Success Story: ससुराल की पाबंदी से स्टीयरिंग व्हील तक, बिहार की इन महिलाओं ने कैसे बदला अपना नसीब?

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Success Story: बिहार के 77वें गणतंत्र दिवस पर राज्य की पहली महिला बस ड्राइवरों ने इतिहास रच दिया। मुसहर समुदाय से आने वाली इन 6 जांबाज महिलाओं ने न केवल स्टीयरिंग संभाली, बल्कि गांधी मैदान की झांकी में प्रथम पुरस्कार जीतकर समाज की रूढ़ियों को भी पीछे छोड़ दिया। 'पिंक बस' को अब पूरी तरह महिलाएं...

पटना: बिहार की सड़कों पर अब बदलाव की एक नई लहर दौड़ रही है। पटना के गांधी मैदान में गणतंत्र दिवस के गौरवमयी अवसर पर बिहार राज्य पथ परिवहन निगम की 'पिंक बस' झांकी ने सबका दिल जीत लिया। इस झांकी की असली ताकत वे 6 महिलाएं थीं, जो राज्य की पहली महिला बस ड्राइवर बनने के लिए तैयार हैं। समाज के सबसे पिछड़े महादलित समुदाय से आने वाली इन बेटियों ने भारी वाहनों का लाइसेंस लेकर यह साबित कर दिया है कि उनके सपने किसी भी बाधा से बड़े हैं। मई 2025 में शुरू हुई पिंक बस सेवा अब अपने असली उद्देश्य को हासिल कर रही है, जहां ड्राइवर और कंडक्टर दोनों महिलाएं ही होंगी।अनीता और बेबी की जांबाज कहानी22 साल की अनीता कुमारी जब पिंक बस की ड्राइवर सीट पर बैठकर आत्मविश्वास के साथ क्लच और एक्सीलेटर संभालती हैं, तो देखने वाले दंग रह जाते हैं। वहीं, पांच फीट से कम कद वाली बेबी कुमारी उन लोगों को करारा जवाब दे रही हैं जो उनकी लंबाई को उनकी कमजोरी मानते थे। बेबी का कहना है, 'लोग मेरे कद पर तंज कसते थे, लेकिन आज मैं ट्रक और बस जैसे भारी वाहन चला सकती हूँ, जिसे सोचने की हिम्मत बड़े-बड़े लोग नहीं करते।' इन महिलाओं ने 2024 में भारी वाहन लाइसेंस हालिस कर अपनी काबलियत साबित की है।सामाजिक बेड़ियों को तोड़कर गांधी मैदान तक का सफरइन महिला ड्राइवरों का सफर संघर्षों से भरा रहा है। सरस्वती कुमारी को अपनी शादी के बाद ससुराल वालों को इस बात के लिए राजी करना पड़ा कि वो बस चलाएंगी। इन महिलाओं ने औरंगाबाद के IDTR संस्थान में कठिन प्रशिक्षण लिया। राजनीति विज्ञान और भूगोल में स्नातक होने के बावजूद इन युवतियों ने पारंपरिक नौकरियों के बजाय इस चुनौतीपूर्ण क्षेत्र को चुना। आरती कुमारी कहती हैं, 'मजदूर परिवार से आकर राज्यपाल के सामने खड़े होना हमारे लिए किसी सपने जैसा है।''पिंक बस' अब सुरक्षा और सशक्तिकरण का मेलपरिवहन विभाग के अनुसार, वर्तमान में राज्य में 100 पिंक बसें चल रही हैं। विभाग ने 21-40 वर्ष की महिलाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है, जिसमें रहना, खाना और तकनीकी शिक्षा पूरी तरह निशुल्क है। परिवहन निदेशक अतुल कुमार वर्मा ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य बसों में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और रोजगार में उनकी भागीदारी बढ़ाना है। जनवरी 2026 में पहले बैच की ट्रेनिंग पूरी हुई है और जल्द ही 13 और महिला ड्राइवर सड़कों पर उतरने वाली हैं। स्टीयरिंग व्हील उनके हाथों में है। इससे महिलाओं की पूरी भागीदारी पक्की होती है। बिहार में महिलाओं के सपने पूरे करने में सरकार उनके साथ खड़ी है। महिलाएं बस में सुरक्षित महसूस करें इसके लिए भी इसकी शुरुआत की गई।'मजदूर की बेटी अब बनाएगी पहचान'ग्रेजुएट गायत्री कुमारी बताती हैं कि समाज की प्रतिक्रिया हमेशा सकारात्मक नहीं रही। जब लोगों को पता चला कि एक मजदूर की बेटी बस चलाएगी और गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा बनेगी, तो कई लोगों ने उपहास भी उड़ाया। लेकिन इन तानों ने उनके इरादों को और मजबूत किया। आज जब इनके पति और पिता गर्व से उनकी सफलता की चर्चा करते हैं, तो यह उन तमाम लड़कियों के लिए प्रेरणा बन जाता है जो गरीबी और संसाधनों की कमी के कारण अपने कदम पीछे खींच लेती हैं।महिलाओं ने बताया कमाल का एक्सपीरियंसपिंक बस की ड्राइवर अनीता कुमारी ने कहा, 'मैं बहुत खुश हूं। आज हमारे लिए बहुत अच्छा दिन है। हमने कभी नहीं सोचा था कि हम पिंक बस चलाएंगी। आज हमें यह मौका मिला है। हम बहुत खुश हैं कि हम यहां पहुंची हैं। हम अपनी तरफ से मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हैं।' पिंक बस की ड्राइवर आरती कुमारी कहती हैं, 'मैं भोजपुर जिले की रहने वाली हूं। मैं 2023 से नारी गुंजा से जुड़ी हुई हूं। मैंने औरंगाबाद में एलएमवी के लिए 21 दिन की ट्रेनिंग ली है और एचएमवी के लिए एक महीने की। मैं मुख्यमंत्री को धन्यवाद देना चाहूंगी।' पिंक बस की ड्राइवर सरस्वती कुमारी ने कहा, 'मैं बहुत खुश हूं कि हम वो कर पा रहे हैं, जो पुरुष करते हैं। हम सरकार के रिजर्वेशन का फायदा उठा रहे हैं। हम चाहते हैं कि रिजर्वेशन जारी रहे ताकि लड़कियां मोटिवेट हो सकें और दूसरी लड़कियां अपने सपने पूरे कर सकें।'इनपुट- आईएएनएस.

पटना: बिहार की सड़कों पर अब बदलाव की एक नई लहर दौड़ रही है। पटना के गांधी मैदान में गणतंत्र दिवस के गौरवमयी अवसर पर बिहार राज्य पथ परिवहन निगम की 'पिंक बस' झांकी ने सबका दिल जीत लिया। इस झांकी की असली ताकत वे 6 महिलाएं थीं, जो राज्य की पहली महिला बस ड्राइवर बनने के लिए तैयार हैं। समाज के सबसे पिछड़े महादलित समुदाय से आने वाली इन बेटियों ने भारी वाहनों का लाइसेंस लेकर यह साबित कर दिया है कि उनके सपने किसी भी बाधा से बड़े हैं। मई 2025 में शुरू हुई पिंक बस सेवा अब अपने असली उद्देश्य को हासिल कर रही है, जहां ड्राइवर और कंडक्टर दोनों महिलाएं ही होंगी।अनीता और बेबी की जांबाज कहानी22 साल की अनीता कुमारी जब पिंक बस की ड्राइवर सीट पर बैठकर आत्मविश्वास के साथ क्लच और एक्सीलेटर संभालती हैं, तो देखने वाले दंग रह जाते हैं। वहीं, पांच फीट से कम कद वाली बेबी कुमारी उन लोगों को करारा जवाब दे रही हैं जो उनकी लंबाई को उनकी कमजोरी मानते थे। बेबी का कहना है, 'लोग मेरे कद पर तंज कसते थे, लेकिन आज मैं ट्रक और बस जैसे भारी वाहन चला सकती हूँ, जिसे सोचने की हिम्मत बड़े-बड़े लोग नहीं करते।' इन महिलाओं ने 2024 में भारी वाहन लाइसेंस हालिस कर अपनी काबलियत साबित की है।सामाजिक बेड़ियों को तोड़कर गांधी मैदान तक का सफरइन महिला ड्राइवरों का सफर संघर्षों से भरा रहा है। सरस्वती कुमारी को अपनी शादी के बाद ससुराल वालों को इस बात के लिए राजी करना पड़ा कि वो बस चलाएंगी। इन महिलाओं ने औरंगाबाद के IDTR संस्थान में कठिन प्रशिक्षण लिया। राजनीति विज्ञान और भूगोल में स्नातक होने के बावजूद इन युवतियों ने पारंपरिक नौकरियों के बजाय इस चुनौतीपूर्ण क्षेत्र को चुना। आरती कुमारी कहती हैं, 'मजदूर परिवार से आकर राज्यपाल के सामने खड़े होना हमारे लिए किसी सपने जैसा है।''पिंक बस' अब सुरक्षा और सशक्तिकरण का मेलपरिवहन विभाग के अनुसार, वर्तमान में राज्य में 100 पिंक बसें चल रही हैं। विभाग ने 21-40 वर्ष की महिलाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है, जिसमें रहना, खाना और तकनीकी शिक्षा पूरी तरह निशुल्क है। परिवहन निदेशक अतुल कुमार वर्मा ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य बसों में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और रोजगार में उनकी भागीदारी बढ़ाना है। जनवरी 2026 में पहले बैच की ट्रेनिंग पूरी हुई है और जल्द ही 13 और महिला ड्राइवर सड़कों पर उतरने वाली हैं। स्टीयरिंग व्हील उनके हाथों में है। इससे महिलाओं की पूरी भागीदारी पक्की होती है। बिहार में महिलाओं के सपने पूरे करने में सरकार उनके साथ खड़ी है। महिलाएं बस में सुरक्षित महसूस करें इसके लिए भी इसकी शुरुआत की गई।'मजदूर की बेटी अब बनाएगी पहचान'ग्रेजुएट गायत्री कुमारी बताती हैं कि समाज की प्रतिक्रिया हमेशा सकारात्मक नहीं रही। जब लोगों को पता चला कि एक मजदूर की बेटी बस चलाएगी और गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा बनेगी, तो कई लोगों ने उपहास भी उड़ाया। लेकिन इन तानों ने उनके इरादों को और मजबूत किया। आज जब इनके पति और पिता गर्व से उनकी सफलता की चर्चा करते हैं, तो यह उन तमाम लड़कियों के लिए प्रेरणा बन जाता है जो गरीबी और संसाधनों की कमी के कारण अपने कदम पीछे खींच लेती हैं।महिलाओं ने बताया कमाल का एक्सपीरियंसपिंक बस की ड्राइवर अनीता कुमारी ने कहा, 'मैं बहुत खुश हूं। आज हमारे लिए बहुत अच्छा दिन है। हमने कभी नहीं सोचा था कि हम पिंक बस चलाएंगी। आज हमें यह मौका मिला है। हम बहुत खुश हैं कि हम यहां पहुंची हैं। हम अपनी तरफ से मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हैं।' पिंक बस की ड्राइवर आरती कुमारी कहती हैं, 'मैं भोजपुर जिले की रहने वाली हूं। मैं 2023 से नारी गुंजा से जुड़ी हुई हूं। मैंने औरंगाबाद में एलएमवी के लिए 21 दिन की ट्रेनिंग ली है और एचएमवी के लिए एक महीने की। मैं मुख्यमंत्री को धन्यवाद देना चाहूंगी।' पिंक बस की ड्राइवर सरस्वती कुमारी ने कहा, 'मैं बहुत खुश हूं कि हम वो कर पा रहे हैं, जो पुरुष करते हैं। हम सरकार के रिजर्वेशन का फायदा उठा रहे हैं। हम चाहते हैं कि रिजर्वेशन जारी रहे ताकि लड़कियां मोटिवेट हो सकें और दूसरी लड़कियां अपने सपने पूरे कर सकें।'इनपुट- आईएएनएस

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