SC: बेटी के पिता को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का इंतजार, कहा- मामला जीत-हार का नहीं, बेटी के बचपन को बचाने का

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SC: बेटी के पिता को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का इंतजार, कहा- मामला जीत-हार का नहीं, बेटी के बचपन को बचाने का
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कर्नाटक की एक बच्ची की कस्टडी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सुनवाई की है। इस सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मां को बच्ची की कस्टडी दे दी है। साथ

इस फैसले को मां ने कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी। हालांकि, हाईकोर्ट ने 2023 में दिए गए निर्णय में नाबालिग बच्ची की कस्टडी पिता के पास ही रखने के पारिवारिक अदालत के फैसले को बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने कहा कि महिला ने अपने दूसरे रिश्ते को ज्यादा तवज्जो दी और बच्ची को नजरअंदाज किया। सुप्रीम कोर्ट में कैसे पहुंचा मामला? हाईकोर्ट के फैसले के बाद मां की तरफ से बच्ची के पिता के खिलाफ पॉक्सो के तहत मामला दायर किया गया। पिता का आरोप है कि बच्ची की मां ने उनके और उनके परिवार के खिलाफ पुलिस में 15 झूठी शिकायतें और छह एफआईआर दर्ज कराईं। पिता का कहना है कि सभी शिकायतें जांच में झूठी पाई गईं। उनका आरोप है कि कोर्ट-निर्देशित मुलाकात के दौरान बच्ची की मां ने उन पर हमला भी किया, जिसके CCTV सबूत उनके पास हैं। अपने खिलाफ दर्ज पॉक्सो के मुकदमों के बाद पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या हैं निर्देश? हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता पिता और प्रतिवादी मां का पक्ष सुना। इसके अलावा बच्ची से भी बात की। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने बच्ची की कस्टडी फिलहाल मां के हवाले कर दी है। साथ ही पॉक्सो के तहत चल रहे मामलों पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस मामले में अब छह महीने बाद सुनवाई होगी। पिता ने क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद पिता ने कहा, ''यह जीत-हार का मामला नहीं है। यह मेरी बेटी का बचपन वापस दिलाने का मामला है। ऐसा बचपन जो डर, भ्रम और अदालत के चक्करों से घिरा न हो। मैं बस चाहता हूं कि वह शांति से बड़ी हो सके।''.

इस फैसले को मां ने कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी। हालांकि, हाईकोर्ट ने 2023 में दिए गए निर्णय में नाबालिग बच्ची की कस्टडी पिता के पास ही रखने के पारिवारिक अदालत के फैसले को बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने कहा कि महिला ने अपने दूसरे रिश्ते को ज्यादा तवज्जो दी और बच्ची को नजरअंदाज किया। सुप्रीम कोर्ट में कैसे पहुंचा मामला? हाईकोर्ट के फैसले के बाद मां की तरफ से बच्ची के पिता के खिलाफ पॉक्सो के तहत मामला दायर किया गया। पिता का आरोप है कि बच्ची की मां ने उनके और उनके परिवार के खिलाफ पुलिस में 15 झूठी शिकायतें और छह एफआईआर दर्ज कराईं। पिता का कहना है कि सभी शिकायतें जांच में झूठी पाई गईं। उनका आरोप है कि कोर्ट-निर्देशित मुलाकात के दौरान बच्ची की मां ने उन पर हमला भी किया, जिसके CCTV सबूत उनके पास हैं। अपने खिलाफ दर्ज पॉक्सो के मुकदमों के बाद पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या हैं निर्देश? हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता पिता और प्रतिवादी मां का पक्ष सुना। इसके अलावा बच्ची से भी बात की। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने बच्ची की कस्टडी फिलहाल मां के हवाले कर दी है। साथ ही पॉक्सो के तहत चल रहे मामलों पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस मामले में अब छह महीने बाद सुनवाई होगी। पिता ने क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद पिता ने कहा, ''यह जीत-हार का मामला नहीं है। यह मेरी बेटी का बचपन वापस दिलाने का मामला है। ऐसा बचपन जो डर, भ्रम और अदालत के चक्करों से घिरा न हो। मैं बस चाहता हूं कि वह शांति से बड़ी हो सके।''

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