Success Story: 65 की उम्र में बना दिया ब्रांड, लाखों का टर्नओवर देख हर कोई ले रहा नाम

शुभा भटनागर कौन हैं News

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शुभा भटनागर उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं। उन्‍होंने 65 साल की उम्र में एक सफल ब्रांड खड़ा कर दिया है। इसका नाम 'शुभावनि सात्विक स्पाइसेज' है। यह स्टार्टअप शुद्ध मसाले सीधे खेतों से ग्राहकों तक पहुंचा रहा है।

नई दिल्‍ली: उत्तर प्रदेश की शुभा भटनागर ने उस उम्र में एक सफल कारोबार खड़ा कर दिया है जब लोग रिटायरमेंट लेकर बैठ जाते हैं। उनके स्‍टार्टअप का नाम 'शुभावनि सात्विक स्पाइसेज' है। 65 साल की उम्र में शुभा ने इसकी शुरुआत की। यह स्‍टार्टअप किसानों खासकर ग्रामीण महिला किसानों से सीधे खरीदे गए शुद्ध, पत्थर से पिसे मसाले बेचता है। मसालों में होने वाली मिलावट को देखकर उन्‍हें इसका आइडिया आया। आज वह इससे बढ़‍िया कमाई कर रही हैं। इस ब्रांड के साथ अभी 22 महिलाएं जुड़ी हैं। आइए, यहां शुभा भटनागर की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।ऐसे बढ़ाए कारोबार में कदम ऐसे बढ़ाए कारोबार में कदम' imgsize='33192' >शिकोहाबाद से हिंदी में एमए पूरा करने के बाद शुभा की शादी हो गई और वह मैनपुरी आ गईं। सालों तक वह घर की जिम्‍मेदारियों में फंसी रहीं। 63 साल की उम्र में शुभा भटनागर ने अपने कारोबारी सफर की शुरुआत शुद्ध कश्मीरी केसर बेचने से की थी। इससे उन्होंने सालाना 10 लाख रुपये का कारोबार खड़ा किया। हालांकि, केसर एक मौसमी उत्पाद था। इससे गांव की महिलाओं को साल भर काम नहीं मिल पाता था। इसी को ध्‍यान में रखकर दो साल बाद उन्होंने मसालों के क्षेत्र में कदम रखा। मंशा यह थी कि शुद्धता के साथ महिलाओं को स्थायी रोजगार मिल सके। आज उनका ब्रांड 22 से अधिक प्रीमियम वैरायटी के मसाले बेच रहा है। इसमें मेघालय की प्रसिद्ध लाकाडोंग हल्दी और केरल की 'ब्लैक गोल्ड' कही जाने वाली काली मिर्च शामिल है।खास तरीके से बनते हैं मसाले खास तरीके से बनते हैं मसाले ' imgsize='30722' >शुभा भटनागर जिन मसालों को बेचती हैं, वे खास तरीके से बनते हैं। ये आधुनिक मशीनों के बजाय पारंपरिक सिला से पीस कर बनाए जाते हैं। इससे उनके प्राकृतिक और पोषक तत्व बने रहते हैं। साथ ही मसालों का प्राकृतिक रंग, सुगंध और औषधीय गुण भी पूरी तरह सुरक्षित रहता है। मिर्च के लिए हाथ से कूटने की तकनीक अपनाई जाती है, जो दादी-नानी के जमाने की शुद्धता की याद दिलाती है।नए ट्रेंड को बनाया मॉडल नए ट्रेंड को बनाया मॉडल ' imgsize='31462' >शुभा भटनागर ने मिठाइयों और ड्राई फ्रूट्स के पारंपरिक गिफ्ट्स को 'वेलनेस गिफ्ट बॉक्सेस' से चुनौती दी है। उन्होंने हल्दी, काली मिर्च, इलायची और केसर जैसे हेल्‍दी मसालों के खूबसूरत पैक तैयार किए हैं। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में सिर्फ 22 दिनों के भीतर उन्होंने 250 से ज्यादा बॉक्स बेचे थे। इससे उन्‍होंने करीब 3 लाख रुपये की कमाई की। कॉर्पोरेट जगत और शादियों में इन वेलनेस बॉक्स की भारी मांग देखी जाती है। यह दिखाता है कि लोग अब सेहत को प्राथमिकता दे रहे हैं।ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा रोजगार ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा रोजगार ' imgsize='30464' >आज शुभा का स्टार्टअप 22 ग्रामीण महिलाओं को रोजगार दे रहा है। उन्‍हें 8,000 रुपये से 9,000 रुपये का मासिक वेतन मिलता है। वे अच्‍छे माहौल में काम करती हैं। शुभा का टारगेट आगे चलकर नोएडा, लखनऊ, आगरा और दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरों में विस्तार करना है। जल्द ही वह शुद्ध आटा लॉन्च करना चाहती हैं। वह तेजी से बढ़ने के बजाय मजबूत, शुद्धता-आधारित ग्रोथ पर फोकस कर रही हैं। क्‍वालिटी से वह किसी भी तरह का कोई समझौता नहीं चाहती हैं।.

नई दिल्‍ली: उत्तर प्रदेश की शुभा भटनागर ने उस उम्र में एक सफल कारोबार खड़ा कर दिया है जब लोग रिटायरमेंट लेकर बैठ जाते हैं। उनके स्‍टार्टअप का नाम 'शुभावनि सात्विक स्पाइसेज' है। 65 साल की उम्र में शुभा ने इसकी शुरुआत की। यह स्‍टार्टअप किसानों खासकर ग्रामीण महिला किसानों से सीधे खरीदे गए शुद्ध, पत्थर से पिसे मसाले बेचता है। मसालों में होने वाली मिलावट को देखकर उन्‍हें इसका आइडिया आया। आज वह इससे बढ़‍िया कमाई कर रही हैं। इस ब्रांड के साथ अभी 22 महिलाएं जुड़ी हैं। आइए, यहां शुभा भटनागर की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।ऐसे बढ़ाए कारोबार में कदम ऐसे बढ़ाए कारोबार में कदम' imgsize='33192' >शिकोहाबाद से हिंदी में एमए पूरा करने के बाद शुभा की शादी हो गई और वह मैनपुरी आ गईं। सालों तक वह घर की जिम्‍मेदारियों में फंसी रहीं। 63 साल की उम्र में शुभा भटनागर ने अपने कारोबारी सफर की शुरुआत शुद्ध कश्मीरी केसर बेचने से की थी। इससे उन्होंने सालाना 10 लाख रुपये का कारोबार खड़ा किया। हालांकि, केसर एक मौसमी उत्पाद था। इससे गांव की महिलाओं को साल भर काम नहीं मिल पाता था। इसी को ध्‍यान में रखकर दो साल बाद उन्होंने मसालों के क्षेत्र में कदम रखा। मंशा यह थी कि शुद्धता के साथ महिलाओं को स्थायी रोजगार मिल सके। आज उनका ब्रांड 22 से अधिक प्रीमियम वैरायटी के मसाले बेच रहा है। इसमें मेघालय की प्रसिद्ध लाकाडोंग हल्दी और केरल की 'ब्लैक गोल्ड' कही जाने वाली काली मिर्च शामिल है।खास तरीके से बनते हैं मसाले खास तरीके से बनते हैं मसाले ' imgsize='30722' >शुभा भटनागर जिन मसालों को बेचती हैं, वे खास तरीके से बनते हैं। ये आधुनिक मशीनों के बजाय पारंपरिक सिला से पीस कर बनाए जाते हैं। इससे उनके प्राकृतिक और पोषक तत्व बने रहते हैं। साथ ही मसालों का प्राकृतिक रंग, सुगंध और औषधीय गुण भी पूरी तरह सुरक्षित रहता है। मिर्च के लिए हाथ से कूटने की तकनीक अपनाई जाती है, जो दादी-नानी के जमाने की शुद्धता की याद दिलाती है।नए ट्रेंड को बनाया मॉडल नए ट्रेंड को बनाया मॉडल ' imgsize='31462' >शुभा भटनागर ने मिठाइयों और ड्राई फ्रूट्स के पारंपरिक गिफ्ट्स को 'वेलनेस गिफ्ट बॉक्सेस' से चुनौती दी है। उन्होंने हल्दी, काली मिर्च, इलायची और केसर जैसे हेल्‍दी मसालों के खूबसूरत पैक तैयार किए हैं। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में सिर्फ 22 दिनों के भीतर उन्होंने 250 से ज्यादा बॉक्स बेचे थे। इससे उन्‍होंने करीब 3 लाख रुपये की कमाई की। कॉर्पोरेट जगत और शादियों में इन वेलनेस बॉक्स की भारी मांग देखी जाती है। यह दिखाता है कि लोग अब सेहत को प्राथमिकता दे रहे हैं।ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा रोजगार ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा रोजगार ' imgsize='30464' >आज शुभा का स्टार्टअप 22 ग्रामीण महिलाओं को रोजगार दे रहा है। उन्‍हें 8,000 रुपये से 9,000 रुपये का मासिक वेतन मिलता है। वे अच्‍छे माहौल में काम करती हैं। शुभा का टारगेट आगे चलकर नोएडा, लखनऊ, आगरा और दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरों में विस्तार करना है। जल्द ही वह शुद्ध आटा लॉन्च करना चाहती हैं। वह तेजी से बढ़ने के बजाय मजबूत, शुद्धता-आधारित ग्रोथ पर फोकस कर रही हैं। क्‍वालिटी से वह किसी भी तरह का कोई समझौता नहीं चाहती हैं।

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