Lok Sabha Elections 2019: राष्ट्रवाद की चुनावी ट्रैक पर दौड़ती भाजपा को थामने उतरीं प्रियंका गांधी Gandhinagar PriyankaGandhiVadra PriyankaGandhi
प्रियंका गांधी वाड्रा ने कांग्रेस कार्यसमिति में पारित प्रस्ताव के अनुरूप लोकसभा चुनाव की राजनीतिक बहस को मुद्दों से भटकाने के भाजपा के सियासी एजेंडे को थामने के लिए मैदान में उतरने का खुला संदेश दे दिया है। सक्रिय राजनीति में आने के बाद गुजरात में अपने पहले संबोधन के जरिये ही प्रियंका ने साफ कर दिया है कि चुनावी बहस को राष्ट्रवाद के रंग में रंगने की भाजपा की रणनीति को कांग्रेस देशभक्ति की अपनी परिभाषा से थामने की कोशिश करेगी। 'जागरूकता' और 'सही निर्णय' यानि 'सही वोट' को ही जनता की सबसे बड़ी देशभक्ति बता प्रियंका ने बेलाग इसकी परिभाषा भी स्पष्ट कर दी।गुजरात के गांधीनगर में प्रियंका का पहला संबोधन संक्षिप्त जरूर रहा मगर उनकी सरल, सुलभ और सारगर्भित संवाद शैली ने जनता के साथ सीधे जुड़ने की प्रभावी क्षमता का संकेत तो दे ही दिया। प्रियंका का यह अंदाज निसंदेह कांग्रेसियों के लिए चुनावी बुखार की गरमी में बड़ी राहत की उम्मीद बनेगा। इसकी वजह भी वाजिब है क्योंकि लंबे अर्से बाद कांग्रेस को राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा वक्ता मिला है जो जनता से सीधे संवाद का तार जोड़ने में सक्षम नजर आ रहा है। खासकर राजनीति के इस दौर में जब पीएम नरेंद्र मोदी की ताकतवर संवाद क्षमता कांग्रेस ही नहीं पूरे विपक्ष की सबसे बड़ी चुनौतियों में एक है।चुनावी बहस को राष्ट्रवाद की ट्रैक पर दौड़ा रही भाजपा की स्पीड पर ब्रेक लगाने के अपने इरादे जाहिर करते हुए प्रियंका ने यह संदेश भी देने का प्रयास किया कि उनकी संवाद शैली में विरोधी पर प्रहार तो होगा मगर कटुता से परहेज करेंगी। जनता से जागरूकता और अपने वोट को सबसे बड़ा हथियार बनाने की बात कहते हुए प्रियंका की गई टिप्पणी इसी ओर इशारा करती है। इसकी व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा ये दोनों ऐसे हथियार हैं जिसे किसी को चोट, दुख या नुकसान नहीं पहुंचता मगर जनता को सबसे मजबूत बनता है। हर साल दो करोड नौकरियां देने, हर व्यक्ति के खाते में कालेधन के 15 लाख रूपये से लेकर महिला सुरक्षा जैसे पूरे नहीं हुए वादे की बात उठा पीएम का नाम लिये बिना ही प्रियंका लोगों के बीच यह संदेश पहुंचाती नजर आयीं कि उनका निशाना कहां है।लोकसभा चुनाव 2019 की राजनीतिक बहस को जन मुद्दों के अखाड़े से बाहर ले जाने की भाजपा की रणनीति को किसी सूरत में कामयाब नहीं होने देने की प्रतिबद्धता कांग्रेस कार्यसमिति के प्रस्ताव में जताई गई। अहमदाबाद में कार्यसमिति की बैठक के तुरंत बाद गांधीनगर की रैली में प्रियंका ने इस पर अमल की शुरूआत कर दी। इस संदर्भ में उन्होंने जनता से साफ कहा कि चुनाव में आप अपना भविष्य चुनने जा रहे हैं। इसीलिए चुनावी बहस फिजुल के मुददों पर नहीं बल्कि आमलोगों की जिंदगी बेहतर बनाने वाले मुद्दों पर होनी चाहिए।हालांकि प्रियंका ने संकेतों में यह माना भी कि बहस को असल मुद्दों की पटरी पर लाने की चुनौती चुनाव के दौरान अगले दो महीने आसान नहीं होगी। तमाम ऐसे मुद्दे उछाले जाएंगे जिससे बहस की दिशा भटकायी जा सके। शायद इसीलिए उन्होंने जनता को जागरूकता के जरिये ही अपनी देशभक्ति प्रकट करने पर जोर देने की बात कही।प्रियंका ने दो टूक यह संदेश देने का प्रयास किया है कि केवल जोशीले नारे ही राष्ट्रवाद नहीं बल्कि सोच-समझकर सही वोट का फैसला भी कतई कम राष्ट्रवाद नहीं है। बहरहाल प्रियंका के इस अंदाजे बयां को कांग्रेस जमीन पर कितनी दूर तक ले जाएगी इसकी तस्वीर आने वाले दिनों में ही साफ होगी। सियासी बहस को मुद्दों के ट्रैक पर लाने की कांग्रेस की कामयाबी भी इसी अनुपात पर निर्भर करेगी।.
प्रियंका गांधी वाड्रा ने कांग्रेस कार्यसमिति में पारित प्रस्ताव के अनुरूप लोकसभा चुनाव की राजनीतिक बहस को मुद्दों से भटकाने के भाजपा के सियासी एजेंडे को थामने के लिए मैदान में उतरने का खुला संदेश दे दिया है। सक्रिय राजनीति में आने के बाद गुजरात में अपने पहले संबोधन के जरिये ही प्रियंका ने साफ कर दिया है कि चुनावी बहस को राष्ट्रवाद के रंग में रंगने की भाजपा की रणनीति को कांग्रेस देशभक्ति की अपनी परिभाषा से थामने की कोशिश करेगी। 'जागरूकता' और 'सही निर्णय' यानि 'सही वोट' को ही जनता की सबसे बड़ी देशभक्ति बता प्रियंका ने बेलाग इसकी परिभाषा भी स्पष्ट कर दी।गुजरात के गांधीनगर में प्रियंका का पहला संबोधन संक्षिप्त जरूर रहा मगर उनकी सरल, सुलभ और सारगर्भित संवाद शैली ने जनता के साथ सीधे जुड़ने की प्रभावी क्षमता का संकेत तो दे ही दिया। प्रियंका का यह अंदाज निसंदेह कांग्रेसियों के लिए चुनावी बुखार की गरमी में बड़ी राहत की उम्मीद बनेगा। इसकी वजह भी वाजिब है क्योंकि लंबे अर्से बाद कांग्रेस को राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा वक्ता मिला है जो जनता से सीधे संवाद का तार जोड़ने में सक्षम नजर आ रहा है। खासकर राजनीति के इस दौर में जब पीएम नरेंद्र मोदी की ताकतवर संवाद क्षमता कांग्रेस ही नहीं पूरे विपक्ष की सबसे बड़ी चुनौतियों में एक है।चुनावी बहस को राष्ट्रवाद की ट्रैक पर दौड़ा रही भाजपा की स्पीड पर ब्रेक लगाने के अपने इरादे जाहिर करते हुए प्रियंका ने यह संदेश भी देने का प्रयास किया कि उनकी संवाद शैली में विरोधी पर प्रहार तो होगा मगर कटुता से परहेज करेंगी। जनता से जागरूकता और अपने वोट को सबसे बड़ा हथियार बनाने की बात कहते हुए प्रियंका की गई टिप्पणी इसी ओर इशारा करती है। इसकी व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा ये दोनों ऐसे हथियार हैं जिसे किसी को चोट, दुख या नुकसान नहीं पहुंचता मगर जनता को सबसे मजबूत बनता है। हर साल दो करोड नौकरियां देने, हर व्यक्ति के खाते में कालेधन के 15 लाख रूपये से लेकर महिला सुरक्षा जैसे पूरे नहीं हुए वादे की बात उठा पीएम का नाम लिये बिना ही प्रियंका लोगों के बीच यह संदेश पहुंचाती नजर आयीं कि उनका निशाना कहां है।लोकसभा चुनाव 2019 की राजनीतिक बहस को जन मुद्दों के अखाड़े से बाहर ले जाने की भाजपा की रणनीति को किसी सूरत में कामयाब नहीं होने देने की प्रतिबद्धता कांग्रेस कार्यसमिति के प्रस्ताव में जताई गई। अहमदाबाद में कार्यसमिति की बैठक के तुरंत बाद गांधीनगर की रैली में प्रियंका ने इस पर अमल की शुरूआत कर दी। इस संदर्भ में उन्होंने जनता से साफ कहा कि चुनाव में आप अपना भविष्य चुनने जा रहे हैं। इसीलिए चुनावी बहस फिजुल के मुददों पर नहीं बल्कि आमलोगों की जिंदगी बेहतर बनाने वाले मुद्दों पर होनी चाहिए।हालांकि प्रियंका ने संकेतों में यह माना भी कि बहस को असल मुद्दों की पटरी पर लाने की चुनौती चुनाव के दौरान अगले दो महीने आसान नहीं होगी। तमाम ऐसे मुद्दे उछाले जाएंगे जिससे बहस की दिशा भटकायी जा सके। शायद इसीलिए उन्होंने जनता को जागरूकता के जरिये ही अपनी देशभक्ति प्रकट करने पर जोर देने की बात कही।प्रियंका ने दो टूक यह संदेश देने का प्रयास किया है कि केवल जोशीले नारे ही राष्ट्रवाद नहीं बल्कि सोच-समझकर सही वोट का फैसला भी कतई कम राष्ट्रवाद नहीं है। बहरहाल प्रियंका के इस अंदाजे बयां को कांग्रेस जमीन पर कितनी दूर तक ले जाएगी इसकी तस्वीर आने वाले दिनों में ही साफ होगी। सियासी बहस को मुद्दों के ट्रैक पर लाने की कांग्रेस की कामयाबी भी इसी अनुपात पर निर्भर करेगी।
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