Chandratal Lake: चंद्रताल झील हिमाचल की सबसे खूबसूरत झील है, यहां लोग झील तक ट्रेक करते हुए आते हैं, लेकिन कुछ पर्यटकों ने इस जगह पर नहाकर इसे गंदा बनाने की कोशिश की। जानते हैं चंद्रताल झील के बारे में।
चंद्रताल झील को 'मून लेक' यानी चांद झील' भी कहते हैं। ये हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी में, लगभग 4,300 मीटर की ऊंचाई पर बसी हुई है। ये जगह उन लोगों के लिए एक बेहद खूबसूरत और सुकून देने वाली जगह है, जिन्हें प्रकृति और एडवेंचर पसंद है। चारों तरफ बर्फ से ढके पहाड़ और खुले नजारे इस जगह को और भी खास बना देते हैं। यहां शांति और खूबसूरती अपने सबसे खूबसूरत रूप में एक साथ देखने को मिलती है।ऐसी जगहों को वहां के प्रशासन और रहने वाले लोग बड़े संजोकर रखते हैं, लेकिन जब बाहर से आने वाले पर्यटक अपनी नासमझ से उसे बेकार कर दें, तो शायद देखने वाले इंसान के पास भी किसी तरह की प्रक्रिया नहीं रहती जाती। अभी हल ही में एक वीडियो सामने आई, जिसमें वहां आने वाले पर्यटक झील में नहा रहे हैं, जब वीडियो सोशल मिडिया पर आई तो लोगों ने भी अपना गुस्सा दिखाया। जानते हैं क्या था वीडियो में।चांद सी झील में नहाते दिखे लोग चंद्रताल झील, जो अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मान्यता के लिए जानी जाती है, वहां सैलानी साफ-साफ लगे बोर्डों के बावजूद उसमें नहाने का नियम तोड़ते नजर आए। इन बोर्डों पर साफ लिखा है कि झील में तैरना मना है, क्योंकि ये जगह धार्मिक रूप से पवित्र मानी जाती है और पर्यावरण को भी इससे नुकसान होता है। फिर भी कुछ लोग खुलेआम इन नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। प्रशासन पहले भी कई बार चेतावनी दे चुका है कि ऐसा करना न केवल डूबने का खतरा बढ़ाता है, बल्कि झील के पानी को गंदा कर पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। स्थानीय लोगों में इस तरह की लापरवाही को लेकर गुस्सा है और अब मांग हो रही है कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जुर्माना लगाया जाए। View this post on Instagram A post shared by Just Indian Things झील का इतिहास हिंदुओं की पवित्र झीलों में से एक मानी जाने वाली ये झील हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचती है। यही से हिमालय की चंद्रा नदी निकलती है, जो आगे चलकर चिनाब नदी की एक सहायक नदी बनती है। अब थोड़ा रहस्यमयी लगेगा, लेकिन चंद्रताल झील से जुड़ी सिर्फ एक नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग कहानियां हैं।इनमें से सबसे मशहूर कहानी चंद्रा और भागा की प्रेम कहानी है। चंद्रा, चंद्र देव की प्यारी बेटी थी और भागा, सूर्य देव का तेजस्वी बेटा। दोनों एक-दूसरे से बेहद प्यार करते थे, लेकिन उनके माता-पिता को ये रिश्ता मंजूर नहीं था। इसलिए दोनों ने भाग जाने का फैसला किया।जहां ये पहली बार मिले थे – यानी बारालाचा ला दर्रा – वहीं से भागने की योजना बनाई थी। लेकिन वे वहां मिल नहीं पाए और किसी दूसरी जगह जाकर मिले और एक दिव्य शादी की। आज जहां चंद्रा और भागा नदी मिलती हैं – वहां चंद्रभागा नदी बहती है, जो उनके मिलन की याद दिलाती है। चंद्रताल झील में कैम्पिंग आसपास के पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए, झील के पास कैंप लगाना मना है क्योंकि ये इलाका चंद्रताल वेटलैंड घोषित हो चुका है और ये फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की देखरेख में आता है। हालांकि, झील से थोड़ी दूरी पर विशाल हिमालय की गोद में कुछ बेहद खूबसूरत कैंपसाइट्स हैं, जो प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर पसंद लोगों को बेहद लुभाती हैं। झील के सबसे पास का कैंपसाइट बताल में है। बताल से चंद्रताल तक पहुंचने में करीबन डेढ़ घंटे की ट्रेकिंग लगती है। चंद्रताल झील कैसे पहुंचे चंद्रताल झील हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में स्थित एक सुंदर झील है। वहां पहुंचने के लिए आप इस तरह से जा सकते हैं:मनाली से:मनाली से सबसे पहले रोहतांग पास होते हुए बटाल पहुंचें।बटाल से चंद्रताल झील लगभग 14 किलोमीटर दूर है, जहाँ तक आप जीप या बाइक से जा सकते हैं।सड़क कुछ हद तक कच्ची है, इसलिए वाहन मजबूत होना चाहिए।काजा से :काजा से कुंजुम पास होते हुए बटाल जाएं और फिर चंद्रताल।ये रास्ता भी सुंदर है लेकिन चुनौतीपूर्ण है।ट्रेकिंग से:बटाल से चंद्रताल तक कई लोग पैदल ट्रेक भी करते हैं। ये लगभग 14 किलोमीटर का ट्रेक है और प्रकृति प्रेमियों के लिए शानदार एक्सपीरियंस देता है।सबसे नजदीकी हवाई अड्डा: भुंतर सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन: जोगिंदरनगर.
चंद्रताल झील को 'मून लेक' यानी चांद झील' भी कहते हैं। ये हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी में, लगभग 4,300 मीटर की ऊंचाई पर बसी हुई है। ये जगह उन लोगों के लिए एक बेहद खूबसूरत और सुकून देने वाली जगह है, जिन्हें प्रकृति और एडवेंचर पसंद है। चारों तरफ बर्फ से ढके पहाड़ और खुले नजारे इस जगह को और भी खास बना देते हैं। यहां शांति और खूबसूरती अपने सबसे खूबसूरत रूप में एक साथ देखने को मिलती है।ऐसी जगहों को वहां के प्रशासन और रहने वाले लोग बड़े संजोकर रखते हैं, लेकिन जब बाहर से आने वाले पर्यटक अपनी नासमझ से उसे बेकार कर दें, तो शायद देखने वाले इंसान के पास भी किसी तरह की प्रक्रिया नहीं रहती जाती। अभी हल ही में एक वीडियो सामने आई, जिसमें वहां आने वाले पर्यटक झील में नहा रहे हैं, जब वीडियो सोशल मिडिया पर आई तो लोगों ने भी अपना गुस्सा दिखाया। जानते हैं क्या था वीडियो में।चांद सी झील में नहाते दिखे लोग चंद्रताल झील, जो अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मान्यता के लिए जानी जाती है, वहां सैलानी साफ-साफ लगे बोर्डों के बावजूद उसमें नहाने का नियम तोड़ते नजर आए। इन बोर्डों पर साफ लिखा है कि झील में तैरना मना है, क्योंकि ये जगह धार्मिक रूप से पवित्र मानी जाती है और पर्यावरण को भी इससे नुकसान होता है। फिर भी कुछ लोग खुलेआम इन नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। प्रशासन पहले भी कई बार चेतावनी दे चुका है कि ऐसा करना न केवल डूबने का खतरा बढ़ाता है, बल्कि झील के पानी को गंदा कर पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। स्थानीय लोगों में इस तरह की लापरवाही को लेकर गुस्सा है और अब मांग हो रही है कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जुर्माना लगाया जाए। View this post on Instagram A post shared by Just Indian Things झील का इतिहास हिंदुओं की पवित्र झीलों में से एक मानी जाने वाली ये झील हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचती है। यही से हिमालय की चंद्रा नदी निकलती है, जो आगे चलकर चिनाब नदी की एक सहायक नदी बनती है। अब थोड़ा रहस्यमयी लगेगा, लेकिन चंद्रताल झील से जुड़ी सिर्फ एक नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग कहानियां हैं।इनमें से सबसे मशहूर कहानी चंद्रा और भागा की प्रेम कहानी है। चंद्रा, चंद्र देव की प्यारी बेटी थी और भागा, सूर्य देव का तेजस्वी बेटा। दोनों एक-दूसरे से बेहद प्यार करते थे, लेकिन उनके माता-पिता को ये रिश्ता मंजूर नहीं था। इसलिए दोनों ने भाग जाने का फैसला किया।जहां ये पहली बार मिले थे – यानी बारालाचा ला दर्रा – वहीं से भागने की योजना बनाई थी। लेकिन वे वहां मिल नहीं पाए और किसी दूसरी जगह जाकर मिले और एक दिव्य शादी की। आज जहां चंद्रा और भागा नदी मिलती हैं – वहां चंद्रभागा नदी बहती है, जो उनके मिलन की याद दिलाती है। चंद्रताल झील में कैम्पिंग आसपास के पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए, झील के पास कैंप लगाना मना है क्योंकि ये इलाका चंद्रताल वेटलैंड घोषित हो चुका है और ये फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की देखरेख में आता है। हालांकि, झील से थोड़ी दूरी पर विशाल हिमालय की गोद में कुछ बेहद खूबसूरत कैंपसाइट्स हैं, जो प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर पसंद लोगों को बेहद लुभाती हैं। झील के सबसे पास का कैंपसाइट बताल में है। बताल से चंद्रताल तक पहुंचने में करीबन डेढ़ घंटे की ट्रेकिंग लगती है। चंद्रताल झील कैसे पहुंचे चंद्रताल झील हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में स्थित एक सुंदर झील है। वहां पहुंचने के लिए आप इस तरह से जा सकते हैं:मनाली से:मनाली से सबसे पहले रोहतांग पास होते हुए बटाल पहुंचें।बटाल से चंद्रताल झील लगभग 14 किलोमीटर दूर है, जहाँ तक आप जीप या बाइक से जा सकते हैं।सड़क कुछ हद तक कच्ची है, इसलिए वाहन मजबूत होना चाहिए।काजा से :काजा से कुंजुम पास होते हुए बटाल जाएं और फिर चंद्रताल।ये रास्ता भी सुंदर है लेकिन चुनौतीपूर्ण है।ट्रेकिंग से:बटाल से चंद्रताल तक कई लोग पैदल ट्रेक भी करते हैं। ये लगभग 14 किलोमीटर का ट्रेक है और प्रकृति प्रेमियों के लिए शानदार एक्सपीरियंस देता है।सबसे नजदीकी हवाई अड्डा: भुंतर सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन: जोगिंदरनगर
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