लोकसभा चुनाव: सियासत के कोल्हू पर गन्ना तय करेगा जीत की मिठास या नोटा से बिगड़ेगा खेल?-Navbharat Times

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लोकसभा चुनाव: सियासत के कोल्हू पर गन्ना तय करेगा जीत की मिठास या नोटा से बिगड़ेगा खेल? via NavbharatTimes LokSabhaElections2019 ElectionsWithTimes

मेरठ 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर सियासी गहमागहमी के बीच गन्ने की फसल का मुद्दा एक बार फिर सियासत के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के बाद बीएसपी प्रमुख मायावती ने ट्वीट कर इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ बीजेपी को घेरा है। जाहिर है कि वेस्ट यूपी में अपने खोए गौरव को वापस पाने की चाहत में बीएसपी कोई भी मुद्दा छोड़ना नहीं चाहती है। ऐसे में अब साफ है कि पश्चिम यूपी में चुनावों में गन्ने का मुद्दा अहम रहना तय है। उधर, राजनीतिक पार्टियों की मुश्किलें इसलिए भी बढ़ सकती हैं कि इस मुद्दे पर किसान लगभग सभी से नाराज हैं और किसान नेता 'नोटा' का समर्थन कर रहे हैं। दरअसल, गन्ने का कोई भी मुद्दा वेस्ट यूपी के किसानों के लिए भावनात्मक जुड़ाव रखता है। यही वजह है कि मामले की सियासी गरमाहट देखते हुए यूपी सरकार ने इस मसले पर त्वरित रूप से जवाब दिया। योगी सरकार की दलील इस मसले पर गन्ना राज्यमंत्री सुरेश राणा का कहना है कि पिछले साल और मौजूदा सत्र का 58 हजार करोड़ रुपये का भुगतान सरकार कर चुकी है। राणा ने बताया कि 2015-16 में 18 हजार करोड़ रुपये और 2017-18 में 35 हजार करोड़ रुपये की गन्ना खरीद हुई थी। उन्होंने कहा कि एसपी-बीएसपी सरकारों ने अपने शासनकाल में गन्ना किसानों के लिए कुछ नहीं किया, आज वे लोग कोरी बयानबाजी कर रहे हैं। हर योजना के केंद्र में गन्ना लखनऊ हो या दिल्ली, सत्ता पर काबिज होने के लिए सभी राजनीति दल वेस्ट यूपी में गन्ना किसानों को केंद्रित कर अपनी राजनीतिक योजनाएं बनाते हैं। पिछले साल गन्ना भुगतान मसले पर भारतीय किसान यूनियन ने बड़ा आंदोलन किया था। उधर, कैराना में हुए उपचुनाव में आरएलडी ने 'जिन्ना नहीं गन्ना' का नारा दिया और उनको यह सीट मिल भी गई। फिर उठा गन्ना भुगतान का मामला अब इस बार लोकसभा चुनाव में गन्ना भुगतान मसले को विपक्ष ने एक बार फिर धार देनी शुरू कर दी है। वहीं भारतीय किसान यूनियन के राष्टीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि सरकार किसी की भी रही हो, गन्ना किसान को समय से भुगतान कभी भी नहीं हो पाता है। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि गन्ना भुगतान को डिजिटल इंडिया कैंपेन से जोड़ दिया जाना चाहिए, किसान के खाते में सीधा पैसा पहुंच जाए। टिकैत ने कहा कि यहां हर किसान की अपनी राय है कि वह किसे वोट देगा। उन्होंने साफ किया कि यूनियन की इसमें कोई भूमिका नहीं है। वेस्ट यूपी के ये हैं हालात सरकार का दावा है कि मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद और बरेली जोन में सरकार 6 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बकाया भुगतान सरकार कर चुकी है। पैसे किसानों के खाते में पहुंच चुके हैं। वहीं, विपक्ष का दावा है कि मेरठ जिले में 700 करोड़ रुपये, शामली में 552 करोड़ रुपये, बिजनौर में 650 करोड़ रुपये, मुजफ्फरनगर में 1100 करोड़ रुपये, बागपत में 400 करोड़ रुपये और सहारनपुर में किसानों का 577 करोड़ रुपये बकाया है। यूपी में इतनी हैं चीनी मिलें: चीनी मिल निगम की- 23 सहकारी चीनी मिलें- 94 चीनी मिलें - 118.

मेरठ 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर सियासी गहमागहमी के बीच गन्ने की फसल का मुद्दा एक बार फिर सियासत के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के बाद बीएसपी प्रमुख मायावती ने ट्वीट कर इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ बीजेपी को घेरा है। जाहिर है कि वेस्ट यूपी में अपने खोए गौरव को वापस पाने की चाहत में बीएसपी कोई भी मुद्दा छोड़ना नहीं चाहती है। ऐसे में अब साफ है कि पश्चिम यूपी में चुनावों में गन्ने का मुद्दा अहम रहना तय है। उधर, राजनीतिक पार्टियों की मुश्किलें इसलिए भी बढ़ सकती हैं कि इस मुद्दे पर किसान लगभग सभी से नाराज हैं और किसान नेता 'नोटा' का समर्थन कर रहे हैं। दरअसल, गन्ने का कोई भी मुद्दा वेस्ट यूपी के किसानों के लिए भावनात्मक जुड़ाव रखता है। यही वजह है कि मामले की सियासी गरमाहट देखते हुए यूपी सरकार ने इस मसले पर त्वरित रूप से जवाब दिया। योगी सरकार की दलील इस मसले पर गन्ना राज्यमंत्री सुरेश राणा का कहना है कि पिछले साल और मौजूदा सत्र का 58 हजार करोड़ रुपये का भुगतान सरकार कर चुकी है। राणा ने बताया कि 2015-16 में 18 हजार करोड़ रुपये और 2017-18 में 35 हजार करोड़ रुपये की गन्ना खरीद हुई थी। उन्होंने कहा कि एसपी-बीएसपी सरकारों ने अपने शासनकाल में गन्ना किसानों के लिए कुछ नहीं किया, आज वे लोग कोरी बयानबाजी कर रहे हैं। हर योजना के केंद्र में गन्ना लखनऊ हो या दिल्ली, सत्ता पर काबिज होने के लिए सभी राजनीति दल वेस्ट यूपी में गन्ना किसानों को केंद्रित कर अपनी राजनीतिक योजनाएं बनाते हैं। पिछले साल गन्ना भुगतान मसले पर भारतीय किसान यूनियन ने बड़ा आंदोलन किया था। उधर, कैराना में हुए उपचुनाव में आरएलडी ने 'जिन्ना नहीं गन्ना' का नारा दिया और उनको यह सीट मिल भी गई। फिर उठा गन्ना भुगतान का मामला अब इस बार लोकसभा चुनाव में गन्ना भुगतान मसले को विपक्ष ने एक बार फिर धार देनी शुरू कर दी है। वहीं भारतीय किसान यूनियन के राष्टीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि सरकार किसी की भी रही हो, गन्ना किसान को समय से भुगतान कभी भी नहीं हो पाता है। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि गन्ना भुगतान को डिजिटल इंडिया कैंपेन से जोड़ दिया जाना चाहिए, किसान के खाते में सीधा पैसा पहुंच जाए। टिकैत ने कहा कि यहां हर किसान की अपनी राय है कि वह किसे वोट देगा। उन्होंने साफ किया कि यूनियन की इसमें कोई भूमिका नहीं है। वेस्ट यूपी के ये हैं हालात सरकार का दावा है कि मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद और बरेली जोन में सरकार 6 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बकाया भुगतान सरकार कर चुकी है। पैसे किसानों के खाते में पहुंच चुके हैं। वहीं, विपक्ष का दावा है कि मेरठ जिले में 700 करोड़ रुपये, शामली में 552 करोड़ रुपये, बिजनौर में 650 करोड़ रुपये, मुजफ्फरनगर में 1100 करोड़ रुपये, बागपत में 400 करोड़ रुपये और सहारनपुर में किसानों का 577 करोड़ रुपये बकाया है। यूपी में इतनी हैं चीनी मिलें: चीनी मिल निगम की- 23 सहकारी चीनी मिलें- 94 चीनी मिलें - 118

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