Chhattisgarh Durg Kerala Nun Conversion And Human Trafficking Case ललिता आगे बताती हैं, 'सिस्टर प्रीती मेरी ने टिकट टीटी को दिखाया था। हमें शक है कि टीटी ने ही बजरंग दल वालों को कॉल किया था। इस फोन कॉल के कुछ देर बाद ही स्टेशन पर 100-150 लोग इकट्ठा हो...
विक्टिम बोली- न झूठा वादा किया, न धर्म बदलवाया; हिंदूवादी नेता सवालों मेंनारायणपुर के रहने वाले सुखमन मंडावी अपनी बहन सुखमती के साथ सुबह करीब 5 बजे दुर्ग रेलवे स्टेशन पहुंचे। उनके साथ दो लड़कियां ललिता उसेंडी और कमलेश्वरी प्रधान भी थीं। यहीं से 10 बजे उन्हें आगरा के लिए ट्रेन पकड़नी थी। वो आगे के सफर के लिए प्लेटफॉर्म पर इंतजार ही कर रहे थे कि तभी टीटी ने टिकट मांगा। उनके पास सिर्फ प्लेटफॉर्म टिकट था। उन्होंने बताया कि स्टेशन पर उनसे दो नन वंदना फ्रांसिस और प्रीति मैरी मिलने वाली हैं। टिकट उन्हीं के पास है। वो तीनों उन्हीं के साथ आगरा जा रही हैं। वंदना और प्रीति ने स्टेशन पहुंचकर टीटी को टिकट दिखाया। ट्रेन आती उससे पहले हिंदूवादी नेता ज्योति शर्मा बजरंग दल के सदस्यों के साथ स्टेशन पहुंच गईं। वो दोनों नन पर जबरन धर्म परिवर्तन और ह्यूमन ट्रैफिकिंग का आरोप लगाकर हंगामा करने लगीं। बजरंग दल ने GRP थाने में नन समेत सुखमन मंडावी के खिलाफ धर्म परिवर्तन और ह्यूमन ट्रैफिकिंग का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई। इसके बाद सुखमन समेत दोनों नन को अरेस्ट कर लिया गया। वहीं सुखमन की बहन सुखमती और दोनों लड़कियों को सखी सेंटर भेज दिया गया। अब 2 अगस्त को NIA कोर्ट ने 50-50 हजार के मुचलके पर इन्हें जमानत दी है। हालांकि जिन लड़कियों के धर्मांतरण और ह्यूमन ट्रैफिकिंग के आरोप लगे, वे हिंदूवादी नेता और बजरंग दल पर आरोप लगा रही हैं। उनका कहना है कि वो परिवार की मर्जी से काम करने जा रही थीं, उनसे कोई झूठा वादा नहीं किया गया। उन्हें मारपीट कर बयान बदलने के लिए कहा गया। हम इस पूरे केस को समझने के लिए ग्राउंड पर पहुंचे। हमने मामले से जुड़े सभी किरदारों से उनका पक्ष जाना और ये समझने की कोशिश की आखिर ये सब क्यों और कैसे हुआ।सबसे पहले हम ललिता उसेंडी से मिले। वो उस दिन का पूरा घटनाक्रम बताते हुए कहती हैं, 'हमें काम के लिए नारायणपुर से आगरा जाना था। हम बस से दुर्ग रेलवे स्टेशन पहुंचे और वहां से हमें आगरा के लिए ट्रेन पकड़नी थी। मेरे साथ सुखमन भइया, उनकी बहन सुखमती और कमलेश्वरी थी।' 'हम नारायणपुर से 24 जुलाई की रात 9.
45 बजे की बस से दुर्ग के लिए निकले। अगले दिन सुबह करीब 5 बजे हम दुर्ग रेलवे स्टेशन पहुंच गए। आगरा के लिए ट्रेन सुबह 10 बजे की थी इसलिए हम स्टेशन पर ही इंतजार करने लगे। इसी दौरान टीटी ने हमसे टिकट मांगा। हमारे पास सिर्फ प्लेटफॉर्म टिकट था। इसलिए टीटी हमसे 250 रुपए जुर्माना मांगने लगे।' ललिता बताती हैं, 'ट्रेन का टिकट सिस्टर वंदना फ्रांसिस और प्रीति मैरी के पास था। वे दोनों हमें दुर्ग स्टेशन पर ही मिलने वाली थीं। इन्हीं के साथ हमें आगरा जाना था। दोनों सिस्टर जब स्टेशन पहुंचीं और उन्होंने टिकट दिखाया तो टीटी ने हमें छोड़ दिया। हालांकि हमारी ट्रेन आने से पहले ही किसी ने बजरंग दल वालों को कह दिया कि हमें जबरदस्ती ले जाया जा रहा है। 100 से 150 लोग स्टेशन पहुंच गए।’ ‘वो दोनों सिस्टर्स पर हमें आगरा सप्लाई करने का आरोप लगाने लगे और स्टेशन पर हंगामा खड़ा कर दिया। हमें दुर्ग स्टेशन के GRP थाने ले जाया गया। वहां लोगों ने हमारे साथ धक्का-मुक्की की। भीड़ को देखते हुए हमें GRP थाने के एक कमरे में रखा गया। इसी दौरान वहां ज्योति शर्मा नाम की महिला आई। उसने हमारे साथ बहुत बदतमीजी की।‘ नन वंदना फ्रांसिस और प्रीति मैरी की तस्वीर, जिन पर जबरन धर्मांतरण कराने और ह्यूमन ट्रैफिकिंग के आरोप लगे।ललिता आगे बताती हैं, ‘ज्योति ने पहले सबको कमरे से बाहर निकाला। फिर GRP वालों से पूछा यहां सीसीटीवी कैमरा तो नहीं लगा है? जैसे ही उसे पता चला कि वहां कैमरा नहीं है, तो उसने हमें तरह-तरह से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। उसने हमें मारा-पीटा और हमारा रेप तक करवाने की धमकी दी। हम सब बहुत डर गए थे।'हमें किसी तरह का कोई लालच नहीं दिया है, हमें आगरा के अस्पताल में सफाई और खाना बनाने का काम मिला है। हमारी बहन पहले भी सिस्टर के साथ काम कर चुकी है, लेकिन वो हमारी बात सुनने को तैयार नहीं थीं, बल्कि हमें थप्पड़ मारे जा रही थीं। ललिता बताती हैं, 'ज्योति हम पर झूठा बयान देने के लिए दबाव बना रही थीं। वो धमकाते हुए कहती कि जैसा कह रही हूं, अगर वैसा नहीं कहा तो हमारे भाई को जेल भिजवा देंगी। वो लगातार हम पर दोनों सिस्टर और सुखमन भइया के खिलाफ बोलने का दबाव बना रही थीं।' 'वो यहीं नहीं रुकी। उसने हमें जाति सूचक गालियां देते हुए कहा कि तुम लोग मेरे जूते के लायक भी नहीं हो। इसके बाद पुलिस ने बड़ी मुश्किल से ज्योति शर्मा से कमरे का दरवाजा खुलवाया और हमें बाहर निकाला। पुलिस ने हमसे एक पेपर पर साइन कराया और फोन भी जमा कर लिया। इसके बाद हम सबको अलग-अलग कर दिया गया। हम तीनों को एक कमरे में रखा, जबकि दोनों सिस्टर को अलग कमरे में रखा गया।' सुखमती, ललिता और कमलेश्वरी इस घटना के बाद से परेशान हैं। इस केस के बाद उन्हें काम भी नहीं मिला और आसपास के लोगों का बर्ताव भी बदल गया।ललिता बताती हैं कि इस घटना की जानकारी मिलते ही दुर्ग स्टेशन पर ईसाई कम्युनिटी के लोग और तमाम चर्च से लोग उनकी मदद करने पहुंचे। हमने ललिता से पूछा कि ज्योति शर्मा वायरल वीडियो में कह रही है कि आठवीं पढ़ी लड़कियां कैसे नर्स बन सकती हैं? क्या आप लोग सिर्फ आठवीं तक ही पढ़ी हो और नर्सिंग करने जा रही थी? ललिता जवाब में कहती हैं, 'मैं 10वीं तक पढ़ी हूं और मुझे खाना बनाने के लिए ही ले जाया जा रहा था। हां अगर मैं आगे पढ़ना चाहती तो मेडिकल के किसी भी फील्ड में बढ़ने की संभावना थी, लेकिन नर्सिंग का झूठा वादा करके नहीं ले जाया जा रहा था।' ‘हम पिछले 10 साल से चर्च जा रहे हैं। रविवार की प्रार्थना हमारे गांव में ही होती है। जब कुछ बड़ा कार्यक्रम होता है तो हम नारायणपुर जाते हैं। दोनों सिस्टर्स को हम लोग कई सालों से जानते हैं। हम आगरा के लिए निकलने ही वाले थे कि उससे पहले ये सब हो गया।‘ इस घटना के बाद से सुखमती, ललिता और कमलेश्वरी की जिंदगी बिल्कुल बदल गई है। ललिता बताती हैं, 'अब हमारे लिए लोगों का नजरिया एकदम बदल गया है।'इस मामले को लेकर हमने नारायणपुर क्रिश्चियन अस्पताल और स्कूल में लंबे समय से काम करने वाली एक सिस्टर से संपर्क किया। उन्हें ही केस के बारे में सबसे पहले जानकारी मिली थी। नाम न लिखने की शर्त पर उन्होंने बताया, ‘सिस्टर वंदना फ्रांसिस फिलहाल आगरा कॉन्वेंट के अंडर में आने वाले अस्पताल में काम कर रही हैं। इससे पहले 6 साल तक वे नारायणपुर में एक फॉर्मासिस्ट के तौर पर मिशन अस्पताल में काम कर रही थीं। पिछले साल ही उनका ट्रांसफर आगरा हो गया। जबकि सिस्टर प्रीति जबलपुर कॉन्वेंट से जुड़ी हुई हैं।' यहां काम करने के दौरान हमारी कई लोगों से जान-पहचान होती हैं। हमारा काम गांव-गांव लोगों तक सुविधा पहुंचाना है। हमने पहले भी कई लड़कियों को उनकी शैक्षणिक योग्यता के आधार काम पर लगाया है। इस बार भी ऐसा ही हुआ। 'आगरा और जबलपुर में महिलाओं की जरूरत थी। सिस्टर वंदना ने यहां लोकल में एक महिला से संपर्क किया, जो चर्च आती थी। उसी ने तीनों लड़कियों को काम के लिए भेजा था।' वे आगे कहती हैं, 'मामला बस इतना था कि दोनों ही सिस्टर्स दुर्ग आकर लड़कियों को काम पर ले जाने वाली थीं क्योंकि नारायणपुर से ले जाने में 6 से 7 घंटे का एक्स्ट्रा टाइम लग जाता। इसलिए उन्होंने परिजन से लड़कियों को दुर्ग स्टेशन पर ही छोड़ने की बात कही थी। लड़कियां अपने भाई के साथ दुर्ग रेलवे स्टेशन पहुंची थीं। इसी दौरान वहां बजरंग दल वाले आए और उन्होंने सिस्टर्स के साथ जो किया, वो सोशल मीडिया और खबरों में हर जगह है।'इस मामले में ललिता ने जिस ज्योति शर्मा पर मारपीट और जातिसूचक गालियां देने के आरोप लगाए, हमने उनका भी पक्ष जानने की कोशिश की। इस घटना से जुड़ा ज्योति शर्मा का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है, जो GRP थाने के अंदर का बताया जा रहा है। वीडियो में दोनों नन भी नजर आ रही हैं। वीडियो में ज्योति किसी पर चिल्लाती दिख रहीं और कह रही हैं, 'समझ में आ रहा है? बोलोगे या फिर एक मारूं?' इसके बाद वो ननों की ओर मुड़कर धमकी देती हैं, 'अगर नहीं बोलोगी तो तुम्हारा चेहरा तोड़ दूंगी, मैं तुम्हें चेतावनी दे रही हूं।' हालांकि दैनिक भास्कर इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है। दुर्ग रेलवे स्टेशन पर GRP थाने में ज्योति शर्मा के हंगामे का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें वो दोनों नन को धमकाते सुनी जा रही हैं। जब हमने ज्योति से इस बारे में बात की तो वे दोनों ननों पर ह्यूमन ट्रैफिकिंग और धर्मांतरण के रैकेट में शामिल होने का आरोप लगाती हैं। वो ये भी दावा करती हैं कि उनके बैग से एक बाइबिल, एक फोटो, एक पासबुक, एक ATM कार्ड और पादरियों के नंबरों वाली डायरी मिली है। घटना के बाद स्टेशन पर भीड़ जुटने को लेकर उन्हें वीडियो में कहते सुना जा सकता है, 'ये नंबर साबित करते हैं कि ये रैकेट है। अगर रैकेट नहीं है तो दो ननों के लिए इतनी भीड़ क्यों इकट्ठी हो रही है? जबकि वो यहां की रहने वाली भी नहीं हैं, मैं एक हिंदू संगठन से हूं इसलिए अपनी बेटी को बचाने आई हूं। ये किसे बचाने आए हैं? ज्योति बिना कैमरे पर आए आगे कहती हैं, 'हमने कोई लड़ाई-झगड़ा नहीं किया है। न हमने किसी को मारा। ये सुबह करीब 8:30 बजे की बात है। हमसे जुड़े एक व्यक्ति अपनी मां को छोड़ने दुर्ग रेलवे स्टेशन गए थे। उन्होंने स्टेशन पर एक लड़की को रोते देखा। पूछने पर पता चला कि कुछ लोग लड़की को जबरदस्ती आगरा ले जा रहे हैं। वो उनके साथ नहीं जाना चाहती थी। उन्होंने ही मुझे कॉल करके सारी बात बताई।' 'मैंने उनसे अनुरोध किया कि आप बच्ची को GRP थाने में बैठा दें। मैं वहां पहुंच रही हूं। मुझे पहुंचने पर पता चला कि एक लड़का तीनों लड़कियों को दुर्ग स्टेशन लेकर आया। इन्हें दो नन के हवाले किया। उसी बीच एक लड़की रोने लगी और घर वापस जाने की बात कहने लगी।' 'जब मैंने पूछा तो लड़की ने बताया कि उन्हें खाना बनाने और नर्सिंग के काम के लिए आगरा ले जाया जा रहा है। वो लड़कियां 10वीं पास भी नहीं हैं। उनसे नर्सिंग का कौन सा काम कराया जाएगा।' ज्योति का कहना है कि बस्ती और मोहल्लों में बने चर्चों की जांच होनी चाहिए। छत्तीसगढ़ सरकार इस पर जल्द कानून लाने जा रही है। इसके बाद धर्मांतरण पर रोक लग जाएगी।अपने ऊपर लगे आरोपों पर ज्योति कहती हैं, 'ये सब अफवाह है। थाने के अंदर कमरे की बात करें तो वहां मेरे अलावा पुलिस वाले भी मौजूद थे। मुझे पता है लोग झूठा आरोप लगाते हैं इसलिए मैं जब कमरे में घुसी, तो मैंने माइक लगाया और वीडियो बनाना शुरू कर दिया। वीडियो सोशल मीडिया पर लाइव चला है।' वो आरोप लगाते हुए कहती हैं, 'पिछले कुछ समय में छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण बहुत तेजी से फैला है। बस्तर और सरगुजा बेल्ट पूरी तरह से धर्मांतरित हो चुकी है। गांवों में छोटे-छोटे चर्च बन गए हैं। वहां के लोग कहते हैं कि हमारा धर्म नहीं बदला गया है। अगर धर्मांतरण नहीं हुआ है तो ये चर्च क्यों बने हैं?' 'मैं भिलाई में रहती हूं। यहां सेक्टर-16 में एक बड़ा चर्च है। दावा किया जाता है कि वहां कोई धर्मांतरण नहीं हो रहा, लेकिन ऐसा नहीं है। बस्ती और मोहल्लों में बने इन चर्च के अंदर धर्मांतरण होता है। इसकी जांच होनी चाहिए।'रिपोर्ट्स के मुताबिक, बस्तर और आसपास के आदिवासी इलाकों में ईसाई कम्युनिटी पर हिंसा, सामाजिक बहिष्कार और जबरन धर्म परिवर्तन के मामले बार-बार सामने आते रहे हैं। दिसंबर 2022 में तो कोंडागांव और नारायणपुर के करीब 33 गांवों में लगभग 1,000 आदिवासी ईसाइयों को उनके घरों से बेदखल कर दिया गया था। कई मामलों में धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाया गया और पीड़ित परिवारों को गांव छोड़ने पर मजबूर किया गया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि छत्तीसगढ़ में इस तरह की घटनाओं के पीछे न सिर्फ सांप्रदायिक तनाव बल्कि स्थानीय राजनीतिक समीकरण भी जिम्मेदार हैं। हमने इसे लेकर छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम के उपाध्यक्ष रत्नेश बेंजमिन से बात की। वे बताते हैं, 'छत्तीसगढ़ में हुई घटना पूरे समाज को झकझोर रही है। एक तरफ सिस्टर्स गरीब असहाय लोगों की मदद करती हैं, दूसरी तरफ बजरंग दल के लोग उन पर अटैक कर रहे हैं।' छत्तीसगढ़ में ईसाइयों की स्थिति को लेकर वे कहते हैं, ‘पुलिस के सामने ईसाइयों पर हमला किया जा रहा है। इसी केस में थाने में जो कुछ हुआ उसे सभी ने देखा। भारतीय संविधान के अनुछेद 26, 27, 28, 29, 30, 31 अल्पसंख्यकों के अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन दुर्ग में जो हुआ, वहां हमारे अधिकारों का पूरी तरह से हनन किया गया है। छत्तीसगढ़ में ईसाइयों पर हो रहे हमले का कोई सटीक डेटा तो बता पाना मुश्किल हैं, लेकिन मरने के बाद दफनाने, चर्च में तोड़फोड़ करने और पास्टर्स को मारने जैसी घटनाएं हर हफ्ते सुनने को मिलती हैं। बस्तर की स्थिति ये है कि अगर कोई ईसाई यहां बीमार पड़ जाता है तो उसे चिंता होती है कि अगर मृत्यु हो गई तो दफनाने के लिए बहुत परेशानी आएगी। आज कहां किसी ईसाई पर अटैक हो जाए, कोई नहीं जानता।'ये खबर भी पढ़ें... ‘कागज दिखाए, फिर भी पूछ रहे, बांग्लादेश से कब आए’ ‘हमारा परिवार बंगाल से दिल्ली काम करने के लिए आया, लेकिन यहां हमें परेशान किया जा रहा है। हम बंगाली बोलते हैं और मुस्लिम भी हैं। भाषा और धर्म के आधार पर हमें टारगेट किया जा रहा है। हमें बांग्लादेशी बताकर बेदखल क्यों किया जा रहा है। हम तो अपने देश में ही सुरक्षित नहीं हैं।‘ अमानुर शेख पश्चिम बंगाल के नदिया जिले से 20 साल पहले दिल्ली आ गए थे। अचानक बदले माहौल से परेशान हैं।हरियाणा में यमुना का जलस्तर 80 हजार क्यूसेक पारलंबे इतजार के बाद उदयपुर में बरसे बादलभागलपुर-6 लाख लोग बाढ़ में घिरे,CM ने किया हवाई सर्वेआगरा में सुबह से छाए बादल, रुक-रुक हो रही बारिशजींद में बारिश से जलभराव, PHOTOS
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