India-EU FTA: 20 साल से अटका 'सभी सौदों का बाप' मुकाम तक कैसे पहुंचा? भारत के लिए ट्रंप और चीन ने कर दिया काम

भारत-ईयू एफटीए News

India-EU FTA: 20 साल से अटका 'सभी सौदों का बाप' मुकाम तक कैसे पहुंचा? भारत के लिए ट्रंप और चीन ने कर दिया काम
डोनाल्‍ड ट्रंपभारत-यूरोपीय संघ व्‍यापार समझौतासभी सौदों का बाप
  • 📰 NBT Hindi News
  • ⏱ Reading Time:
  • 278 sec. here
  • 15 min. at publisher
  • 📊 Quality Score:
  • News: 146%
  • Publisher: 51%

India-EU FTA: यूरोपीय संघ और भारत एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते के कगार पर हैं, जिसे 'सभी सौदों का बाप' कहा जा रहा है। यह समझौता दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ लाएगा और चीन पर निर्भरता कम करेगा। यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियों के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता...

नई दिल्ली: यूरोपीय संघ और भारत एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते के मुहाने पर खड़े हैं। इसे यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन ने ' सभी सौदों का बाप ' कहा है। यह समझौता दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था को दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यापारिक गुटों में से एक से जोड़ता है। इस पर दोनों पक्ष लगभग दो दशकों से काम कर रहे हैं। यह समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत के साथ व्यापार सौदे की कोशिशों से बिल्कुल अलग है जो काफी जल्दबाजी में दिख रही है। जहां ईयू-भारत एफटीए पर लगभग 20 साल से बातचीत चल रही है। वहीं, भारत-अमेरिका व्यापार सौदे पर बातचीत फरवरी 2025 में शुरू हुई। लेकिन, व्हाइट हाउस पहले से ही अधीर हो गया है।दो दशकों की यात्रा और ऐतिहासिक मुकामभारत और यूरोपीय संघ के बीच इस महत्वपूर्ण व्यापार समझौते पर सहमति बनने के पीछे कई कारण हैं। इसमें दोनों पक्षों की ओर से राजनीतिक इच्छाशक्ति का नवीनीकरण, लगातार उच्च-स्तरीय बातचीत और बदलती वैश्विक भू-राजनीति का बड़ा योगदान है। 2013 में बातचीत रुकने के बाद जून 2022 में वैश्विक व्यापार और सुरक्षा की बदलती गतिशीलता के कारण इसमें फिर से जान फूंकी गई। ट्रंप प्रशासन की संरक्षणवादी व्यापार नीतियों ने भी इस समझौते को और ज्‍यादा जरूरी बना दिया। कारण है कि इसने पारंपरिक अमेरिकी व्यापार भागीदारों को वैकल्पिक बाजारों की तलाश करने के लिए मजबूर किया। अमेरिका की ओर से भारत से सभी आयात पर 50% टैरिफ और ईयू से आयात पर 20% बेसलाइन टैरिफ, साथ ही ईयू के स्टील और एल्यूमीनियम आयात पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाने के बाद भारत ने ईयू के साथ कृषि क्षेत्र पर समझौता किए बिना एफटीए को आगे बढ़ाने का फैसला किया। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक साफ मैसेज था कि भारत अपने मुख्य हितों से समझौता नहीं करेगा।चीन का बढ़ता दबदबा भी दोनों पक्षों के बीच बातचीत का महत्वपूर्ण फैक्‍टर रहा। भारतीय उद्योगों, जैसे सौर घटक निर्माण, को चीन के सस्ते उत्पादों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा था। वहीं, ईयू भी चीन की मैन्‍युफैक्‍चरिंग में बढ़ते दबदबे को लेकर चिंतित था। इससे उसके स्थानीय उद्योगों को नुकसान हो रहा था। इन साझा चिंताओं ने दोनों देशों को एक साथ आने के लिए प्रेरित किया।2025 में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन की भारत यात्रा के बाद इस प्रक्रिया में तेजी आई। उन्होंने अपने पूरे कमिश्नरों के साथ भारत का दौरा किया। साल के अंत तक बातचीत पूरी करने का संकल्प लिया। तब से 14 से ज्‍यादा वार्ता दौर, मंत्रिस्तरीय स्तर के हस्तक्षेप और बाजार पहुंच और सेवाओं में अंतर को कम करने के प्रयासों ने इस सौदे को आगे बढ़ाया है। भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की जनवरी 2026 में ब्रुसेल्स की यात्रा भी इसमें मील का पत्थर साबित हुई।फायदे ही फायदेईयू-भारत एफटीए दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ लेकर आएगा। दोनों देशों के बीच पहले से ही मजबूत वाणिज्यिक संबंध हैं। वित्तीय वर्ष 2024 में द्विपक्षीय व्यापार 135 अरब डॉलर था।भारत के लिए फायदे- विस्तृत बाजार तक पहुंच: भारत को 27 ईयू देशों के विशाल और स्थिर बाजार तक पहुंच मिलेगी, जिससे फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।- वैकल्पिक बाजार: अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित भारत के श्रम-गहन उद्योगों, जैसे कपड़ा, आभूषण और चमड़े के सामान, को एक नया और प्रतिस्पर्धी बाजार मिलेगा। उदाहरण के लिए, भारतीय वस्त्रों पर ईयू में 10% टैरिफ है, जबकि बांग्लादेशी वस्त्रों के लिए यह शून्य है। एफटीए इस बाधा को दूर करेगा।- आईटी सेवाओं और कुशल पेशेवरों के लिए अवसर: भारतीय आईटी सेवाओं के निर्यात और कुशल पेशेवरों की आवाजाही के लिए एक वैकल्पिक बाजार खुलेगा, जिससे अमेरिका पर निर्भरता कम होगी।- चीन पर निर्भरता में कमी: सप्‍लाई चेन में विविधता लाकर और आर्थिक लचीलापन बढ़ाकर चीन पर निर्भरता कम होगी।- रिन्‍यूएबल एनर्जी को बढ़ावा: चीनी उत्पादों की कम कीमतों से प्रतिस्पर्धा न कर पाने वाले भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा घटक उद्योगों के लिए एक अनुकूल बाजार मिलेगा।- रणनीतिक स्वायत्तता में बढ़ोतरी: व्यापार समझौतों के जरिये भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बढ़ाएगा और ग्‍लोबल वैल्‍यू चेन में इंटीग्रेट होगा।ईयू के लिए लाभ- बढ़ा हुआ निर्यात: टैरिफ में कमी से ईयू के पूंजीगत उद्योगों, जैसे विमान, ऑटोमोबाइल, विद्युत मशीनरी, पेय पदार्थ और रसायन को तेजी से बढ़ते भारतीय बाजार में निर्यात बढ़ाने का अवसर मिलेगा।- सप्‍लाई चेन डायवर्सिफिकेशन: चीन से सप्‍लाई चेन को अलग करके ईयू भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और रिन्‍यूएबल एनर्जी कम्‍पोनेंट्स के लिए वैकल्पिक विनिर्माण स्थलों के विकास में निवेश को बढ़ावा देगा।- आर्थिक विकास को मजबूती: निवेश, कम टैरिफ और यांत्रिक इंजीनियरिंग और वाहन जैसे क्षेत्रों के लिए सरलीकृत नियमों से ईयू के आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।- रणनीतिक साझेदारी का विस्तार: जलवायु, सुरक्षा और बहुपक्षीय व्यापार जैसे वैश्विक मुद्दों पर रणनीतिक साझेदारी मजबूत होगी, जिससे इंडो-पैसिफिक और ग्लोबल साउथ में ईयू का प्रभाव बढ़ेगा।ट्रंप के लिए के लिए झटका कैसे?ईयू-भारत एफटीए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' टैरिफ रणनीति के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। ट्रंप की ओर से भारत और ईयू दोनों पर लगाए गए टैरिफ और अन्य धमकियों के कारण दोनों पक्षों ने सप्‍लाई चेन में विविधता लाने और अमेरिका पर निर्भरता कम करने के लिए एफटीए को आगे बढ़ाने की जरूरत महसूस की।रणनीतिक रूप से यह एफटीए बहुध्रुवी व्‍यवस्‍था को तेज करता है। इंडो-पैसिफिक और ग्लोबल साउथ में ईयू-भारत सहयोग को मजबूत करता है। अप्रत्याशित अमेरिकी नीतियों के खिलाफ एक बचाव के रूप में काम करता है। इससे ट्रंप की ग्‍लोबल ताकत कमजोर हो सकती है। भारत का गणतंत्र दिवस समारोह इस वर्ष एक बड़े आर्थिक परिणाम का गवाह बनेगा। ईयू-भारत एफटीए वास्तव में ' सभी सौदों का बाप ' साबित होगा, जो दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को और भी मजबूती से एक साथ बांधेगा।यह समझौता न केवल आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह वैश्विक व्यापार परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव का भी संकेत देता है। यह दिखाता है कि देश अब केवल एक या दो प्रमुख शक्तियों पर निर्भर रहने के बजाय अपने व्यापारिक संबंधों में विविधता लाकर अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत कर रहे हैं। यह एक ऐसे युग की शुरुआत है जहां बहुध्रुवीय व्‍यवस्‍था और सहयोग को अधिक महत्व दिया जाएगा।.

नई दिल्ली: यूरोपीय संघ और भारत एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते के मुहाने पर खड़े हैं। इसे यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन ने ' सभी सौदों का बाप ' कहा है। यह समझौता दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था को दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यापारिक गुटों में से एक से जोड़ता है। इस पर दोनों पक्ष लगभग दो दशकों से काम कर रहे हैं। यह समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत के साथ व्यापार सौदे की कोशिशों से बिल्कुल अलग है जो काफी जल्दबाजी में दिख रही है। जहां ईयू-भारत एफटीए पर लगभग 20 साल से बातचीत चल रही है। वहीं, भारत-अमेरिका व्यापार सौदे पर बातचीत फरवरी 2025 में शुरू हुई। लेकिन, व्हाइट हाउस पहले से ही अधीर हो गया है।दो दशकों की यात्रा और ऐतिहासिक मुकामभारत और यूरोपीय संघ के बीच इस महत्वपूर्ण व्यापार समझौते पर सहमति बनने के पीछे कई कारण हैं। इसमें दोनों पक्षों की ओर से राजनीतिक इच्छाशक्ति का नवीनीकरण, लगातार उच्च-स्तरीय बातचीत और बदलती वैश्विक भू-राजनीति का बड़ा योगदान है। 2013 में बातचीत रुकने के बाद जून 2022 में वैश्विक व्यापार और सुरक्षा की बदलती गतिशीलता के कारण इसमें फिर से जान फूंकी गई। ट्रंप प्रशासन की संरक्षणवादी व्यापार नीतियों ने भी इस समझौते को और ज्‍यादा जरूरी बना दिया। कारण है कि इसने पारंपरिक अमेरिकी व्यापार भागीदारों को वैकल्पिक बाजारों की तलाश करने के लिए मजबूर किया। अमेरिका की ओर से भारत से सभी आयात पर 50% टैरिफ और ईयू से आयात पर 20% बेसलाइन टैरिफ, साथ ही ईयू के स्टील और एल्यूमीनियम आयात पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाने के बाद भारत ने ईयू के साथ कृषि क्षेत्र पर समझौता किए बिना एफटीए को आगे बढ़ाने का फैसला किया। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक साफ मैसेज था कि भारत अपने मुख्य हितों से समझौता नहीं करेगा।चीन का बढ़ता दबदबा भी दोनों पक्षों के बीच बातचीत का महत्वपूर्ण फैक्‍टर रहा। भारतीय उद्योगों, जैसे सौर घटक निर्माण, को चीन के सस्ते उत्पादों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा था। वहीं, ईयू भी चीन की मैन्‍युफैक्‍चरिंग में बढ़ते दबदबे को लेकर चिंतित था। इससे उसके स्थानीय उद्योगों को नुकसान हो रहा था। इन साझा चिंताओं ने दोनों देशों को एक साथ आने के लिए प्रेरित किया।2025 में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन की भारत यात्रा के बाद इस प्रक्रिया में तेजी आई। उन्होंने अपने पूरे कमिश्नरों के साथ भारत का दौरा किया। साल के अंत तक बातचीत पूरी करने का संकल्प लिया। तब से 14 से ज्‍यादा वार्ता दौर, मंत्रिस्तरीय स्तर के हस्तक्षेप और बाजार पहुंच और सेवाओं में अंतर को कम करने के प्रयासों ने इस सौदे को आगे बढ़ाया है। भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की जनवरी 2026 में ब्रुसेल्स की यात्रा भी इसमें मील का पत्थर साबित हुई।फायदे ही फायदेईयू-भारत एफटीए दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ लेकर आएगा। दोनों देशों के बीच पहले से ही मजबूत वाणिज्यिक संबंध हैं। वित्तीय वर्ष 2024 में द्विपक्षीय व्यापार 135 अरब डॉलर था।भारत के लिए फायदे- विस्तृत बाजार तक पहुंच: भारत को 27 ईयू देशों के विशाल और स्थिर बाजार तक पहुंच मिलेगी, जिससे फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।- वैकल्पिक बाजार: अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित भारत के श्रम-गहन उद्योगों, जैसे कपड़ा, आभूषण और चमड़े के सामान, को एक नया और प्रतिस्पर्धी बाजार मिलेगा। उदाहरण के लिए, भारतीय वस्त्रों पर ईयू में 10% टैरिफ है, जबकि बांग्लादेशी वस्त्रों के लिए यह शून्य है। एफटीए इस बाधा को दूर करेगा।- आईटी सेवाओं और कुशल पेशेवरों के लिए अवसर: भारतीय आईटी सेवाओं के निर्यात और कुशल पेशेवरों की आवाजाही के लिए एक वैकल्पिक बाजार खुलेगा, जिससे अमेरिका पर निर्भरता कम होगी।- चीन पर निर्भरता में कमी: सप्‍लाई चेन में विविधता लाकर और आर्थिक लचीलापन बढ़ाकर चीन पर निर्भरता कम होगी।- रिन्‍यूएबल एनर्जी को बढ़ावा: चीनी उत्पादों की कम कीमतों से प्रतिस्पर्धा न कर पाने वाले भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा घटक उद्योगों के लिए एक अनुकूल बाजार मिलेगा।- रणनीतिक स्वायत्तता में बढ़ोतरी: व्यापार समझौतों के जरिये भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बढ़ाएगा और ग्‍लोबल वैल्‍यू चेन में इंटीग्रेट होगा।ईयू के लिए लाभ- बढ़ा हुआ निर्यात: टैरिफ में कमी से ईयू के पूंजीगत उद्योगों, जैसे विमान, ऑटोमोबाइल, विद्युत मशीनरी, पेय पदार्थ और रसायन को तेजी से बढ़ते भारतीय बाजार में निर्यात बढ़ाने का अवसर मिलेगा।- सप्‍लाई चेन डायवर्सिफिकेशन: चीन से सप्‍लाई चेन को अलग करके ईयू भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और रिन्‍यूएबल एनर्जी कम्‍पोनेंट्स के लिए वैकल्पिक विनिर्माण स्थलों के विकास में निवेश को बढ़ावा देगा।- आर्थिक विकास को मजबूती: निवेश, कम टैरिफ और यांत्रिक इंजीनियरिंग और वाहन जैसे क्षेत्रों के लिए सरलीकृत नियमों से ईयू के आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।- रणनीतिक साझेदारी का विस्तार: जलवायु, सुरक्षा और बहुपक्षीय व्यापार जैसे वैश्विक मुद्दों पर रणनीतिक साझेदारी मजबूत होगी, जिससे इंडो-पैसिफिक और ग्लोबल साउथ में ईयू का प्रभाव बढ़ेगा।ट्रंप के लिए के लिए झटका कैसे?ईयू-भारत एफटीए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' टैरिफ रणनीति के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। ट्रंप की ओर से भारत और ईयू दोनों पर लगाए गए टैरिफ और अन्य धमकियों के कारण दोनों पक्षों ने सप्‍लाई चेन में विविधता लाने और अमेरिका पर निर्भरता कम करने के लिए एफटीए को आगे बढ़ाने की जरूरत महसूस की।रणनीतिक रूप से यह एफटीए बहुध्रुवी व्‍यवस्‍था को तेज करता है। इंडो-पैसिफिक और ग्लोबल साउथ में ईयू-भारत सहयोग को मजबूत करता है। अप्रत्याशित अमेरिकी नीतियों के खिलाफ एक बचाव के रूप में काम करता है। इससे ट्रंप की ग्‍लोबल ताकत कमजोर हो सकती है। भारत का गणतंत्र दिवस समारोह इस वर्ष एक बड़े आर्थिक परिणाम का गवाह बनेगा। ईयू-भारत एफटीए वास्तव में 'सभी सौदों का बाप' साबित होगा, जो दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को और भी मजबूती से एक साथ बांधेगा।यह समझौता न केवल आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह वैश्विक व्यापार परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव का भी संकेत देता है। यह दिखाता है कि देश अब केवल एक या दो प्रमुख शक्तियों पर निर्भर रहने के बजाय अपने व्यापारिक संबंधों में विविधता लाकर अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत कर रहे हैं। यह एक ऐसे युग की शुरुआत है जहां बहुध्रुवीय व्‍यवस्‍था और सहयोग को अधिक महत्व दिया जाएगा।

We have summarized this news so that you can read it quickly. If you are interested in the news, you can read the full text here. Read more:

NBT Hindi News /  🏆 20. in İN

डोनाल्‍ड ट्रंप भारत-यूरोपीय संघ व्‍यापार समझौता सभी सौदों का बाप भारत-ईयू एफटीए न्‍यूज India-Eu Fta Donald Trump India-European Union Trade Agreement Mother Of All Deals India-Eu Fta News

 

United States Latest News, United States Headlines

Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.

Breaking News LIVE Update: বিজেপির নতুন সভাপতি নীতিন নবীন! মাত্র ৪৫ বছর বয়সেই পদ্মচূড়ায়...Breaking News LIVE Update: বিজেপির নতুন সভাপতি নীতিন নবীন! মাত্র ৪৫ বছর বয়সেই পদ্মচূড়ায়...West bengal news live latest national breaking news today trending india news in bengali 20 January
Read more »

US-EU Tariff War India Gain: अमेरिका-ईयू में टैरिफ की जंग, भारत को बंपर फायदाUS-EU Tariff War India Gain: अमेरिका-ईयू में टैरिफ की जंग, भारत को बंपर फायदाIndia-EU FTA: ग्रीनलैंड पर कब्जे की मंशा के चलते अमेरिका के यूरोपीय संघ के बीच व्यापार विवाद में कड़वाहट आ रही है। इससे भारत के निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है और यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते को मजबूती मिल सकती है। यूरोपीय देशों पर अमेरिका द्वारा लगाया गया नया शुल्क यूरोपीय संघ को भारत जैसे स्थिर व्यापार साझेदारों की ओर धकेल सकता...
Read more »

‘Mother Of All Deals’: EU Chief On Trade Deal With India Ahead Of India-EU Summit‘Mother Of All Deals’: EU Chief On Trade Deal With India Ahead Of India-EU SummitAhead of the January 27 India-EU Summit in New Delhi, EU Commission President Ursula von der Leyen called the nearing EU-India free trade agreement the mother of all deals at Davos World Economic Forum.
Read more »

India-EU FTA: 'मदर ऑफ ऑल डील्स' की दहलीज पर भारत; 27 जनवरी को ऐतिहासिक समझौते के आसार, जानिए क्या फायदा होगा?India-EU FTA: 'मदर ऑफ ऑल डील्स' की दहलीज पर भारत; 27 जनवरी को ऐतिहासिक समझौते के आसार, जानिए क्या फायदा होगा?वैश्विक व्यापार में अनिश्चितताओं के बीच भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) एक &39;ऐतिहासिक व्यापार समझौते&39; के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने दावोस में विश्व आर्थिक
Read more »

India-EU FTA: 'मदर ऑफ ऑल डील्स' पर जल्द लगेगी मुहर! जानें कैसे बदलेगी भारत की व्यापार कहानीIndia-EU FTA: 'मदर ऑफ ऑल डील्स' पर जल्द लगेगी मुहर! जानें कैसे बदलेगी भारत की व्यापार कहानीIndia-EU Trade Deal: भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया अब फाइनल स्टेज में है. लगभग 20 साल चली बातचीत के बाद, दोनों पक्ष अब “मदर ऑफ ऑल डील्स” के करीब हैं. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने डावोस में कहा कि अंतिम चरण शेष है, लेकिन समझौता ऐतिहासिक होगा.
Read more »

ग्रीनलैंड पर ट्रंप को EU का सबसे बड़ा झटका, बंद होंगे 27 देशों के दरवाजे, भारत के लिए खत्म होगा 19 साल का इंतजार, मिलेगा 2 अरब लोगों का बाजारग्रीनलैंड पर ट्रंप को EU का सबसे बड़ा झटका, बंद होंगे 27 देशों के दरवाजे, भारत के लिए खत्म होगा 19 साल का इंतजार, मिलेगा 2 अरब लोगों का बाजारIndia-EU FTA: ग्रीनलैंड को पाने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जिद अब दो महाशक्तियों के बीच जंग का रूप लेने लगी है. अमेरिका और यूरोप आमने-सामने आ गए हैं.
Read more »



Render Time: 2026-04-02 18:23:53