Trump ने सबके सामने कबूल कर लिया है कि असल में अमेरिकियों के पास टैलेंट है ही नहीं. H1 B Visa को हौवा बनाकर पेश करने के बाद ट्रप को प्रवासी कर्मचारियों की अहमियत समझ में आ रही है. उन्होंने बताया है कि उनके बिना अमेरिकी कंपनियों का क्या हाल हो सकता है.
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनावी वादों में एच1 बी वीजा को हौवा बनाकर पेश किया था. अमेरिकी जनता के दिमाग में ठूंस-ठूंस कर भर दिया था कि यही राक्षस अमेरिकियों की नौकरी खा रहा है और प्रवासियों की भरमार की वजह से उनका हक छीना जा रहा है.
ट्रंप ने इसके बाद एच1-बी वीजा पर रूल्स टाइट करने शुरू कर दिए थे, भारी-भरकम फीस के अलावा इमिग्रेशन पॉलिसी लगभग प्रवासियों के खिलाफ कर दी थी. हालांकि, अचानक ट्रंप के तेवर ठंडे पड़ते दिखाए दिए रहे हैं. अब उन्हें एहसास हो रहा है कि असल में अमेरिकियों के पास टैलेंट है ही नहीं. Trump ने अमेरिकी टैलेंट पर क्या कह डाला? दरअसल, हाल ही में ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को एक इंटरव्यू दिया है, जिसमें उन्होंने प्रवासी कर्मचारियों की अहमियत खुलकर स्वीकार की है. ट्रंप ने एंकर लॉरा इंग्राहम से बातचीत के दौरान कबूल कर लिया है कि ‘अमेरिकी उतने टैलेंट नहीं हैं’. ट्रंप ने मान लिया है कि अमेरिका के औद्योगिक और तकनीकी वर्चस्व को बनाए रखने के लिए विदेशी टैलेंट को नौकरी देना बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि खास कर जटिल मैनुफैक्चरिंग और डिफेंस क्षेत्र में अमेरिका के पास जरूरी टैलेंट की कमी है. NOW – Trump says that H1B immigrants are necessary since there are not plenty of talented Americans. Laura: “We have plenty of talented people here!” Trump: “No, you don’t. No, you don’t… No, you don’t have… You don’t have certain talents and you have to… People have to… pic.twitter.com/xEfZRIbKPd — Disclose.tv November 12, 2025 कैसे लात माकर निकाले गए प्रवासी मजदूर? उन्होंने कहा कि लंबे समय से बेरोजगार लोगों को बिना ट्रेनिंग दिए ये काम नहीं करवाए जा सकते हैं. उन्होंने इस पर जॉर्जिया के हुंडई प्लांट का उदाहरण दिया, जहां पर ICE की छापेमारी हुई थी. ट्रंप ने कहा कि इस प्लांट से विदेशी विशेषज्ञता को पूरी तरह हटाना बेहद मुश्किल था, उनके बिना जटिल उत्पादों का निर्माण लगभग नामुमकिन हो गया था. यहां पर दक्षिण कोरिया से प्रवासी जटिल बैटरियां बनाने के काम में लगे थे. ट्रंप ने बताया कि ये लोग पूरी जिंदगी से यही काम कर रहे थे, ऐसे में एक ऐसे अमेरिकी बेरोजगार से उन्हें रिप्लेस करना मुश्किल था, जिसे ट्रेनिंग तक नहीं मिली. बता दें कि यहां से सैकड़ों प्रवासी कर्मचारियों को गिरफ्तार करके डिपोर्ट कर दिया गया था. भारतीयों के बिना कैसे बेहाल हो जाएगा अमेरिका? बता दें कि अमेरिकी में H1बी वीजा अप्लाई करने वाले प्रवासियों में से एक बड़ा हिस्सा भारत से आता है. ट्रंप ने जब एच-1बी वीजा आवेदन पर 100,000 डॉलर की फीस थोपी थी, तब प्रभावितों में सबसे ऊपर भारतीय थे. हालांकि, बाद में ट्रंप ने बताया कि ये फीस सिर्फ नए आवेदनों पर लागू की जाएगी. एफडब्ल्यूडी. यूएस के मुताबिक अमेरिका में लगभग 730,000 एच-1बी वीजा धारक हैं, जिनमें से ज्यादातर भारतीय हैं. जाहिर है कि इनके बिना अमेरिकी कंपनियां बेहाल हो जाएंगी.
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