Karauli Success Story: रिटायर्ड डिप्टी कमिश्नर ने 25 साल पहले आंवले की बागवानी शुरू की और इसे एक मिसाल बना दिया. आज उनका मॉडल पूरे प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत है. उनकी मेहनत और नवाचार से खेती में नई क्रांति आई है और किसानों को आय का स्थिर स्रोत मिला है.
अगर मन में कुछ कर गुजरने की चाह हो तो न हालात मायने रखते हैं, न उम्र. कुछ ऐसा ही कर दिखाया है राजस्थान के करौली जिले के बीजलपुर गांव के किसान और आयकर विभाग के रिटायर्ड डिप्टी कमिश्नर जगन मीणा ने. सरकारी नौकरी के साथ-साथ खेती में नवाचार कर उन्होंने वो मिसाल कायम की, जो आज पूरे प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई है.
करीब 25 साल पहले, जब आंवले की बागवानी का नाम भी कम ही लोग जानते थे, तब जगन मीणा ने अपनी 45 बीघा जमीन पर प्रतापगढ़ से 2800 पौधे लाकर बागवानी की शुरुआत की थी. आज रिटायरमेंट के बाद यही बागवानी उनकी पहचान बन चुकी है. खेती के इस नवाचार ने न केवल उनकी आमदनी कई गुना बढ़ाई, बल्कि क्षेत्र के दर्जनों लोगों को वह अब रोजगार भी दें रहें है. जगन मीणा बताते हैं कि उन्होंने सन 2000 में पारंपरिक खेती छोड़ आंवले की बागवानी की ओर रुख किया था. उस वक्त पारंपरिक खेती में न लाभ था, न रुझान. हमने देखा कि पारंपरिक खेती में मेहनत तो बहुत है लेकिन आमदनी कम है. इसलिए मैंने जोखिम उठाकर आंवले की खेती शुरू की. और यह निर्णय आज मेरी ज़िंदगी का सबसे सफल कदम साबित हुआ. खास बात यें कि करौली के किसान जगन मीणा ने आयकर विभाग में 28 साल तक सेवा दी और इसी दौरान उन्होंने खेती में यह प्रयोग किया. उनका मकसद केवल खुद की आय बढ़ाना नहीं था, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोज़गार देना भी था. आज उनके बाग से हर साल 50-60 लोगों को 5-6 महीनों तक नियमित काम, जबकि दर्जनों लोगों को सालभर स्थायी रोजगार मिलता है. जगन मीणा का मानना है कि करौली और आसपास का इलाका खट्टे फलों की खेती के लिए बेहद उपजाऊ है. वह कहते हैं, अगर किसान एक-दो बीघा जमीन में भी आंवला या नींबू जैसी बागवानी करें, तो पारंपरिक खेती की तुलना में दोगुना मुनाफा कमा सकते हैं. आज 63 वर्ष की उम्र में भी जगन मीणा अपने 45 बीघा के बाग की देखरेख खुद करते हैं. उनके बाग में अब करीब 4000 से अधिक आंवले के पेड़ हैं. वह बताते हैं कि आंवले की खेती में नियमित देखभाल बहुत जरूरी है. अगर पौधों पर ध्यान न दिया जाए तो फलन घट जाता है और कीटों का खतरा बढ़ जाता है. जगन मीणा किसानों को संदेश देते हैं कि समय के साथ खेती में बदलाव जरूरी है. यदि किसान थोड़ा जोखिम लेकर नवाचार अपनाएं तो न केवल अपनी आय बढ़ा सकते हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर बना सकते हैं.
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