H-1B से ज्यादा बड़ा खतरा है HIRE एक्ट! भारतीय वर्कर्स पर अमेरिका का 'ट्रिपल अटैक'

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US HIRE Act Impact on Indians: अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप लगातार कोई न कोई नया कानून लेकर आने की तैयारी कर रहे हैं, जिसका असर भारतीय वर्कर्स पर पड़ रहा है।

US HIRE Act: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले H-1B वीजा फीस बढ़ाकर 1 लाख डॉलर कर दी। इसकी वजह से अब भारतीयों के लिए यूएस जाकर अमेरिकी कंपनियों में काम करना मुश्किल हो चुका है। कंपनियों के लिए भारतीयों को जॉब देना महंगा हो चुका है, क्योंकि पहले उन्हें H-1B वीजा के लिए 88 लाख फीस देनी होगी, तभी वे उन्हें अमेरिका ला सकती हैं। ये समस्या अभी चल ही रही है कि अमेरिका में H-1B फीस से बड़े खतरे ने अपना रूप लेना शुरू कर दिया है।अमेरिका में एक नया कानून लाने की तैयारी हो रही है, जिसका नाम 'हाल्टिंग इंटरनेशनल रिलोकेशन ऑफ एंप्लॉयमेंट' एक्ट 2025 है। अगर इसे मंजूरी मिल जाती है तो अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत जैसे देशों में काम को आउटसोर्सिंग करना महंगा हो जाएगा। इसका सीधा असर उन भारतीय प्रोफेशनल्स पर पड़ेगा, जो अभी H-1B वीजा की बढ़ी फीस से जूझ रहे हैं। अभी तो अमेरिकी कंपनियां ही उन्हें जॉब देने से आनाकानी कर रही हैं। इस कानून के बाद तो भारत में भी जॉब पाना मुश्किल हो जाएगा।क्या है HIRE एक्ट?HIRE एक्ट के तहत उन सभी अमेरिकी कंपनियों पर 25% टैक्स लगाया जाएगा, जो अपने उस काम को आउटसोर्स करती हैं, जिसका फायदा अमेरिकी नागरिकों को मिलता है। इसे ऐसे समझिए कि अगर कोई अमेरिकी कंपनी अपने कॉल सेंटर वाले काम को भारत में किसी कंपनी को सौंप देती है, लेकिन कॉल सेंटर की सर्विस से अमेरिकी नागरिकों की समस्याएं सुलझाई जा रही हैं। ऐसी स्थिति में फिर अमेरिकी कंपनी पर 25% टैक्स लगेगा, जो किसी भी तरह से रिफंड भी नहीं होने वाला है। क्यों भारतीयों के लिए खतरा है HIRE एक्ट?हाल ही में आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के जरिए भारत पर लगाया गया टैरिफ सिर्फ सामान निर्यात पर असर नहीं डालेगा, बल्कि ये सर्विस सेक्टर को भी प्रभावित करने वाला है। रघुराम राजन ने HIRE एक्ट को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि इसके तहत विदेशी वर्कर्स की भर्ती करने वाली अमेरिकी कंपनियों के मुनाफे पर टैक्स लगाया जाएगा। ये भारत में असर डालेगा, क्योंकि ये कंपनियां बड़ी संख्या में भारतीयों को जॉब पर रखती हैं। पूर्व आरबीआई गवर्नर का मानना है कि HIRE एक्ट के नतीजे H-1B वीजा आवेदकों के लिए हाल ही में लागू किए गए 1 लाख डॉलर फीस से ज्यादा हैं। इस एक्ट का सबसे ज्यादा असर बीपीओ, कंसल्टेंसी फर्म और आईटी कंपनियों पर पड़ेगा, जो अमेरिकी कंपनियों के साथ मिलकर काम करती हैं। HIRE एक्ट की वजह से तीन तरह के नुकसान हो सकते हैं, जो निम्नलिखित हैं। आउटसोर्सिंग जॉब्स में कमी: दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरू, हैदराबाद, चेन्नई जैसे शहरों में हजारों कंपनियां ऑपरेट कर रही हैं, जो अमेरिकी कंपनियों संग पार्टनरशिप में काम करती हैं। अमेरिकी कंपनियां अपने कुछ काम को इन कंपनियों में आउटसोर्स कर देती हैं। इससे उन्हें फायदा मिलता है, क्योंकि भारत में उन्हें कम सैलरी देनी पड़ती है। हालांकि, HIRE एक्ट के बाद ऐसा करने पर उन्हें 25% टैक्स देना पड़ेगा। ऐसे में वे आउटसोर्सिंग बंद करेगी, जिसकी वजह से भारत में भी जॉब्स कम हो जाएंगी। अमेरिका का वीजा पाना मुश्किल: HIRE एक्ट के जरिए अमेरिका में हायरिंग बढ़ाने पर जोर देने की बात की गई है, लेकिन इसके लिए वीजा नियमों को बदलना भी नहीं पड़ेगा। अमेरिकी कंपनियों के लिए आउटसोर्सिंग पहले से ही महंगी हो जाएगी। ऐसी स्थिति में वे देश में ही लोगों को जॉब देने पर ध्यान लगाएंगी। इस तरह के हालातों में भारतीय वर्कर्स के लिए इन कंपनियों में जॉब के लिए H-1B वीजा या L-1 वीजा पाना मुश्किल हो जाएगा। कुल मिलाकर अमेरिका के दरवाजे बंद हो सकते हैं। आईटी इंडस्ट्री पर असर: अमेरिकी कंपनियों की तरफ से भारत के आईटी सेक्टर में अरबों डॉलर का काम आता है। यहां पर आउटसोर्सिंग से अमेरिकी कंपनियां तो मुनाफा कमाती ही हैं, लेकिन भारतीय आईटी सेक्टर को भी आगे बढ़ने का मौका मिलता है। मगर टैक्स लगने के बाद कंपनियां आउटसोर्सिंग से बच सकती हैं, ऐसा होने पर भारतीय आईटी सेक्टर पर सीधा असर पड़ेगा। भारत के आईटी सेक्टर का सबसे बड़ा मार्केट ही अमेरिका है। अगर वह मुंह मोड़ लेता है तो बड़े पैमाने पर छंटनी हो सकती है।अच्छी बात ये है कि अभी HIRE एक्ट फाइनेंस को लेकर गठित सीनेट कमिटी के पास है। यहां इस बिल पर चर्चा हो रही है और बदलाव की बात भी की जा रही है। यहां से पास होने के बाद ही एक्ट को कांग्रेस को भेजा जाएगा।.

US HIRE Act: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले H-1B वीजा फीस बढ़ाकर 1 लाख डॉलर कर दी। इसकी वजह से अब भारतीयों के लिए यूएस जाकर अमेरिकी कंपनियों में काम करना मुश्किल हो चुका है। कंपनियों के लिए भारतीयों को जॉब देना महंगा हो चुका है, क्योंकि पहले उन्हें H-1B वीजा के लिए 88 लाख फीस देनी होगी, तभी वे उन्हें अमेरिका ला सकती हैं। ये समस्या अभी चल ही रही है कि अमेरिका में H-1B फीस से बड़े खतरे ने अपना रूप लेना शुरू कर दिया है।अमेरिका में एक नया कानून लाने की तैयारी हो रही है, जिसका नाम 'हाल्टिंग इंटरनेशनल रिलोकेशन ऑफ एंप्लॉयमेंट' एक्ट 2025 है। अगर इसे मंजूरी मिल जाती है तो अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत जैसे देशों में काम को आउटसोर्सिंग करना महंगा हो जाएगा। इसका सीधा असर उन भारतीय प्रोफेशनल्स पर पड़ेगा, जो अभी H-1B वीजा की बढ़ी फीस से जूझ रहे हैं। अभी तो अमेरिकी कंपनियां ही उन्हें जॉब देने से आनाकानी कर रही हैं। इस कानून के बाद तो भारत में भी जॉब पाना मुश्किल हो जाएगा।क्या है HIRE एक्ट?HIRE एक्ट के तहत उन सभी अमेरिकी कंपनियों पर 25% टैक्स लगाया जाएगा, जो अपने उस काम को आउटसोर्स करती हैं, जिसका फायदा अमेरिकी नागरिकों को मिलता है। इसे ऐसे समझिए कि अगर कोई अमेरिकी कंपनी अपने कॉल सेंटर वाले काम को भारत में किसी कंपनी को सौंप देती है, लेकिन कॉल सेंटर की सर्विस से अमेरिकी नागरिकों की समस्याएं सुलझाई जा रही हैं। ऐसी स्थिति में फिर अमेरिकी कंपनी पर 25% टैक्स लगेगा, जो किसी भी तरह से रिफंड भी नहीं होने वाला है। क्यों भारतीयों के लिए खतरा है HIRE एक्ट?हाल ही में आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के जरिए भारत पर लगाया गया टैरिफ सिर्फ सामान निर्यात पर असर नहीं डालेगा, बल्कि ये सर्विस सेक्टर को भी प्रभावित करने वाला है। रघुराम राजन ने HIRE एक्ट को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि इसके तहत विदेशी वर्कर्स की भर्ती करने वाली अमेरिकी कंपनियों के मुनाफे पर टैक्स लगाया जाएगा। ये भारत में असर डालेगा, क्योंकि ये कंपनियां बड़ी संख्या में भारतीयों को जॉब पर रखती हैं। पूर्व आरबीआई गवर्नर का मानना है कि HIRE एक्ट के नतीजे H-1B वीजा आवेदकों के लिए हाल ही में लागू किए गए 1 लाख डॉलर फीस से ज्यादा हैं। इस एक्ट का सबसे ज्यादा असर बीपीओ, कंसल्टेंसी फर्म और आईटी कंपनियों पर पड़ेगा, जो अमेरिकी कंपनियों के साथ मिलकर काम करती हैं। HIRE एक्ट की वजह से तीन तरह के नुकसान हो सकते हैं, जो निम्नलिखित हैं। आउटसोर्सिंग जॉब्स में कमी: दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरू, हैदराबाद, चेन्नई जैसे शहरों में हजारों कंपनियां ऑपरेट कर रही हैं, जो अमेरिकी कंपनियों संग पार्टनरशिप में काम करती हैं। अमेरिकी कंपनियां अपने कुछ काम को इन कंपनियों में आउटसोर्स कर देती हैं। इससे उन्हें फायदा मिलता है, क्योंकि भारत में उन्हें कम सैलरी देनी पड़ती है। हालांकि, HIRE एक्ट के बाद ऐसा करने पर उन्हें 25% टैक्स देना पड़ेगा। ऐसे में वे आउटसोर्सिंग बंद करेगी, जिसकी वजह से भारत में भी जॉब्स कम हो जाएंगी। अमेरिका का वीजा पाना मुश्किल: HIRE एक्ट के जरिए अमेरिका में हायरिंग बढ़ाने पर जोर देने की बात की गई है, लेकिन इसके लिए वीजा नियमों को बदलना भी नहीं पड़ेगा। अमेरिकी कंपनियों के लिए आउटसोर्सिंग पहले से ही महंगी हो जाएगी। ऐसी स्थिति में वे देश में ही लोगों को जॉब देने पर ध्यान लगाएंगी। इस तरह के हालातों में भारतीय वर्कर्स के लिए इन कंपनियों में जॉब के लिए H-1B वीजा या L-1 वीजा पाना मुश्किल हो जाएगा। कुल मिलाकर अमेरिका के दरवाजे बंद हो सकते हैं। आईटी इंडस्ट्री पर असर: अमेरिकी कंपनियों की तरफ से भारत के आईटी सेक्टर में अरबों डॉलर का काम आता है। यहां पर आउटसोर्सिंग से अमेरिकी कंपनियां तो मुनाफा कमाती ही हैं, लेकिन भारतीय आईटी सेक्टर को भी आगे बढ़ने का मौका मिलता है। मगर टैक्स लगने के बाद कंपनियां आउटसोर्सिंग से बच सकती हैं, ऐसा होने पर भारतीय आईटी सेक्टर पर सीधा असर पड़ेगा। भारत के आईटी सेक्टर का सबसे बड़ा मार्केट ही अमेरिका है। अगर वह मुंह मोड़ लेता है तो बड़े पैमाने पर छंटनी हो सकती है।अच्छी बात ये है कि अभी HIRE एक्ट फाइनेंस को लेकर गठित सीनेट कमिटी के पास है। यहां इस बिल पर चर्चा हो रही है और बदलाव की बात भी की जा रही है। यहां से पास होने के बाद ही एक्ट को कांग्रेस को भेजा जाएगा।

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