दरअसल, हाल के दिनों में नीतीश कुमार राष्ट्रीय राजनीति में तब बहुत अधिक प्रासंगिक हो गए थे, जब उन्होंने अपनी अगुवाई में विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन का निर्माण कराया था।
जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद उनके अगले कदम को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म हो गया है, लेकिन केसी त्यागी ने अमर उजाला से बातचीत करते हुए दावा किया है कि वे नीतीश कुमार और जनता दल यूनाइटेड का साथ कभी नहीं छोड़ेंगे। वे पार्टी में बने रहेंगे और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता की तरह नहीं, लेकिन एक कार्यकर्ता के तौर पर अपनी बात मजबूती से रखते रहेंगे। उनके पास अभी भी पार्टी के सलाहकार का पद है और वे इस पद पर काम करते रहेंगे। यह भी है चर्चा दरअसल, केसी त्यागी समाजवादी विचारधारा के राजनीतिज्ञ रहे हैं। उनकी पूरी राजनीति समाजवादी विचारधारा से प्रेरित नेताओं और राजनीतिक दलों के आसपास रही है। ऐसे में भविष्य में भी इस बात की संभावना बहुत कम ही है कि वे जदयू छोड़कर भाजपा या किसी दक्षिणपंथी विचारधारा के राजनीतिक दल के साथ चले जाएं। उनकी राजनीति इसी विचारधारा के राजनीतिक दलों के आसपास रहने की संभावना है। ऐसे में कभी जदयू से मतभेद हुए भी तो वे राष्ट्रीय जनता दल या समाजवादी पार्टी जैसे दलों में अपनी भूमिका तलाश सकते हैं। अब केंद्रीय भूमिका में उनका कोई रोल नहीं दरअसल, हाल के दिनों में नीतीश कुमार राष्ट्रीय राजनीति में तब बहुत अधिक प्रासंगिक हो गए थे, जब उन्होंने अपनी अगुवाई में विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन का निर्माण कराया था। माना जाता है कि नीतीश कुमार स्वयं को इंडिया गठबंधन की ओर से स्वयं को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने के सपने देख रहे थे। माना यह भी जाता है कि उनकी इस महत्त्वाकांक्षा को आधार देने में केसी त्यागी ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लेकिन उनकी इस महत्त्वाकांक्षा को इंडिया गठबंधन में भाव नहीं मिला जिसके कारण नीतीश कुमार ने गठबंधन से किनारा कर लिया। इस बीच राहुल गांधी ने अपने आपको मजबूत भूमिका के लिए तैयार कर लिया है। राहुल गांधी जिस तरह राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत हुए हैं, इस बात की भी कोई संभावना नहीं बची है कि यदि कभी एक बार फिर पलटी मारकर नीतीश कुमार इंडिया गठबंधन के साथ जाते हैं, तो उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाएगा। अब विपक्षी दलों के बीच उन्हें कोई बड़ा महत्त्व नहीं मिलने वाला है। यह भी एक कारण हो सकता है कि नीतीश कुमार के लिए केसी त्यागी अब अप्रासंगिक हो गए हों। यदि इंडिया गठबंधन ने नीतीश कुमार को पीएम पद के लिए स्वीकार कर लिया होता, तो केसी त्यागी की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका बनी रहती। लेकिन गठबंधन से किनारा करने के कारण अब राष्ट्रीय राजनीति में नीतीश कुमार के लिए कोई भूमिका नहीं बची है। ऐसे में केसी त्यागी भी कहीं न कहीं नीतीश कुमार के लिए अप्रासंगिक हो गए हैं। यही कारण है कि केसी त्यागी ने अपने आपको इस पद से मुक्त कर लिया। त्यागी ने क्या कहा? केसी त्यागी ने अमर उजाला से बातचीत में इस बात का खुलासा किया कि उन्होंने नीतीश कुमार के द्वारा पार्टी का अध्यक्ष पद दोबारा स्वीकार करने से पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन दिल्ली में हुई पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में इसे स्वीकार नहीं किया गया था। अब बदली हुई परिस्थितियों में उन्होंने अपने आपको इस जिम्मेदारी से दोबारा मुक्त कर लिया है। इसका यह अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए कि वे नीतीश कुमार या जदयू का साथ छोड़ने जा रहे हैं। दिग्गज राजनेता केसी त्यागी ने अमर उजाला से कहा कि वे न तो जदयू को छोड़ने जा रहे हैं और न ही राजनीति से सन्यास नहीं लेने जा रहे हैं। उन्होंने पार्टी के प्रवक्ता पद से इस्तीफा दिया है, लेकिन नीतीश कुमार अभी भी उनके लिए सबसे महत्त्वपूर्ण हैं और वे एक जदयू कार्यकर्ता के तौर पर अपनी बात रखते रहेंगे। राज्यसभा न भेजने से थे नाराज? क्या राज्यसभा न भेजे जाने से नाराज होकर आपने इस्तीफा दे दिया? अमर उजाला के इस प्रश्न के जवाब में केसी त्यागी ने कहा कि यह बात पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कभी किसी पद की लालच से राजनीति नहीं की। वे लंबे समय से राजनीति में हैं और 1984 से ही प्रवक्ता के तौर पर काम करते आए हैं। वे वीपी सिंह, चौधरी चरण सिंह, जॉर्ज फर्नांडिस जैसे लोगों के साथ काम कर चुके हैं और उनके रहते हुए महासचिव जैसे सम्मानजनक पद पर काम किया है। ऐसे में लंबे समय से वे इस तरह की भूमिका में रहे हैं, इसलिए अब वे इस पद को रिक्त कर रहे हैं। लेकिन वे एक सलाहकार के तौर पर अभी भी पार्टी के लिए काम करते रहेंगे।.
जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद उनके अगले कदम को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म हो गया है, लेकिन केसी त्यागी ने अमर उजाला से बातचीत करते हुए दावा किया है कि वे नीतीश कुमार और जनता दल यूनाइटेड का साथ कभी नहीं छोड़ेंगे। वे पार्टी में बने रहेंगे और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता की तरह नहीं, लेकिन एक कार्यकर्ता के तौर पर अपनी बात मजबूती से रखते रहेंगे। उनके पास अभी भी पार्टी के सलाहकार का पद है और वे इस पद पर काम करते रहेंगे। यह भी है चर्चा दरअसल, केसी त्यागी समाजवादी विचारधारा के राजनीतिज्ञ रहे हैं। उनकी पूरी राजनीति समाजवादी विचारधारा से प्रेरित नेताओं और राजनीतिक दलों के आसपास रही है। ऐसे में भविष्य में भी इस बात की संभावना बहुत कम ही है कि वे जदयू छोड़कर भाजपा या किसी दक्षिणपंथी विचारधारा के राजनीतिक दल के साथ चले जाएं। उनकी राजनीति इसी विचारधारा के राजनीतिक दलों के आसपास रहने की संभावना है। ऐसे में कभी जदयू से मतभेद हुए भी तो वे राष्ट्रीय जनता दल या समाजवादी पार्टी जैसे दलों में अपनी भूमिका तलाश सकते हैं। अब केंद्रीय भूमिका में उनका कोई रोल नहीं दरअसल, हाल के दिनों में नीतीश कुमार राष्ट्रीय राजनीति में तब बहुत अधिक प्रासंगिक हो गए थे, जब उन्होंने अपनी अगुवाई में विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन का निर्माण कराया था। माना जाता है कि नीतीश कुमार स्वयं को इंडिया गठबंधन की ओर से स्वयं को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने के सपने देख रहे थे। माना यह भी जाता है कि उनकी इस महत्त्वाकांक्षा को आधार देने में केसी त्यागी ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लेकिन उनकी इस महत्त्वाकांक्षा को इंडिया गठबंधन में भाव नहीं मिला जिसके कारण नीतीश कुमार ने गठबंधन से किनारा कर लिया। इस बीच राहुल गांधी ने अपने आपको मजबूत भूमिका के लिए तैयार कर लिया है। राहुल गांधी जिस तरह राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत हुए हैं, इस बात की भी कोई संभावना नहीं बची है कि यदि कभी एक बार फिर पलटी मारकर नीतीश कुमार इंडिया गठबंधन के साथ जाते हैं, तो उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाएगा। अब विपक्षी दलों के बीच उन्हें कोई बड़ा महत्त्व नहीं मिलने वाला है। यह भी एक कारण हो सकता है कि नीतीश कुमार के लिए केसी त्यागी अब अप्रासंगिक हो गए हों। यदि इंडिया गठबंधन ने नीतीश कुमार को पीएम पद के लिए स्वीकार कर लिया होता, तो केसी त्यागी की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका बनी रहती। लेकिन गठबंधन से किनारा करने के कारण अब राष्ट्रीय राजनीति में नीतीश कुमार के लिए कोई भूमिका नहीं बची है। ऐसे में केसी त्यागी भी कहीं न कहीं नीतीश कुमार के लिए अप्रासंगिक हो गए हैं। यही कारण है कि केसी त्यागी ने अपने आपको इस पद से मुक्त कर लिया। त्यागी ने क्या कहा? केसी त्यागी ने अमर उजाला से बातचीत में इस बात का खुलासा किया कि उन्होंने नीतीश कुमार के द्वारा पार्टी का अध्यक्ष पद दोबारा स्वीकार करने से पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन दिल्ली में हुई पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में इसे स्वीकार नहीं किया गया था। अब बदली हुई परिस्थितियों में उन्होंने अपने आपको इस जिम्मेदारी से दोबारा मुक्त कर लिया है। इसका यह अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए कि वे नीतीश कुमार या जदयू का साथ छोड़ने जा रहे हैं। दिग्गज राजनेता केसी त्यागी ने अमर उजाला से कहा कि वे न तो जदयू को छोड़ने जा रहे हैं और न ही राजनीति से सन्यास नहीं लेने जा रहे हैं। उन्होंने पार्टी के प्रवक्ता पद से इस्तीफा दिया है, लेकिन नीतीश कुमार अभी भी उनके लिए सबसे महत्त्वपूर्ण हैं और वे एक जदयू कार्यकर्ता के तौर पर अपनी बात रखते रहेंगे। राज्यसभा न भेजने से थे नाराज? क्या राज्यसभा न भेजे जाने से नाराज होकर आपने इस्तीफा दे दिया? अमर उजाला के इस प्रश्न के जवाब में केसी त्यागी ने कहा कि यह बात पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कभी किसी पद की लालच से राजनीति नहीं की। वे लंबे समय से राजनीति में हैं और 1984 से ही प्रवक्ता के तौर पर काम करते आए हैं। वे वीपी सिंह, चौधरी चरण सिंह, जॉर्ज फर्नांडिस जैसे लोगों के साथ काम कर चुके हैं और उनके रहते हुए महासचिव जैसे सम्मानजनक पद पर काम किया है। ऐसे में लंबे समय से वे इस तरह की भूमिका में रहे हैं, इसलिए अब वे इस पद को रिक्त कर रहे हैं। लेकिन वे एक सलाहकार के तौर पर अभी भी पार्टी के लिए काम करते रहेंगे।
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