Success Story of Sunita and Suhas Ramegowda: 15 साल कॉर्पोरेट सेक्टर में जॉब करने के बाद यह कपल एक गांव में बस गया। वहां इसने गांव वालों की आर्थिक समस्या दूर करने के लिए एक स्टार्टअप शुरू किया। यह पुराने कपड़ों से गुड़िया बनाते हैं और इन्हें ऑनलाइन व ऑफलाइन बेचते हैं। इनका सालाना रेवेन्यू कई लाख रुपये का...
नई दिल्ली: जिन पुराने कपड़ों को हम बेकार समझकर फेंक देते हैं, ऐसे ही पुराने कपड़ों से एक कपल कमाई कर रहा है। इस कपल का नाम सुनीता रामेगौड़ा और सुहास रामेगौड़ा है। यह कपल पुराने कपड़ों से गुड़िया तैयार करता है और उन्हें बेचता है। इस कपल के स्टार्टअप का नाम 'The Good Gift' है। अपने स्टार्टअप के बारे में सुनीता और सुहास का कहना है कि उन्होंने बचपन में अपने घर में दादी से देखा कि वह पुरानों कपड़ों से गुड़िया बनाती थीं। इस, इसी से उन्हें इसका स्टार्टअप शुरू करने का आइडिया आया। सुहास के मुताबिक इस गुड़िया को इस तरह से बनाया गया है कि इनके कपड़े तक बदल सकते हैं। इन गुड़ियाओं के चेहरे के भाव इस तरह बनाए जाते हैं कि ये बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी अच्छे लगें। Success Story : हलवाई का बेटा, पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए ट्यूशन पढ़ाया, खड़ा कर दिया 35 हजार करोड़ का बैंकआदिवासी महिलाओं को दिया रोजगारसुनीता और सुहास का कहना है कि उन्होंने पुराने कपड़ों से गुड़िया बनाने के कारण काफी कपड़े को लैंडफिल में जाने से रोका है। वह बताते हैं कि एक अनुमान के मुताबिक करीब 8000 किलोग्राम कपड़ा लैंडफिल साइट में जाने से बच गया और उन्होंने उसे अपने स्टार्टअप में इस्तेमाल कर लिया। इन्होंने अपने स्टार्टअप में आदिवासी महिलाओं को रोजगार दिया है और उन्हें सशक्त बनाया है। वह बताते हैं कि उनके स्टार्टअप से तमिलनाडु के नीलगिरी की आदिवासी समुदायों की 200 से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हैं। 15 साल नौकरी के बाद लिया फैसलाशादी के बाद सुनीता और सुहास बेंगलुरु में बस गए। यहां उन्होंने कम से कम 15 साल कॉर्पोरेट सेक्टर में जॉब की। वे बताते हैं कि वह जॉब से संतुष्ट नहीं थे। वे ऐसा काम करना चाहते थे, जिसमें उन्हें खुशी मिले। सुहास बताते हैं कि वह शहरी भागदौड़ से थक गए थे। वे पता लगाना चाहते थे कि उन्हें किस चीज में खुशी मिल सकती है। ऐसे में उन्होंने एक गांव जाने का फैसला लिया। 2017 में इन्होंने नीलगिरी पहाड़ों में रहने का फैसला लिया। इन्होंने खुद ही मिट्टी का घर बनाया। सब्जियां उगाना शुरूकिया। पहाड़ी नदियों से पानी इकट्ठा किया और बिजली के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग किया। https://www.
instagram.com/reel/C9gj-vaSyJP/?utm_source=ig_web_copy_link&igsh=MzRlODBiNWFlZA==ऐसे आया बिजनेस का आइडियासुहास बताते हैं कि यहां रहने के बाद इन्होंने देखा कि यहां रहने वाले आदिवासी लोगों के लिए आजीविका एक रोजमर्रा की चुनौती थी। चाय की कटाई के अलावा, ग्रामीण महिलाओं के लिए कोई अन्य नियमित काम नहीं था। हर सुबह वे अपने बच्चों को छोड़कर दूसरे गांवों में काम करने जाया करती थीं। ऐसे में इस कपल ने साल 2019 में इंडियन यार्ड्स फाउंडेशन की स्थापना की। यह शिल्प निर्माण से जुड़ा सामाजिक उद्यम था। इसे शुरू करने का उद्देश्य नीलगिरी में आदिवासी समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को सुधारना था। शुरू में इन्होंने गांव की महिलाओं को कढ़ाई आदि की चीजें सिखाईं। कुछ समय ऐसा ही गुजरा। सब कुछ सही था, लेकिन समय आगे बढ़ने का था। इस जरूरत के चलते 2023 की शुरुआत में 'द गुड गिफ्ट' का गठन हुआ। सुनीता कहती है कि हमने प्रोडक्ट को मार्केट तक पहुंचाने के लिए एक वेबसाइट बनाई। वेबसाइट पर कई तरह के प्रोडक्ट डाले। कई प्रोडक्ट के साथ एक्सपेरिमेंट किए। अंत में फैब्रिक डॉल और खिलौनों पर ध्यान केंद्रित किया।आज लाखों रुपये का सालाना कारोबारस्टार्टअप शुरू करने के एक साल के भीतर कपल ने B2B में अपने बिजनेस का विस्तार किया। उन्होंने चेन्नई, बेंगलुरु, गोवा, ऊटी आदि में 60 ऑफलाइन स्टोर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वे अब हर महीने कपड़े की 3000 से ज्यादा गुड़िया बेचते हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में उनका रेवेन्यू 75 लाख रुपये रहा। सुनीता बताती हैं कि उनके साथ काम करने वाली आदिवासी महिलाएं आज महीने के 8 से 10 हजार रुपये कमा रही हैं।
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