जूता-तमाचा कांड से पहले सांसद शरद त्रिपाठी के रास्ते में क्यों कूदे विधायक बघेल?- Amarujala

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जूता-तमाचा कांड से पहले सांसद शरद त्रिपाठी के रास्ते में क्यों कूदे विधायक बघेल? UttarPradesh

बघेल का कहना है कि इसमें क्या बुराई थी। मोटरसाइकिल रैली में सांसद उनके पीछे बैठे थे और वह मोटर साइकिल चला रहे थे। राजनीति में दोनों एक दूसरे को काफी दिन से जानते हैं, इसमें अलग से बैठकर बात करने में क्या हर्ज था?राकेश सिंह बघेल का कहना है कि शरद त्रिपाठी ने कहा चुप रहिए, आप जैसे 50 विधायक हमने निकाल दिए हैं। बघेल को यह खल गया। उनका कहना है कि एक तो पहली बार 2014 में वह सांसद बने। इसके पहले कभी विधायक भी नहीं रहे। विधानभा चुनाव 2017 में वह अपने संसदीय क्षेत्र को समय ही नहीं दिए, फिर विधायक कहां से पैदा करने लगे। जबकि शरद त्रिपाठी के अनुसार विधायक को अधिकारी से बातचीत के दौरान बीच में आने की जरूरत ही नहीं थी।बघेल का कहना है कि शरद त्रिपाठी के बारे में जानना हो तो उनके संसदीय क्षेत्र के पांचों विधायकों से पूछिए। वह बता देंगे कि उस दिन क्या हुआ था और वह या सांसद जी कैसे आदमी हैं? पुराने विधायक श्रीराम चौहान या विधायक जय चौबे से पूछ लीजिए। बघेल का आरोप है कि सांसद बनने के बाद शरद त्रिपाठी पांचों विधानसभा क्षेत्र में न के बराबर गए। जबकि वह बराबर अपने विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हैं। विधानसभा नहीं चलती तो वह बमुश्किल लखनऊ जाते हैं। अपने क्षेत्र में ही रहते हैं। बघेल का दावा है कि यदि वह अपने विकास कार्य का लेखा-जोखा रख देंगे तो लोग दांतो तले अंगुली दबा देंगे।बघेल ने इस दावे को खारिज कर दिया कि वह संत कबीर नगर से लोकसभा चुनाव लड़ने या शरद त्रिपाठी का टिकट कटवाने की कोशिश में हैं। उन्होंने कहा कि यदि वह लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते तो किसी से तो कहते? पार्टी के किसी बड़े नेता से चर्चा करते और टिकट पाने का प्रयास करते? बघेल ने कहा कि न तो उन्होंने ऐसी कोई कोशिश की और न ही वह किसी से मिले। शरद त्रिपाठी सफाई में केवल इतना कह रहे हैं कि जो उन्हें कहना था पार्टी के फोरम में कह चुके हैं।विधायक और सांसद जी को अपने-अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता सता रही है। कार्रवाई का डर भी है। दोनों को इसकी आशंका है कि मीडिया में इतने बड़े पैमाने पर खबर प्रसारित होने के बाद शीर्ष स्तर तक मामला फैल गया है। दोनों नेता मानकर चल रहे हैं कि शुक्रवार को हुई भाजपा की संसदीय बोर्ड की बैठक में भी यह मामला उठा होगा? इस मामले में प्रदेश में लगातार चुनाव तैयारियों और संगठन की मजबूती के लिए सक्रिय सुनील बंसल से भी बात हो चुकी है। दोनों नेताओं को पश्चाताप भी है और अपनी नाक ऊंची रखने की चिंता भी। सबकुछ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और उन्हें केन्द्रीय नेता से मिले निर्देश पर ही निर्भर करेगा। लिहाजा दोनों समय की बाट जोह रहे हैं। संत कबीर नगर के सांसद शरद त्रिपाठी और विधायक राकेश सिंह बघेल के बीच में जूताकांड की असली वजह विधायक का बीच में हस्तक्षेप करना है। शरद त्रिपाठी का कहना है कि उन्होंने जैसे ही समीक्षा बैठक के दौरान इंजीनियर से पूछना शुरू किया, विधायक बघेल बीच में कूद पड़े। इसके बाद सांसद विधायक में संक्षिप्त कहासुनी के बाद जूता-तमाचा कांड हो गया।विधायक बघेल का कहना है कि आप पूरा वीडियो देख लीजिए। शुरू से शरद त्रिपाठी का रुख देख लीजिए हमें कहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आगे कुरेदने पर विधायक राकेश सिंह बघेल का कहना है कि हर चीज का एक वातावरण, समय और माहौल होता है। जो सांसद शरद त्रिपाठी उस समय कह रहे थे, उसका सही समय नहीं था। बघेल का कहना है कि स्थिति इस तरह की पैदा हो गई कि उन्हें बीच में हस्तक्षेप करना पड़ा। बघेल का कहना है कि इसमें क्या बुराई थी। मोटरसाइकिल रैली में सांसद उनके पीछे बैठे थे और वह मोटर साइकिल चला रहे थे। राजनीति में दोनों एक दूसरे को काफी दिन से जानते हैं, इसमें अलग से बैठकर बात करने में क्या हर्ज था?राकेश सिंह बघेल का कहना है कि शरद त्रिपाठी ने कहा चुप रहिए, आप जैसे 50 विधायक हमने निकाल दिए हैं। बघेल को यह खल गया। उनका कहना है कि एक तो पहली बार 2014 में वह सांसद बने। इसके पहले कभी विधायक भी नहीं रहे। विधानभा चुनाव 2017 में वह अपने संसदीय क्षेत्र को समय ही नहीं दिए, फिर विधायक कहां से पैदा करने लगे। जबकि शरद त्रिपाठी के अनुसार विधायक को अधिकारी से बातचीत के दौरान बीच में आने की जरूरत ही नहीं थी।बघेल का कहना है कि शरद त्रिपाठी के बारे में जानना हो तो उनके संसदीय क्षेत्र के पांचों विधायकों से पूछिए। वह बता देंगे कि उस दिन क्या हुआ था और वह या सांसद जी कैसे आदमी हैं? पुराने विधायक श्रीराम चौहान या विधायक जय चौबे से पूछ लीजिए। बघेल का आरोप है कि सांसद बनने के बाद शरद त्रिपाठी पांचों विधानसभा क्षेत्र में न के बराबर गए। जबकि वह बराबर अपने विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हैं। विधानसभा नहीं चलती तो वह बमुश्किल लखनऊ जाते हैं। अपने क्षेत्र में ही रहते हैं। बघेल का दावा है कि यदि वह अपने विकास कार्य का लेखा-जोखा रख देंगे तो लोग दांतो तले अंगुली दबा देंगे।बघेल ने इस दावे को खारिज कर दिया कि वह संत कबीर नगर से लोकसभा चुनाव लड़ने या शरद त्रिपाठी का टिकट कटवाने की कोशिश में हैं। उन्होंने कहा कि यदि वह लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते तो किसी से तो कहते? पार्टी के किसी बड़े नेता से चर्चा करते और टिकट पाने का प्रयास करते? बघेल ने कहा कि न तो उन्होंने ऐसी कोई कोशिश की और न ही वह किसी से मिले। शरद त्रिपाठी सफाई में केवल इतना कह रहे हैं कि जो उन्हें कहना था पार्टी के फोरम में कह चुके हैं।विधायक और सांसद जी को अपने-अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता सता रही है। कार्रवाई का डर भी है। दोनों को इसकी आशंका है कि मीडिया में इतने बड़े पैमाने पर खबर प्रसारित होने के बाद शीर्ष स्तर तक मामला फैल गया है। दोनों नेता मानकर चल रहे हैं कि शुक्रवार को हुई भाजपा की संसदीय बोर्ड की बैठक में भी यह मामला उठा होगा? इस मामले में प्रदेश में लगातार चुनाव तैयारियों और संगठन की मजबूती के लिए सक्रिय सुनील बंसल से भी बात हो चुकी है। दोनों नेताओं को पश्चाताप भी है और अपनी नाक ऊंची रखने की चिंता भी। सबकुछ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और उन्हें केन्द्रीय नेता से मिले निर्देश पर ही निर्भर करेगा। लिहाजा दोनों समय की बाट जोह रहे हैं।.

बघेल का कहना है कि इसमें क्या बुराई थी। मोटरसाइकिल रैली में सांसद उनके पीछे बैठे थे और वह मोटर साइकिल चला रहे थे। राजनीति में दोनों एक दूसरे को काफी दिन से जानते हैं, इसमें अलग से बैठकर बात करने में क्या हर्ज था?राकेश सिंह बघेल का कहना है कि शरद त्रिपाठी ने कहा चुप रहिए, आप जैसे 50 विधायक हमने निकाल दिए हैं। बघेल को यह खल गया। उनका कहना है कि एक तो पहली बार 2014 में वह सांसद बने। इसके पहले कभी विधायक भी नहीं रहे। विधानभा चुनाव 2017 में वह अपने संसदीय क्षेत्र को समय ही नहीं दिए, फिर विधायक कहां से पैदा करने लगे। जबकि शरद त्रिपाठी के अनुसार विधायक को अधिकारी से बातचीत के दौरान बीच में आने की जरूरत ही नहीं थी।बघेल का कहना है कि शरद त्रिपाठी के बारे में जानना हो तो उनके संसदीय क्षेत्र के पांचों विधायकों से पूछिए। वह बता देंगे कि उस दिन क्या हुआ था और वह या सांसद जी कैसे आदमी हैं? पुराने विधायक श्रीराम चौहान या विधायक जय चौबे से पूछ लीजिए। बघेल का आरोप है कि सांसद बनने के बाद शरद त्रिपाठी पांचों विधानसभा क्षेत्र में न के बराबर गए। जबकि वह बराबर अपने विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हैं। विधानसभा नहीं चलती तो वह बमुश्किल लखनऊ जाते हैं। अपने क्षेत्र में ही रहते हैं। बघेल का दावा है कि यदि वह अपने विकास कार्य का लेखा-जोखा रख देंगे तो लोग दांतो तले अंगुली दबा देंगे।बघेल ने इस दावे को खारिज कर दिया कि वह संत कबीर नगर से लोकसभा चुनाव लड़ने या शरद त्रिपाठी का टिकट कटवाने की कोशिश में हैं। उन्होंने कहा कि यदि वह लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते तो किसी से तो कहते? पार्टी के किसी बड़े नेता से चर्चा करते और टिकट पाने का प्रयास करते? बघेल ने कहा कि न तो उन्होंने ऐसी कोई कोशिश की और न ही वह किसी से मिले। शरद त्रिपाठी सफाई में केवल इतना कह रहे हैं कि जो उन्हें कहना था पार्टी के फोरम में कह चुके हैं।विधायक और सांसद जी को अपने-अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता सता रही है। कार्रवाई का डर भी है। दोनों को इसकी आशंका है कि मीडिया में इतने बड़े पैमाने पर खबर प्रसारित होने के बाद शीर्ष स्तर तक मामला फैल गया है। दोनों नेता मानकर चल रहे हैं कि शुक्रवार को हुई भाजपा की संसदीय बोर्ड की बैठक में भी यह मामला उठा होगा? इस मामले में प्रदेश में लगातार चुनाव तैयारियों और संगठन की मजबूती के लिए सक्रिय सुनील बंसल से भी बात हो चुकी है। दोनों नेताओं को पश्चाताप भी है और अपनी नाक ऊंची रखने की चिंता भी। सबकुछ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और उन्हें केन्द्रीय नेता से मिले निर्देश पर ही निर्भर करेगा। लिहाजा दोनों समय की बाट जोह रहे हैं। संत कबीर नगर के सांसद शरद त्रिपाठी और विधायक राकेश सिंह बघेल के बीच में जूताकांड की असली वजह विधायक का बीच में हस्तक्षेप करना है। शरद त्रिपाठी का कहना है कि उन्होंने जैसे ही समीक्षा बैठक के दौरान इंजीनियर से पूछना शुरू किया, विधायक बघेल बीच में कूद पड़े। इसके बाद सांसद विधायक में संक्षिप्त कहासुनी के बाद जूता-तमाचा कांड हो गया।विधायक बघेल का कहना है कि आप पूरा वीडियो देख लीजिए। शुरू से शरद त्रिपाठी का रुख देख लीजिए हमें कहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आगे कुरेदने पर विधायक राकेश सिंह बघेल का कहना है कि हर चीज का एक वातावरण, समय और माहौल होता है। जो सांसद शरद त्रिपाठी उस समय कह रहे थे, उसका सही समय नहीं था। बघेल का कहना है कि स्थिति इस तरह की पैदा हो गई कि उन्हें बीच में हस्तक्षेप करना पड़ा। बघेल का कहना है कि इसमें क्या बुराई थी। मोटरसाइकिल रैली में सांसद उनके पीछे बैठे थे और वह मोटर साइकिल चला रहे थे। राजनीति में दोनों एक दूसरे को काफी दिन से जानते हैं, इसमें अलग से बैठकर बात करने में क्या हर्ज था?राकेश सिंह बघेल का कहना है कि शरद त्रिपाठी ने कहा चुप रहिए, आप जैसे 50 विधायक हमने निकाल दिए हैं। बघेल को यह खल गया। उनका कहना है कि एक तो पहली बार 2014 में वह सांसद बने। इसके पहले कभी विधायक भी नहीं रहे। विधानभा चुनाव 2017 में वह अपने संसदीय क्षेत्र को समय ही नहीं दिए, फिर विधायक कहां से पैदा करने लगे। जबकि शरद त्रिपाठी के अनुसार विधायक को अधिकारी से बातचीत के दौरान बीच में आने की जरूरत ही नहीं थी।बघेल का कहना है कि शरद त्रिपाठी के बारे में जानना हो तो उनके संसदीय क्षेत्र के पांचों विधायकों से पूछिए। वह बता देंगे कि उस दिन क्या हुआ था और वह या सांसद जी कैसे आदमी हैं? पुराने विधायक श्रीराम चौहान या विधायक जय चौबे से पूछ लीजिए। बघेल का आरोप है कि सांसद बनने के बाद शरद त्रिपाठी पांचों विधानसभा क्षेत्र में न के बराबर गए। जबकि वह बराबर अपने विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हैं। विधानसभा नहीं चलती तो वह बमुश्किल लखनऊ जाते हैं। अपने क्षेत्र में ही रहते हैं। बघेल का दावा है कि यदि वह अपने विकास कार्य का लेखा-जोखा रख देंगे तो लोग दांतो तले अंगुली दबा देंगे।बघेल ने इस दावे को खारिज कर दिया कि वह संत कबीर नगर से लोकसभा चुनाव लड़ने या शरद त्रिपाठी का टिकट कटवाने की कोशिश में हैं। उन्होंने कहा कि यदि वह लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते तो किसी से तो कहते? पार्टी के किसी बड़े नेता से चर्चा करते और टिकट पाने का प्रयास करते? बघेल ने कहा कि न तो उन्होंने ऐसी कोई कोशिश की और न ही वह किसी से मिले। शरद त्रिपाठी सफाई में केवल इतना कह रहे हैं कि जो उन्हें कहना था पार्टी के फोरम में कह चुके हैं।विधायक और सांसद जी को अपने-अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता सता रही है। कार्रवाई का डर भी है। दोनों को इसकी आशंका है कि मीडिया में इतने बड़े पैमाने पर खबर प्रसारित होने के बाद शीर्ष स्तर तक मामला फैल गया है। दोनों नेता मानकर चल रहे हैं कि शुक्रवार को हुई भाजपा की संसदीय बोर्ड की बैठक में भी यह मामला उठा होगा? इस मामले में प्रदेश में लगातार चुनाव तैयारियों और संगठन की मजबूती के लिए सक्रिय सुनील बंसल से भी बात हो चुकी है। दोनों नेताओं को पश्चाताप भी है और अपनी नाक ऊंची रखने की चिंता भी। सबकुछ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और उन्हें केन्द्रीय नेता से मिले निर्देश पर ही निर्भर करेगा। लिहाजा दोनों समय की बाट जोह रहे हैं।

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