Success Story: सौरव कुमार ने आरा में फैब्रिक वेस्ट से पोर्ट बनाने का स्टार्टअप Home Alive Decor शुरू किया है. जिसमें 10 लोग रोजगार करते हैं. बिहार सरकार ने 10 लाख का लोन मंजूर किया है. सौरव कुमार एमिटी यूनिवर्सिटी से एंटरप्रेन्योर एमबीए किया है. अब अपना खुद का होम अलाइव डेकोर उद्योग शुरू किया है.
आज के समय में कई अनोखी चीजों का स्टार्टअप शुरू हुआ है. ऐसे में बिहार के आरा के एक युवक फैब्रिक वेस्ट से पोर्ट बनाने का काम शुरू किया है. फैब्रिक वेस्ट से प्रोडक्ट तैयार करने वाले युवक का नाम सौरव कुमार है.
उन्होंने एमिटी यूनिवर्सिटी से एंटरप्रेन्योर एमबीए किया है. अब अपना खुद का होम अलाइव डेकोर उद्योग शुरू किया है. इनके प्रोडक्ट की पूरे बिहार व देश के अन्य राज्यों से खूब डिमांड आ रही है. सौरव कुमार आरा के जगदेव नगर मोहल्ले के रहने वाले हैं. इस उद्योग में उनकी मां भी खूब साथ देती है. घर के ऊपर ही वर्कशॉप बनाई गई है. कुछ काम इनके पैतृक गांव में भी होता है. इसके अलावा इनका आउटलेट पटना के बेली रोड में पिलर नम्बर 18 के पास भी है. इनका प्रोडक्ट इनके खुद के पेज www.homealivedecor.Com पर भी मिलता है. सोशल मीडिया फेसबुक और इंस्टाग्राम के माध्यम से भी बेचा जाता है. फैब्रिक वेस्ट का मतलब होता है बेकार कपड़ा. जिसमें आम कपड़ा, तौलिया, शर्ट, पैंट, कंबल ये सारी चीजें होती हैं. कपड़े के अलावा वाइट सीमेंट, माइनर कले, वाटर प्रूफ पेंट अन्य कुछ सामग्री का इस्तेमाल कर इसे 12 स्टेप में हाथ से तैयार किया जाता है. प्रोडक्ट तैयार होने पर इसपर हाथों से कलाकारी और पेंट कर खूबसूरत बनाया जाता है. उसके बाद ये मार्केट में जाने के लिए तैयार हो जाता है. 150 रुपये से 3 हजार तक उपलब्ध रहता है. सौरव के उद्योग में 10 लोग रोजगार प्राप्त है जिसमें 6 महिला और 4 पुरुष है. सौरभ ने बताया कि शुरू से ही खुद का उद्योग करने का शौक था. इसलिए हमने एमबीए किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद हम इस सोच में लग गए कि ऐसा क्या करें, जिसमें कम बजट में उद्योग शुरू हो जाए. मेरी शुरू से ही सोच थी कि प्रर्यावरण को फायदा हो ऐसा काम करें. मेरे काम में हमने महिलाओं को रोजगार दिया. बहुत एक्सपेरिमेंट करने के बाद आइडिया आया कि फेब्रिक वेस्ट का प्रयोग कर प्रोडक्ट तैयार किया जा सकता है. शुरूआत में एक साल हमने घर में ही एक्सपेरिमेंट क और प्रोडक्ट तैयार कर रिश्तेदार और दोस्तों को गिफ्ट किए. उनका रेस्पॉन्स बहुत अच्छा आने लगा तो इसको धीरे-धीरे उद्योग में तब्दील करने लगे. स्टार्टप के तौर पर बिहार सरकार के द्वारा सौरव के उद्योग को 10 लाख का लोन दिया गया है. हालांकि, लोन की राशि अभी इनके खाते में नहीं आई है. सौरव ने बताया कि किसी व्यक्ति के द्वारा बताया गया उद्योग अगर बिल्कुल नया है तो बिहार सरकार के द्वारा स्टार्टप योजना में चयन हो सकता है. जिसके बाद हमने ऑनलाइन आवेदन किया. उसमें हमारे आयडिया को चयनित कर लिया गया. फिर मेरा एग्जाम हुआ उसके बाद मेरे स्टार्टप को बिहार सरकार लोन देने के लिए तैयार हुई है.
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