Delhi: 1947 के भारत-पाक बंटवारे में बिछड़ गए थे दो भाई, 72 साल बाद गुरुद्वारे में ऐसे हुई मुलाकात, जानें पूरा मामला
Delhi: 1947 के भारत-पाक बंटवारे में बिछड़ गए थे दो भाई, 72 साल बाद गुरुद्वारे में ऐसे हुई मुलाकात, जानें पूरा मामला जनसत्ता ऑनलाइन March 6, 2019 7:00 PM 1947 के इंडिया-पाक बंटवारे के बाद बिछड़े दो भाई फोटो सोर्सः फाइनेंशियल एक्सप्रेस 1947 में भारत – पाकिस्तान बंटवारे के दौरान बिछड़े दो चचेरे भाई मंगलवार को दिल्ली में मिले। बता दें कि दोनों भाइयों की मुलाकात 72 साल बाद दिल्ली के रकाबगंज गुरुद्वारे में हुई। चचेरे भाइयों का नाम अमीर सिंह और दलबीर सिंह है। भारत-पाक के बंटवारे के दौरान अमीर की उम्र महज 4 साल की थी और दलबीर 9 साल के थे। बंटवारे में अलग हो गए थे दोनों भाई: 1947 के भारत-पाक बंटवारे में बिछड़े भाई पाकिस्तान के गुजरनवाला के घड़िया कालन गांव में एक हवेली में रहते थे। बंटवारे के समय दोनों भाई एक -दूसरे से अलग हो गए। उस वक्त अमीर अपनी मां के साथ भारत आ गए। उस वक्त अमीर अपने भाई दलबीर से मिल नहीं सके क्योंकि उस समय दलबीर अपने ननिहाल गए हुए थे। हालांकि दोनों ही भाई इस बात से बेखबर थे कि बंटवारे के बाद दोनों भारत में ही रह रहे हैं। बंटवारे के बाद ऐसी बदली जिंदगीः बंटवारे के बाद भारत आने पर अमीर हरियाणा के पानीपत में रहने लगे वहीं दलबीर करनाल में। अपने भाई से मिलने की उम्मीद छोड़ दलबीर सिंह भारतीय सेना में भर्ती हो गए। पर अमीर ने दलबीर की खोज को जारी रखा। अमीर को परिवार के कुछ लोगो से पता चला कि दलबीर संगरूर में रह रहे है। अपने भाई को ढूंढते हुए जब अमीर संगरूर पहुंचे तो उन्हें पता चला कि अब दलबीर सेना में भर्ती हो चुके हैं और अब वह संगरूर में नहीं रहते। काफी साल बीत गए क्योंकि उस समय इंटरनेट की सुविधा तो थी नहीं जिसकी मदद से अमीर अपने बड़े भाई दलबीर को सोशल मीडिया पर ढूंढ पाते। अमीर को दलबीर की चाची से केवल इतनी जानकारी थी कि दलबीर अब दिल्ली में रहने लगे हैं। इस दौरान अमीर उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर में बस गए और खेती-बाड़ी का काम देखने लगे वहीं सेना से रिटायर्ड दलबीर ने नोएडा में अपना स्पिरिचुअल क्लीनिक खोल लिया। 2014 में गए थे पाकिस्तानः हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक2014 में, आमिर पाकिस्तान का वीजा प्राप्त करने में सफल रहे और गुजरनवाला में अपने गांव गए। जहां पर लोगों ने उनका खुलकर स्वागत किया। अमीर ने बताया कि वहां उन्होंने अपनी जमीन के सारे रिकॉर्ड निकाले। इससे उन्हें अपने भाई दलबीर का पता चला। अमीर ने बताया कि मैं जानता था कि मेरा भाई जिंदा है मुझे बस उसे ढूढंना था। Also Read वेवसाइट की ली मददः इसी दौरान अमीर को 1947 के बिछड़े लोगों को मिलाने संबंधी वेबसाइट का पता चला। अमीर ने वेबसाइट वालों के साथ एक वीडियो इंटरव्यू रिकॉर्ड किया। उन्हें उम्मीद थी कि शायद उनका यह इंटरव्यू उनके भाई तक पहुंच जाए। आखिर में अमीर की मेहनत रंग लाई। अमीर के चाची के पोते अमनदीप संधू ने उनसे संपर्क किया। अमीर ने बताया कि जब उन्होंने दलबीर से फोन पर बात की तो वह अपने आंसुओं को रोक नही पाए। 72 साल बाद मिलेः दिल्ली के रकाबगंज गुरुद्वारे में 72 साल के बाद मंगलवार 5 मार्च को मिलने पर दोनों भाइयों की आंखे नम थी। सात दशक बाद दोनों भाई एक-दूसरे से मिल रहे थे। Hindi News से जुड़े अपडेट और व्यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App.
Delhi: 1947 के भारत-पाक बंटवारे में बिछड़ गए थे दो भाई, 72 साल बाद गुरुद्वारे में ऐसे हुई मुलाकात, जानें पूरा मामला जनसत्ता ऑनलाइन March 6, 2019 7:00 PM 1947 के इंडिया-पाक बंटवारे के बाद बिछड़े दो भाई फोटो सोर्सः फाइनेंशियल एक्सप्रेस 1947 में भारत – पाकिस्तान बंटवारे के दौरान बिछड़े दो चचेरे भाई मंगलवार को दिल्ली में मिले। बता दें कि दोनों भाइयों की मुलाकात 72 साल बाद दिल्ली के रकाबगंज गुरुद्वारे में हुई। चचेरे भाइयों का नाम अमीर सिंह और दलबीर सिंह है। भारत-पाक के बंटवारे के दौरान अमीर की उम्र महज 4 साल की थी और दलबीर 9 साल के थे। बंटवारे में अलग हो गए थे दोनों भाई: 1947 के भारत-पाक बंटवारे में बिछड़े भाई पाकिस्तान के गुजरनवाला के घड़िया कालन गांव में एक हवेली में रहते थे। बंटवारे के समय दोनों भाई एक -दूसरे से अलग हो गए। उस वक्त अमीर अपनी मां के साथ भारत आ गए। उस वक्त अमीर अपने भाई दलबीर से मिल नहीं सके क्योंकि उस समय दलबीर अपने ननिहाल गए हुए थे। हालांकि दोनों ही भाई इस बात से बेखबर थे कि बंटवारे के बाद दोनों भारत में ही रह रहे हैं। बंटवारे के बाद ऐसी बदली जिंदगीः बंटवारे के बाद भारत आने पर अमीर हरियाणा के पानीपत में रहने लगे वहीं दलबीर करनाल में। अपने भाई से मिलने की उम्मीद छोड़ दलबीर सिंह भारतीय सेना में भर्ती हो गए। पर अमीर ने दलबीर की खोज को जारी रखा। अमीर को परिवार के कुछ लोगो से पता चला कि दलबीर संगरूर में रह रहे है। अपने भाई को ढूंढते हुए जब अमीर संगरूर पहुंचे तो उन्हें पता चला कि अब दलबीर सेना में भर्ती हो चुके हैं और अब वह संगरूर में नहीं रहते। काफी साल बीत गए क्योंकि उस समय इंटरनेट की सुविधा तो थी नहीं जिसकी मदद से अमीर अपने बड़े भाई दलबीर को सोशल मीडिया पर ढूंढ पाते। अमीर को दलबीर की चाची से केवल इतनी जानकारी थी कि दलबीर अब दिल्ली में रहने लगे हैं। इस दौरान अमीर उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर में बस गए और खेती-बाड़ी का काम देखने लगे वहीं सेना से रिटायर्ड दलबीर ने नोएडा में अपना स्पिरिचुअल क्लीनिक खोल लिया। 2014 में गए थे पाकिस्तानः हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक2014 में, आमिर पाकिस्तान का वीजा प्राप्त करने में सफल रहे और गुजरनवाला में अपने गांव गए। जहां पर लोगों ने उनका खुलकर स्वागत किया। अमीर ने बताया कि वहां उन्होंने अपनी जमीन के सारे रिकॉर्ड निकाले। इससे उन्हें अपने भाई दलबीर का पता चला। अमीर ने बताया कि मैं जानता था कि मेरा भाई जिंदा है मुझे बस उसे ढूढंना था। Also Read वेवसाइट की ली मददः इसी दौरान अमीर को 1947 के बिछड़े लोगों को मिलाने संबंधी वेबसाइट का पता चला। अमीर ने वेबसाइट वालों के साथ एक वीडियो इंटरव्यू रिकॉर्ड किया। उन्हें उम्मीद थी कि शायद उनका यह इंटरव्यू उनके भाई तक पहुंच जाए। आखिर में अमीर की मेहनत रंग लाई। अमीर के चाची के पोते अमनदीप संधू ने उनसे संपर्क किया। अमीर ने बताया कि जब उन्होंने दलबीर से फोन पर बात की तो वह अपने आंसुओं को रोक नही पाए। 72 साल बाद मिलेः दिल्ली के रकाबगंज गुरुद्वारे में 72 साल के बाद मंगलवार 5 मार्च को मिलने पर दोनों भाइयों की आंखे नम थी। सात दशक बाद दोनों भाई एक-दूसरे से मिल रहे थे। Hindi News से जुड़े अपडेट और व्यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App
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