Income Tax Rule: 1 अप्रैल से प्रभावी हो रहे नए इनकम टैक्स कानून 2026 में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। सीए अभिषेक जैन ने बताया कि अब टैक्स सिस्टम सरल होगा और 'टैक्स ईयर' की नई अवधारणा आएगी।
नई दिल्ली| मैं तो भूल ही गया. अरे कोई बात नहीं. कुछ नहीं होगा. गलती हो गई अब क्या करूं? अगर आईटीआर भरते समय आपके साथ भी कुछ ऐसा ही होता है या फिर 'लास्ट मिनट' का इंतज़ार करते हैं, तो अब जाग जाइए। क्योंकि, 1 अप्रैल से नया इनकम टैक्स कानून पूरी तरह से प्रभावी होने जा रहा है। यानी अब तक जो जुगाड़ चल जाते थे, वो अब नहीं चलेंगे। इस नए कानून से हमारी सैलरी, रेंट, HRA और इन्वेस्टमेंट पर क्या असर पड़ेगा? इन तमाम उलझनों को सुलझाने के लिए जागरण बिजनेस ने चार्टर्ड अकाउंटेंट अभिषेक जैन से खास बातचीत की। जिसमें उन्होंने 1 अप्रैल से लागू होने जा रहे नए इनकम टैक्स कानून पर होने जा रहे बदलावों पर खुलकर बातचीत की और आपके मन में उठ रहे सवालों के जवाब दिए। 10 सवाल और उनके जवाबों में पेश हैं बातचीत के मुख्य अंशः सवाल 1: एक अप्रैल से नया इनकम टैक्स कानून प्रभावी होने के बाद मुख्य बदलाव क्या होंगे? जवाबः सबसे बड़ा बदलाव 'सिम्प्लिफिकेशन' यानी सरलीकरण का है। जब 2017 में GST आया था, तो पूरा सिस्टम ही बदल गया था, लेकिन इनकम टैक्स में ऐसा नहीं है। इसे आम आदमी के लिए आसान बनाया गया है। पहले कानून में इतने क्लॉज़, प्रोवाइज़ो और एक्सप्लेनेशन होते थे कि आम आदमी ऊपर से पढ़ना शुरू करता था और नीचे आते-आते सब भूल जाता था। अब ऐसा नहीं होगा। सेक्शन्स की संख्या कम कर दी गई है। सबसे अच्छी बात यह है कि अब चीजों को 'टेबुलर फॉर्म' में दिया गया है। यानी अगर आपको किसी खास इनकम पर टैक्स या टीडीएस चेक करना है, तो एक टेबल में देखकर तुरंत समझ आ जाएगा। सीए के पास भागने की ज़रूरत कम पड़ेगी। सवाल 2: टैक्स असेसमेंट ईयर और प्रीवियस ईयर का ये क्या नया खेल है? जवाबः अगर आप भी 'असेसमेंट ईयर' और 'फाइनेंसियल ईयर' के बीच कंफ्यूज होकर गलत रिटर्न भर देते थे, तो आपके लिए अच्छी खबर है। क्योंकि, आम आदमी हमेशा सोचता था कि कमाई तो मैंने 2025-26 में की है, तो रिटर्न 2026-27 का क्यों भरवा रहे हो? इस कंफ्यूजन को दूर करने के लिए अब सिर्फ एक टर्म होगा- टैक्स ईयर । हालांकि, यहां ध्यान देने वाली बात है कि यह फाइनेंसियल ईयर से थोड़ा अलग है। टैक्स ईयर उस दिन से शुरू माना जाएगा जिस दिन से आपकी पहली इनकम शुरू होती है और यह 31 मार्च को खत्म होगा। यानी अगर आपकी नौकरी 30 नवंबर को लगी है, तो आपका 'टैक्स ईयर' 30 नवंबर से 31 मार्च तक का ही माना जाएगा। सवाल 3: क्या ओल्ड टैक्स रिजीम अब और आकर्षक होने जा रही है? जवाबः बिल्कुल! चार साल पहले सरकार ने इशारा किया था कि वो धीरे-धीरे 'ओल्ड रिजीम' को खत्म कर देंगे और 'न्यू रिजीम' ही चलेगी। लेकिन अचानक गेम पलट गया है। सरकार ने ओल्ड रिजीम में मिलने वाले अलाउंसेस की लिमिट को भारी भरकम तरीके से बढ़ा दिया है। इससे ओल्ड टैक्स रिजीम फिर से मिडिल क्लास और सैलरीड कर्मचारियों के लिए बहुत फायदे का सौदा बन गई है। अब आपको अपनी कैलकुलेशन फिर से करनी पड़ेगी कि आपके लिए ओल्ड रिजीम बेहतर है या न्यू। सवाल 4: अलाउंसेस बढ़ने से ओल्ड टैक्स रिजीम कितनी आकर्षक हो जाएगी? जरा आंकड़ों में बताएं। जवाबः यहीं पर सबसे बड़ा 'मास्टरस्ट्रोक' है। 1961 के जमाने से चला आ रहा 'चिल्ड्रन एजुकेशन अलाउंस' मात्र ₹100 प्रति माह था। सीए जैन हंसते हुए कहते हैं, ₹100 में तो आज के जमाने में कुछ नहीं आता। अब सरकार ने इसे बढ़ाकर सीधा ₹3000 प्रति माह कर दिया है। इसी तरह, 'हॉस्टल अलाउंस' जो पहले मात्र ₹300 हुआ करता था, उसे बढ़ाकर ₹9000 प्रति माह कर दिया गया है। जरा सोचिए, पहले ₹100 के हिसाब से आपको साल की सिर्फ ₹1200 की छूट मिलती थी और बाकी सारा अलाउंस टैक्सेबल होता था। अब यह लिमिट बढ़ने से आपकी टैक्सेबल इनकम काफी कम हो जाएगी और आप अच्छा-खासा टैक्स बचा पाएंगे। यह भी पढ़ें- New Income Tax Law : 1 अप्रैल से कितना बदल जाएगा टैक्स कानून, HRA से ओल्ड रिजीम तक कहां-क्या फायदे? CA से सुनिए सवाल 5: मेट्रो सिटीज की लिस्ट में कौन-से 3 नए शहर जुड़े हैं और इसका क्या फायदा है? जवाबः अगर आप मेट्रो शहर में रहते हैं, तो HRA पर आपको 50% की टैक्स छूट मिलती है, जबकि नॉन-मेट्रो में यह 40% है। अब तक केवल चार शहर ही मेट्रो माने जाते थे। नए कानून में इस लिस्ट में 3 नए शहर जोड़ दिए गए हैं- बेंगलुरु, अहमदाबाद और पुणे। यानी अगर आप इन तीन शहरों में नौकरी कर रहे हैं और किराए पर रहते हैं, तो अब आप भी अपनी बेसिक सैलरी के 50% हिस्से तक HRA की छूट क्लेम कर सकते हैं। । सवाल 6: मैं अपने पैरेंट्स को रेंट देकर टैक्स बचाता हूं, HRA के इस मोर्चे पर क्या बदलाव हुए हैं? जवाबः ऐसे में आपको सावधानी बरतने की जरूरत है। अगर आप सिर्फ कागजों पर रेंट एग्रीमेंट बनाकर टैक्स बचा रहे थे , तो अब आप फंस सकते हैं। माता-पिता को रेंट देना पूरी तरह से लीगल है, क्योंकि वे अलग 'इंडिविजुअल' हैं। लेकिन नए फॉर्म में अब एक स्पष्ट सवाल होगा- 'Are you paying rent to your relative?' और आपको अपना रिश्ता भी बताना होगा। जैसे ही आप 'Yes' पर टिक करेंगे, आपका केस इनकम टैक्स विभाग के रडार में आ जाएगा। अगर आप सच में हर महीने बैंक से पैसे ट्रांसफर कर रहे हैं और आपके पास रेंट रिसीट है, तो डरने की बात नहीं। लेकिन अगर ये सिर्फ टैक्स चोरी का 'जुगाड़' है, तो पेनल्टी और भारी ब्याज चुकाने के लिए तैयार रहें। सवाल 7: अगर मैं सालाना एक लाख रुपए से ज्यादा रेंट दे रहा हूं, तो क्या होगा? जवाबः पहले लोग मकान मालिक को कैश में किराया दे देते थे और मकान मालिक उस इनकम को छुपा लेता था। अब यह नहीं चलेगा। नियम के मुताबिक, ₹1 लाख सालाना से ज्यादा रेंट होने पर मकान मालिक का PAN नंबर देना जरूरी है। सीए जैन एक उदाहरण देते हैं, मान लीजिए आपने अपने मकान मालिक का पैन नंबर रिटर्न में डाल दिया, लेकिन मकान मालिक सोच रहा है कि पैसा तो कैश में आया है, मैं क्यों टैक्स भरूं? अब ऐसा नहीं होगा। डिपार्टमेंट का सिस्टम आपके द्वारा दिए गए पैन नंबर से ऑटोमैटिकली क्रॉस-मैच करेगा। अगर मकान मालिक ने वो रेंट अपनी इनकम में नहीं दिखाया, तो सिस्टम अपने आप दोनों को नोटिस भेज देगा। यानी अब दोनों में से कोई एक तो झूठ बोलता पकड़ा ही जाएगा। सवाल 8: इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन में क्या बदला है? जवाबः डेडलाइन को लेकर अक्सर हड़बड़ी होती थी। सीए जैन बताते हैं कि पहले आम लोगों और बिना ऑडिट वाले छोटे बिजनेसमैन की डेडलाइन 31 जुलाई ही होती थी। सीए के पास बहुत प्रेशर होता था। अब सरकार ने थोड़ी राहत दी है। आम नौकरीपेशा के लिए डेडलाइन 31 जुलाई ही रहेगी। लेकिन ऐसे बिजनेस या ट्रस्ट जिनकी ऑडिट नहीं होती है, उनकी डेडलाइन बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है। । सवाल 9: टीडीएस और प्रॉपर्टी खरीदने के नियमों में क्या राहत मिली है? जवाबः टीडीएस के नियम थोड़े सरल हुए हैं। सीए जैन के अनुसार सबसे बड़ी राहत एनआरआई से प्रॉपर्टी खरीदने वालों को मिली है। पहले अगर आप किसी एनआरआई से घर खरीदते थे, तो खरीदार को TAN नंबर लेना पड़ता था। यह एक बहुत ही जटिल प्रक्रिया थी। आम आदमी को समझ ही नहीं आता था कि यह कैसे करें और कई बार बिना जानकारी के नोटिस आ जाते थे। नए कानून में खरीदार के लिए TAN नंबर लेने की इस जटिल प्रक्रिया को खत्म कर दिया गया है। यह आम लोगों के लिए एक बड़ा और स्वागत योग्य कदम है। सवाल 10: क्या टैक्स चोरी अब नामुमकिन हो गई है? शेयर बाजार वालों के लिए क्या नया है? जवाबः अगर आप सोचते हैं कि अरे, सरकार को कैसे पता चलेगा, तो यह आपकी सबसे बड़ी भूल है। सीए अभिषेक जैन साफ कहते हैं कि 'टैक्स प्लानिंग' और 'टैक्स चोरी' में फर्क है। नए कानून का बैकएंड पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित है। आपने बच्चों के स्कूल की फीस कैश में दी, या शेयर बाजार में ट्रेडिंग करके 25 लाख कमाए और रिटर्न में नहीं दिखाया, यह सब 26AS फॉर्म के जरिए AI आपकी कुंडली निकाल लेगा। 'मुझे कानून नहीं पता था' अब कोई बहाना नहीं चलेगा। इसके अलावा, शेयर बाजार में F&O ट्रेडिंग करने वालों पर 1 अप्रैल से STT बढ़ रहा है। इससे ट्रेडर्स की लागत बढ़ेगी, हालांकि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के नियम फिलहाल पहले जैसे ही रखे गए हैं। यह भी पढ़ें- Gold Silver Price Crash: कितना और गिरेगा सोना-चांदी, खरीदें या नहीं, किसमें करें निवेश? 15 सवालों में सब कुछ.
नई दिल्ली| मैं तो भूल ही गया... अरे कोई बात नहीं.... कुछ नहीं होगा... गलती हो गई अब क्या करूं? अगर आईटीआर भरते समय आपके साथ भी कुछ ऐसा ही होता है या फिर 'लास्ट मिनट' का इंतज़ार करते हैं, तो अब जाग जाइए। क्योंकि, 1 अप्रैल से नया इनकम टैक्स कानून पूरी तरह से प्रभावी होने जा रहा है। यानी अब तक जो जुगाड़ चल जाते थे, वो अब नहीं चलेंगे। इस नए कानून से हमारी सैलरी, रेंट, HRA और इन्वेस्टमेंट पर क्या असर पड़ेगा? इन तमाम उलझनों को सुलझाने के लिए जागरण बिजनेस ने चार्टर्ड अकाउंटेंट अभिषेक जैन से खास बातचीत की। जिसमें उन्होंने 1 अप्रैल से लागू होने जा रहे नए इनकम टैक्स कानून पर होने जा रहे बदलावों पर खुलकर बातचीत की और आपके मन में उठ रहे सवालों के जवाब दिए। 10 सवाल और उनके जवाबों में पेश हैं बातचीत के मुख्य अंशः सवाल 1: एक अप्रैल से नया इनकम टैक्स कानून प्रभावी होने के बाद मुख्य बदलाव क्या होंगे? जवाबः सबसे बड़ा बदलाव 'सिम्प्लिफिकेशन' यानी सरलीकरण का है। जब 2017 में GST आया था, तो पूरा सिस्टम ही बदल गया था, लेकिन इनकम टैक्स में ऐसा नहीं है। इसे आम आदमी के लिए आसान बनाया गया है। पहले कानून में इतने क्लॉज़, प्रोवाइज़ो और एक्सप्लेनेशन होते थे कि आम आदमी ऊपर से पढ़ना शुरू करता था और नीचे आते-आते सब भूल जाता था। अब ऐसा नहीं होगा। सेक्शन्स की संख्या कम कर दी गई है। सबसे अच्छी बात यह है कि अब चीजों को 'टेबुलर फॉर्म' में दिया गया है। यानी अगर आपको किसी खास इनकम पर टैक्स या टीडीएस चेक करना है, तो एक टेबल में देखकर तुरंत समझ आ जाएगा। सीए के पास भागने की ज़रूरत कम पड़ेगी। सवाल 2: टैक्स असेसमेंट ईयर और प्रीवियस ईयर का ये क्या नया खेल है? जवाबः अगर आप भी 'असेसमेंट ईयर' और 'फाइनेंसियल ईयर' के बीच कंफ्यूज होकर गलत रिटर्न भर देते थे, तो आपके लिए अच्छी खबर है। क्योंकि, आम आदमी हमेशा सोचता था कि कमाई तो मैंने 2025-26 में की है, तो रिटर्न 2026-27 का क्यों भरवा रहे हो? इस कंफ्यूजन को दूर करने के लिए अब सिर्फ एक टर्म होगा- टैक्स ईयर । हालांकि, यहां ध्यान देने वाली बात है कि यह फाइनेंसियल ईयर से थोड़ा अलग है। टैक्स ईयर उस दिन से शुरू माना जाएगा जिस दिन से आपकी पहली इनकम शुरू होती है और यह 31 मार्च को खत्म होगा। यानी अगर आपकी नौकरी 30 नवंबर को लगी है, तो आपका 'टैक्स ईयर' 30 नवंबर से 31 मार्च तक का ही माना जाएगा। सवाल 3: क्या ओल्ड टैक्स रिजीम अब और आकर्षक होने जा रही है? जवाबः बिल्कुल! चार साल पहले सरकार ने इशारा किया था कि वो धीरे-धीरे 'ओल्ड रिजीम' को खत्म कर देंगे और 'न्यू रिजीम' ही चलेगी। लेकिन अचानक गेम पलट गया है। सरकार ने ओल्ड रिजीम में मिलने वाले अलाउंसेस की लिमिट को भारी भरकम तरीके से बढ़ा दिया है। इससे ओल्ड टैक्स रिजीम फिर से मिडिल क्लास और सैलरीड कर्मचारियों के लिए बहुत फायदे का सौदा बन गई है। अब आपको अपनी कैलकुलेशन फिर से करनी पड़ेगी कि आपके लिए ओल्ड रिजीम बेहतर है या न्यू। सवाल 4: अलाउंसेस बढ़ने से ओल्ड टैक्स रिजीम कितनी आकर्षक हो जाएगी? जरा आंकड़ों में बताएं। जवाबः यहीं पर सबसे बड़ा 'मास्टरस्ट्रोक' है। 1961 के जमाने से चला आ रहा 'चिल्ड्रन एजुकेशन अलाउंस' मात्र ₹100 प्रति माह था। सीए जैन हंसते हुए कहते हैं, ₹100 में तो आज के जमाने में कुछ नहीं आता। अब सरकार ने इसे बढ़ाकर सीधा ₹3000 प्रति माह कर दिया है। इसी तरह, 'हॉस्टल अलाउंस' जो पहले मात्र ₹300 हुआ करता था, उसे बढ़ाकर ₹9000 प्रति माह कर दिया गया है। जरा सोचिए, पहले ₹100 के हिसाब से आपको साल की सिर्फ ₹1200 की छूट मिलती थी और बाकी सारा अलाउंस टैक्सेबल होता था। अब यह लिमिट बढ़ने से आपकी टैक्सेबल इनकम काफी कम हो जाएगी और आप अच्छा-खासा टैक्स बचा पाएंगे। यह भी पढ़ें- New Income Tax Law: 1 अप्रैल से कितना बदल जाएगा टैक्स कानून, HRA से ओल्ड रिजीम तक कहां-क्या फायदे? CA से सुनिए सवाल 5: मेट्रो सिटीज की लिस्ट में कौन-से 3 नए शहर जुड़े हैं और इसका क्या फायदा है? जवाबः अगर आप मेट्रो शहर में रहते हैं, तो HRA पर आपको 50% की टैक्स छूट मिलती है, जबकि नॉन-मेट्रो में यह 40% है। अब तक केवल चार शहर ही मेट्रो माने जाते थे। नए कानून में इस लिस्ट में 3 नए शहर जोड़ दिए गए हैं- बेंगलुरु, अहमदाबाद और पुणे। यानी अगर आप इन तीन शहरों में नौकरी कर रहे हैं और किराए पर रहते हैं, तो अब आप भी अपनी बेसिक सैलरी के 50% हिस्से तक HRA की छूट क्लेम कर सकते हैं। । सवाल 6: मैं अपने पैरेंट्स को रेंट देकर टैक्स बचाता हूं, HRA के इस मोर्चे पर क्या बदलाव हुए हैं? जवाबः ऐसे में आपको सावधानी बरतने की जरूरत है। अगर आप सिर्फ कागजों पर रेंट एग्रीमेंट बनाकर टैक्स बचा रहे थे , तो अब आप फंस सकते हैं। माता-पिता को रेंट देना पूरी तरह से लीगल है, क्योंकि वे अलग 'इंडिविजुअल' हैं। लेकिन नए फॉर्म में अब एक स्पष्ट सवाल होगा- 'Are you paying rent to your relative?' और आपको अपना रिश्ता भी बताना होगा। जैसे ही आप 'Yes' पर टिक करेंगे, आपका केस इनकम टैक्स विभाग के रडार में आ जाएगा। अगर आप सच में हर महीने बैंक से पैसे ट्रांसफर कर रहे हैं और आपके पास रेंट रिसीट है, तो डरने की बात नहीं। लेकिन अगर ये सिर्फ टैक्स चोरी का 'जुगाड़' है, तो पेनल्टी और भारी ब्याज चुकाने के लिए तैयार रहें। सवाल 7: अगर मैं सालाना एक लाख रुपए से ज्यादा रेंट दे रहा हूं, तो क्या होगा? जवाबः पहले लोग मकान मालिक को कैश में किराया दे देते थे और मकान मालिक उस इनकम को छुपा लेता था। अब यह नहीं चलेगा। नियम के मुताबिक, ₹1 लाख सालाना से ज्यादा रेंट होने पर मकान मालिक का PAN नंबर देना जरूरी है। सीए जैन एक उदाहरण देते हैं, मान लीजिए आपने अपने मकान मालिक का पैन नंबर रिटर्न में डाल दिया, लेकिन मकान मालिक सोच रहा है कि पैसा तो कैश में आया है, मैं क्यों टैक्स भरूं? अब ऐसा नहीं होगा। डिपार्टमेंट का सिस्टम आपके द्वारा दिए गए पैन नंबर से ऑटोमैटिकली क्रॉस-मैच करेगा। अगर मकान मालिक ने वो रेंट अपनी इनकम में नहीं दिखाया, तो सिस्टम अपने आप दोनों को नोटिस भेज देगा। यानी अब दोनों में से कोई एक तो झूठ बोलता पकड़ा ही जाएगा। सवाल 8: इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन में क्या बदला है? जवाबः डेडलाइन को लेकर अक्सर हड़बड़ी होती थी। सीए जैन बताते हैं कि पहले आम लोगों और बिना ऑडिट वाले छोटे बिजनेसमैन की डेडलाइन 31 जुलाई ही होती थी। सीए के पास बहुत प्रेशर होता था। अब सरकार ने थोड़ी राहत दी है। आम नौकरीपेशा के लिए डेडलाइन 31 जुलाई ही रहेगी। लेकिन ऐसे बिजनेस या ट्रस्ट जिनकी ऑडिट नहीं होती है, उनकी डेडलाइन बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है। । सवाल 9: टीडीएस और प्रॉपर्टी खरीदने के नियमों में क्या राहत मिली है? जवाबः टीडीएस के नियम थोड़े सरल हुए हैं। सीए जैन के अनुसार सबसे बड़ी राहत एनआरआई से प्रॉपर्टी खरीदने वालों को मिली है। पहले अगर आप किसी एनआरआई से घर खरीदते थे, तो खरीदार को TAN नंबर लेना पड़ता था। यह एक बहुत ही जटिल प्रक्रिया थी। आम आदमी को समझ ही नहीं आता था कि यह कैसे करें और कई बार बिना जानकारी के नोटिस आ जाते थे। नए कानून में खरीदार के लिए TAN नंबर लेने की इस जटिल प्रक्रिया को खत्म कर दिया गया है। यह आम लोगों के लिए एक बड़ा और स्वागत योग्य कदम है। सवाल 10: क्या टैक्स चोरी अब नामुमकिन हो गई है? शेयर बाजार वालों के लिए क्या नया है? जवाबः अगर आप सोचते हैं कि अरे, सरकार को कैसे पता चलेगा, तो यह आपकी सबसे बड़ी भूल है। सीए अभिषेक जैन साफ कहते हैं कि 'टैक्स प्लानिंग' और 'टैक्स चोरी' में फर्क है। नए कानून का बैकएंड पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित है। आपने बच्चों के स्कूल की फीस कैश में दी, या शेयर बाजार में ट्रेडिंग करके 25 लाख कमाए और रिटर्न में नहीं दिखाया, यह सब 26AS फॉर्म के जरिए AI आपकी कुंडली निकाल लेगा। 'मुझे कानून नहीं पता था' अब कोई बहाना नहीं चलेगा। इसके अलावा, शेयर बाजार में F&O ट्रेडिंग करने वालों पर 1 अप्रैल से STT बढ़ रहा है। इससे ट्रेडर्स की लागत बढ़ेगी, हालांकि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के नियम फिलहाल पहले जैसे ही रखे गए हैं। यह भी पढ़ें- Gold Silver Price Crash: कितना और गिरेगा सोना-चांदी, खरीदें या नहीं, किसमें करें निवेश? 15 सवालों में सब कुछ
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