यश कुमार यूपी के मुरादाबाद से हैं। अमेरिका में वह बहुत अच्छे पैकेज पर नौकरी करते थे। लेकिन, उस चकाचौंध भरी जिंदगी को छोड़कर उन्होंने उद्यमिता के कठिन रास्ते पर चलने का फैसला किया। अब उनकी पहचान एक उद्यमी के तौर पर बन चुकी है। वह भारत के छोटे होमस्टे मालिकों की समस्या का सॉल्यूशन बन गए...
नई दिल्ली: अमेरिका में 2 करोड़ रुपये का सालाना पैकेज। ऐशो-आराम की जिंदगी। लेकिन, उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के रहने वाले यश कुमार को ये कुछ भी रोक नहीं पाया। 2024 में वह अमेरिका से भारत लौट आए। उन्होंने यहां आकर 'जीरो-कमीशन' होमस्टे प्लेटफॉर्म शुरू किया। इसका नाम होमीहट्स है। इसका मकसद भारत के गांवों और कस्बों में होमस्टे की समस्याओं को सुलझाना है। जहां बड़े प्लेटफॉर्म 15-21% तक कमीशन लेते हैं। यश का स्टार्टअप सिर्फ छोटी सब्सक्रिप्शन फीस पर होमस्टे मालिकों को अपनी कमाई का 100% हिस्सा रखने की आजादी देता है। उनका काम तेजी से दौड़ पड़ा है। इसने अपने साथ 2,000 प्रॉपर्टी जोड़ ली हैं। इसका बुकिंग वॉल्यूम 2 करोड़ रुपये से ज्यादा का है। आइए, यहां यश कुमार की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।ऐसे शुरू हुआ सफर ऐसे शुरू हुआ सफर ' imgsize='22208' >यश कुमार एक साधारण मध्यम-वर्गीय परिवार में पले-बढ़े। वह मुरादाबाद से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता भारतीय रेलवे में काम करते थे। 2012 में यश अमेरिका चले गए। वहां सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में एक शानदार करियर बनाया। हालांकि, 2018 में दक्षिण भारत की एक सड़क यात्रा के दौरान उन्होंने महसूस किया कि भारत के सुंदर विला और कॉटेज ऑनलाइन दुनिया में कहीं खोए हुए हैं। छोटे होमस्टे मालिकों को तकनीक और भाषा की बाधाओं के चलते बड़े प्लेटफॉर्म्स पर टिकने में मुश्किल हो रही थी। इसी कमी को दूर करने के लिए यश अमेरिका में सब कुछ बेचकर भारत लौट आए। उत्तराखंड के पहाड़ों में 6 महीने ग्राउंड रिसर्च कर अपने वेंचर 'होमीहट्स' की नींव रखी।अलग बिजनेस मॉडल अपनाया अलग बिजनेस मॉडल अपनाया' imgsize='74458' >होमस्टे सेक्टर में सबसे बड़ी समस्या भारी कमीशन की रही है। यश कुमार के स्टार्टअप ने जुलाई 2025 में 'होस्ट इट योरसेल्फ' फीचर लॉन्च किया। इसमें होम स्टेट मालिक सिर्फ 490 रुपये महीने के सब्सक्रिप्शन पर अपनी प्रॉपर्टी लिस्ट कर सकते हैं। इसमें उन्हें एक 'चैनल मैनेजर' भी मिलता है। यह 8 से ज्यादा बुकिंग वेबसाइट्स के कैलेंडर को एक साथ सिंक कर देता है। 'डबल बुकिंग' का रिस्क खत्म करने के लिए ऐसा किया जाता है। खास बात यह है कि मेहमान सीधे व्हाट्सएप के जरिए होस्ट से जुड़ सकते हैं। बुकिंग मनी सीधे अगले दिन होस्ट के खाते में पहुंच जाती है।16 राज्यों में मौजूदगी 16 राज्यों में मौजूदगी ' imgsize='20172' >यश को पता था कि भारत में हर कोई अंग्रेजी नहीं जानता। लिहाजा, उन्होंने अपने ऐप को हिंदी, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ जैसी भाषाओं में उपलब्ध कराया। इसमें एआई-ड्रिवन डायनेमिक प्राइसिंग टूल और चैटबॉट्स भी जोड़े गए हैं। सिक्योरिटी के लिए हर होस्ट को वीडियो केवाईसी और मालिकाना हक के सबूत देने होते हैं। यश का काम तेजी से दौड़ा है। यह स्टार्टअप 16 राज्यों में 2,000 से अधिक संपत्तियों को जोड़ चुका है। अब तक स्टार्टअप ने 2 करोड़ से अधिक की बुकिंग वॉल्यूम दर्ज की है। बड़े हैं भविष्य के टारगेट बड़े हैं भविष्य के टारगेट ' imgsize='86936' >भारतीय होमस्टे मार्केट 2034 तक 85,000 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। यश कुमार इसी अवसर को भुनाना चाहते हैं। उनका टारगेट 2026 तक 10,000 और 2028 तक 20,000 से अधिक प्रॉपर्टीज को प्लेटफॉर्म पर लाना है। भारत के साथ वह'लेटलूप' ब्रांड के तहत दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपने एआई टूल्स ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। बिना बाहरी फंडिंग के बावजूद यश का फोकस मुनाफे से ज्यादा एक ऐसा ईकोसिस्टम बनाने पर है जो भारतीय होमस्टे मालिकों को ग्लोबल लेवल पर प्रतिस्पर्धी बनाए।.
नई दिल्ली: अमेरिका में 2 करोड़ रुपये का सालाना पैकेज। ऐशो-आराम की जिंदगी। लेकिन, उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के रहने वाले यश कुमार को ये कुछ भी रोक नहीं पाया। 2024 में वह अमेरिका से भारत लौट आए। उन्होंने यहां आकर 'जीरो-कमीशन' होमस्टे प्लेटफॉर्म शुरू किया। इसका नाम होमीहट्स है। इसका मकसद भारत के गांवों और कस्बों में होमस्टे की समस्याओं को सुलझाना है। जहां बड़े प्लेटफॉर्म 15-21% तक कमीशन लेते हैं। यश का स्टार्टअप सिर्फ छोटी सब्सक्रिप्शन फीस पर होमस्टे मालिकों को अपनी कमाई का 100% हिस्सा रखने की आजादी देता है। उनका काम तेजी से दौड़ पड़ा है। इसने अपने साथ 2,000 प्रॉपर्टी जोड़ ली हैं। इसका बुकिंग वॉल्यूम 2 करोड़ रुपये से ज्यादा का है। आइए, यहां यश कुमार की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।ऐसे शुरू हुआ सफर ऐसे शुरू हुआ सफर ' imgsize='22208' >यश कुमार एक साधारण मध्यम-वर्गीय परिवार में पले-बढ़े। वह मुरादाबाद से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता भारतीय रेलवे में काम करते थे। 2012 में यश अमेरिका चले गए। वहां सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में एक शानदार करियर बनाया। हालांकि, 2018 में दक्षिण भारत की एक सड़क यात्रा के दौरान उन्होंने महसूस किया कि भारत के सुंदर विला और कॉटेज ऑनलाइन दुनिया में कहीं खोए हुए हैं। छोटे होमस्टे मालिकों को तकनीक और भाषा की बाधाओं के चलते बड़े प्लेटफॉर्म्स पर टिकने में मुश्किल हो रही थी। इसी कमी को दूर करने के लिए यश अमेरिका में सब कुछ बेचकर भारत लौट आए। उत्तराखंड के पहाड़ों में 6 महीने ग्राउंड रिसर्च कर अपने वेंचर 'होमीहट्स' की नींव रखी।अलग बिजनेस मॉडल अपनाया अलग बिजनेस मॉडल अपनाया' imgsize='74458' >होमस्टे सेक्टर में सबसे बड़ी समस्या भारी कमीशन की रही है। यश कुमार के स्टार्टअप ने जुलाई 2025 में 'होस्ट इट योरसेल्फ' फीचर लॉन्च किया। इसमें होम स्टेट मालिक सिर्फ 490 रुपये महीने के सब्सक्रिप्शन पर अपनी प्रॉपर्टी लिस्ट कर सकते हैं। इसमें उन्हें एक 'चैनल मैनेजर' भी मिलता है। यह 8 से ज्यादा बुकिंग वेबसाइट्स के कैलेंडर को एक साथ सिंक कर देता है। 'डबल बुकिंग' का रिस्क खत्म करने के लिए ऐसा किया जाता है। खास बात यह है कि मेहमान सीधे व्हाट्सएप के जरिए होस्ट से जुड़ सकते हैं। बुकिंग मनी सीधे अगले दिन होस्ट के खाते में पहुंच जाती है।16 राज्यों में मौजूदगी 16 राज्यों में मौजूदगी ' imgsize='20172' >यश को पता था कि भारत में हर कोई अंग्रेजी नहीं जानता। लिहाजा, उन्होंने अपने ऐप को हिंदी, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ जैसी भाषाओं में उपलब्ध कराया। इसमें एआई-ड्रिवन डायनेमिक प्राइसिंग टूल और चैटबॉट्स भी जोड़े गए हैं। सिक्योरिटी के लिए हर होस्ट को वीडियो केवाईसी और मालिकाना हक के सबूत देने होते हैं। यश का काम तेजी से दौड़ा है। यह स्टार्टअप 16 राज्यों में 2,000 से अधिक संपत्तियों को जोड़ चुका है। अब तक स्टार्टअप ने 2 करोड़ से अधिक की बुकिंग वॉल्यूम दर्ज की है। बड़े हैं भविष्य के टारगेट बड़े हैं भविष्य के टारगेट ' imgsize='86936' >भारतीय होमस्टे मार्केट 2034 तक 85,000 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। यश कुमार इसी अवसर को भुनाना चाहते हैं। उनका टारगेट 2026 तक 10,000 और 2028 तक 20,000 से अधिक प्रॉपर्टीज को प्लेटफॉर्म पर लाना है। भारत के साथ वह'लेटलूप' ब्रांड के तहत दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपने एआई टूल्स ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। बिना बाहरी फंडिंग के बावजूद यश का फोकस मुनाफे से ज्यादा एक ऐसा ईकोसिस्टम बनाने पर है जो भारतीय होमस्टे मालिकों को ग्लोबल लेवल पर प्रतिस्पर्धी बनाए।
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