इन बंधकों ने बताया कि कैसे उन्हें भूमिगत सुरंगों और इमारतों रखा गया था. उन पर हर वक़्त बंदूकों का साया रहता था.
नामा लेवी हमास की क़ैद से रिहा होने के बाद अपने परिवार से मिलती हुईं.हमास ने ग़ज़ा में क़ैद चार युवा महिलाओं को छोड़ा है. हमास की ओर से बंधक बना कर रखी गईं इन युवतियों के माता-पिता ने बताया है कि कैसे उनकी बेटियों के साथ बदसलूकी की गई.
उन्हें भूखा रखा गया और धमकाया गया. हमास की क़ैद से छूटी इन युवतियों के माता-पिता ने बताया कि हथियारबंद लोगों ने उन्हें चेतावनी दी. उनकी बेटियों से जबरदस्ती खाना बनवाया गया और बर्तन धुलवाए गए. इन बंधकों ने बताया कि कैसे उन्हें भूमिगत सुरंगों और इमारतों रखा गया था. उनके साथ मारपीट की गई और हमास के प्रोपेगेंडा वीडियो में काम करवाया गया. इन युवतियों के माता-पिताओं ने बताया कि उनकी बेटियां इस दौरान आपबीतियों को साझा करती थीं. वो एक डायरी रखती थीं जिसमें चित्र बनाए जाते थे.दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन में महिलाओं के आरक्षण से कितनी भागीदारी बढ़ेगी?बजट 2025: निर्मला सीतारमण ने महिलाओं को क्या-कुछ दिया, जानकार क्या कहते हैं? रिहा होने के बाद इनमें से किसी भी युवती ने मीडिया को इंटरव्यू नहीं दिया है. उनके माता-पिताओं को कहना है कि अभी भी उनके साथ हुए दुर्व्यवहार के ब्योरे आ ही रहे हैं. कई ऐसी भी बातें हैं जिनके बारे में वो बातें नहीं कर सकते हैं. क्योंकि उन्हें डर है कि इससे ग़ज़ा में हमास की कैद में रह रहे दूसरे बंधकों के लिए जोखिम बढ़ सकता है.7 अक्टूबर 2023 को हमास ने उनका नाहल ओज़ आर्मी बेस से अपहरण कर लिया था. इसी दिन हमास के लड़ाकों ने इसराइल पर हमला किया था. इन लोगों को पिछले 15 महीने से बंधक बना कर रखा गया था. लेकिन इस दौरान उन तक भोजन की उपलब्धता और उनके साथ किए जाने वाले पुरुष गार्ड्स के व्यवहार का पैटर्न भी बदलता रहा. हमास के लोग उन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाते रहे. इस दौरान शायद ही इन महिलाओं ने सूरज की रोशनी देखी होगी.ग़ज़ा पर किसका अधिकार है और ट्रंप क्या वाकई ग़ज़ा पर कब्ज़ा कर सकते हैं? 5 बिंदुओं में समझिए20 साल की अगम बर्जर के पिता ने बताया, '' ये महिलाएं जिन जगहों पर ले जाई गईं वो बिल्कुल अलग-अलग थीं. इनमें ख़राब से बढ़िया सुरंग से लेकर खराब से बढ़िया घर शामिल थे. अगम बर्जर नाहल ओज़ में सैनिक की ड्यूटी निभा रही थीं. श्लोमी बर्जर ने कहा, '' कुछ जगहों पर खाना बहुत अच्छा था लेकिन कुछ जगहों पर काफी बेकार. सिर्फ किसी तरह खा कर जिंदा रहा जा सकता था.''गिल्बोआ ने बताया, '' जिन लोगों ने उन्हें बंधक बना कर रखा था उनके साथ वो एक जगह से दूसरी जगह पर भागती रहीं. वहां वो वॉर जोन में थीं. ऐसा करना बेहद ख़तरनाक था.'' जब डेनियला ने पिछले सप्ताह छोड़े गए तीन बंधकों को बेहद कमजोर और दुबला-पतला देखा तो अपनी मां से कहा,'' अगर मुझे दो महीने पहले छोड़ा जाता तो मैं भी इसी तरह दिखती.'' गिल्बोआ कहती हैं, "मेरी बेटी बेहद दुबली हो गई है. कैद में रहने की वजह से उसका वजन काफी गिर गया है. लेकिन पिछले दो महीनों में उनका वजन बढ़ाने का लिए उन्हें काफी खाना दिया जा रहा था.'' दूसरी महिलाओं के माता-पिताओं ने भी वजन घटने की बात की है. मिरेव लेशम गोनेन की बेटी को हमास के लोग नोवा म्यूज़िक फेस्टिवल से ले गए थे. जनवरी में युद्धविराम के पहले सप्ताह के दौरान 24 साल की रोमी को छोड़ा गया है. उनकी मां बताया कि रोमी का वजन 20 फ़ीसदी घट गया है. गिल्बोआ का कहना था कि उनके लिए सबसे कठिन वो वीडियो देखना था, जो ये बता रहा था कि उनकी बेटी की मौत हो गई है. उसे बंधक बनाने वालों ने उस पर पाउडर छिड़क दिया था ताकि वो प्लास्टर से ढकी दिखे. ऐसा लगे जैसे वो इसराइली सैन्य हमले में मारी गई है. उन्होंने बीबीसी से कहा, " जिसने भी इसे देखा, उसने इसे सच माना. लेकिन मैं खुद से ये कहती रही कि ऐसा नहीं हो सकता.''ट्रंप और नेतन्याहू की बैठक पर क्यों टिकी हैं सऊदी अरब और ईरान की निगाहें?इसराइल पर 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले बाद ग़ज़ा में इसराइली सैन्य कार्रवाई शुरू हुई. हमास के हमले में 1200 लोगों की मौत हो गई थी. हमले के दौरान उसने 251 लोगों को बंधक बना लिया था. हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है इसराइली कार्रवाई में अब तक 48,230 लोगों की मौत हुई है. संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि इस कार्रवाई में ग़ज़ा की दो तिहाई इमारतें ध्वस्त हो गई हैं. अगम के पिता का कहना है कि उनकी बेटी को बंधक बनाने वाले अक्सर उन्हें धमकी देते रहते थे. कैद में रहने के बाद उनके साथ शारीरिक दुर्व्यवहार हुआ. नवंबर 2023 में रिहा किए गए पूर्व बंधक अमित सौसाना पर हमले का ख़ास तौर पर ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा "कभी-कभी उसकी आंखों के सामने दूसरी महिला बंधकों पर भी अत्याचार किया जाता था.'' बर्जर का कहना है कि उनकी बेटी ने उन्हें बताया कि कैसे हथियारबंद लोग उन पर लगातार नज़र रखते थे. वो हर वक़्त बंदूक और ग्रेनेड लिए रहते थे. उनका कहना है कि बंधक बनाने वाले पुरुषों ने महिलाओं को काफी अपमानित किया. उन्हें साफ़-सफ़ाई करने और खाना बनाने के लिए मजबूर किया जाता था. वह कहते हैं, "ये चीजें मेरी बेटी को काफी परेशान करती थीं. वह एक ऐसी लड़की है कि अगर उसे कुछ करने के लिए कहा जाए तो कर देगी. वह शर्मीली नहीं है. और कभी-कभी वह उन्हें बताती है कि वो उन लोगों के उनके व्यवहार के बारे में क्या सोचती है." उन्होंने कहा कि विरोध के तौर पर अगम ने यहूदियों के विश्राम के दिन सब्बाथ पर कोई काम करने से इनकार कर दिया था. हालांकि उसे हिरासत में रखने वालों ने इसे मान लिया था.ग़ज़ा-इसराइल युद्धविराम: जब विस्थापित फ़लस्तीनी उत्तरी ग़ज़ा में अपने घरों को पहुंचे तो उन्होंने क्या देखाअगम के पिता कहते हैं, "जब अगम वापस आई तो वह हर समय बोलना चाहती थी. एक दिन के बाद वो उसकी आवाज ही जैसे बंद हो चुकी थी. क्योंकि वो काफी ज्यादा बोल चुकी थी.''उनका कहना है कि उनकी बेटी को कभी-कभी ऐसी जगहों पर रखा जाता था जहां टीवी या रेडियो चल रहा होता था.लेवी ने कहा "इससे उसे बहुत उम्मीद मिली. उसे लगा कि अब उसे कोई भूल नहीं पाएगा. वो लोग जरूर इस नरक से निकल जाएंगे.''बंधक बनाए जाने के दिन के फ़ुटेज में नामा और अन्य महिला सैनिकों को खून से सने कपड़ों में आर्मी बेस के एक कमरे में हथियारबंद लोगों से घिरा हुआ दिखाया गया था. इसके बाद उन्हें जबरदस्ती बिठाकर ग़ज़ा में ले जाया गया.उस समय उनके पास हथियार नहीं थे. ये उन पांच महिलाओं में से हैं, जिन्हें युद्धविराम के पहले दौर में छोड़ा गया था. 7 अक्टूबर के हमले से कुछ दिन पहले डेनिएला सर्विस से एक दिन की छुट्टी लेकर घर पर थी. उन्होंने अपनी मां से कहा था,'' वापस लौटते ही युद्ध शुरू हो जाएगा.''जो महिलाएं लौटी हैं उनके माता-पिताओं ने कहा कि उनकी बेटियां अभी भी ग़ज़ा में मौजूद लोगों को लेकर चिंतित हैं. उन्होंने युद्ध विराम जारी रखने की अपील की है. इस बीच,लेशेम गोनेन का कहना है कि उन्हें अभी भी ये समझ नहीं आ रहा है कि उनकी बेटी रोमी के साथ क्या हुआ था. उसे नोवा म्यूजिक फेस्टिवल में गोली मार दी गई थी. उसकी मां का कहना है कि उसकी चोट का ठीक से इलाज नहीं किया गया. उसका घाव खुला था जहां से हड्डी दिख रही थी. लेशेम गोनेन का कहना है कि रोमी ने कैद को बेहद डरावना बताया. वो बंदूकधारियों और भीड़ से घिरी थी. लेकिन उनके 'पुनर्मिलन' का क्षण बेहद भावनात्मक था.जिन महिलाओं को छोड़ा गया उनके माता-पिताओं ने बताया कि उनकी बेटियों ने कैद के दिन काटने के लिए कई तरीके खोजे.बर्जर कहते हैं, "वो हर दिन जितना हो सके उतना लिखती थीं. वो लिखती थीं- क्या हो रहा है. वो कहां जा रही हैं. गार्ड कौन थे, वगैरह.'' क़ैद में रहते हुए, युवतियों ने उन चीजों के सपने देखे जो जो वो घर लौटकर करना चाहती थीं. जैसे बालों की कटिंग और सुशी खाना.अब इसराइल वापसी पर वो अपनी ज़िंदगी को पटरी पर लाने की कोशिश कर रही हैं. उनके परिवारों का कहना है कि धीरे-धीरे ही सही उन्हें इस कोशिश में कामयाबी मिल रही है. लेवी कहते हैं, अपनी बेटी नामा के साथ पुनर्मिलन का वो पल अभी भी उनके ज़ेहन में धुंधला है. लेकिन वो उस भावना को याद कर सकते हैं. ये भावना ये थी, '' मैं अब तुम्हारा ख़्याल रखूंगा, और सब कुछ ठीक हो जाएगा. तुम्हारे पिता अब यहां हैं. अब सब कुछ ठीक हो जाएगा.''ट्रंप और मोहम्मद बिन सलमान की दोस्ती कितना परवान चढ़ेगी और इसराइल का इस पर क्या रुख़ रहेगा?रूस-यूक्रेन युद्ध: पुतिन से मिलने के लिए ज़ेलेंस्की ने रखी ये शर्तकांग्रेस सांसद गौरव गोगोई की पत्नी पर हिमंत के आरोप और गोगोई का जवाब, क्यों इतने आक्रामक हैं मुख्यमंत्री ट्रंप और पुतिन की बातचीत पर ज़ेलेंस्की की तीखी प्रतिक्रिया, कहा बिना यूक्रेन की भागीदारी के कोई भी शांति समझौता बेकार 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