डीप स्पेस नेटवर्क: स्पेस का शक्तिशाली साइंटिफिक टेलीकम्युनिकेशन सिस्टम, जानें कैसे करता है काम

मानवीय रुचि News

डीप स्पेस नेटवर्क: स्पेस का शक्तिशाली साइंटिफिक टेलीकम्युनिकेशन सिस्टम, जानें कैसे करता है काम
विज्ञानप्रौद्योगिकीराष्ट्रीय
  • 📰 News Nation
  • ⏱ Reading Time:
  • 8 sec. here
  • 12 min. at publisher
  • 📊 Quality Score:
  • News: 41%
  • Publisher: 51%

डीप स्पेस नेटवर्क: स्पेस का शक्तिशाली साइंटिफिक टेलीकम्युनिकेशन सिस्टम, जानें कैसे करता है काम

"नई दिल्ली, 2 अप्रैल । जब अंतरिक्ष यान पृथ्वी से लाखों या करोड़ों किलोमीटर दूर चंद्रमा, मंगल या अन्य ग्रहों की यात्रा पर होते हैं, तब उनके साथ निरंतर संपर्क बनाए रखना बहुत चुनौतीपूर्ण काम होता है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के पास इस चुनौती का समाधान है- डीप स्पेस नेटवर्क के रुप में जिसे डीएसएन भी कहा जाता है।Advertisment डीप स्पेस नेटवर्क दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे साइंटिफिक टेलीकम्युनिकेशन सिस्टम है, जो दूरस्थ अंतरिक्ष मिशनों को पृथ्वी से जोड़े रखता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, डीप स्पेस नेटवर्क नासा का एक अंतर राष्ट्रीय रेडियो एंटीना नेटवर्क है। यह न सिर्फ अंतरिक्ष यानों को निर्देश भेजता है बल्कि उनसे मिलने वाले वैज्ञानिक डेटा, तस्वीरें और सिग्नल को भी पृथ्वी पर पहुंचाता है। डीएसएन का संचालन नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी करती है। यह नेटवर्क तीन मुख्य केंद्रों पर आधारित है, जो दुनिया भर में लगभग 120 डिग्री की दूरी पर स्थित हैं, पहला गोल्डस्टोन कैलिफोर्निया में दूसरा मैड्रिड में और तीसरा कैनबरा में स्थित है। इन तीनों केंद्रों को इस तरह चुना गया है कि पृथ्वी घूमने पर भी कोई अंतरिक्ष यान डीएसएन की नजर से कभी पूरी तरह ओझल न हो। जब एक केंद्र से यान क्षितिज से नीचे चला जाता है, तो दूसरा केंद्र तुरंत उसका सिग्नल पकड़ लेता है। अब सवाल है कि डीएसएन कैसे काम करता है? वैज्ञानिकों के अनुसार इसमें बड़े-बड़े पैराबॉलिक डिश एंटीना लगे हैं। इनमें सबसे बड़ा 70 मीटर व्यास वाला एंटीना है, जो अरबों किलोमीटर दूर से आने वाले बेहद कमजोर रेडियो सिग्नलों को भी पकड़ने में सक्षम है। ये एंटीना अंतरिक्ष यानों को कमांड भेजते हैं, उनकी स्थिति की निगरानी करते हैं और वैज्ञानिक डेटा वापस पृथ्वी पर लाते हैं। डीएसएन सिर्फ कम्युनिकेशन का साधन नहीं है। यह रडार और रेडियो एस्ट्रोनॉमी के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे वैज्ञानिक क्षुद्रग्रहों यानी एस्टेरॉयड, ग्रहों और चंद्रमाओं के अंदरूनी हिस्सों के बारे में जानकारी हासिल करते हैं। डीप स्पेस नेटवर्क एस्ट्रोनॉमी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिकों के अनुसार आज नासा के अधिकांश गहरे अंतरिक्ष मिशन जैसे मंगल पर भेजे गए रोवर, जुपिटर और शनि के मिशन या वॉयेजर जैसे दूरस्थ यान डीएसएन पर ही निर्भर हैं। बिना डीएसएन के इन यानों से संपर्क रखना लगभग असंभव होता। यही नहीं डीएसएन की मदद से वैज्ञानिक पृथ्वी के ऊर्जा संतुलन, ब्रह्मांड की संरचना और सौर मंडल की गहराइयों को बेहतर ढंग से समझ पा रहे हैं। भविष्य में चंद्रमा, मंगल और उससे आगे के मिशनों के लिए डीएसएन और भी महत्वपूर्ण होने वाला है। --आईएएनएस एमटी/पीएम डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है.

इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी."

We have summarized this news so that you can read it quickly. If you are interested in the news, you can read the full text here. Read more:

News Nation /  🏆 15. in İN

विज्ञान प्रौद्योगिकी राष्ट्रीय डीप स्पेस नेटवर्क: स्पेस का शक्तिशाली साइंटिफिक ट जानें कैसे करता है काम न्यूज़ नेशन News Nation News Nation Live Tv News Nation Live News Nation Videos

 

United States Latest News, United States Headlines



Render Time: 2026-04-02 13:36:45