उत्तम विश्व संदेश: अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को फोन पर बात की और यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए वार्ता शुरू होने की घोषणा की। हालांकि, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की को इस बातचीत से पहले सम्मिलित नहीं किया गया, जिससे यूक्रेन और यूरोपीय देश आश्चर्यचकित हैं। ट्रंप की यूक्रेन नीति बाइडन सरकार की नीति से भिन्न है, और यूरोपीय देशों का मानना है कि यूक्रेन के लिए शांति समझौते पर बातचीत में शामिल होना आवश्यक है। ट्रंप के रक्षा सचिव ने कहा है कि रूस द्वारा हासिल किए गए क्षेत्रों को यूक्रेन को वापस करने की उम्मीद 'अवास्तविक' है, जिससे यूक्रेन के लिए और चिंताएं बढ़ गई हैं।
नई दिल्ली: तीन दिन पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बात की। इसके बाद ट्रंप ने ऐलान किया कि यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए वार्ता जल्द शुरू होगी। लेकिन इसमें एक पेच था। पेच यह कि पुतिन से किन बिंदुओं पर बात होगी, इसके बारे में ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से चर्चा नहीं की थी।जेलेंस्की से धोखा : यह बात इसलिए भी चौंकाने वाली थी क्योंकि पिछले दिसंबर में ही ट्रंप और जेलेंस्की की मुलाकात हुई थी। खैर, पुतिन से फोन वार्ता के बाद ट्रंप ने जेलेंस्की से भी बात की, लेकिन यूक्रेन पूरे प्रकरण से इसलिए हैरान था क्योंकि बाइडन सरकार के वक्त युद्ध पर अमेरिका की जो नीति थी, ट्रंप के दौर में वह बिल्कुल बदल गई। बाइडन सरकार की नीति थी, 'यूक्रेन पर अगर कोई बातचीत होगी तो उसमें वह भी शामिल होगा।' लेकिन ट्रंप ने पहले पुतिन से बात की और फिर जेलेंस्की से चर्चा।शांति की कीमत : ट्रंप-पुतिन की बातचीत से ऐन पहले जेलेंस्की ने कहा था, 'अगर यूक्रेन युद्ध पर रूस और अमेरिका बात करें तो अमेरिका को सही सूचनाएं नहीं मिलेंगी।' यानी अगर सही बात ही नहीं पहुंचेगी तो सही फैसला कैसे होगा। असल में, शांति की इच्छा पुतिन और जेलेंस्की दोनों जाहिर करते रहे हैं। लेकिन शांति किस कीमत पर होनी चाहिए, इसे लेकर दोनों की राय अलग है। पुतिन चाहते हैं कि यूक्रेन के जिन इलाकों पर उनका कब्जा हो चुका है, वे वापस न लिए जाएं। जेलेंस्की चाहते हैं कि रूस वे इलाके यूक्रेन को वापस करे।वजूद की लड़ाई : पुतिन की मुश्किल यह है कि अगर वह जीते गए इलाके वापस करते हैं तो एक तरह से युद्ध में उनकी हार मानी जाएगी और इससे उनकी साख कमजोर होगी। जेलेंस्की अगर यूक्रेन के इलाके वापस लिए बगैर युद्ध रोकते हैं तो उनके लिए अपना राजनीतिक वजूद बचाए रखना मुश्किल हो जाएगा। वैसे, भी उनका आधिकारिक कार्यकाल पहले ही खत्म हो चुका है। फिलहाल, युद्ध की वजह से वहां चुनाव नहीं हो पा रहे हैं।यूरोपीय देशों का रुख : ट्रंप के सत्ता में आने से पहले इस लड़ाई में यूक्रेन के साथ जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देश भी खड़े थे। यूरोपीय देश चाहते हैं कि अगर अमेरिका युद्ध रुकवाने के लिए रूस से कोई बातचीत करता है तो उन्हें भी उसका हिस्सा बनाया जाना चाहिए। इन देशों का मानना है कि वार्ता में जो भी हल निकले, उसमें यूक्रेन को मजबूत स्थिति में होना चाहिए। अगर ट्रंप की चली तो शायद ही ऐसा हो।यूक्रेन के लिए बुरी खबरें : इसके संकेत भी मिल रहे हैं। ट्रंप के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ का कहना है कि 2014 और 2022 में जो इलाके रूस ने हासिल किए हैं, अगर यूक्रेन उन्हें वापस हासिल करने की उम्मीद कर रहा है तो वह आशा 'अवास्तविक ' है। यही नहीं, यूक्रेन के लिए और भी बुरी खबरें हैं। उसे नैटो में शामिल नहीं किया जाएगा। दूसरी ओर, अगर कोई शांति समझौता रूस और यूक्रेन के बीच होता है तो उस पर अमल के लिए अमेरिका वहां फौज भी नहीं भेजेगा। अगर यूरोपीय देश अपनी तरफ से यूक्रेन में फौज भेजते हैं तो उनकी सुरक्षा का दायित्व नैटो पर नहीं होगा। ट्रंप सरकार की इन बातों से अगर कोई सबसे खुश होगा तो वह हैं पुतिन।लोकतंत्र को झटका : जब बाइडन राष्ट्रपति थे, तब यूक्रेन को अमेरिका और यूरोपीय देशों की ओर से दी जा रही मदद लोकतंत्र को बचाने की जंग थी। उन्हें इस बात का अहसास था कि अगर पुतिन की मनमानी को नहीं रोका गया तो वह विस्तारवादी नीतियों पर आगे बढ़ते रहेंगे। पुतिन के बारे में माना जाता रहा है कि सोवियत संघ के दौर के साम्राज्यवाद को वह फिर से स्थापित करना चाहते हैं। 2014 में उन्होंने यूक्रेन से क्राइमिया को छीना था। 2022 के युद्ध में भी पुतिन यूक्रेन के कई क्षेत्रों पर कब्जा करने में कामयाब रहे हैं। यूक्रेन के सहयोगी यूरोपीय देश चाहते हैं कि युद्ध खत्म करवाने की एवज में रूसी राष्ट्रपति से भी रियायतें हासिल करनी चाहिए। युद्ध पुतिन की शर्तों पर खत्म नहीं करना चाहिए। यह न सिर्फ दुनिया में लोकतंत्र के लिए झटका होगा बल्कि इससे दूसरी ताकतों को मनमानी करने का मौका मिलेगा।विस्तारवादी लीडर्स : इसके संकेत भी पहले से दिख रहे हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद इस बात की आशंका बढ़ी हुई है कि चीन भी ताइवान को अपने में मिलाने के लिए जंग छेड़ सकता है। हाल ही में शी चिनफिंग ने कहा कि ताइवान मसले को वह आने वाली पीढ़ियों की खातिर नहीं छोड़ना चाहते यानी वह अपने कार्यकाल में उसका विलय चीन में करना चाहते हैं। लेकिन पहले जहां ऐसी विस्तारवादी नीतियों की बातें सिर्फ पुतिन और चिनफिंग कर रहे थे, वहीं राष्ट्रपति पद संभालने के बाद ट्रंप ने भी ऐसे संकेत दिए। पहले तो उन्होंने कनाडा को अमेरिका का 51वां सूबा बनाने की बात कही। फिर ग्रीनलैंड को खरीदने की। उसके बाद गाजा को फलस्तीनियों से खाली करवाने की। ट्रंप ऊटपटांग बातें करके भले अपने समर्थकों को खुश करने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन सच यह है कि इसकी कीमत समूची दुनिया को चुकानी पड़ेगी।.
नई दिल्ली: तीन दिन पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बात की। इसके बाद ट्रंप ने ऐलान किया कि यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए वार्ता जल्द शुरू होगी। लेकिन इसमें एक पेच था। पेच यह कि पुतिन से किन बिंदुओं पर बात होगी, इसके बारे में ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से चर्चा नहीं की थी।जेलेंस्की से धोखा : यह बात इसलिए भी चौंकाने वाली थी क्योंकि पिछले दिसंबर में ही ट्रंप और जेलेंस्की की मुलाकात हुई थी। खैर, पुतिन से फोन वार्ता के बाद ट्रंप ने जेलेंस्की से भी बात की, लेकिन यूक्रेन पूरे प्रकरण से इसलिए हैरान था क्योंकि बाइडन सरकार के वक्त युद्ध पर अमेरिका की जो नीति थी, ट्रंप के दौर में वह बिल्कुल बदल गई। बाइडन सरकार की नीति थी, 'यूक्रेन पर अगर कोई बातचीत होगी तो उसमें वह भी शामिल होगा।' लेकिन ट्रंप ने पहले पुतिन से बात की और फिर जेलेंस्की से चर्चा।शांति की कीमत : ट्रंप-पुतिन की बातचीत से ऐन पहले जेलेंस्की ने कहा था, 'अगर यूक्रेन युद्ध पर रूस और अमेरिका बात करें तो अमेरिका को सही सूचनाएं नहीं मिलेंगी।' यानी अगर सही बात ही नहीं पहुंचेगी तो सही फैसला कैसे होगा। असल में, शांति की इच्छा पुतिन और जेलेंस्की दोनों जाहिर करते रहे हैं। लेकिन शांति किस कीमत पर होनी चाहिए, इसे लेकर दोनों की राय अलग है। पुतिन चाहते हैं कि यूक्रेन के जिन इलाकों पर उनका कब्जा हो चुका है, वे वापस न लिए जाएं। जेलेंस्की चाहते हैं कि रूस वे इलाके यूक्रेन को वापस करे।वजूद की लड़ाई : पुतिन की मुश्किल यह है कि अगर वह जीते गए इलाके वापस करते हैं तो एक तरह से युद्ध में उनकी हार मानी जाएगी और इससे उनकी साख कमजोर होगी। जेलेंस्की अगर यूक्रेन के इलाके वापस लिए बगैर युद्ध रोकते हैं तो उनके लिए अपना राजनीतिक वजूद बचाए रखना मुश्किल हो जाएगा। वैसे, भी उनका आधिकारिक कार्यकाल पहले ही खत्म हो चुका है। फिलहाल, युद्ध की वजह से वहां चुनाव नहीं हो पा रहे हैं।यूरोपीय देशों का रुख : ट्रंप के सत्ता में आने से पहले इस लड़ाई में यूक्रेन के साथ जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देश भी खड़े थे। यूरोपीय देश चाहते हैं कि अगर अमेरिका युद्ध रुकवाने के लिए रूस से कोई बातचीत करता है तो उन्हें भी उसका हिस्सा बनाया जाना चाहिए। इन देशों का मानना है कि वार्ता में जो भी हल निकले, उसमें यूक्रेन को मजबूत स्थिति में होना चाहिए। अगर ट्रंप की चली तो शायद ही ऐसा हो।यूक्रेन के लिए बुरी खबरें : इसके संकेत भी मिल रहे हैं। ट्रंप के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ का कहना है कि 2014 और 2022 में जो इलाके रूस ने हासिल किए हैं, अगर यूक्रेन उन्हें वापस हासिल करने की उम्मीद कर रहा है तो वह आशा 'अवास्तविक ' है। यही नहीं, यूक्रेन के लिए और भी बुरी खबरें हैं। उसे नैटो में शामिल नहीं किया जाएगा। दूसरी ओर, अगर कोई शांति समझौता रूस और यूक्रेन के बीच होता है तो उस पर अमल के लिए अमेरिका वहां फौज भी नहीं भेजेगा। अगर यूरोपीय देश अपनी तरफ से यूक्रेन में फौज भेजते हैं तो उनकी सुरक्षा का दायित्व नैटो पर नहीं होगा। ट्रंप सरकार की इन बातों से अगर कोई सबसे खुश होगा तो वह हैं पुतिन।लोकतंत्र को झटका : जब बाइडन राष्ट्रपति थे, तब यूक्रेन को अमेरिका और यूरोपीय देशों की ओर से दी जा रही मदद लोकतंत्र को बचाने की जंग थी। उन्हें इस बात का अहसास था कि अगर पुतिन की मनमानी को नहीं रोका गया तो वह विस्तारवादी नीतियों पर आगे बढ़ते रहेंगे। पुतिन के बारे में माना जाता रहा है कि सोवियत संघ के दौर के साम्राज्यवाद को वह फिर से स्थापित करना चाहते हैं। 2014 में उन्होंने यूक्रेन से क्राइमिया को छीना था। 2022 के युद्ध में भी पुतिन यूक्रेन के कई क्षेत्रों पर कब्जा करने में कामयाब रहे हैं। यूक्रेन के सहयोगी यूरोपीय देश चाहते हैं कि युद्ध खत्म करवाने की एवज में रूसी राष्ट्रपति से भी रियायतें हासिल करनी चाहिए। युद्ध पुतिन की शर्तों पर खत्म नहीं करना चाहिए। यह न सिर्फ दुनिया में लोकतंत्र के लिए झटका होगा बल्कि इससे दूसरी ताकतों को मनमानी करने का मौका मिलेगा।विस्तारवादी लीडर्स : इसके संकेत भी पहले से दिख रहे हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद इस बात की आशंका बढ़ी हुई है कि चीन भी ताइवान को अपने में मिलाने के लिए जंग छेड़ सकता है। हाल ही में शी चिनफिंग ने कहा कि ताइवान मसले को वह आने वाली पीढ़ियों की खातिर नहीं छोड़ना चाहते यानी वह अपने कार्यकाल में उसका विलय चीन में करना चाहते हैं। लेकिन पहले जहां ऐसी विस्तारवादी नीतियों की बातें सिर्फ पुतिन और चिनफिंग कर रहे थे, वहीं राष्ट्रपति पद संभालने के बाद ट्रंप ने भी ऐसे संकेत दिए। पहले तो उन्होंने कनाडा को अमेरिका का 51वां सूबा बनाने की बात कही। फिर ग्रीनलैंड को खरीदने की। उसके बाद गाजा को फलस्तीनियों से खाली करवाने की। ट्रंप ऊटपटांग बातें करके भले अपने समर्थकों को खुश करने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन सच यह है कि इसकी कीमत समूची दुनिया को चुकानी पड़ेगी।
YUKRAINE WAR TRUMP PUTIN NATO EUROPEAN UNION
United States Latest News, United States Headlines
Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.
जर्मनी ट्रंप के दूसरे कार्यकाल से चिंतितजर्मनी के राजदूत के एक गोपनीय संदेश से पता चला है कि ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने से जर्मनी में कई तरह की चिंताएं हैं, खासकर नाटो, व्यापार, जलवायु परिवर्तन और यूरोप की सुरक्षा को लेकर. जर्मनी की सरकार ट्रंप के कारण होने वाले व्यापारिक तनाव, जलवायु समझौते से अमेरिका के बाहर होने और रूस पर प्रतिबंध हटने की आशंका से चिंतित है.
Read more »
पुतिन ने ट्रंप को खुश करने के लिए यूक्रेन पर क्या कहा?व्लादिमीर पुतिन ने दावा किया कि अगर डोनाल्ड ट्रंप 2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति बने रहते, तो यूक्रेन संकट से बचा जा सकता था। उन्होंने 2020 के चुनाव को “चोरी” करार देते हुए ट्रंप के दावे को दोहराया कि यूक्रेन युद्ध उनके समय में शुरू नहीं होता। ट्रंप ने कहा कि पुतिन को एक समझौता करना चाहिए और रूस के साथ शांति की वार्ता को आगे बढ़ाना चाहिए। ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की से बातचीत के प्रस्तावों का उल्लेख किया।
Read more »
जेलेंस्की अमेरिकी सैन्य सहायता पर केंद्रित, ट्रंप के रूख ने किया अनिश्चितयूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका ने यूक्रेन को सैन्य सहायता देना बंद नहीं किया है, लेकिन मानवीय सहायता के बारे में स्पष्टीकरण नहीं दिया। ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद विदेशी सहायता अनुदान रोका जा सकता है, जो यूक्रेन के लिए एक चिंता का विषय है। जेलेंस्की ने कहा कि वे युद्ध समाप्ति के लिए पुतिन के साथ समझौता कर सकते हैं, लेकिन ट्रंप के रूख से यूक्रेन को मिल रही अमेरिकी सहायता का भविष्य अनिश्चित हो गया है।
Read more »
छिड़ी टैरिफ वॉर, चीन की अमेरिका को टिट फॉर टैट, 10 पर्सेंट के जवाब में लगाया 15 पर्सेंट टैक्सराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका कनाडा, मेक्सिको और चीन पर टैरिफ लगाने की घोषणा करने के बाद 'निश्चित रूप से' यूरोपीय संघ (ईयू) पर भी टैरिफ लगाएगा.
Read more »
ट्रंप यूक्रेन से दुर्लभ मृदा खनिज मांग रहे हैंअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन से अमेरिका की मदद के बदले में दुर्लभ मृदा खनिजों की मांग की है.
Read more »
जेलेंस्की, ट्रंप से युद्ध-समाधान के लिए सुरक्षा गारंटी की मांगयूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने यूक्रेन-रूस युद्ध को समाप्त करने के लिए 'सुरक्षा गारंटी' की मांग की है। उन्होंने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात के दौरान कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत केवल तभी होगी जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक सामान्य योजना पर चर्चा हो जाएगी। ट्रंप ने जेलेंस्की की मांग स्वीकार की है और युद्ध समाप्त करने के लिए खुद को महत्वपूर्ण भूमिका में देखते हैं। जेडी वेंस ने यूरोपीय अधिकारियों को स्वतंत्र भाषण और अवैध प्रवास पर ध्यान केंद्रित करते हुए चेतावनी दी है।
Read more »
