Mumbai BMC Election Results: मुंबई बीएमसी चुनावों में ठाकरे भाइयों की हार के बाद उद्धव ठाकरे के सियासी भविष्य को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। बीएमसी का गढ़ बचाने के लिए उद्धव ने कांग्रेस का साथ छोड़कर चचेरे भाई राज ठाकरे से हाथ मिलाया था लेकिन वह बीजेपी और शिंदे को सत्ता में आने से नहीं रोक पाए।...
मुंबई: महाराष्ट्र में मुंबई बीएमसी चुनाव को उद्धव ठाकरे के राजनीति भविष्य के अहम माना जा रहा था। 2026 के चुनावों में बीजेपी-शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के साथ लड़कर सबसे बड़ा सबसे बड़ा गठबंधन बनकर उभरी है, हालांकि बीजेपी बीएमसी में अकेले बहुमत हासिल नहीं कर पाई है। इसके बाद भी बीजेपी के प्रदर्शन पर मुंबई से लेकर दिल्ली तक जश्न है क्योंकि 1980 में बीजेपी का गठन होने के बाद पहली बार पार्टी का मेयर बीएमसी पर बैठेगा। मुंबई के चुनाव नतीजों पर बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व की नजर थी।2017 के चुनावों में बीजेपी ने 82 और उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने 84 सीटें जीती थीं। तब बीजेपी ने शिवसेना का समर्थन किया था, लेकिन इस बार बाजी पलट दी। अब दिलचस्पी इस बात की है कि किस बीजेपी पार्षद को पार्टी का पहला मेयर बनने का गौरव मिलेगा। बीएमसी चुनाव 1997 से 2026 तक शिवसेना का सफर चुनाव शिवसेना की सीटें 1997 103 2002 97 2007 84 2012 75 2017 84 2026 57 मनसे 9 सीट 1 सीट एनसीपी शरद 13 दिन में ही 48 वोट से बने थे सांसद, मुंबई बीएमसी चुनावों में रवींद्र वायकर काे दूसरा झटका, बेटी की सनसनीखेज हारउद्धव ठाकरे को कितना बड़ा झटका? मुंबई में जीत हासिल करने के बाद राज्य में बीजेपी के शीर्ष नेता और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि नतीजों से साफ है कि महाराष्ट्र को नरेंद्र मोदी पर भरोसा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बाला साहेब ठाकरे का आशीर्वाद उन्हें यानी बीजेपी को मिला। फडणवीस ने जीत का श्रेय पीएम मोदी और संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण के साथ मुंबई चीफ अमीत साटम को दिया। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि क्या अब उद्धव ठाकरे की राजनीति पर ब्रेक लग जाएगा? क्याेंकि बीजेपी ने वे तीन सीटें भी जीतीं जहां अन्नमलाई ने प्रचार किया था। उद्धव ठाकरे ने नतीजों पर प्रतिक्रिया नहीं दी है। राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि बीएमसी चुनाव उद्धव ठाकरे के लिए आसान नहीं थे, इसके बाद भी उनकी पार्टी ने सम्मानजनक प्रदर्शन किया है, हालांकि बीजेपी के नेता नितेश राणे ने उनका मजाक उड़ाया है तो वहीं तजिंदर सिंह बग्गा ने उद्धव, राज और आदित्य ठाकरे को रममलाई भिजवाई है। हम 10 मिनट में बंद कर सकते हैं मुंबई, फडणवीस ने संजय राउत के बयान पर कहा-खोखली धमकियों से नहीं डरतेउत्तर भारतीय वोट जरूर छिटकेनतीजों के बाद दावा किया जा रहा है कि अगर उद्धव अपने चचेरे भाई राज ठाकरे से दूर रहकर कांग्रेस के साथ लड़ते तो तस्वीर दूसरी होती। यह सिर्फ कोरी कायसबाजी है। निश्चित तौर उद्धव ठाकरे को उतने मुस्लिम वोट नहीं मिले। जितने की अपेक्षा उनकी पार्टी ने की थी। मनसे के साथ आने उत्तर भारतीय वोट भी छिटक गए। अगर इन नतीजों से उद्धव ठाकरे को झटका लगा है तो बीजेपी भी वो हासिल नहीं कर पाई जिसकी तैयारी उसने विधानसभा चुनावों के बाद ही शुरू की दी थी। विधानसभा चुनावों में प्रचंड जीत के बाद बीजेपी ने अकेले दम पर मुंबई कब्जाने की योजना बनाई थी, लेकिन ठाकरे ब्रदर्स के साथ आने के कारण उसे शिंदे को अधिक सीटें देनी पड़ीं। बीजेपी अकेले दम पर बहुमत नहीं जुटा पाई। वह बीएमसी में अपना मेयर बैठाएगी तो जरूर लेकिन शिंदे की जरूरत उसे पडेगी। खत्म नहीं हुए उद्धव ठाकरे 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद यह माना गया था कि उद्धव ठाकरे खत्म हो जाएंगे लेकिन लोकसभा चुनावों में वह 9 सांसद जिताने में सफल रहे। विधानसभ चुनावों में उनकी पार्टी एमवीए में सबसे बड़ा दल रही। पार्टी के 16 विधायक जीते। बीएमसी चुनावों में अगर उद्धव ठाकरे की पार्टी 30 सीटों के आसपास सिमट जाती तो उनकी स्थिति कमजोर हो जाती। शिंदे की बगावत के बाद ज्यादातर पार्षद शिंदे के साथ चले गए थे। ऐसे में उद्धव ठाकरे ने आदित्य और वरुण सरदेसाई द्वारा चिन्हित किए गए युवा चेहरों पर दांव खेलकर शिवसेना यूबीटी की मशाल जलाए रखी है। शिंदे ने दोगुनी हैं उद्धव की सीटें बीएमसी चुनावों के शाम छह बजे तक आए 211 रुझानों में उद्धव ठाकरे की सीटों की संख्या शिंदे की शिवसेना से डबल है। अगर शिंदे और उद्धव के साथ मनसे की सीटों को जोड़ दे तो यह संख्या 95 के पार चली जाती है। राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना यूबीटी के खाते में हार जरूर आई है लेकिन सबकुछ खत्म नहीं हुआ है। मुंबई ठाकरे ब्रांड अभी कायम है, क्यों बीजेपी से लेकर शिंदे की सेना और उद्धव ठाकरे-मनसे के घोषणापत्र पर ठाकरे ही तस्वीर थी। बीएमसी में बहुमत का अंकड़ा 114 का है। बीजेपी और शिवसेना के 125+ तक जाने की उम्मीद की जा रही है। राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि मुंबईकर ने उद्धव ठाकरे को खारिज नहीं किया बल्कि उन्हें विपक्ष की भूमिका में बैठाया है। उद्धव जितनी मजबूती से विपक्ष की भूमिका निभाएंगे? उसी पर उनका राजनीतिक भविष्य टिका हुआ है। अगर शिंदे सीटों की संख्या में उद्धव ठाकरे के करीब तक पहुंच जाते हैं तो निश्चित तौर पर उद्धव ठाकरे के लिए सिचुएशन ज्यादा तकलीफ देह हो जाती। क्योंकि 2017 के चुनावों में शिवसेना को पांच शहरों की सत्ता मिली थी।.
मुंबई: महाराष्ट्र में मुंबई बीएमसी चुनाव को उद्धव ठाकरे के राजनीति भविष्य के अहम माना जा रहा था। 2026 के चुनावों में बीजेपी-शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के साथ लड़कर सबसे बड़ा सबसे बड़ा गठबंधन बनकर उभरी है, हालांकि बीजेपी बीएमसी में अकेले बहुमत हासिल नहीं कर पाई है। इसके बाद भी बीजेपी के प्रदर्शन पर मुंबई से लेकर दिल्ली तक जश्न है क्योंकि 1980 में बीजेपी का गठन होने के बाद पहली बार पार्टी का मेयर बीएमसी पर बैठेगा। मुंबई के चुनाव नतीजों पर बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व की नजर थी।2017 के चुनावों में बीजेपी ने 82 और उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने 84 सीटें जीती थीं। तब बीजेपी ने शिवसेना का समर्थन किया था, लेकिन इस बार बाजी पलट दी। अब दिलचस्पी इस बात की है कि किस बीजेपी पार्षद को पार्टी का पहला मेयर बनने का गौरव मिलेगा। बीएमसी चुनाव 1997 से 2026 तक शिवसेना का सफर चुनाव शिवसेना की सीटें 1997 103 2002 97 2007 84 2012 75 2017 84 2026 57 मनसे 9 सीट 1 सीट एनसीपी शरद 13 दिन में ही 48 वोट से बने थे सांसद, मुंबई बीएमसी चुनावों में रवींद्र वायकर काे दूसरा झटका, बेटी की सनसनीखेज हारउद्धव ठाकरे को कितना बड़ा झटका? मुंबई में जीत हासिल करने के बाद राज्य में बीजेपी के शीर्ष नेता और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि नतीजों से साफ है कि महाराष्ट्र को नरेंद्र मोदी पर भरोसा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बाला साहेब ठाकरे का आशीर्वाद उन्हें यानी बीजेपी को मिला। फडणवीस ने जीत का श्रेय पीएम मोदी और संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण के साथ मुंबई चीफ अमीत साटम को दिया। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि क्या अब उद्धव ठाकरे की राजनीति पर ब्रेक लग जाएगा? क्याेंकि बीजेपी ने वे तीन सीटें भी जीतीं जहां अन्नमलाई ने प्रचार किया था। उद्धव ठाकरे ने नतीजों पर प्रतिक्रिया नहीं दी है। राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि बीएमसी चुनाव उद्धव ठाकरे के लिए आसान नहीं थे, इसके बाद भी उनकी पार्टी ने सम्मानजनक प्रदर्शन किया है, हालांकि बीजेपी के नेता नितेश राणे ने उनका मजाक उड़ाया है तो वहीं तजिंदर सिंह बग्गा ने उद्धव, राज और आदित्य ठाकरे को रममलाई भिजवाई है। हम 10 मिनट में बंद कर सकते हैं मुंबई, फडणवीस ने संजय राउत के बयान पर कहा-खोखली धमकियों से नहीं डरतेउत्तर भारतीय वोट जरूर छिटकेनतीजों के बाद दावा किया जा रहा है कि अगर उद्धव अपने चचेरे भाई राज ठाकरे से दूर रहकर कांग्रेस के साथ लड़ते तो तस्वीर दूसरी होती। यह सिर्फ कोरी कायसबाजी है। निश्चित तौर उद्धव ठाकरे को उतने मुस्लिम वोट नहीं मिले। जितने की अपेक्षा उनकी पार्टी ने की थी। मनसे के साथ आने उत्तर भारतीय वोट भी छिटक गए। अगर इन नतीजों से उद्धव ठाकरे को झटका लगा है तो बीजेपी भी वो हासिल नहीं कर पाई जिसकी तैयारी उसने विधानसभा चुनावों के बाद ही शुरू की दी थी। विधानसभा चुनावों में प्रचंड जीत के बाद बीजेपी ने अकेले दम पर मुंबई कब्जाने की योजना बनाई थी, लेकिन ठाकरे ब्रदर्स के साथ आने के कारण उसे शिंदे को अधिक सीटें देनी पड़ीं। बीजेपी अकेले दम पर बहुमत नहीं जुटा पाई। वह बीएमसी में अपना मेयर बैठाएगी तो जरूर लेकिन शिंदे की जरूरत उसे पडेगी। खत्म नहीं हुए उद्धव ठाकरे 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद यह माना गया था कि उद्धव ठाकरे खत्म हो जाएंगे लेकिन लोकसभा चुनावों में वह 9 सांसद जिताने में सफल रहे। विधानसभ चुनावों में उनकी पार्टी एमवीए में सबसे बड़ा दल रही। पार्टी के 16 विधायक जीते। बीएमसी चुनावों में अगर उद्धव ठाकरे की पार्टी 30 सीटों के आसपास सिमट जाती तो उनकी स्थिति कमजोर हो जाती। शिंदे की बगावत के बाद ज्यादातर पार्षद शिंदे के साथ चले गए थे। ऐसे में उद्धव ठाकरे ने आदित्य और वरुण सरदेसाई द्वारा चिन्हित किए गए युवा चेहरों पर दांव खेलकर शिवसेना यूबीटी की मशाल जलाए रखी है। शिंदे ने दोगुनी हैं उद्धव की सीटें बीएमसी चुनावों के शाम छह बजे तक आए 211 रुझानों में उद्धव ठाकरे की सीटों की संख्या शिंदे की शिवसेना से डबल है। अगर शिंदे और उद्धव के साथ मनसे की सीटों को जोड़ दे तो यह संख्या 95 के पार चली जाती है। राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना यूबीटी के खाते में हार जरूर आई है लेकिन सबकुछ खत्म नहीं हुआ है। मुंबई ठाकरे ब्रांड अभी कायम है, क्यों बीजेपी से लेकर शिंदे की सेना और उद्धव ठाकरे-मनसे के घोषणापत्र पर ठाकरे ही तस्वीर थी। बीएमसी में बहुमत का अंकड़ा 114 का है। बीजेपी और शिवसेना के 125+ तक जाने की उम्मीद की जा रही है। राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि मुंबईकर ने उद्धव ठाकरे को खारिज नहीं किया बल्कि उन्हें विपक्ष की भूमिका में बैठाया है। उद्धव जितनी मजबूती से विपक्ष की भूमिका निभाएंगे? उसी पर उनका राजनीतिक भविष्य टिका हुआ है। अगर शिंदे सीटों की संख्या में उद्धव ठाकरे के करीब तक पहुंच जाते हैं तो निश्चित तौर पर उद्धव ठाकरे के लिए सिचुएशन ज्यादा तकलीफ देह हो जाती। क्योंकि 2017 के चुनावों में शिवसेना को पांच शहरों की सत्ता मिली थी।
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