Krishan Janmashtami 2025 Avtar Katha: राधा-कृष्ण के अवतार को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं। इनमें प्रभु के अवतार लेने के रहस्यों के बारे में बताया गया है। ठीक इसी तरह महाभागवत में एक कथा आती है, जिसमें दावा किया गया है कि भगवान कृष्ण मां काली के अवतार हैं जबकि राधा जी के रूप में भगवान शिव अवतरित हुए थे। आइये इस कथा के बारे में जानते...
Shri Krishan Avtar Katha: प्रभु की लीला तो प्रभु ही जानें! महाभागवत की एक कथा यह बताती है कि शिव जी राधा हैं और मां काली ने श्री कृष्ण के रूप में अवतार लिया है। ये कथा बड़ी ही रोचक है जहां भगवान शिव की मन की इच्छा पूरी करने के लिए मां काली ये स्वरूप धारण करती हैं। आइये जन्माष्टमी की पावन अवसर पर इस कथा के बारे में विस्तार से जानते हैं। शिवजी के मन में आई अभिलाषाकथा इस प्रकार है कि एक बार परमकौतुकी लीलामय भगवान शिव ने माता पार्वती से कहा, हे देवी! अगर तुम मुझ पर प्रसन्न हो तो तुम पृथ्वी पर कहीं जाकर पुरुष के रूप में अवतार लो और मैं स्त्री रूप धारण करूंगा। यहां जैसे मैं तुम्हारा प्रियतम स्वामी और तुम मेरी प्राण प्रिय हो, ठीक उसी तरह वहां तुम मेरे स्वामी बनो और मैं तुम्हारी पत्नी बनूंगा। मेरी यही इच्छा है। तुम मेरी सभी इच्छाओं को पूरा करती हो। इसे भी पूरा करो। देवी पार्वती ने स्वीकार की इच्छाइसके बाद शक्तिमान की इच्छा पूरा करने के लिए शक्ति की देवी मां पार्वती ने कहा, नवीन मेघ के समान कान्तिमयी जो मेरी भद्रकाली नामक मूर्ति है, वही श्री कृष्ण रूप में धरती पर अवतार लेगी और अब आप भी अपने अत्यन्त स्त्रीरूप धारण कीजिये। तब भगवान शिव पूरी तरह संतुष्ट होकर कहते हैं, मैं तुम्हारी कामना से धरती पर 9 रूपों में प्रकट होऊंगा। मैं खुद वृषभानुनन्दिनी राधाजी के तौर पर अवतार लूंगा। तु्म्हारी प्राणप्रिया बनकर तुम्हारे साथ घूमूंगा। इसके साथ ही मेरी आठ मूर्तियां आठ रमणियों के रूप में प्रकट होंगी और वे ही मनोहरनयना श्रीरुक्मिणी और सत्यभामा आदि तुम्हारी पटरानियां होंगी। इसके अतिरिक्त जो मेरे भैरवगण हैं, वे भी रमणीरूप धारण करे भूतलपर अवतरित होंगे।राधा-कृष्ण अवतार का रहस्यभगवान शिव की इन बातों को सुनकर देवी कहती हैं, आपकी इच्छा सफल हो। मैं आपकी इन सभी मूर्तियों के साथ यथोचित विहार करूंगी। हे प्रभु, मेरी जया और विजया नामक दो सखियां हैं, वे पुरुष रूप में श्रीदामा और सुदामा होंगी। भगवान विष्णु के साथ मेरा पहले ही निर्णय हो चुका है कि वे हलायुध रूप में मेरे बड़े भाई के तौर पर अवतार लेंगे। वे हमेशा मेरे प्रिय कार्यों का साधन करेंगे। उनका नाम बलराम होगा। इस तरह मैं आपका काम सिद्ध करके अपनी कीर्ति को स्थापित करके फिर से धरती से लौट आऊंगी। इसी फैसले के बाद पृथ्वी और ब्रह्माजी की प्रार्थना पर पार्वती जी ने श्रीकृष्ण और शिव जी ने राधा रूप में अवतार लिया। यह एक कल्प में राधा-कृष्ण अवतार का बाहरी रहस्य है, जो महाभागवत के आधार पर बताया जाता है।.
Shri Krishan Avtar Katha: प्रभु की लीला तो प्रभु ही जानें! महाभागवत की एक कथा यह बताती है कि शिव जी राधा हैं और मां काली ने श्री कृष्ण के रूप में अवतार लिया है। ये कथा बड़ी ही रोचक है जहां भगवान शिव की मन की इच्छा पूरी करने के लिए मां काली ये स्वरूप धारण करती हैं। आइये जन्माष्टमी की पावन अवसर पर इस कथा के बारे में विस्तार से जानते हैं। शिवजी के मन में आई अभिलाषाकथा इस प्रकार है कि एक बार परमकौतुकी लीलामय भगवान शिव ने माता पार्वती से कहा, हे देवी! अगर तुम मुझ पर प्रसन्न हो तो तुम पृथ्वी पर कहीं जाकर पुरुष के रूप में अवतार लो और मैं स्त्री रूप धारण करूंगा। यहां जैसे मैं तुम्हारा प्रियतम स्वामी और तुम मेरी प्राण प्रिय हो, ठीक उसी तरह वहां तुम मेरे स्वामी बनो और मैं तुम्हारी पत्नी बनूंगा। मेरी यही इच्छा है। तुम मेरी सभी इच्छाओं को पूरा करती हो। इसे भी पूरा करो। देवी पार्वती ने स्वीकार की इच्छाइसके बाद शक्तिमान की इच्छा पूरा करने के लिए शक्ति की देवी मां पार्वती ने कहा, नवीन मेघ के समान कान्तिमयी जो मेरी भद्रकाली नामक मूर्ति है, वही श्री कृष्ण रूप में धरती पर अवतार लेगी और अब आप भी अपने अत्यन्त स्त्रीरूप धारण कीजिये। तब भगवान शिव पूरी तरह संतुष्ट होकर कहते हैं, मैं तुम्हारी कामना से धरती पर 9 रूपों में प्रकट होऊंगा। मैं खुद वृषभानुनन्दिनी राधाजी के तौर पर अवतार लूंगा। तु्म्हारी प्राणप्रिया बनकर तुम्हारे साथ घूमूंगा। इसके साथ ही मेरी आठ मूर्तियां आठ रमणियों के रूप में प्रकट होंगी और वे ही मनोहरनयना श्रीरुक्मिणी और सत्यभामा आदि तुम्हारी पटरानियां होंगी। इसके अतिरिक्त जो मेरे भैरवगण हैं, वे भी रमणीरूप धारण करे भूतलपर अवतरित होंगे।राधा-कृष्ण अवतार का रहस्यभगवान शिव की इन बातों को सुनकर देवी कहती हैं, आपकी इच्छा सफल हो। मैं आपकी इन सभी मूर्तियों के साथ यथोचित विहार करूंगी। हे प्रभु, मेरी जया और विजया नामक दो सखियां हैं, वे पुरुष रूप में श्रीदामा और सुदामा होंगी। भगवान विष्णु के साथ मेरा पहले ही निर्णय हो चुका है कि वे हलायुध रूप में मेरे बड़े भाई के तौर पर अवतार लेंगे। वे हमेशा मेरे प्रिय कार्यों का साधन करेंगे। उनका नाम बलराम होगा। इस तरह मैं आपका काम सिद्ध करके अपनी कीर्ति को स्थापित करके फिर से धरती से लौट आऊंगी। इसी फैसले के बाद पृथ्वी और ब्रह्माजी की प्रार्थना पर पार्वती जी ने श्रीकृष्ण और शिव जी ने राधा रूप में अवतार लिया। यह एक कल्प में राधा-कृष्ण अवतार का बाहरी रहस्य है, जो महाभागवत के आधार पर बताया जाता है।
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