पर्यटन मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में वर्ष 2023 में 1.89 करोड़ अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया। उस साल पर्यटन के माध्यम से विदेशी मुद्रा आय बढ़कर 2.
डॉ. जयंतीलाल भंडारी। कश्मीर की सबसे खूबसूरत वादियों में से एक पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले ने जम्मू-कश्मीर में पर्यटन क्षेत्र को भी करारा झटका दिया है। इसके साथ ही पर्यटन से जुड़े लाखों कश्मीरियों के जीवन में घोर निराशा घर कर गई है। जम्मू-कश्मीर में लगभग पांच लाख लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से पर्यटन उद्योग-कारोबार में रोजगार मिला हुआ है। इनमें से अधिकांश के लिए टैक्सी सर्विस, होटल, गाइड, हस्तशिल्प और पर्यटन से जुड़ी गतिविधियां जीविका का साधन हैं। इस आतंकी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में रिकार्ड तोड़ती पर्यटकों की संख्या कम होते हुए दिखाई दे रही है। बड़ी संख्या में पर्यटक अपनी होटल एवं फ्लाइट बुकिंग कैंसिल करा रहे हैं। इसका सीधा असर वहां के पर्यटन उद्योग-कारोबार और स्थानीय लोगों की आय पर दिखाई दे रहा है। गौरतलब है कि पिछली सदी के अंतिम दशक में जब जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद चरम पर था, जब कश्मीरी हिंदू घाटी छोड़कर जा रहे थे, तब कश्मीर में पर्यटकों की संख्या नगण्य हो गई थी, लेकिन अनुच्छेद 370 और 35ए हटाए जाने और विधानसभा चुनाव के बाद माहौल सुरक्षित होने के बाद प्रदेश में देश-विदेश के पर्यटकों के कदम तेजी से बढ़ने लगे थे। पर्यटन की ताकत के दम पर राज्य की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ने लगी थी। वित्त वर्ष 2024-25 में जम्मू-कश्मीर की विकास दर सात प्रतिशत से अधिक रही। उसका सकल घरेलू उत्पाद करीब 2.
65 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहां के लोगों की प्रति व्यक्ति आय भी करीब 11 प्रतिशत बढ़कर डेढ़ लाख रुपये से अधिक हो गई है। इस कारण बेरोजगारी दर भी घटी है। यदि हम जम्मू-कश्मीर में पहुंचे पर्यटकों की संख्या देखें तो यह वर्ष 2020 में करीब 34 लाख थी। वर्ष 2023 में वहां 2.11 करोड़ पर्यटक पहुंचे थे। यह संख्या वर्ष 2024 में बढ़कर 2.36 करोड़ पहुंच गई, जो एक रिकार्ड है। इस समय प्रदेश के पर्यटन उद्योग का आकार लगभग 12 हजार करोड़ रुपये का है। आर्थिक गतिविधियों के दायरे में वृद्धि होने से जम्मू-कश्मीर की आर्थिकी में सेवा क्षेत्र का योगदान करीब 61 प्रतिशत हो गया है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह करीब 55 प्रतिशत ही है। राज्य के गैर कर राजस्व में पर्यटन क्षेत्र की हिस्सेदारी तेजी से बढ़कर 25 प्रतिशत से अधिक हो गई है, लेकिन अब इस आतंकी हमले ने पर्यटन कारोबार को संकट में डाल दिया है। वर्ष 2019 में पुलवामा में हुए आतंकी हमले के कारण भी जम्मू-कश्मीर में पर्यटन को बड़ा झटका लगा था और पर्यटकों की संख्या घटकर आधी रह गई थी। पर्यटन कश्मीर की आर्थिक शक्ति है, जबकि एक दशक पहले कश्मीर की आर्थिकी में केंद्र सरकार द्वारा दिए गए संसाधनों की अधिक भूमिका थी। हालांकि जम्मू-कश्मीर के अधिकांश लोग जीवन निर्वाह के लिए परंपरागत कृषि कार्य में संलग्न दिखते हैं। कश्मीरी लोग चावल, मक्का, गेहूं, जौ, दलहन, तिलहन तथा तंबाकू आदि उत्पादित करते हैं। साथ ही बड़े-बड़े बागों में सेब, नाशपाती, आडू, शहतूत, अखरोट और बादाम उगाए जाते हैं, लेकिन इन सबकी उत्पादकता बहुत कम है। अनुच्छेद-370 हटाए जाने के बाद पिछले पांच वर्षों में जम्मू-कश्मीर में पर्यटकों के बढ़ने से राज्य की आर्थिकी में सुधार होने लगा था। इससे कश्मीर के हस्तशिल्प और छोटे उद्योगों का विकास दिखाई देने लगा था। इसका फायदा यहां के लोगों को सीधे तौर पर रोजगार के अवसर के रूप में मिलने लगा था। ऐसे में कश्मीर से अपने घर को छोड़कर दूसरे राज्यों में नौकरी के लिए जाने वाले युवाओं की संख्या में कमी आने लगी थी। कश्मीरी लोगों के जीवनस्तर में सुधार होने लगा था। नया निवेश आने से बुनियादी ढांचे, शिक्षा तथा स्वास्थ्य सुविधाओं में इजाफा होने के साथ आर्थिक-सामाजिक खुशहाली बढ़ने लगी थी, लेकिन पहलगाम में आतंकी हमला कश्मीर के पर्यटन उद्योग की रीढ़ तोड़ते हुए दिखाई दे रहा है। साफ है कि आतंकियों ने कश्मीरी लोगों की आर्थिकी पर भी करारा आघात किया है। विश्व यात्रा एवं पर्यटन परिषद के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था का लगभग सात प्रतिशत हिस्सा पर्यटन क्षेत्र से आता है। भारत में पर्यटन उद्योग का आकार वर्ष 2024 में लगभग 256 अरब डालर रहा। पर्यटन उद्योग करीब 4.5 करोड़ लोगों को रोजगार देता है। तेजी से बढ़ता भारत का पर्यटन उद्योग अगले 10 वर्षों में 523 अरब डालर का हो सकता है। भारत दुनिया के खूबसूरत और अद्भुत देशों में से एक है। भारत अपने बेजोड़ पर्यटन स्थलों के दम पर दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित करने की संभावनाएं रखता है। सदियों से पर्यटक और आगंतुक इसके स्थलों की ओर आकर्षित होते रहे हैं। पर्यटन मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में वर्ष 2023 में 1.89 करोड़ अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया। उस साल पर्यटन के माध्यम से विदेशी मुद्रा आय बढ़कर 2.32 लाख करोड़ रुपये हो गई थी। घरेलू पर्यटक भी देश के विभिन्न पर्यटन स्थलों पर गए। इसके बावजूद भारत में पर्यटन उद्योग अभी बहुत पीछे है। पर्यटकों का खर्च स्थानीय अर्थव्यवस्था में पुनः निवेश का काम करता है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से रोजगार और पर्यटन से जुड़े विभिन्न उद्योग-कारोबार भी बढ़ते हैं। उम्मीद है कि मोदी सरकार कुछ ऐसे कदम उठाएगी, जिससे पहलगाम आतंकी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर सहित पूरे देश में पर्यटन पर छाए निराशा के बादल छंटेंगे।
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