खेलना काफी पसंद था। एक फुटबॉल टूर्नमेंट के दौरान उन्होंने कहा भी था कि गोवा के लोग अब फुटबॉल को भूल रहे हैं और क्रिकेट खेल रहे हैं। खुद पर्रिकर ने एक इंटरव्यू में कहा था कि राजनीति में आने के बाद वह आईआईटी हॉस्टल की मस्ती और फुटबॉल को मिस करते हैं।बतौर सीएम गोवा में मनोहर पर्रिकर के कार्यकाल को न्यू गोवा बनाने के उनके प्रयासों के लिए याद किया जाएगा। पर्रिकर ने इन्फ्रास्ट्रक्चर के कामों और गोवा में निवेश को बढ़ाने पर काफी जोर दिया था। गोवा के सीएम का कार्यभार 2017 में संभालने के बाद उन्होंने कहा था कि गोवा हॉलिडे और शूटिंग भर की जगह नहीं है। वह गोवा को निवेश और इनफ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से देश का अव्वल प्रदेश बनाना चाहते हैं।
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