कर्मचारी ने लिखा कि जब भी वह एक-दो दिन वर्क फ्रॉम होम करता, मैनेजर का रवैया बेहद लापरवाह हो जाता. उसका कहना था कि एक बार उसने बता दिया कि आज उसके पास कोई काम नहीं है और वह घर से लॉगइन रहेगा, फिर भी मैनेजर ने कह दिया- “काम तो हुआ नहीं, छुट्टी डाल दे.”
WFH Leave Controversy: हरियाणा के फरीदाबाद में काम कर रहे 23 वर्षीय युवक ने Reddit पर अपनी कहानी साझा की, जिसमें उसने बताया कि कैसे टॉक्सिक वर्क कल्चर और मैनेजर के अजीब फैसलों ने उसे मजबूर कर दिया कि वह अचानक नौकरी छोड़ दे.
कर्मचारी ने बताया कि सैलरी समय पर मिलती थी लेकिन ऑफिस का माहौल बेहद खराब था. वह अपने पूरे डिपार्टमेंट में अकेला काम करने वाला व्यक्ति था और कंपनी जल्द ही किसी नई भर्ती की योजना में भी नहीं थी. कभी अचानक काम का ढेर लगा दिया जाता और कभी पूरा दिन बेहद शांत बीत जाता. WFH को ‘छुट्टी’ कहने का अजीब रवैया कर्मचारी ने लिखा कि जब भी वह एक-दो दिन वर्क फ्रॉम होम करता, मैनेजर का रवैया बेहद लापरवाह हो जाता. उसका कहना था कि एक बार उसने बता दिया कि आज उसके पास कोई काम नहीं है और वह घर से लॉगइन रहेगा, फिर भी मैनेजर ने कह दिया- “काम तो हुआ नहीं, छुट्टी डाल दे.” कर्मचारी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि चाहे वह कॉल पर उपलब्ध रहे, लॉग्ड इन रहे या दिनभर एक्टिव रहे- अगर वह चुपचाप काम करता रहा तो मैनेजर इसे “नो वर्क” मान लेता था. इस बात से उसकी नाराजगी लगातार बढ़ रही थी. I finally resigned from my toxic workplace and now my manager is bragging that I’ll “never get a job like this again.” What?? byuCARAMELGHOST_ inIndianWorkplace अटेंडेंस विवाद ने बढ़ाया गुस्सा उसके लिए आखिरी धक्का तब आया जब वह एक दिन ऑफिस 12:50 बजे पहुँचा. उसकी शिफ्ट 10:30 बजे शुरू होती थी, लेकिन कंपनी हर महीने कर्मचारियों को दो ‘शॉर्ट लीव’ देती है, जिसमें वे दो घंटे देर से आ सकते हैं या जल्दी जा सकते हैं. उस दिन वह अनुमत समय से सिर्फ 20 मिनट ज्यादा लेट हो गया था. उसे लगा होगा कि मैनेजर सिर्फ चेतावनी देगा, मगर उसे कहा गया कि “हाफ डे मार्क करो.” कर्मचारी ने यह मान भी लिया, लेकिन गुस्सा तब फूटा जब हाफ डे मार्क कराने के बाद भी उस पर पूरा काम डाल दिया गया. उसने लिखा- “यह मेरे लिए आखिरी स्ट्रॉ था और मैंने उसी दिन इस्तीफा दे दिया.” मैनेजर की बातें और कर्मचारी का जवाब कर्मचारी ने दावा किया कि उसके जाने के बाद मैनेजर ने बाकी कर्मचारियों से कहा कि उसने “सबसे बड़ी गलती” की है और उसे “कभी इस जैसा जॉब नहीं मिलेगा.” इस पर उसने Reddit पर लिखा- “आपने मुझे एक पूरी टीम का काम अकेले कराया, WFH को छुट्टी माना, अटेंडेंस को स्कूल की तरह ट्रीट किया, और अब आप सोचते हैं कि मुझे शुक्रगुजार रहना चाहिए? सच कहूं तो मुझे बिल्कुल पछतावा नहीं है. मैं खुद को हल्का महसूस कर रहा हूं.” ऑनलाइन रिएक्शन: लोगों ने दिखाई सहानुभूति पोस्ट देखते ही लोगों की प्रतिक्रियाएं आने लगीं. कई यूजर्स ने उसकी हिम्मत की तारीफ की और कहा कि उसने सही फैसला लिया. एक यूजर ने लिखा- “Good luck on your new endeavours”, जबकि दूसरे ने टिप्पणी की- “Nobody deserves it.” कुछ लोगों ने सलाह दी कि कर्मचारी को कंपनी और मैनेजर का नाम उजागर करना चाहिए ताकि नई भर्ती में कंपनी को परेशानियां हों और मैनेजर सीख ले कि कर्मचारियों के साथ सम्मान से पेश आना कितना जरूरी है. एक यूजर ने लिखा- “The workplace in India is the result of its culture.” यह टिप्पणी भारतीय कार्यस्थलों में मौजूद दबाव और टॉक्सिक रवैये की ओर इशारा करती है. कहानी की सीख यह कहानी बताती है कि सैलरी समय पर मिलने से नौकरी अच्छी नहीं होती. अगर वर्क कल्चर खराब हो, मैनेजर माइक्रोमैनेज करे और कर्मचारी की मेहनत को मान्यता न मिले, तो नौकरी मानसिक तनाव बन जाती है. यह घटना उन सभी युवाओं के लिए सबक है जो टॉक्सिक माहौल में फंसे हुए हैं- कभी-कभी ‘ना’ कहना ही आत्मसम्मान बचाने का सबसे बेहतर तरीका होता है.
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