भारतीय बैंकिंग इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में एक पंजाब नेशनल बैंक के 11,333 करोड़ रुपए के स्कैम ने बैंकिंग सिस्टम की चूलें हिला दी थीं
पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के आरोपी हीरा कारोबारी नीरव मोदी को लंदन में गिरफ्तार कर लिया गया है.पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के आरोपी हीरा कारोबारी नीरव मोदी को लंदन में गिरफ्तार कर लिया गया है. बताया जा रहा है कि भारत के दबाव में ब्रिटेन ये कार्रवाई की है.
शाम साढ़े तीन बजे लंदन की कोर्ट में उसे पेश किया जाएगा. सीबीआई नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के लिए लगातार कोशिश में लगी हुई है.भारतीय बैंकिंग इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में एक पंजाब नेशनल बैंक के 11,333 करोड़ रुपए के स्कैम ने बैंकिंग सिस्टम की चूलें हिला दी थीं. हैरतअंगेज करने वाली बात यह है कि ये फर्जी ट्रांजैक्शंस पिछले 7 साल से चल रहे थे और देश के इस दूसरे सबसे बड़े पीएसयू बैंक को इसकी भनक तक नहीं लगी. इस घोटाले की जद में अन्य बैंक भी आने लगे. कम से कम तीन भारतीय बैंकों- प्राइवेट सेक्टर के एक्सिस बैंक और सरकारी क्षेत्र के इलाहाबाद बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की विदेशी शाखाओं के इस फ्रॉड में शामिल होने की बात सामने आई.पूरे घोटाले की जड़ में लेटर ऑफ अंडरटेकिंग है. यह एक तरह की गारंटी होती है, जिसके आधार पर दूसरे बैंक अकाउंट होल्डर को पैसा देते हैं. अब यदि खातेदार डिफॉल्ट कर जाता है तो एलओयू मुहैया कराने वाले बैंक की यह जिम्मेदारी होती है कि वह संबंधित बैंक को बकाए का भुगतान करे. पीएनबी के मामले में संदिग्ध फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से हुए.सामान्य तौर पर बैंकों के बीच इस तरह के लेनदेन के लिए एक तरह की आपसी सहमति होती है. और अगर एक बैंक इस तरह का लेटर ऑफ अंडरटेकिंग जारी करता है तो दूसरा बैंक उसका सम्मान करते हुए ट्रेडर्स या बायर्स को इतने का क्रेडिट उपलब्ध कराता है.चूंकि भारत के इन बैंकों की विदेशी शाखाओं के संबंध वहां ऑपरेट कर रही ज्वैलरी कंपनियों के आउटलेट्स से होते हैं, ऐसे में इन आउटलेट्स ने बैंक कर्मियों की मिलीभगत से इस अंडरटेकिंग का जरूरत से काफी अधिक फायदा उठा लिया. इसके अलावा, पीएनबी कर्मियों द्वारा फर्जी अंडरटेकिंग भी जारी की गई, जो इस घोटाले का मूल कारण है.इन ज्वैलरी कंपनियों के विदेशी ठिकानों जैसे- हांगकांग, दुबई और न्यूयॉर्क आदि में दुकानें हैं. ये दुकानें एलओयू के आधार पर बायर्स क्रेडिट का लाभ 2010 से ही लेती रही हैं. लेकिन मामला तब गड़बड़ा गया जब पिछले 25 जनवरी को की जाने वाली पेमेंट नहीं हो पाई.सूत्रों के अनुसार, पीएनबी के अधिकारी ज्वैलर्स से इस फेसिलिटी और अतिरिक्त रकम के एवज में 10 फीसदी अतिरिक्त भी लेते थे. चूंकि ज्वैलर्स ऐसा करने में अब सक्षम नहीं थे, ऐसे में पूरी फर्जीवाड़ा सामने आ गई. चूंकि पीएनबी ने जारी एलओयू के एवज में पैसे देने से इंकार कर दिया, ऐसे में अन्य बैंकों में एक ने मामले को हांग कांग मॉनेटरी अथॉरिटी को रिपोर्ट कर दी, जो लोकल रेगुलेटर है. इसी तरह इस बैंक ने आरबीआई को भी इसकी जानकारी दे दी.इस स्कैम की शुरुआत डायमंड कंपनियों- गीतांजलि जेम्स, गिली इंडिया, नक्षत्र और नीरव मोदी ग्रुप की कंपनियों के रफ डायमंड के आयात के लिए लेटर ऑफ क्रेडिट या लेटर ऑफ अंडरटेकिंग जारी करने के मामले में पीएनबी से संपर्क साधने के साथ हुई. लेटर ऑफ क्रेडिट की शर्तों के अनुसार, ज्वैलरी डिजाइनर मोदी की कंपनियों की ओर से PNB विदेशी सप्लायर्स को खास अवधि के लिए पेमेंट करता था और बाद में यह पैसा मोदी से वसूला जाता था. आम तौर पर इसकी अवधि तीन महीने की होती है. एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट मार्केट में यह व्यवस्था सामान्य है. इसमें अगर क्लाइंट लेटर ऑफ क्रेडिट की अवधि के अंत में किसी कारणवश पैसा नहीं दे पाता है तो उसके भुगतान की अवधि बढ़ा दी जाती है. यह स्थानीय बैंक की ओर से दिए गए लेटर ऑफ अंडरटेकिंग के आधार पर किया जाता है. इस मामले में नीरव मोदी प्रमुख क्लाएंट हैं और यह स्थानीय बैंक पीएनबी है.जारी किए गए फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग: पंजाब नेशनल बैंक के अधिकारियों-कर्मियों ने इन मामलों में जाली लेटर ऑफ अंडरटेकिंग जारी किए थे. इनके आधार पर एक्सिस बैंक और इलाहाबाद बैंक सहित कुछ भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं ने बैंक को डॉलर में लोन दिए थे. डॉलर में दिए गए इस लोन का यूज बैंक के नॉस्ट्रो अकाउंट्स की फंडिंग के लिए किया गया. इन अकाउंट्स से फंड को विदेशों में कुछ कंपनियों के पास भेजा गया. नॉस्ट्रो अकाउंट किसी भारतीय बैंक का किसी विदेशी बैंक में खाता होता है. इस मामले में यह भारतीय बैंक पीएनबी है. पीएनबी कर्मियों और अधिकारियों ने फर्जी लेटर ऑफ क्रेडिट के आधार पर स्विफ्ट नेटवर्क का गलत यूज किया. इसके एक्सिस और इलाहाबाद बैंक को फंड की जरूरत वाले मेसेज भेजने के लिए किया.इसमें पंजाब नैशनल बैंक के दो कर्मचारियों ने व्यवस्था की कमी का फायदा उठाकर बैंक को बड़ा नुकसान पहुंचाया. फंड हासिल करने और रकम को पीएनबी से बाहर भेजने के लिए इन कर्मचारियों ने 'स्विफ्ट' का इस्तेमाल किया और रोजाना की बैंकिंग ट्रांजैक्शंस को प्रॉसेस करने वाले कोर बैंकिंग सिस्टम को चकमा दे दिया. 'स्विफ्ट' ग्लोबल फाइनेंशियल मेसेजिंग सर्विस है, जिसका इस्तेमाल प्रत्येक घंटे लाखों डॉलर को भेजने के लिए किया जाता है.घोटाला सामने आने के बाद से महज दो दिनों में उसके शेयर 17 फीसदी तक टूट चुके हैं, जिससे निवेशकों के 6840 करोड़ रुपए डूब गए हैं. इस घोटाले की राशि पीएनबी के लगभग 36000 करोड़ रुपए के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन का लगभग एक-तिहाई है
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