UP PCS Success Story: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट uppsc.up.nic.
UP PCS 9th Rank Shubham Singh Success Story : 'जब गिरा तो संभालने के लिए पूरा परिवार था.' उत्तर प्रदेश फतेहपुर के रहने वाले शुभम सिंह के लिए यही एक चीज सबसे बड़ी प्रेरणा बन गई। बार-बार मिल रही असफलातों के बावजूज न सिर्फ उन्होंने खुद को संभाला बल्कि ऐसा फाइट बैक किया कि सभी उनकी सफलता नजीर बन गई। जो यूपी पीसीएस का प्रीलिम्स तक भी क्लियर नहीं कर पाए थे, उन्होंने 9वीं रैंक हासिल की है। इंजीनियर से डिप्टी कलेक्टर बने शुभम सिंह की सक्सेस स्टोरी सरकारी नौकरी का सपना देख रहे युवाओं के लिए प्रेरणा से कम नहीं है।प्राइवेट स्कूल में टीचर हैं पिताशुभम सिंह उत्तर प्रदेश के फतेहपुर गांव के साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता राकेश कुमार एक प्राइवेट स्कूल में टीचर हैं और मां गृहणी हैं। परिवार का खर्च चलाने के लिए प्राइवेट स्कूल टीचर पिता खेती का काम भी करते हैं। शुभम ने बचपन से पिता को दिन-रात मेहनत करते देखा है। इसलिए उनके जीवन में मेहनत और संघर्ष नई चीज नहीं थी। नई बात थी उन हालातों में भी अपने लक्ष्य को पाने का जुनून।सरकारी स्कूल से IIT तक का सफरशुभम की प्राइमरी स्कूलिंग धाता में स्थित चौधरी रामचंद्र सिंह गुलजार सिंह प्राथमिक विद्यालय से हुई है। पढ़ाई में बचपन से होशियार रहे हैं। इसलिए 6वीं के बाद उन्हें जवाहर नवोदय विद्यालय, फतेहपुर में एडमिशन मिल गया। उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई नवोदय विद्यालय से की। अच्छे नंबरों से पास होने वाले शुभम ने आगे इंजीनियरिंग में करियर बनाने के लिए IIT धनबाद में एडमिशन लिया। लेकिन केमिकल इंजीनियरिंग की डिग्री लेने तक उन्होंने ठान लिया था कि जाना है तो सिविल सेवा में।UPSC और UPPSC PCS एग्जाम में मिली असफलताएंहर साल लाखों युवा सिविल सेवा में जाने के लिए यूपीएससी और पीसीएस एग्जाम देते हैं। उनमें से अधिकतर असफल हो जाते हैं। शुभम भी उन्हीं युवाओं में से थे। यूपीएससी में कुछ नहीं हो रहा था और इधर पीसीएस 2023 में प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं हुआ। एक इंटरव्यू में शुभम कहते हैं कि तीन-चार साल में मनोदशा टूटने लगती है, लगने लगा था कि कैंपस प्लेसमेंट ले लेना चाहिए, क्योंकि दोस्त विदेश ट्रिप प्लान कर रहे थे। तब परिवार ने समझाया कि समय लगता है। धीरे-धीरे चीजें हो जाती हैं। बिना कोचिंग UP PCS में पाई 9वीं रैंक, अब बनेंगे डिप्टी कलेक्टरपरिवार के मोटिवेशन और हार न मानने का जज्बा लेकर शुभम ने फिर से पीसीएस एग्जाम दिया। असफलातओं से सीख ली। बिना कोचिंग यूपी पीसीएस की तैयारी की। कुछ विषयों के लिए यूट्यूब पर ऑनलाइन स्टडी की। टेस्ट सीरीज का बहुत फायदा मिला। PCS टॉपर के युवाओं को जरूरी टिप्सप्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को टिप्स देते हुए शुभम ने कहा कि सबसे पहले असफलताओं के बाद भी रुकना नहीं है, चलते ही रहना है। प्रोपर मेंटरिंग लें। प्रीलिम्स मेन्स और इंटरव्यू के हिसाब से अलग-अलग स्टेज है, इसलिए तीनों स्टेज के हिसाब से तैयारी करनी होगी। अपने वीक पॉइंट पहचानना जरूरी है। सेल्फ एनालिसिस करना आना चाहिए। टाइम टाइम पर पता लगाएं कि जो स्ट्रेटजी फॉलो कर रहे हैं वो कितनी कामयाब साबित हो रही है। शुभम सिंह की जर्नी हार को स्वीकार कर ईमानदारी से सफलता के प्रयास करने की कोशिश करना सिखाती है।.
UP PCS 9th Rank Shubham Singh Success Story : 'जब गिरा तो संभालने के लिए पूरा परिवार था...' उत्तर प्रदेश फतेहपुर के रहने वाले शुभम सिंह के लिए यही एक चीज सबसे बड़ी प्रेरणा बन गई। बार-बार मिल रही असफलातों के बावजूज न सिर्फ उन्होंने खुद को संभाला बल्कि ऐसा फाइट बैक किया कि सभी उनकी सफलता नजीर बन गई। जो यूपी पीसीएस का प्रीलिम्स तक भी क्लियर नहीं कर पाए थे, उन्होंने 9वीं रैंक हासिल की है। इंजीनियर से डिप्टी कलेक्टर बने शुभम सिंह की सक्सेस स्टोरी सरकारी नौकरी का सपना देख रहे युवाओं के लिए प्रेरणा से कम नहीं है।प्राइवेट स्कूल में टीचर हैं पिताशुभम सिंह उत्तर प्रदेश के फतेहपुर गांव के साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता राकेश कुमार एक प्राइवेट स्कूल में टीचर हैं और मां गृहणी हैं। परिवार का खर्च चलाने के लिए प्राइवेट स्कूल टीचर पिता खेती का काम भी करते हैं। शुभम ने बचपन से पिता को दिन-रात मेहनत करते देखा है। इसलिए उनके जीवन में मेहनत और संघर्ष नई चीज नहीं थी। नई बात थी उन हालातों में भी अपने लक्ष्य को पाने का जुनून।सरकारी स्कूल से IIT तक का सफरशुभम की प्राइमरी स्कूलिंग धाता में स्थित चौधरी रामचंद्र सिंह गुलजार सिंह प्राथमिक विद्यालय से हुई है। पढ़ाई में बचपन से होशियार रहे हैं। इसलिए 6वीं के बाद उन्हें जवाहर नवोदय विद्यालय, फतेहपुर में एडमिशन मिल गया। उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई नवोदय विद्यालय से की। अच्छे नंबरों से पास होने वाले शुभम ने आगे इंजीनियरिंग में करियर बनाने के लिए IIT धनबाद में एडमिशन लिया। लेकिन केमिकल इंजीनियरिंग की डिग्री लेने तक उन्होंने ठान लिया था कि जाना है तो सिविल सेवा में।UPSC और UPPSC PCS एग्जाम में मिली असफलताएंहर साल लाखों युवा सिविल सेवा में जाने के लिए यूपीएससी और पीसीएस एग्जाम देते हैं। उनमें से अधिकतर असफल हो जाते हैं। शुभम भी उन्हीं युवाओं में से थे। यूपीएससी में कुछ नहीं हो रहा था और इधर पीसीएस 2023 में प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं हुआ। एक इंटरव्यू में शुभम कहते हैं कि तीन-चार साल में मनोदशा टूटने लगती है, लगने लगा था कि कैंपस प्लेसमेंट ले लेना चाहिए, क्योंकि दोस्त विदेश ट्रिप प्लान कर रहे थे। तब परिवार ने समझाया कि समय लगता है। धीरे-धीरे चीजें हो जाती हैं। बिना कोचिंग UP PCS में पाई 9वीं रैंक, अब बनेंगे डिप्टी कलेक्टरपरिवार के मोटिवेशन और हार न मानने का जज्बा लेकर शुभम ने फिर से पीसीएस एग्जाम दिया। असफलातओं से सीख ली। बिना कोचिंग यूपी पीसीएस की तैयारी की। कुछ विषयों के लिए यूट्यूब पर ऑनलाइन स्टडी की। टेस्ट सीरीज का बहुत फायदा मिला। PCS टॉपर के युवाओं को जरूरी टिप्सप्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को टिप्स देते हुए शुभम ने कहा कि सबसे पहले असफलताओं के बाद भी रुकना नहीं है, चलते ही रहना है। प्रोपर मेंटरिंग लें। प्रीलिम्स मेन्स और इंटरव्यू के हिसाब से अलग-अलग स्टेज है, इसलिए तीनों स्टेज के हिसाब से तैयारी करनी होगी। अपने वीक पॉइंट पहचानना जरूरी है। सेल्फ एनालिसिस करना आना चाहिए। टाइम टाइम पर पता लगाएं कि जो स्ट्रेटजी फॉलो कर रहे हैं वो कितनी कामयाब साबित हो रही है। शुभम सिंह की जर्नी हार को स्वीकार कर ईमानदारी से सफलता के प्रयास करने की कोशिश करना सिखाती है।
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