Delhi Coaching Center Incident राजधानी दिल्ली के राजेंद्र नगर में हुए हादसे के मामले में पांच और आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। तीन छात्रों की मौत के बाद कार्रवाई का सिलसिला जारी है। उधर छात्रों का प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शन कर रहे छात्र मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ और घायलों के परिजनों 50-50 लाख की मांग कर रहे हैं। MCD ने 13 कोचिंग सेंटरों...
एएनआई, नई दिल्ली। राजेंद्र नगर कोचिंग सेंटर हादसा मामले में दिल्ली पुलिस ने पांच और आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनमें चार बिल्डिंग मालिक और एक थार कार का मालिक शामिल है। इस बिल्डिंग के चार मालिक हैं, जिनके नाम सरबजीत सिंह, तेजिंदर सिंह, हरविंदर सिंह और परविंदर सिंह हैं। चारों चचेरे भाई हैं। ये लोग करोलबाग में रहते हैं। इन्होंने राव आइएएस कोचिंग सेंटर के मालिक अभिषेक गुप्ता को चार लाख रुपए मासिक किराए पर बिल्डिंग का बेसमेंट एरिया दे रखा था। दिल्ली नगर निगम द्वारा बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन करने वाले कोचिंग सेंटरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के बाद, संस्थानों के मालिकों ने सोमवार को बेसमेंट लाइब्रेरी का इस्तेमाल करने वाले छात्रों से खाली करने को कहा। छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच एमसीडी ने बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन करने के आरोप में रविवार को करोल बाग में 13 कोचिंग सेंटरों के बेसमेंट को सील कर दिया। मेयर शेली ओबेरॉय ने बेसमेंट में अवैध रूप से चल रहे कोचिंग सेंटरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में आईएएस उम्मीदवारों के लिए कोचिंग सेंटर वाली बिल्डिंग के बेसमेंट में बारिश के बाद पानी भर जाने से तीन छात्रों की मौत हो गई। छात्रों ने शिकायत की कि लाइब्रेरी में प्रवेश के लिए बायोमेट्रिक एक्सेस अनिवार्य है, जो ज्यादातर बेसमेंट में स्थित हैं। सोमवार को ANI से बात करते हुए छात्र मनीष कुमार ने कहा, 27 जुलाई को जो हुआ वह यह था कि बायोमेट्रिक ब्लाक हो गया था, जिसकी वजह से बेसमेंट में पानी भर जाने के कारण छात्र अंदर फंस गए। इस त्रासदी को टाला जा सकता था। मनीष ने आगे कहा कि बायोमेट्रिक के विकल्प सुनिश्चित किए जाने की जरूरत है ताकि ऐसी दूसरी त्रासदी टाली जा सके। एक अन्य छात्र पुनीत सिंह ने शिकायत की कि किसी भी आपात स्थिति में संस्थान की इमारतों में रहने वालों को बचाने का कोई तरीका नहीं है। पुनीत सिंह ने कहा, यहां की अधिकांश इमारतों में प्रवेश और निकास के लिए बायोमेट्रिक एक्सेस की जरूरत होती है। किसी आपात स्थिति या अप्रत्याशित घटना की स्थिति में पूरी इमारत में कोई बालकनी नहीं है और आग लगने की स्थिति में इमारत में रहने वालों को बचाने का कोई तरीका नहीं है। हम बच नहीं पाएंगे और कोई भी बायोमेट्रिक के बिना इमारत में प्रवेश नहीं कर पाएगा। उन्होंने कहा, हमारे जीवन और सुरक्षा के लिए कौन जिम्मेदार होगा? क्षेत्र में 70-75 प्रतिशत पुस्तकालयों तक पहुंच बायोमेट्रिक्स द्वारा नियंत्रित है और पुस्तकालय बेसमेंट में स्थित हैं। साहिल नामक एक छात्र ने बताया, हम पिछले दो दिनों से यहां बैठे हैं, लेकिन एमसीडी का कोई भी अधिकारी हमसे मिलने नहीं आया। हमने कल डीसीपी को अपनी मांगें सौंपी थीं। साथ ही मृतकों, अस्पतालों में भर्ती लोगों के बारे में जानकारी दी। बताया कि हमने डीसीपी को एफआईआर की प्रतियां, की जाने वाली कार्रवाई और मृतकों के परिवार को एक करोड़ रुपये और घायलों को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिलाने की मांग की, लेकिन इनमें से किसी पर भी ध्यान नहीं दिया गया। वहीं, सोमवार की सुबह करोल बाग में भी छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा, जिसमें बेसमेंट में पुस्तकालय चलाने वाले कोचिंग सेंटरों और मालिकों के खिलाफ कार्रवाई, बेवजह किराए और ब्रोकरेज को नियंत्रित करने के लिए किराया विनियमन विधेयक या किराया विनियमन संहिता और छात्रों के लिए बीमा कवर या शिकायत निवारण तंत्र सहित विभिन्न मांगें उठाई गईं। उन्होंने यह भी मांग की है कि सरकार बारिश के दौरान क्षेत्र में जलभराव या बिजली के झटके से बचने के लिए कदम उठाए। दिल्ली पुलिस ने घटना के सिलसिले में कोचिंग सेंटर के मालिक और समन्वयक को गिरफ्तार किया है। उन पर अन्य आरोपों के अलावा गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है।.
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