सुप्रीम कोर्ट ने दहेज से जुड़ी एक मौत के मामले में एक व्यक्ति की जमानत रद्द करते हुए पटना हाई कोर्ट को कहा कि आरोपी को जमानत देते समय उसको सावधानी बरतनी चाहिए थी।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दहेज के मामले में महिला की मौत के मामले में आरोपी की जमानत को रद्द कर दिया। आरोपी की जमानत रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दहेज के मामलों में महिलाओं की मौत की घटनाओं को समाज पर गहरा धब्बा करार दिया। टिकाऊ नहीं है पटना हाई कोर्ट का फैसलामामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानूनी रोक के बावजूद, इस प्रथा के कारण हजारों महिलाएं बेमौत मारी जाती हैं। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने जमानत रद्द करते हुए कहा कि पटना हाई कोर्ट का आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश बिल्कुल टिकाऊ नहीं है।कोर्ट को बरतनी चाहिए थी सावधानीपीठ ने कहा कि दहेज से जुड़ी मौत जैसे बेहद गंभीर अपराध में, हाई कोर्ट को अपने विवेक का इस्तेमाल करते समय बहुत ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए थी। पीठ ने आगे कहा कि दहेज से जुड़ी मौत के मामले वास्तव में एक गहरी शर्मिंदगी और एक बड़ी सामाजिक बुराई हैं, जो मानवाधिकारों और गरिमा का गंभीर उल्लंघन करते हैं। कानूनी रोक के बाद बेमौत मारी जाती हजारों महिलाएंकानूनी रोक के बावजूद, इस प्रथा के कारण हजारों महिलाएं बेमौत मारी जाती है; अक्सर या तो उनकी हत्या कर दी जाती है, या फिर दूल्हे के परिवार की तरफ से पैसे या कीमती चीजों की लालच भरी मांगों के कारण उन्हें आत्महत्या करने पर मजबूर कर दिया जाता है। दहेज से जुड़ी मौतें समाज पर गहरा धब्बा हैं।आरोपी के वकील ने कोर्ट में दी दलीलआरोपी की तरफ से पेश वकील ने दलील दी कि यह मामला आत्महत्या का है। वकील के अनुसार, मृतका की मानसिक हालत ठीक नहीं थी और कहा जाता है कि उसने एक इमारत की छठी मंजिल से कूदकर जान दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि पीड़िता की शादी आरोपी से डेढ़ साल पहले हुई थी।क्या है पूरा मामला1 सितंबर, 2024 को महिला अपने ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई थी। उसके शरीर पर अंदरूनी और बाहरी, दोनों तरह की चोटों के निशान थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह सिर में लगी चोट के कारण होने वाला रक्तस्राव और सदमा बताया गया।.
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दहेज के मामले में महिला की मौत के मामले में आरोपी की जमानत को रद्द कर दिया। आरोपी की जमानत रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दहेज के मामलों में महिलाओं की मौत की घटनाओं को समाज पर गहरा धब्बा करार दिया। टिकाऊ नहीं है पटना हाई कोर्ट का फैसलामामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानूनी रोक के बावजूद, इस प्रथा के कारण हजारों महिलाएं बेमौत मारी जाती हैं। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने जमानत रद्द करते हुए कहा कि पटना हाई कोर्ट का आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश बिल्कुल टिकाऊ नहीं है।कोर्ट को बरतनी चाहिए थी सावधानीपीठ ने कहा कि दहेज से जुड़ी मौत जैसे बेहद गंभीर अपराध में, हाई कोर्ट को अपने विवेक का इस्तेमाल करते समय बहुत ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए थी। पीठ ने आगे कहा कि दहेज से जुड़ी मौत के मामले वास्तव में एक गहरी शर्मिंदगी और एक बड़ी सामाजिक बुराई हैं, जो मानवाधिकारों और गरिमा का गंभीर उल्लंघन करते हैं। कानूनी रोक के बाद बेमौत मारी जाती हजारों महिलाएंकानूनी रोक के बावजूद, इस प्रथा के कारण हजारों महिलाएं बेमौत मारी जाती है; अक्सर या तो उनकी हत्या कर दी जाती है, या फिर दूल्हे के परिवार की तरफ से पैसे या कीमती चीजों की लालच भरी मांगों के कारण उन्हें आत्महत्या करने पर मजबूर कर दिया जाता है। दहेज से जुड़ी मौतें समाज पर गहरा धब्बा हैं।आरोपी के वकील ने कोर्ट में दी दलीलआरोपी की तरफ से पेश वकील ने दलील दी कि यह मामला आत्महत्या का है। वकील के अनुसार, मृतका की मानसिक हालत ठीक नहीं थी और कहा जाता है कि उसने एक इमारत की छठी मंजिल से कूदकर जान दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि पीड़िता की शादी आरोपी से डेढ़ साल पहले हुई थी।क्या है पूरा मामला1 सितंबर, 2024 को महिला अपने ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई थी। उसके शरीर पर अंदरूनी और बाहरी, दोनों तरह की चोटों के निशान थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह सिर में लगी चोट के कारण होने वाला रक्तस्राव और सदमा बताया गया।
Supreme Court Dowry Case Domestic Violence Cases Patna High Court Dowry Death Case Supreme Court On Dowry Death Cases सुप्रीम कोर्ट दहेज केस पटना हाई कोर्ट
