US H-1B Visa Policy: अमेरिका में H-1B वीजा लंबे समय से विवादों में रहा है। इसके आलोचकों का कहना है कि इस वीजा प्रोग्राम के जरिए विदेशी वर्कर्स अमेरिकियों की नौकरी खा रहे हैं।
H-1B Visa News: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ H-1B वीजा पर विदेशी वर्कर्स को देश में लाने की बात कर रहे हैं। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका को स्किल वर्कर्स की जरूरत है और उनके बिना देश की अर्थव्यवस्था नहीं चल पाएगी। दूसरी तरफ उनकी सरकार H-1B वीजा पर आने वाले विदेशी वर्कर्स के लिए एक खतरनाक प्लान भी बना रही है। इसका खुलासा खुद अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने किया है। उन्होंने जो प्लान बताया है, उससे विदेशी वर्कर्स यूएस में नहीं रह पाएंगे।फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ट्रंप सरकार का प्लान है कि H-1B वीजा प्रोग्राम के तहत विदेशी वर्कर्स को देश में लाया जाए, जो अमेरिकी वर्कर्स को ट्रेनिंग देंगे और फिर अपने देश लौट जाएंगे। इसका मतलब है कि H-1B वीजा वर्कर्स को देश में स्थायी रूप से बसने से रोका जाएगा। अभी उनके पास ग्रीन कार्ड हासिल करने का विकल्प रहता है, जिसके जरिए वे अमेरिका में स्थायी रूप से बस पाते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि ग्रीन कार्ड मिलने के बाद नागरिकता का रास्ता भी खुलता है।ट्रेनिंग देकर अपने देश लौट जाएंगे विदेशी वर्करअमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा, 'राष्ट्रपति का विजन यहां पर विदेशी वर्कर्स को लाने का है, जहां ये नौकरियां गईं , क्योंकि उनके पास स्किल हैं। तीन, पांच, सात साल वे अमेरिका में विदेशी वर्कर्स को ट्रेनिंग देंगे, फिर वे अपने घर जा सकते हैं। अमेरिकी वर्कर पूरी तरह से उनकी जगह ले लेंगे।' अमेरिकी मंत्री का ये बयान ऐसे समय पर आया है, जब खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा का समर्थन किया और स्किल वर्कर्स को देश में लाने की बात कही है।स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ने पिछले कुछ दशकों में कई सारी मैन्यूफैक्चरिंग जॉब्स को आउटसोर्स किया है। उन्होंने कहा, '20-30 सालों में अमेरिका ने मैन्यूफैक्चरिंग से जुड़ी नौकरियों को आउटसोर्स किया है। राष्ट्रपति का प्वाइंट ये है कि हम ये नहीं कहते हैं कि आप रातोंरात जहाज बनाना सीख लेंगे। हम सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को अमेरिका वापस लाना चाहते हैं। हम इस अप्रोच को होम रन कहते हैं। हमने सालों से अमेरिका में जहाज नहीं बनाए हैं, हमने सेमीकंडक्टर नहीं बनाए हैं।'.
H-1B Visa News: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ H-1B वीजा पर विदेशी वर्कर्स को देश में लाने की बात कर रहे हैं। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका को स्किल वर्कर्स की जरूरत है और उनके बिना देश की अर्थव्यवस्था नहीं चल पाएगी। दूसरी तरफ उनकी सरकार H-1B वीजा पर आने वाले विदेशी वर्कर्स के लिए एक खतरनाक प्लान भी बना रही है। इसका खुलासा खुद अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने किया है। उन्होंने जो प्लान बताया है, उससे विदेशी वर्कर्स यूएस में नहीं रह पाएंगे।फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ट्रंप सरकार का प्लान है कि H-1B वीजा प्रोग्राम के तहत विदेशी वर्कर्स को देश में लाया जाए, जो अमेरिकी वर्कर्स को ट्रेनिंग देंगे और फिर अपने देश लौट जाएंगे। इसका मतलब है कि H-1B वीजा वर्कर्स को देश में स्थायी रूप से बसने से रोका जाएगा। अभी उनके पास ग्रीन कार्ड हासिल करने का विकल्प रहता है, जिसके जरिए वे अमेरिका में स्थायी रूप से बस पाते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि ग्रीन कार्ड मिलने के बाद नागरिकता का रास्ता भी खुलता है।ट्रेनिंग देकर अपने देश लौट जाएंगे विदेशी वर्करअमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा, 'राष्ट्रपति का विजन यहां पर विदेशी वर्कर्स को लाने का है, जहां ये नौकरियां गईं , क्योंकि उनके पास स्किल हैं। तीन, पांच, सात साल वे अमेरिका में विदेशी वर्कर्स को ट्रेनिंग देंगे, फिर वे अपने घर जा सकते हैं। अमेरिकी वर्कर पूरी तरह से उनकी जगह ले लेंगे।' अमेरिकी मंत्री का ये बयान ऐसे समय पर आया है, जब खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा का समर्थन किया और स्किल वर्कर्स को देश में लाने की बात कही है।स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ने पिछले कुछ दशकों में कई सारी मैन्यूफैक्चरिंग जॉब्स को आउटसोर्स किया है। उन्होंने कहा, '20-30 सालों में अमेरिका ने मैन्यूफैक्चरिंग से जुड़ी नौकरियों को आउटसोर्स किया है। राष्ट्रपति का प्वाइंट ये है कि हम ये नहीं कहते हैं कि आप रातोंरात जहाज बनाना सीख लेंगे। हम सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को अमेरिका वापस लाना चाहते हैं। हम इस अप्रोच को होम रन कहते हैं। हमने सालों से अमेरिका में जहाज नहीं बनाए हैं, हमने सेमीकंडक्टर नहीं बनाए हैं।'
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