लोकसभा चुनाव: बिहार में चुनावी समर में विरासत संभालने उतरेंगे 'योद्धा' via NavbharatTimes LokSabhaElections2019 ElectionsWithNBT
पटना राजनीति में विरासत संभालने की परिपाटी कोई नई बात नहीं है। सियासी घरानों के बेटे, बेटी और पत्नी अपनों की विरासत को संभालते रहे हैं। ये दीगर बात है कि कई इसमें सफल हो पाते हैं तो कई असफल भी होते हैं। बिहार में भी इस लोकसभा चुनाव में कई चुनावी योद्धा अखाडे़ में अपनी राजनीतिक विरासत संभालते या यूं कहें अपने पूर्वजों के नाम पर वोट मांगते नजर आएंगे। कई राजनेताओं की पत्नियां पति की विरासत के लिए चुनावी समर में नजर आएंगी। वैसे, सबसे दिलचस्प पहलू है कि कई राजनीतिक दल बाहुबलियों की पत्नियों और उनके परिजनों के सहारे भी चुनावी नैया पार करने की जुगाड़ में दिख रहे हैं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने बिहार की सभी 40 सीटों में से 39 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। इन उम्मीदवारों में से कई सियासी घराने के पुत्रों में शामिल हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री जयनारायण निषाद के बेटे अजय निषाद इस चुनाव में मुजफ्फरपुर से भाग्य आजमा रहे हैं। वहीं पूर्व सांसद मदन जायसवाल के बेटे संजय जायसवाल एक बार फिर पश्चिमी चंपारण से चुनावी मैदान में हैं। बीजेपी ने मधुबनी से सांसद हुकुमदेव नारायण यादव के बेटे अशोक कुमार यादव को भी टिकट थमा दिया है। इसी तरह केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख रामविलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान जमुई से, तो उनके भाई पशुपति कुमार पारस हाजीपुर से चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं रामचंद्र पासवान समस्तीपुर से भाग्य आजमाएंगे। यहां विरासत को पत्नी का सहारा बाहुबली नेता के रूप में पहचान बना चुके सूरजभान के भाई चंदन कुमार को एलजेपी ने नवादा संसदीय क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतारने का फैसला लिया है। इसी तरह इस चुनाव में आरजेडी ने नवादा क्षेत्र से नाबालिग के साथ दुष्कर्म के मामले में सजा काट रहे विधायक राजवल्लभ यादव की पत्नी विभा देवी को टिकट थमा दिया है। वैसे, विपक्षी दलों के महागठबंधन ने अब तक 40 में से मात्र चार सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की है, मगर ऐसे कई राजनेताओं के बेटे और बेटियां हैं जो चुनाव में उतरने के लिए तैयार हैं। इन नेताओं के परिवारवाले संभाल रहे विरासत आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद भले ही कानूनी बधाओं के कारण खुद चुनाव लड़ने में सक्षम नहीं हों, लेकिन उनकी बेटी मीसा भारती पाटलिपुत्र संसदीय क्षेत्र से फिर चुनाव लड़ने को तैयार बताई जा रही हैं। इसी तरह सांसद पप्पू यादव की पत्नी और कांग्रेस सांसद रंजीता रंजन भी सुपौल से फिर मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। इसके अलावा भी कई नेताओं के रिश्तेदार टिकट के जुगाड़ में लगे हुए हैं। इस मामले में राजनीतिक पार्टियां भले ही एक-दूसरे पर आरोप लगा रही हैं, लेकिन शायद ही कोई दल ऐसा हो जिसमें विरासत संभालने वाले उम्मीदवार न हों। जेडीयू का आरजेडी पर तंज जेडीयू के प्रवक्ता नीरज कुमार कहते हैं कि विपक्षी दलों की स्थिति राजनीति में अपराधीकरण की प्रारंभ से रही है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, धन्य है सत्ता के लालची लोग। नाबालिग से दुष्कर्म के सजायाप्ता विधायक को तो पार्टी से निकाला नहीं और अब उनकी पत्नी को उम्मीदवार बना दिए। जब पार्टी के अध्यक्ष ही जेल में सजा काट रहा हो, तो उसे अपराधी और शरीफ का अंतर कहां पता होगा? .
..' 'कार्यकर्ताओं में रहता है आक्रोश' उधर, इस मसले को लेकर आरजेडी के एक नेता ने नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर कहा, विरासत के चक्कर में कार्यकर्ताओं की मेहनत पर पानी फिरता है। उन्होंने आक्रोशित होकर कहा, किसी नेता में इतना दम नहीं की वह कार्यकर्ता के बिना चुनाव लड़ सके और जीत सके। मगर जब टिकट की दावेदारी की बात आती है, तब शीर्ष नेतृत्व से लेकर राजनेताओं के बेटे, बेटी और उनकी पत्नियां भाग्यशाली हो जाती हैं। एसे में कार्यकर्ता ठगा रह जाता है।'
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