Success Story of Lokesh Patade: छत्तीसगढ़ के लोकेश 'गरीबों के गुलाब' से सालाना लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं। खेती से पहले वह एक कंपनी में बिजली सलाहकार थे।
नई दिल्ली: हरी-भरी खुशबू से महकते खेत और किसानों की जिंदगी में बदलाव- यह कहानी है छत्तीसगढ़ के जयरामनगर निवासी लोकेश पाटाडे की। लोकेश ने हाई-प्रेशर बॉयलर से जुड़ी इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर खेती की ओर रुख किया और आज प्रदेश में एक नई मिसाल कायम कर दी है। वह सालाना लाखों रुपये कमा रहे हैं।लोकेश पाटाडे पहले एक दक्षिण कोरियाई कंपनी में बिजली सलाहकार के रूप में काम करते थे, लेकिन परिवार और पर्यावरण के लिए कुछ अलग करने की चाह ने उन्हें खेती की राह पर ला दिया। उनकी पत्नी प्रियंका ने उन्हें हिम्मत दी। प्रियंका प्लांट बायोटेक्नोलॉजिस्ट हैं। लोकेश ने 35 साल की उम्र में 80 हजार रुपये के शुरुआती निवेश और एक एकड़ जमीन से अपने कारोबार की यात्रा शुरू की थी। इसका यह कारोबार अब तीन एकड़ में फैले मेडो एग्रोटेक फार्म तक पहुंच चुकी है। Success Story : कभी इलाज कराने के भी नहीं थे पैसे, किस्मत ऐसी चमकी कि बन गए अरबपति, क्यों दान कर दी कंपनी?किस चीज की खेती?लोकेश जेरेनियम की खेती कर रहे हैं। इसे 'गरीब आदमी का गुलाब' भी कहा जाता है। इस पौधे से निकलने वाला एसेंशियल ऑयल कॉस्मेटिक्स, परफ्यूम और अरोमाथेरेपी की काफी डिमांड रहती है। एक लीटर तेल की कीमत 11,000 रुपये तक होती है। उनके खेत से हर साल प्रति एकड़ 50-60 लीटर तेल निकलता है।जेरेनियम का पौधा बहुत मजबूत होता है। इसमें जल्दी से कोई कीड़ा नहीं लगता, जिससे किसानों को कम परेशानी होती है। इस पौधे से एक बार लगाने के बाद कई बार फसल मिलती है। इसमें खेती करने के लिए बहुत कम चीजों की जरूरत पड़ती है, यानी खर्च भी कम आता है। और सबसे अच्छी बात यह है कि इस पौधे से खेती करने पर कोई कचरा भी नहीं होता। यह पूरी तरह से कचरा-मुक्त खेती है।बचे हिस्से से खास इनोवेशनतेल निकालने के बाद बचे हुए हिस्सों से लोकेश ऑर्गेनिक हाइड्रोजोल-आधारित एयर फ्रेशनर बनाते हैं। यह भारत में अपनी तरह का पहला इनोवेशन है। ये एयर फ्रेशनर पर्यावरण-अनुकूल, बच्चों और पालतू जानवरों के लिए सुरक्षित और केमिकल प्रोडक्ट का प्राकृतिक विकल्प हैं। सालाना कितनी हो रही कमाई?आज लोकेश सालाना लगभग 12 लाख रुपये कमा रहे हैं। उनकी कमाई में 10 लाख रुपये जेरेनियम और सब्जियों की खेती से आते हैं, जबकि 2 लाख रुपये उनके बनाए प्रोडक्ट से। उनका स्टार्टअप मेडो एग्रोटेक इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय- रिसर्च एंड बिजनेस इनक्यूबेशन से जुड़ा हुआ है।लोकेश सिर्फ अपनी खेती तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ट्रेनिंग, वर्कशॉप और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए किसानों को उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर प्रेरित कर रहे हैं। वे AI टूल्स जैसे KissanGPT का भी इस्तेमाल कर खेती और उत्पादन को और स्मार्ट बना रहे हैं।किसानों के लिए बड़ी संभावनाभारत में हर साल 149 टन जेरेनियम तेल की खपत होती है, लेकिन उत्पादन सिर्फ 5 टन है। ऐसे में किसानों के लिए बाजार में बड़ी संभावना है। लोकेश कहते हैं, 'हम सिर्फ फसलें नहीं उगा रहे, हम संभावनाएं उगा रहे हैं। हर किसान जो जेरेनियम की खेती अपनाता है, वह अपनी कमाई के साथ अपना भविष्य भी बदल रहा है।'.
नई दिल्ली: हरी-भरी खुशबू से महकते खेत और किसानों की जिंदगी में बदलाव- यह कहानी है छत्तीसगढ़ के जयरामनगर निवासी लोकेश पाटाडे की। लोकेश ने हाई-प्रेशर बॉयलर से जुड़ी इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर खेती की ओर रुख किया और आज प्रदेश में एक नई मिसाल कायम कर दी है। वह सालाना लाखों रुपये कमा रहे हैं।लोकेश पाटाडे पहले एक दक्षिण कोरियाई कंपनी में बिजली सलाहकार के रूप में काम करते थे, लेकिन परिवार और पर्यावरण के लिए कुछ अलग करने की चाह ने उन्हें खेती की राह पर ला दिया। उनकी पत्नी प्रियंका ने उन्हें हिम्मत दी। प्रियंका प्लांट बायोटेक्नोलॉजिस्ट हैं। लोकेश ने 35 साल की उम्र में 80 हजार रुपये के शुरुआती निवेश और एक एकड़ जमीन से अपने कारोबार की यात्रा शुरू की थी। इसका यह कारोबार अब तीन एकड़ में फैले मेडो एग्रोटेक फार्म तक पहुंच चुकी है।Success Story: कभी इलाज कराने के भी नहीं थे पैसे, किस्मत ऐसी चमकी कि बन गए अरबपति, क्यों दान कर दी कंपनी?किस चीज की खेती?लोकेश जेरेनियम की खेती कर रहे हैं। इसे 'गरीब आदमी का गुलाब' भी कहा जाता है। इस पौधे से निकलने वाला एसेंशियल ऑयल कॉस्मेटिक्स, परफ्यूम और अरोमाथेरेपी की काफी डिमांड रहती है। एक लीटर तेल की कीमत 11,000 रुपये तक होती है। उनके खेत से हर साल प्रति एकड़ 50-60 लीटर तेल निकलता है।जेरेनियम का पौधा बहुत मजबूत होता है। इसमें जल्दी से कोई कीड़ा नहीं लगता, जिससे किसानों को कम परेशानी होती है। इस पौधे से एक बार लगाने के बाद कई बार फसल मिलती है। इसमें खेती करने के लिए बहुत कम चीजों की जरूरत पड़ती है, यानी खर्च भी कम आता है। और सबसे अच्छी बात यह है कि इस पौधे से खेती करने पर कोई कचरा भी नहीं होता। यह पूरी तरह से कचरा-मुक्त खेती है।बचे हिस्से से खास इनोवेशनतेल निकालने के बाद बचे हुए हिस्सों से लोकेश ऑर्गेनिक हाइड्रोजोल-आधारित एयर फ्रेशनर बनाते हैं। यह भारत में अपनी तरह का पहला इनोवेशन है। ये एयर फ्रेशनर पर्यावरण-अनुकूल, बच्चों और पालतू जानवरों के लिए सुरक्षित और केमिकल प्रोडक्ट का प्राकृतिक विकल्प हैं। सालाना कितनी हो रही कमाई?आज लोकेश सालाना लगभग 12 लाख रुपये कमा रहे हैं। उनकी कमाई में 10 लाख रुपये जेरेनियम और सब्जियों की खेती से आते हैं, जबकि 2 लाख रुपये उनके बनाए प्रोडक्ट से। उनका स्टार्टअप मेडो एग्रोटेक इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय- रिसर्च एंड बिजनेस इनक्यूबेशन से जुड़ा हुआ है।लोकेश सिर्फ अपनी खेती तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ट्रेनिंग, वर्कशॉप और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए किसानों को उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर प्रेरित कर रहे हैं। वे AI टूल्स जैसे KissanGPT का भी इस्तेमाल कर खेती और उत्पादन को और स्मार्ट बना रहे हैं।किसानों के लिए बड़ी संभावनाभारत में हर साल 149 टन जेरेनियम तेल की खपत होती है, लेकिन उत्पादन सिर्फ 5 टन है। ऐसे में किसानों के लिए बाजार में बड़ी संभावना है। लोकेश कहते हैं, 'हम सिर्फ फसलें नहीं उगा रहे, हम संभावनाएं उगा रहे हैं। हर किसान जो जेरेनियम की खेती अपनाता है, वह अपनी कमाई के साथ अपना भविष्य भी बदल रहा है।'
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