रक्षा मंत्रालय की कल होने वाली DAC बैठक में 114 राफेल लड़ाकू विमानों, P8i एयरक्राफ्ट और स्कैल्प मिसाइलों जैसे अहम सौदों को मंजूरी मिल सकती है. वायुसेना वर्तमान में 42 के मुकाबले मात्र 29 स्क्वाड्रन के साथ स्क्वाड्रन क्रंच झेल रही है. राफेल के आने से पहले से मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रेनिंग इकोसिस्टम का लाभ मिलेगा.
आकाश सिंह. Defence Acquisition Council Update: भारतीय आकाश की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय कल एक निर्णायक बैठक करने जा रहा है. रक्षा खरीद परिषद की इस बैठक में 114 मल्टी-रोल लड़ाकू विमान ों सहित कई महत्वपूर्ण सैन्य सौदों को AoN यानी ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ मिलने की संभावना है.
वायुसेना वर्तमान में लड़ाकू विमानों की भारी कमी से जूझ रही है, जिसे दूर करने के लिए राफेल को सबसे मजबूत विकल्प के रूप में देखा जा रहा है. कल होने वाली इस उच्च स्तरीय बैठक में न केवल 114 राफेल विमानों, बल्कि ‘हाई एल्टीट्यूड स्यूडो सैटेलाइट्स’ , स्कैल्प क्रूज मिसाइल और P8i विमानों जैसे महत्वपूर्ण रक्षा सौदों पर भी चर्चा होगी. वायुसेना के पास वर्तमान में लड़ाकू विमानों के केवल 29 स्क्वाड्रन हैं जबकि स्वीकृत क्षमता 42 होनी चाहिए. रिटायर होते पुराने विमानों और धीमी इंडक्शन प्रक्रिया ने देश की रक्षा तैयारियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. विमान प्रकार स्क्वाड्रन संख्या SU-30 MKI 13 राफेल 2 जगुआर 6 मिराज 2000 3 MiG-29 3 LCA तेजस 2 राफेल ही वायुसेना की पहली पसंद क्यों? रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय वायुसेना पहले से ही राफेल का संचालन कर रही है. ऐसे में नए 114 विमानों के लिए अलग से ट्रेनिंग सेंटर या भारी रखरखाव इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं होगी. राफेल एक कॉम्बैट प्रोवन पैकेज है जो लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मीटियर मिसाइल और गहरे हमले के लिए स्कैल्प क्रूज मिसाइल से लैस है. इसके अलावा, इस सौदे में ‘टेक्नोलॉजी ट्रांसफर’ और स्थानीय उत्पादन का क्लॉज भी शामिल होने की उम्मीद है जिससे भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ मुहिम को बल मिलेगा. राफेल के साथ वायुसेना को भारतीय हथियारों और सेंसर को एकीकृत करने की सुविधा भी मिलती है जो इसे एक कम जोखिम वाला और उच्च क्षमता वाला विकल्प बनाती है. 5 महत्वपूर्ण सवाल DAC की बैठक में कौन से प्रमुख रक्षा सौदों पर फैसला हो सकता है? बैठक में 114 राफेल लड़ाकू विमान, हाई एल्टीट्यूड स्यूडो सैटेलाइट्स , स्कैल्प क्रूज मिसाइल, P8i एयरक्राफ्ट और मरीन इंजन प्रोग्राम पर चर्चा होनी है. भारतीय वायुसेना में लड़ाकू विमानों की कितनी कमी है? वायुसेना को सुरक्षा मानकों के अनुसार 42 स्क्वाड्रन की आवश्यकता है लेकिन वर्तमान में केवल 29 स्क्वाड्रन ही उपलब्ध हैं. राफेल विमानों की नई खरीद से क्या फायदा होगा? चूंकि IAF पहले से राफेल उड़ा रही है इसलिए रखरखाव, ट्रेनिंग और हथियारों की सप्लाई लाइन पहले से तैयार है, जिससे इन्हें जल्दी सेना में शामिल किया जा सकेगा. तेजस Mk-1A के आने के बाद भी कमी क्यों बनी हुई है? पुराने विमानों के रिटायर होने की रफ्तार नए विमानों के शामिल होने की रफ्तार से अधिक है, जिसके कारण स्क्वाड्रन गैप बना हुआ है. स्कैल्प मिसाइल की क्या विशेषता है? यह एक लंबी दूरी की ‘डीप स्ट्राइक’ क्रूज मिसाइल है जो दुश्मन के इलाके में घुसकर महत्वपूर्ण ठिकानों को सटीक तरीके से नष्ट करने की क्षमता रखती है.
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