आम बजट 2026-27 में चुनावी राज्यों के लिए लोक-लुभावनी घोषणाओं की अनुपस्थिति ने विपक्षी सांसदों को हैरान कर दिया। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट को पेशेवर स्वरूप दिया, जिससे राजनीति के दबाव से दूर एक आर्थिक प्रस्तुति दिखी। केरल और तमिलनाडु के सांसदों ने विशेष रूप से निराशा व्यक्त की, क्योंकि उन्हें अपने राज्यों के लिए सौगातों की उम्मीद...
संजय मिश्र, जागरण नई दिल्ली। पांच राज्यों के चुनाव दहलीज पर होने के बावजूद इनको लेकर कुछ लोक-लुभावनी घोषणाएं-वादे आम बजट 2026-27 में न होना विपक्षी सांसदों को भी हैरान कर गया। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले आम बजट में विशेष रूप से बिहार चुनाव के पूर्व घोषणाओं की बौछार की थी उसे देखते हुए पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु-पुडुचेरी से लेकर असम के संदर्भ में भी कुछ ऐसे ही उम्मीद लगाई जा रही थी। मगर वित्तमंत्री ने इसके विपरीत बजट को पेशवर स्वरूप देने की कोशिश की जिसमें आर्थिकी को राजनीति की जरूरतों के दबाव से दूर रखने का एक प्रयास नजर आया। उम्मीद के प्रतिकूल किसी भी तरह की चुनावी सौगातों की घोषणा नहीं कर वित्तमंत्री ने चुनावी राज्यों के विपक्षी सांसदों को खासतौर पर मायूस किया और केरल के विपक्षी सांसदों ने तो इस पर नाराजगी का इजहार करते हुए सदन में आवाज उठाई। विपक्ष खेमा हैरान वित्तमंत्री के बजट भाषण के दौरान बीच-बीच में कई दफा चुनावी राज्यों के लिए घोषणाएं की जाने की विपक्षी बेंच से टीका-टिप्पणियां की गई। खासतौर पर जब नारियल तथा ड्राइफ्रूटस की खेती के प्रोत्साहन तथा वाराणसी से सिलीगुड़ी तक हाई स्पीड रेल कॉरीडोर की घोषणाएं हुई। इसके उपरांत चुनाव वाले राज्यों के लिए सीधे कोई एलान नहीं हुआ और जब निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण समाप्त किया तो केरल से कांग्रेस के सांसद अपने राज्य को कुछ नहीं देने का आरोप लगाते हुए विरोध की आवाज उठाने लगे। तमिलनाडु के कुछ विपक्षी सांसद भी अपनी सीट पर खड़े दिखे। हालांकि दिलचस्प यह रहा कि सदन में आक्रामक रहने वाले तृणमूल कांग्रेस के सांसद बजट भाषण के दौरान पूरी तरह संयमित दिखे। वैसे लोकसभा में वित्तमंत्री के बजट भाषण प्रारंभ करने से ठीक पहले पक्ष-विपक्ष के राजनीतिक चिंतन की एक छोटी झलक जरूर दिखाई पड़ी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सदन में प्रवेश करते हुए सत्ताधारी भाजपा के सांसदों ने हर-हर महादेव, वंदे मातरम और भारत माता की जय के नारे लगाए तो विपक्षी सांसदों ने जवाब में जय संविधान की आवाज बुलंद की। वैसे वित्तमंत्री का करीब 85 मिनट का बजट भाषण पूरी तरह निर्बाध रहा और विपक्ष ने एक बार भी इसमें कहीं खलल नहीं डाला। सत्तापक्ष लगातर हर घोषणा पर मेज थपथपता रहा जबकि विपक्षी खेमा निरपेक्ष भाव से चुपचाप वित्तमंत्री को सुनता दिखा। कॉफी ब्राउन बार्डर के साथ सुनहरे चेक बॉर्डर युक्त बैंगनी तमिलनाडु की प्रसिद्ध कांजीवरम साड़ी पहने निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में लगातार अपना नौवां बजट पेश किया। भाषण में दिखा अलग अंदाज वित्तमंत्री के बजट भाषण के अबकी बार अलग अंदाज की झलक इससे भी मिली कि टैगौर-तिरुवल्लुवर हों या बसवन्ना जैसी महान हस्तियों का इस बार कोई उल्लेख नहीं किया। भाषण के प्रारंभ में गुरु रविदास जयंती और माघ पूर्णिमा के पवित्र अवसर का जिक्र जरूर किया। वित्तमंत्री के बजट भाषण के दौरान अग्रिम बेंच पर पीएम मोदी सत्तापक्ष की अगुवाई कर रहे थे और केंद्रीय मंत्री राजनाथ ¨सह, अमित शाह तथा शिवराज सिंह उनके साथ पहली पंक्ति में बैठे थे। सड़क-परिवहन मंत्री नितिन गड़करी की अनुपस्थिति में शिवराज पहली पंक्ति में बैठे थे। निर्मला सीतारमण के निकट स्वास्थ्य मंत्री जेपी नडडा बैठे थे।विपक्षी बेंच की कमान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी संभाल रहे थे। वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव तथा टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी भी विपक्षी खेमे की पहली पंक्ति में बैठे नेताओं की नुमाइंदगी कर रहे थे। बजट भाषण खत्म होने के बाद पीएम मोदी समेत तमाम मंत्रियों ने सीतारमण को उनकी सीट पर जाकर बधाई दी।वहीं विपक्षी खेमे के कई प्रमुख सांसद एनसीपी-एसपी की सांसदसुप्रिया सुले के पास जाकर विमान दुर्घटना में हुई अजीत पवार की मौत पर अपनी संवेदनाएं जता रहे थे। इसमें कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, तारिक अनवर, मीसा भारती से लेकर एनके प्रेमंचद्रन आदि शामिल थे। बजट 2026: क्या है 5 X 5 का फैक्टर? आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर, पढ़ें पूरी खबर.
संजय मिश्र, जागरण नई दिल्ली। पांच राज्यों के चुनाव दहलीज पर होने के बावजूद इनको लेकर कुछ लोक-लुभावनी घोषणाएं-वादे आम बजट 2026-27 में न होना विपक्षी सांसदों को भी हैरान कर गया। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले आम बजट में विशेष रूप से बिहार चुनाव के पूर्व घोषणाओं की बौछार की थी उसे देखते हुए पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु-पुडुचेरी से लेकर असम के संदर्भ में भी कुछ ऐसे ही उम्मीद लगाई जा रही थी। मगर वित्तमंत्री ने इसके विपरीत बजट को पेशवर स्वरूप देने की कोशिश की जिसमें आर्थिकी को राजनीति की जरूरतों के दबाव से दूर रखने का एक प्रयास नजर आया। उम्मीद के प्रतिकूल किसी भी तरह की चुनावी सौगातों की घोषणा नहीं कर वित्तमंत्री ने चुनावी राज्यों के विपक्षी सांसदों को खासतौर पर मायूस किया और केरल के विपक्षी सांसदों ने तो इस पर नाराजगी का इजहार करते हुए सदन में आवाज उठाई। विपक्ष खेमा हैरान वित्तमंत्री के बजट भाषण के दौरान बीच-बीच में कई दफा चुनावी राज्यों के लिए घोषणाएं की जाने की विपक्षी बेंच से टीका-टिप्पणियां की गई। खासतौर पर जब नारियल तथा ड्राइफ्रूटस की खेती के प्रोत्साहन तथा वाराणसी से सिलीगुड़ी तक हाई स्पीड रेल कॉरीडोर की घोषणाएं हुई। इसके उपरांत चुनाव वाले राज्यों के लिए सीधे कोई एलान नहीं हुआ और जब निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण समाप्त किया तो केरल से कांग्रेस के सांसद अपने राज्य को कुछ नहीं देने का आरोप लगाते हुए विरोध की आवाज उठाने लगे। तमिलनाडु के कुछ विपक्षी सांसद भी अपनी सीट पर खड़े दिखे। हालांकि दिलचस्प यह रहा कि सदन में आक्रामक रहने वाले तृणमूल कांग्रेस के सांसद बजट भाषण के दौरान पूरी तरह संयमित दिखे। वैसे लोकसभा में वित्तमंत्री के बजट भाषण प्रारंभ करने से ठीक पहले पक्ष-विपक्ष के राजनीतिक चिंतन की एक छोटी झलक जरूर दिखाई पड़ी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सदन में प्रवेश करते हुए सत्ताधारी भाजपा के सांसदों ने हर-हर महादेव, वंदे मातरम और भारत माता की जय के नारे लगाए तो विपक्षी सांसदों ने जवाब में जय संविधान की आवाज बुलंद की। वैसे वित्तमंत्री का करीब 85 मिनट का बजट भाषण पूरी तरह निर्बाध रहा और विपक्ष ने एक बार भी इसमें कहीं खलल नहीं डाला। सत्तापक्ष लगातर हर घोषणा पर मेज थपथपता रहा जबकि विपक्षी खेमा निरपेक्ष भाव से चुपचाप वित्तमंत्री को सुनता दिखा। कॉफी ब्राउन बार्डर के साथ सुनहरे चेक बॉर्डर युक्त बैंगनी तमिलनाडु की प्रसिद्ध कांजीवरम साड़ी पहने निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में लगातार अपना नौवां बजट पेश किया। भाषण में दिखा अलग अंदाज वित्तमंत्री के बजट भाषण के अबकी बार अलग अंदाज की झलक इससे भी मिली कि टैगौर-तिरुवल्लुवर हों या बसवन्ना जैसी महान हस्तियों का इस बार कोई उल्लेख नहीं किया। भाषण के प्रारंभ में गुरु रविदास जयंती और माघ पूर्णिमा के पवित्र अवसर का जिक्र जरूर किया। वित्तमंत्री के बजट भाषण के दौरान अग्रिम बेंच पर पीएम मोदी सत्तापक्ष की अगुवाई कर रहे थे और केंद्रीय मंत्री राजनाथ ¨सह, अमित शाह तथा शिवराज सिंह उनके साथ पहली पंक्ति में बैठे थे। सड़क-परिवहन मंत्री नितिन गड़करी की अनुपस्थिति में शिवराज पहली पंक्ति में बैठे थे। निर्मला सीतारमण के निकट स्वास्थ्य मंत्री जेपी नडडा बैठे थे।विपक्षी बेंच की कमान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी संभाल रहे थे। वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव तथा टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी भी विपक्षी खेमे की पहली पंक्ति में बैठे नेताओं की नुमाइंदगी कर रहे थे। बजट भाषण खत्म होने के बाद पीएम मोदी समेत तमाम मंत्रियों ने सीतारमण को उनकी सीट पर जाकर बधाई दी।वहीं विपक्षी खेमे के कई प्रमुख सांसद एनसीपी-एसपी की सांसदसुप्रिया सुले के पास जाकर विमान दुर्घटना में हुई अजीत पवार की मौत पर अपनी संवेदनाएं जता रहे थे। इसमें कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, तारिक अनवर, मीसा भारती से लेकर एनके प्रेमंचद्रन आदि शामिल थे। बजट 2026: क्या है 5 X 5 का फैक्टर? आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर, पढ़ें पूरी खबर
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