बेंगलुरु के शरत श्यामसुंदर ने स्टार्टअप्स के लिए जटिल अनुपालन की मुश्किलों को एक सफल ₹2.
नई दिल्ली: भारत में स्टार्टअप शुरू करने का उत्साह अक्सर जटिल कानूनी और नौकरशाही की कागजी कार्रवाई के सामने फीका पड़ जाता है। रजिस्ट्रेशन, टैक्स फाइलिंग और तमाम तरह के डॉक्यूमेंट्स पहली बार के उद्यमियों के लिए बड़ी दीवार बन जाते हैं। बेंगलुरु के उद्यमी शरत श्यामसुंदर ने इसी चुनौती को एक बड़े अवसर में बदल दिया। अपनी पहली कारोबारी विफलता से सबक लेते हुए शरत ने 2015 में 'द स्टार्टअप जोन' की स्थापना की। इसका मिशन स्टार्टअप कंप्लायंस को 'सरल और तनाव-मुक्त' बनाना था। महज 2-3 लाख रुपये की शुरुआती पूंजी के साथ घर से शुरू हुई उनकी कंपनी ने 5,000 से ज्यादा स्टार्टअप्स की मदद की है। किसी बाहरी फंडिंग के बिना ही वित्त वर्ष 2024-25 में इसने 2.
2 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल किया। यह अपने पहले साल में 5 लाख रुपये था। आइए, यहां शरत श्यामसुंदर की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।अपने अनुभव से लिया सबक अपने अनुभव से लिया सबक' imgsize='25084' >ज्यादातर नए उद्यमी भारत के जटिल कंप्लायंस सिस्टम से जूझते हैं। बेंगलुरु के शरत श्यामसुंदर ने 2011 में अपने पहले उद्यम 'द इनविटेशन स्टोर' के दौरान इस चुनौती का सामना किया। उन्हें अनावश्यक रूप से सर्विस टैक्स रजिस्ट्रेशन कराने की सलाह दी गई। इससे उनका समय और पैसा बर्बाद हुआ। इस अनुभव ने उन्हें एहसास कराया कि अपर्याप्त जानकारी के कारण छोटे व्यवसायों को फिलूल शुल्क और भ्रम का सामना करना पड़ता है। अपनी पहली कंपनी बंद करने के बाद उन्होंने वकील सर्च और पेयू जैसी कंपनियों में काम किया, जहां उन्होंने कानूनी फाइलिंग और डिजिटल ऑटोमेशन की बारीकियों को समझा। शरत ने देखा कि संस्थापक अपना कीमती समय व्यवसाय बढ़ाने के बजाय कंप्लायंस में बर्बाद कर रहे हैं। 2015 के अंत तक उन्होंने इस 'कंप्लायंस के जंजाल' को हमेशा के लिए आसान बनाने के लिए 'द स्टार्टअप जोन' की नींव रखी।घर से की काम की शुरुआत घर से की काम की शुरुआत' imgsize='45320' >शरत ने बेंगलुरु और चेन्नई में तीन-चार लोगों की एक छोटी टीम के साथ घर से काम शुरू किया। शुरुआती निवेश केवल 2-3 लाख रुपये था। इसका इस्तेमाल एक बुनियादी वेबसाइट और कुछ सेकंड-हैंड लैपटॉप खरीदने में किया गया। शुरुआत में कंपनी केवल VAT और सर्विस टैक्स रजिस्ट्रेशन जैसी सेवाएं देती थी। धीरे-धीरे हर साल वह नई सेवाएं जोड़ते गए। इनमें कंपनी निगमन, अकाउंटिंग, बौद्धिक संपदा और बाद में फंडिंग संबंधी सहायता शामिल थी। यह रणनीति सफल रही। 2021 तक 'द स्टार्टअप जोन' टैक्स, कानूनी और अकाउंटिंग विशेषज्ञों को एक ही छत के नीचे लाकर व्यापक कंप्लायंस पार्टनर बन गई।यह साबित हुआ अहम मोड़ यह साबित हुआ अहम मोड़' imgsize='20262' >शरत के वेंचर के लिए 2017 में जीएसटी का लागू होना महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। शरत की टीम ने जीएसटी पोर्टल लाइव होने से पहले ही विज्ञापन शुरू कर दिया था। पहले ही दिन उन्हें लगभग 100 कॉल आए और वह भारत के शुरुआती जीएसटी सेवा प्रदाताओं में से एक बन गए। इस आत्मविश्वास और अनुकूलन क्षमता ने व्यवसाय को तेजी से बढ़ाया। कंपनी जो पहले साल में केवल 5 लाख रुपये का राजस्व अर्जित कर पाई थी, उसने जीएसटी के बाद 45 लाख रुपये का आंकड़ा पार किया। चुनौतीपूर्ण कोरोना लॉकडाउन के दौरान भी टीम ने बिना किसी छंटनी या वेतन कटौती के पूरी दृढ़ता से काम किया। 2022 तक कंपनी ने 1 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार किया। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 2.2 करोड़ के राजस्व के साथ अब वह 3 करोड़ रुपये का लक्ष्य बना रही है। यह सब बिना किसी बाहरी फंडिंग के हासिल किया गया है।विस्तार की बड़ी हैं योजनाएं विस्तार की बड़ी हैं योजनाएं ' imgsize='17384' >शरत की कंपनी ने अब तक 5,000 से अधिक ग्राहकों की सेवा की है। वह अपनी इस सफलता का श्रेय वर्ड-ऑफ-माउथ और ग्राहकों के विश्वास को देते हैं। अब कंपनी अपने अगले बड़े अध्याय की ओर देख रही है। 'बिजनेस बियॉन्ड बाउंड्रीज ' नाम की इस पहल के तहत विदेशी उद्यमियों को भारत में आसानी से परिचालन स्थापित करने में मदद दी जाएगी। उन्होंने सहकर्मी स्थानों , एचआर फर्मों और प्रमुख बैंकों के साथ साझेदारी की है। इसके अलावा, टीम कंप्लायंस प्रक्रियाओं को तेज, अधिक सटीक और सुरक्षित बनाने के लिए ऑटोमेशन और AI में भारी निवेश कर रही है। शरत का अंतिम लक्ष्य स्पष्ट है। कागजी कार्रवाई को संभालना ताकि संस्थापक अपने वास्तविक जुनून यानी अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने पर ध्यान दे सकें।
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