Success Story: आईसीयू से लौटे पिता को देख बदला फैसला...नौकरी छोड़ शुरू किया ये काम, अब 1.2 करोड़ का सालाना टर्नओवर

सत्यव्रत मुनि कौन हैं News

Success Story: आईसीयू से लौटे पिता को देख बदला फैसला...नौकरी छोड़ शुरू किया ये काम, अब 1.2 करोड़ का सालाना टर्नओवर
सत्यव्रत मुनि की सफलतासत्यव्रत मुनि सफलता की कहानीसफलता की कहानी
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सत्यव्रत मुनि ओडिशा के रहने वाले हैं। अपने पिता के कोरोना महामारी के दौरान बीमार पड़ने और फिर पारंपरिक आहार से ठीक होने के अनुभव से प्रेरित होकर उन्‍होंने बड़ा फैसला लिया। सत्‍यव्रत ने जमी-जमाई नौकरी छोड़कर 2022 में मुनिको फूड्स की स्थापना की। यह कंपनी आज फलते-फूलते कारोबार में बदल चुकी...

नई दिल्‍ली: कोरोना महामारी ने ओडिशा के सत्यव्रत मुनि की जिंदगी बदल दी। यही वह वक्‍त था जब उनकी कॉर्पोरेट यात्रा थम गई। 2020 में उनके पिता आईसीयू से लौटे और काफी कमजोर हो गए। तब उनकी मां ने पारंपरिक ओडिया सुपरफूड 'चटुआ' खिलाना शुरू किया। दो महीने में पिता की सेहत पूरी तरह सुधर गई। इस अनुभव ने सत्यव्रत को पारंपरिक भोजन की ताकत से रूबरू कराया। आईआईएम - अहमदाबाद के छात्र रहे जो सत्यव्रत पहले रिस्‍क लेने से बचते थे, उन्होंने इस घटना के बाद अपनी नौकरी छोड़ दी। फरवरी 2022 में उन्होंने मुनिको फूड्स की नींव रखी। यह फूड-टेक स्टार्टअप मिलेट, मोरिंगा और कटहल जैसी स्थानीय सामग्रियों से बिना किसी हानिकारक रसायन के सेहतमंद रेडी-टू-ईट प्रोडक्‍ट बनाता है। इसका सालाना टर्नओवर अब 1.

2 करोड़ रुपये पहुंच चुका है। आइए, यहां सत्यव्रत मुनि की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।जोखिम लेने की मिली हिम्‍मत जोखिम लेने की मिली हिम्‍मत ' imgsize='26856' >ओडिशा के सत्यव्रत मुनि ने 2013 में तमिलनाडु एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी से बीटेक करने के बाद आईआईएम-अहमदाबाद में दाखिला लिया। आईआईएम में साथी बैचमेट्स और एलईएम कोर्स ने उन्हें उद्यमिता की ओर प्रेरित किया। हालांकि, शुरुआत में वह जोखिम लेने से हिचकिचाते थे। यही कारण था कि उन्होंने 2015 में TAFE और उसके बाद महिंद्रा ट्रैक्टर्स के साथ अपना करियर शुरू किया। उनकी यह सुरक्षित यात्रा 2020 में कोरोना महामारी के दौरान अचानक रुक गई। तब उनके पिता कोरोना की पहली लहर में आईसीयू से लौटे थे। उनकी सेहत बहुत गिर गई थी। सत्‍यव्रत की मां ने उन्हें पारंपरिक 'चटुआ' खिलाना शुरू किया। इसके चमत्कारी परिणाम सामने आए। दो महीने में ही उनके पिता की सेहत पूरी तरह बहाल हो गई। यह घटना सत्यव्रत के लिए जीवन बदलने वाला अनुभव साबित हुई। इसने उन्हें पारंपरिक भारतीय खाद्य पदार्थों की ताकत का एहसास कराया।नौकरी छोड़ शुरू किया अपना काम नौकरी छोड़ शुरू किया अपना काम' imgsize='19084' >इस अनुभव से प्रेरित होकर सत्यव्रत ने हानिकारक प्रिजर्वेटिव या रसायनों से मुक्त, पौष्टिक, पारंपरिक और आसानी से तैयार होने वाले खाद्य उत्पाद बनाने का फैसला किया। उन्होंने महिंद्रा ट्रैक्टर्स में अपनी प्रोडक्ट मैनेजर की नौकरी छोड़ दी। 8 फरवरी 2022 को मुनिको फूड्स की स्थापना की। उनके वेंचर ने बाजरा-आधारित प्रोबायोटिक ड्रिंक 'गुट्जी' और इम्यूनिटी-बूस्टिंग पापड़ जैसे उत्पाद लॉन्च किए। उन्‍हें लगा कि बाजरा, मोरिंगा और फर्मेंटेड खाद्य पदार्थों की पारंपरिक शक्ति को आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण तकनीकों के साथ मिलाकर वह शहरी उपभोक्ताओं के लिए सुविधाजनक और आकर्षक उत्पाद विकसित कर सकते हैं। कंपनी ने अपनी उत्पादन तकनीक को इन-हाउस विकसित किया। लोचापड़ा में 10 लाख रुपये के शुरुआती निवेश से एक छोटी फैक्ट्री लगाई।शुरुआती चुनौतियों का डटकर किया सामना शुरुआती चुनौतियों का डटकर किया सामना' imgsize='27486' >सत्‍यव्रत के सामने शुरुआत में मार्केटिंग और ऊंची कीमत के कारण उपभोक्ताओं को उत्पाद आजमाने के लिए राजी करने की बड़ी चुनौती थी। कम बिक्री के कारण कर्मचारियों को वेतन देना मुश्किल हो गया था। इस चुनौती का सामना करने के लिए सत्यव्रत खुद बाजार में उतरे। खुदरा विक्रेताओं और ग्राहकों से सीधे संवाद किया। इस अनुभव से उन्हें कम कीमत वाली SKU लॉन्च करने का आइडिया आया। इसने बिक्री बढ़ाने में मदद की। आज, मुनिको की लगभग 80% मांग ग्रामीण और अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों से आती है, जहां वे खुदरा विक्रेताओं को सप्‍लाई करते हैं। मुनिको फूड्स ने वित्त वर्ष 2022-23 में 48 लाख रुपये से वित्त वर्ष 2023-24 में 1.2 करोड़ का रेवेन्‍यू प्राप्त किया। यह 150% की शानदार ग्रोथ है। इस सफलता से उत्‍साहित होकर कंपनी अब आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में विस्तार करने की तैयारी कर रही है। इसके दम पर उन्होंने चालू वित्त वर्ष में 6 करोड़ रुपये के राजस्व का टारगेट रखा है।स्‍थानीय किसानों का बढ़ा मुनाफा स्‍थानीय किसानों का बढ़ा मुनाफा' imgsize='30422' >सत्‍यव्रत के वेंचर की सफलता केवल व्यापार तक ही सीमित नहीं है। इसका सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव भी है। कंपनी अपने मुख्य कच्चे माल जैसे बाजरा को ओडिशा के आदिवासी बेल्ट से खरीदती है। इससे स्थानीय किसानों और किसान उत्पादक कंपनियों को उनकी फसलों के लिए अधिक लाभ मिलता है। इससे वे सस्‍टेनेबल एग्रीकल्‍चर जारी रखने के लिए प्रेरित होते हैं। बाजरा जैसी फसलें सूखा-प्रतिरोधी होती हैं। इन्हें अन्य फसलों की तुलना में कम पानी और रासायनिक इनपुट की आवश्यकता होती है, जो पर्यावरण के लिए भी बेहतर है। इस प्रकार सत्यव्रत मुनि ने पारंपरिक खाद्य ज्ञान, आधुनिक तकनीक और सामाजिक जिम्मेदारी को मिलाकर एक सफल मॉडल स्थापित किया है।

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