DNA: PoK से नजदीकी और कट्टर नेटवर्क, वो वजहें जिन्होंने नौगाम को बनाया ‘व्हाइट कॉलर टेरर’ का हब

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DNA: PoK से नजदीकी और कट्टर नेटवर्क, वो वजहें जिन्होंने नौगाम को बनाया ‘व्हाइट कॉलर टेरर’ का हब
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Delhi Bomb Blast Latest News: नौगाम के पुलिस स्टेशन में धमाके के बाद से कई सवाल उठ रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर नौगाम टेरर हब क्यों बनता जा रहा है. वे कौन सी परिस्थितियां हैं, जो आतंकियों को यहां सुरक्षित स्थान देती हैं.

How Nowgam is the Epicenter of Terror: दिल्ली के बाद कश्मीर के नौगाम में बारूदी धमाका हुआ है. ये धमाका सड़क पर नहीं बल्कि पुलिस थाने में हुआ. ये धमाका आतंकी ने नहीं किया है. लेकिन इस धमाके का कनेक्शन भी व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल से ही है.

जिस नौगाम के पुलिस स्टेशन में बारूद फटा है वो पिछले कुछ सालों में आतंक का नया एपिसेंटर बन गया है. नौगाम PoK से नजदीक है. ऐसे में आंतकियों के लिए यहां साजिश का सेंटर बनाना आसान है. यहां हाईब्रिड आतंकी तैयार होते रहे हैं. नौगाम के जिस पुलिस स्टेशन में धमाका हुआ, वहां व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल से बरामद बारूद रखा गया था. जहां धमाका हुआ उस पुलिस स्टेशन में 2 हजार 9 किलो अमोनियम नाइट्रेट स्टोर किया गया था. धमाके में कितना बारूद फटा हम आपको बताएंगे लेकिन पहले समझिए कि धमाका कैसे हुआ. नौगाम पुलिस स्टेशन में कैसे हुआ धमाका? व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल से जुड़े आतंकियों के ठिकानों से बरामद बारूद की फॉरेंसिक जांच के लिए उसकी सैंपलिंग की जा रही थी. सरल शब्दों में कहें तो इस बारूद का सैंपल लेकर उसे लैब भेजने की प्रक्रिया चल रही थी. तभी ये धमाका हुआ. धमाके में 9 लोगों की जान गई. मरनेवालों में 1 SIA इंस्पेक्टर, फॉरेंसिक टीम के 3 सदस्य, क्राइम ब्रांच के 2 फोटोग्राफर, 2 राजस्व अधिकारी और एक दर्जी शामिल हैं. धमाके में 29 लोग घायल हुए हैं. घायलों में से 6 की हालत गंभीर है. सोचिए हाई सिक्योरिटी वाले पुलिस स्टेशन में धमाका हुआ. उस बारूद में ब्लास्ट हुआ जो देश को दहलाने के लिए जुटाया गया था. इसलिए इस धमाके पर सवाल उठ रहे हैं. हम इन सवालों पर चर्चा करेंगे. धमाके में जान गंवानेवालों को श्रद्धांजलि दी गई. जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और वरिष्ठ अधिकारियों ने मृतकों को श्रद्धासुमन अर्पित किए. अब उस सवाल की तरफ लौटते हैं आखिर अति सुरक्षित पुलिस स्टेशन में धमाका कैसे हुआ. ये मानवीय चूक है या कोई साजिश क्या विस्फोटक की सैंपलिंग के लिए उचित प्रक्रिया का पालन किया गया था. एजेंसियों को ये अच्छे से मालूम था कि अमोनियम नाइट्रेट खतरनाक विस्फोटक है. फिर थाने में रखे गए बारूद में विस्फोट होना बहुत डराने वाली घटना है. इसलिए ये जानना जरूर है कि क्या सावधानी से सैंपलिंग की जा रही थी. #DNAWithRahulSinha : नौगाम क्यों बना आतंक का एपिसेंटर ?#DNA #NowgamBlast #Srinagar | #ZeeNews @RahulSinhaTV pic.twitter.comKiMqQ6mM5V — Zee News November 15, 2025 सवाल ये है कि आखिर ये मानवीय चूक है या कोई साजिश है. ये सवाल महत्वपूर्ण है. क्योंकि नौगाम आतंकी साजिश का एपिसेंटर हैं. यहीं आतंकियों के ठिकानों से बरामद दो हजार 900 किलो बारूद स्टोर किया गया था. ये बारूद फरीदाबाद से नौगाम लाया गया था. लाल किला धमाके से पहले ही इसे नौगाम में स्टोर किया गया था. इसलिए साजिश का संदेह है. क्या धमाके से सबूत नष्ट करने की साजिश थी. क्योंकि देश को दहलाने की साजिश रचनेवाले व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल के खिलाफ ये बारूद अहम सबूत था. ये सबूत आतंकियों को सजा दिलाने और उनके अंजाम तक पहुंचाने में मददगार होता. बारूद के एक हिस्से में ही हुआ धमाका ये सिर्फ सवाल हैं जो देश के हर सजग नागरिक के दिमाग में आ रहे हैं. इन सवालों के जवाब जांच में आएंगे. उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जांच के आदेश दिए हैं. डीजीपी ने कहा है कि एक अंतरिम कमेटी हादसे की जांच करेगी. मित्रो यहां हम आपको धमाके से जुड़ी एक और बड़ी बात बताते हैं थाने में रखे गए दो हजार 900 किलो बारूद के एक हिस्से में ही धमाका हुआ. जिस पुलिस स्टेशन में धमाका हुआ वो रिहायशी इलाके में मौजूद है. धमाके के बाद आसपास की सड़क पर बारूद फैल गया. कोई और हादसा ना हो इसलिए यहां आम लोगों को आवाजाही रोक दी गई. व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल की बारूदी साजिश के दो धमाके हमने देखे हैं. 10 नवंबर को दिल्ली में धमाका हुआ, 14 नवंबर को नौगाम पुलिस स्टेशन में धमाका हुआ. यानी दिल्ली धमाके के 5वें दिन ही नौगाम में धमाका हो गया. दिल्ली धमाके में 300 मीटर दूर एक मृतक के शऱीर के अवशेष मिले थे. अगर ये धमाका किसी भीड़ भरे रिहायशी इलाके में हुआ होता तो क्या होता. लेकिन पहले आपको बताते हैं नौगाम पुलिस स्टेशन में हुआ धमाका कितना खतरनाक था. भीड़ भरे इलाके में हो धमाका तो आ जाएगी बर्बादी वहीं नौगाम पुलिस स्टेशन से कुछ सौ मीटर दूर खड़ी कारों के शीशे हैं. धमाका कितना खतरनाक था इसका अंदाजा इन कांच के टुकड़ों को देखकर लगाया जा सकता है. विस्फोट की आवाज 5 किलोमीटर के दायरे में सुनी गई. ध्यान दीजिएगा 5 किलोमीटर के दायरे में धमाके की आवाज सुनी गई. 1 किलोमीटर के दायरे में घरों और कारों को नुकसान पहुंचा है. नौगाम में इतना नुकसान तब हुआ जब 2 हजार 900 किलो बारूद का एक छोटा सा हिस्सा ही फटा. सोचिए अगर पूरा बारूद फट गया होता तो क्या होता. मित्रो व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल की बारूद साजिश की भयावहता को एक आंकड़े से समझते हैं. नौगाम में जो धमाका हुआ है अगर वैसा धमाका दिल्ली के कनॉट प्लेस जैसे इलाके में हो और 2 हजार 900 किलो बारूद फट जाए तो इसका असर 1 किलोमीटर के दायरे में होगा. धमाके से 300 मीटर के दायरे में भारी नुकसान होगा. इससे 3000 से ज्यादा लोगों की जान जा सकती है. 150 मीटर के दायरे में बनीं 80 प्रतिशत इमारतें तबाह हो जाएंगी और 2000 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होगा. नौगाम व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का एपिसेंटर कैसे बना? अब आप समझ गए होंगे कि ये साजिश कितनी खतरनाक थी. इसलिए ये सवाल उठ रहे हैं कि क्या नौगाम पुलिस स्टेशन में हुए धमाके के पीछे भी ऐसी ही कोई साजिश थी? नौगाम पुलिस स्टेशन में हुए धमाके पर सवाल उठ रहे हैं कि ये हादसा है या साजिश. ये सवाल क्यों उठ रहा है अब हम आपको विस्तार से समझाते हैं. सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि नौगाम व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का एपिसेंटर है. यहीं पर जैश के पोस्टर चिपकाए गए थे. इसी नौगाम में व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का मास्टरमाइंड मौलवी इरफान एक मस्जिद में इमाम था. इसी मौलवी इरफान ने डॉक्टरों को अपनी तकरीरों से आतंकी बनाया था. आशंका है कि नौगाम में अब भी मौलवी इरफान के नेटवर्क से जुड़े स्लीपर सेल हो सकते हैं. अब इसी नौगाम में धमाका हुआ और वो भी पुलिस स्टेशन के अंदर. नौगाम को हम क्यों व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल के आतंकियों का एपिसेंटर कह रहे हैं इसे समझने के लिए नौगाम की भौगोलिक स्थिति को समझना होगा. नौगाम श्रीनगर और दक्षिण कश्मीर के बीच है. ये श्रीनगर और दक्षिण कश्मीर के बीच अहम ट्रांजिट प्वाइंट है. दक्षिण कश्मीर का पुलवामा और शोपियां जम्मू-कश्मीर के सबसे अशांत इलाकों में हैं. आतंकियों को भागने का मिलता है मौका नौगाम LoC से करीब 20 किलोमीटर दूर है. ऐसे में यहां पहुंचना आतंकियों के लिए आसान होता है. पुलवामा और शोपियां में लोकल आतंकी एक्टिव रहते हैं. इन आतंकियों तक नौगाम के रास्ते हथियार और हथियार की सप्लाई होती है. कई आतंकी नौगाम को छिपने की जगह के तौर पर भी इस्तेमाल करते हैं. नौगाम में छोटी-छोटी गलियां और रास्ते हैं. इसलिए यहां किसी भी आतंकी वारदात को अंजाम देने के बाद आतंकियों को भागने और छिपने में आसानी रहती है. इसलिए श्रीनगर को नौगाम को जोड़नेवाले बाईपास पर कई बार सुरक्षाबलों की गाड़ियों को निशाना बनाया गया. नौगाम में ही पहले दो बार विस्फोटकों से लदी कार का पता चला था. नौगाम अब व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का एपिसेंटर बना है. लेकिन यहां पहले भी आतंकियों की मौजूदगी रही है. नौगाम में ही लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर नवीद जट्ट को सुरक्षाबलों ने मार गिराया था. ये पुलिस हिरासत से फरार हो गया था और नौगाम में छिपा था. अक्टूबर 2018 में मुठभेड़ में नौगाम में दो आतंकवादी मारे गए थे. नौगाम बना अंसार गजवत-उल-हिंद का रिक्रूटमेंट सेंटर 2005 में नौगाम इलाके में एक बड़ा आतंकी हमला हुआ था, तब जैश के आतंकियों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के पुराने घर के पास धमाका किया था. इस धमाके में 10 लोग मारे गए थे. मौलवी इरफान और उसके जैसे कट्टरपंथियों ने नौगाम को आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद का रिक्रूटमेंट सेंटर बना दिया था. हमने आपको पहले भी बताया है कि अंसार गजवत-उल-हिंद..कट्टरपंथी आतंकी संगठन है और ये ISIS से प्रभावित है. इसलिए ये संदेह जताया जा रहा है कि नौगाम पुलिस स्टेशन में हुआ धमाका लापरवाही थी या कोई बड़ी साजिश.

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