फेंसेडिल कफ सीरप तस्करी पर UP STF का एक्शन... सहारनपुर में चार गिरफ्तार, बड़े नेटवर्क का खुलासा

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फेंसेडिल कफ सीरप तस्करी पर UP STF का एक्शन... सहारनपुर में चार गिरफ्तार, बड़े नेटवर्क का खुलासा
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Phensedyl Cough Syrup Smuggling Gang: यूपी एसटीएफ ने फेंसेडिल कफ सीरप तस्करी गिरोह का पर्दाफाश का है। मामले में चार की गिरफ्तारी और 200 करोड़ की अवैध संपत्ति का खुलासा हुआ है।

अभय सिंह राठौड़, लखनऊ: उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स ने फेंसेडिल कफ सिरप और कोडीन युक्त अन्य दवाओं की तस्करी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया है। एसटीएफ की टीम ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। ये दवाएं नशे के रूप में प्रयोग की जा रही थीं। गिरफ्तारी सहारनपुर जिले से की गई है, जहां से नशे के इस बड़े नेटवर्क को संचालित किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान दो पिस्तौल, दस कारतूस, चार मोबाइल फोन और भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक व भौतिक दस्तावेज बरामद हुए हैं। जांच में बताया गया है कि इस रैकेट ने देश के कई राज्य और पड़ोसी देश बांग्लादेश तक दवाओं की तस्करी कर करोड़ों रुपये कमाए हैं।एसटीएफ ने जिन चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान सहारनपुर निवासी विभोर राणा, विशाल सिंह, बिट्टू कुमार और सचिन कुमार के रूप में हुई है। वहीं, बिट्टू और सचिन को कचहरी रोड थाना सदर बाजार के पास गली से 11 नवंबर को गिरफ्तार किया है। जबकि विभोर राणा और विशाल सिंह को सहारनपुर में अंजू सहगल अस्पताल के पास पकड़ा गया है। इन आरोपियों के पास से दो पिस्तौल, 10 कारतूस, चार मोबाइल फोन तथा भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक व कागजी दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इनसे तस्करी के व्यापक नेटवर्क और धन लेन-देन के रिकार्ड सामने आए हैं।एबॉट कंपनी से ली थी डिस्ट्रीब्यूशनशिपशुरुआती पूछताछ में विभोर राणा और विशाल सिंह ने स्वीकार किया कि साल 2018 में जीआर ट्रेडिंग नामक फर्म लेकर उन्होंने एबॉट कंपनी से सुपर-डिस्ट्रीब्यूशनशिप ली थी और इसके जरिए फेंसेडिल का अवैध व्यापार शुरु किया था। आरोप है कि आरोपियों ने फर्जी फर्में व नकली ड्रग लाइसेंस बनाकर दवाओं की खरीद-फरोख्त कागजों में दिखायी। असली रिटेलर को माल नहीं दिया। इसकी जगह नशीले पदार्थ के रूप में उपयोग के लिए तस्करों को भेज दिया था। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि यह व्यापार बिहार, झारखंड होते हुए बांग्लादेश तक जाता था और इस अवैध धंधे से अब तक लगभग 200 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की गई है।पहले भी पड़े थे छापेएसटीएफ के मुताबिक, पहले भी 2021 और 2022 में कई जगह इस तरह के माल पर छापे पड़े थे। कुछ मामलों में माल जब्त हो चुका है। 2024 में लखनऊ में भी भारी मात्रा में अवैध फेंसेडिल पकड़ा गया था और उस पर सुशांत गोल्फ सिटी थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था। इसी जांच के क्रम में उत्तर प्रदेश शासन ने 12 फरवरी 2024 को एसटीएफ व खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रसाधन विभाग की संयुक्त जांच समिति का गठन किया था। आरोपियों ने पूछताछ में एबॉट हेल्थकेयर के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न शहरों में बने सुपर डिस्ट्रीब्यूटर्स व फर्जी फर्मों का नाम भी लिया। विस्तृत जांच हुई शुरूआरोपियों के मुताबिक, कई सहयोगी अभिषेक शर्मा, शुभम शर्मा, संदीप शर्मा, दीपक राणा, संजय शर्मा एवं सीए अरुण सिंघल इस नेटवर्क के साथ जुड़े हुए थे। आरोप है कि फर्जी फर्मों के बैंक एवं यूजर-नेम और पासवर्ड का उपयोग कर आर्थिक लेनदेन को कागजों में दिखाया जाता था। एसटीएफ ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। गिरफ़्तार आरोपियों के मोबाइल, बैंक रिकॉर्ड एवं बरामद दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि पूरी गिरोह की शृंखला, रूट-मैप और आंतरिक कनेक्शन का खुलासा हो सके।मात्रा बढ़ने पर नशीला पदार्थफार्मासिस्ट फेडरेशन यूपी के अध्यक्ष सुनील कुमार यादव ने बताया कि ये एक खांसी की दवा है। लेकिन अगर इन्हें ज्यादा मात्रा में लिया जाए तो नशीला पदार्थ के रूप में काम करता है। उन्होंने कहा कि अगर इसकी लत लग जाए तो लीवर और किडनी पर भी असर पड़ता है। दिमाग पर भी असर पड़ता है। डिप्रेशन जैसी बीमारी हो सकती है। यादाश्त कम और इंसान चिड़चिड़ा भी हो सकता है। सुनील कुमार ने कहा कि अगर इनका लंबे समय तक इस्तेमाल किया जाता है तो बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है।फेंसेडिल कफ सिरप और कोडीन युक्त अन्य दवाओं का नशे के रूप में उपयोग एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन गया है, खासतौर पर युवाओं के बीच। इन सिरप में कोडीन जैसे ओपिओइड और अल्कोहल उपस्थित होते हैं, जो उचित खुराक में खांसी और दर्द से राहत देते हैं, लेकिन अधिक मात्रा में सेवन करने पर नशा, तंद्रा, भ्रम, चक्कर और शारीरिक निर्भरता पैदा कर सकते हैं।नशे के रूप में क्यों होता है इस्तेमाल, दुष्प्रभाव: फेंसेडिल और इसी तरह की कोडीन-आधारित कफ सिरप में कोडीन होता है, जो मस्तिष्क के सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर असर डालता है, जिससे नशे जैसा अहसास आता है। यह सस्ते विकल्प के रूप में उपलब्ध रहता है, इसलिए शराब, तंबाकू या अन्य मादक द्रव्यों के मुकाबले इसकी ओर झुकाव तेजी से बढ़ा है। युवाओं में इसे कोल्ड ड्रिंक या चाय-कॉफी के साथ मिलाकर भी पीने की आदत देखी जा रही है, जिससे नशे की तीव्रता और जोखिम बढ़ जाता है। कोडीन का अत्यधिक सेवन केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को दबा देता है, जिससे सांस रुकना, बेहोशी, मृत्यु तक की स्थिति आ सकती है। बार-बार सेवन करने पर शारीरिक और मानसिक निर्भरता हो जाती है। इसको अचानक बंद करने पर मानसिक अस्थिरता के गंभीर लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं। उच्च मात्रा में कोडीन सेवन से भ्रम, बोलचाल में समस्या, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट बढ़ना, चक्कर आना आदि जोखिम भी होते हैं।.

अभय सिंह राठौड़, लखनऊ: उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स ने फेंसेडिल कफ सिरप और कोडीन युक्त अन्य दवाओं की तस्करी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया है। एसटीएफ की टीम ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। ये दवाएं नशे के रूप में प्रयोग की जा रही थीं। गिरफ्तारी सहारनपुर जिले से की गई है, जहां से नशे के इस बड़े नेटवर्क को संचालित किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान दो पिस्तौल, दस कारतूस, चार मोबाइल फोन और भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक व भौतिक दस्तावेज बरामद हुए हैं। जांच में बताया गया है कि इस रैकेट ने देश के कई राज्य और पड़ोसी देश बांग्लादेश तक दवाओं की तस्करी कर करोड़ों रुपये कमाए हैं।एसटीएफ ने जिन चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान सहारनपुर निवासी विभोर राणा, विशाल सिंह, बिट्टू कुमार और सचिन कुमार के रूप में हुई है। वहीं, बिट्टू और सचिन को कचहरी रोड थाना सदर बाजार के पास गली से 11 नवंबर को गिरफ्तार किया है। जबकि विभोर राणा और विशाल सिंह को सहारनपुर में अंजू सहगल अस्पताल के पास पकड़ा गया है। इन आरोपियों के पास से दो पिस्तौल, 10 कारतूस, चार मोबाइल फोन तथा भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक व कागजी दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इनसे तस्करी के व्यापक नेटवर्क और धन लेन-देन के रिकार्ड सामने आए हैं।एबॉट कंपनी से ली थी डिस्ट्रीब्यूशनशिपशुरुआती पूछताछ में विभोर राणा और विशाल सिंह ने स्वीकार किया कि साल 2018 में जीआर ट्रेडिंग नामक फर्म लेकर उन्होंने एबॉट कंपनी से सुपर-डिस्ट्रीब्यूशनशिप ली थी और इसके जरिए फेंसेडिल का अवैध व्यापार शुरु किया था। आरोप है कि आरोपियों ने फर्जी फर्में व नकली ड्रग लाइसेंस बनाकर दवाओं की खरीद-फरोख्त कागजों में दिखायी। असली रिटेलर को माल नहीं दिया। इसकी जगह नशीले पदार्थ के रूप में उपयोग के लिए तस्करों को भेज दिया था। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि यह व्यापार बिहार, झारखंड होते हुए बांग्लादेश तक जाता था और इस अवैध धंधे से अब तक लगभग 200 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की गई है।पहले भी पड़े थे छापेएसटीएफ के मुताबिक, पहले भी 2021 और 2022 में कई जगह इस तरह के माल पर छापे पड़े थे। कुछ मामलों में माल जब्त हो चुका है। 2024 में लखनऊ में भी भारी मात्रा में अवैध फेंसेडिल पकड़ा गया था और उस पर सुशांत गोल्फ सिटी थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था। इसी जांच के क्रम में उत्तर प्रदेश शासन ने 12 फरवरी 2024 को एसटीएफ व खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रसाधन विभाग की संयुक्त जांच समिति का गठन किया था। आरोपियों ने पूछताछ में एबॉट हेल्थकेयर के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न शहरों में बने सुपर डिस्ट्रीब्यूटर्स व फर्जी फर्मों का नाम भी लिया। विस्तृत जांच हुई शुरूआरोपियों के मुताबिक, कई सहयोगी अभिषेक शर्मा, शुभम शर्मा, संदीप शर्मा, दीपक राणा, संजय शर्मा एवं सीए अरुण सिंघल इस नेटवर्क के साथ जुड़े हुए थे। आरोप है कि फर्जी फर्मों के बैंक एवं यूजर-नेम और पासवर्ड का उपयोग कर आर्थिक लेनदेन को कागजों में दिखाया जाता था। एसटीएफ ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। गिरफ़्तार आरोपियों के मोबाइल, बैंक रिकॉर्ड एवं बरामद दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि पूरी गिरोह की शृंखला, रूट-मैप और आंतरिक कनेक्शन का खुलासा हो सके।मात्रा बढ़ने पर नशीला पदार्थफार्मासिस्ट फेडरेशन यूपी के अध्यक्ष सुनील कुमार यादव ने बताया कि ये एक खांसी की दवा है। लेकिन अगर इन्हें ज्यादा मात्रा में लिया जाए तो नशीला पदार्थ के रूप में काम करता है। उन्होंने कहा कि अगर इसकी लत लग जाए तो लीवर और किडनी पर भी असर पड़ता है। दिमाग पर भी असर पड़ता है। डिप्रेशन जैसी बीमारी हो सकती है। यादाश्त कम और इंसान चिड़चिड़ा भी हो सकता है। सुनील कुमार ने कहा कि अगर इनका लंबे समय तक इस्तेमाल किया जाता है तो बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है।फेंसेडिल कफ सिरप और कोडीन युक्त अन्य दवाओं का नशे के रूप में उपयोग एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन गया है, खासतौर पर युवाओं के बीच। इन सिरप में कोडीन जैसे ओपिओइड और अल्कोहल उपस्थित होते हैं, जो उचित खुराक में खांसी और दर्द से राहत देते हैं, लेकिन अधिक मात्रा में सेवन करने पर नशा, तंद्रा, भ्रम, चक्कर और शारीरिक निर्भरता पैदा कर सकते हैं।नशे के रूप में क्यों होता है इस्तेमाल, दुष्प्रभाव: फेंसेडिल और इसी तरह की कोडीन-आधारित कफ सिरप में कोडीन होता है, जो मस्तिष्क के सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर असर डालता है, जिससे नशे जैसा अहसास आता है। यह सस्ते विकल्प के रूप में उपलब्ध रहता है, इसलिए शराब, तंबाकू या अन्य मादक द्रव्यों के मुकाबले इसकी ओर झुकाव तेजी से बढ़ा है। युवाओं में इसे कोल्ड ड्रिंक या चाय-कॉफी के साथ मिलाकर भी पीने की आदत देखी जा रही है, जिससे नशे की तीव्रता और जोखिम बढ़ जाता है। कोडीन का अत्यधिक सेवन केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को दबा देता है, जिससे सांस रुकना, बेहोशी, मृत्यु तक की स्थिति आ सकती है। बार-बार सेवन करने पर शारीरिक और मानसिक निर्भरता हो जाती है। इसको अचानक बंद करने पर मानसिक अस्थिरता के गंभीर लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं। उच्च मात्रा में कोडीन सेवन से भ्रम, बोलचाल में समस्या, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट बढ़ना, चक्कर आना आदि जोखिम भी होते हैं।

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