India-EU FTA: 'मदर ऑफ ऑल डील्स' पर जल्द लगेगी मुहर! जानें कैसे बदलेगी भारत की व्यापार कहानी

India-EU FTA News

India-EU FTA: 'मदर ऑफ ऑल डील्स' पर जल्द लगेगी मुहर! जानें कैसे बदलेगी भारत की व्यापार कहानी
India-EU Free Trade AgreementFta DealIndia-European Uniontrade Deal
  • 📰 News18 India
  • ⏱ Reading Time:
  • 320 sec. here
  • 18 min. at publisher
  • 📊 Quality Score:
  • News: 169%
  • Publisher: 51%

India-EU Trade Deal: भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया अब फाइनल स्टेज में है. लगभग 20 साल चली बातचीत के बाद, दोनों पक्ष अब “मदर ऑफ ऑल डील्स” के करीब हैं. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने डावोस में कहा कि अंतिम चरण शेष है, लेकिन समझौता ऐतिहासिक होगा.

India-EU FTA: भारत और यूरोपीय संघ के बीच होने वाली ट्रेड डील पर दुनियाभर की नजरें टिकी हैं. दोनों देश इस ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बहुत करीब हैं. भारत और यूरोपीय संघ के बीच लगभग 20 साल से बातचीत चल रही है, लेकिन अब तक यह बातचीत कभी इतने ऊपर स्तर तक नहीं पहुंची जैसी अब देखी जा रही है.

डावोस में वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम में यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि दोनों पक्ष अब अंतिम चरण के करीब हैं. उन्होंने कहा, “अभी भी काम बाकी है, लेकिन हम ऐतिहासिक व्यापार समझौते की कगार पर हैं. कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कह रहे हैं.” उनके बयान से न केवल इस साझेदारी के महत्व को समझा जा सकता है बल्कि यह भी स्पष्ट होता है कि फिलहाल जियो-पॉलिटिकल हालात में यह बातचीत तेजी से आगे बढ़ी है. यूरोपीय संघ पहले ही भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है, और प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट केवल टैरिफ कटौती तक सीमित नहीं है. इसका उद्देश्य सामान, सर्विसेस, निवेश, स्टैंडर्ड्स और नई तकनीकों में सहयोग के लिए एक बेहतर और स्थिर माहौल तैयार करना है. इस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ-केंद्रित नीति की वजह से भारत को अमेरिका के साथ बढ़ती व्यापारिक असहमति का भी सामना करना पड़ रहा है. भारत–ईयू शिखर सम्मेलन 27 जनवरी को होने वाला है, और इस अवसर से पहले दोनों पक्ष के नेगोशिएटर ऐसे तेज़ी से शेष अध्यायों को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं, जो एक दशक पहले असंभव लगती. ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ क्यों कहा जा रहा है? भारत–ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट अपनी विशालता के कारण बेमिसाल है. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन ने इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा है, क्योंकि यह समझौता लगभग 2 अरब लोगों के संयुक्त बाज़ार और विश्व GDP के लगभग एक-चौथाई हिस्से को कवर करता है. व्यापार मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस समझौते के महत्व पर जोर दिया है. उन्होंने कहा, “अब तक हमने सात विकसित देशों के साथ FTA किए हैं. यह सबसे बड़ा होगा. यह दुनिया की दो सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्थाओं को कवर करेगा.” इस समझौते की खासियत इसकी व्यापकता है. टैरिफ कटौती के अलावा, इसमें सेवाओं, तकनीकी सहयोग, नियामक मानकों, डिजिटल नियमों और निवेश सुरक्षा पर भी सहयोग शामिल है. जैसे-जैसे वैश्विक सप्लाई चेन रिऑर्गेनाइज्ड हो रही है, यह डील दोनों पक्षों को नए व्यापार और प्रोडक्शन लिंक के केंद्र में स्थापित करेगी. पहली कोशिश 2007 में हुई थी, तब इसे ब्रॉड-बेस्ड ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट एग्रीमेंट कहा जाता था. 2007 से 2013 के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन टैरिफ, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी, डेटा सुरक्षा, श्रम और पर्यावरण मानक, और बाज़ार में पहुंच को लेकर मतभेदों के कारण यह प्रक्रिया ठप हो गई. लंबे समय तक धीमी प्रगति के बाद, 2022 में वार्ता फिर से शुरू हुई. महामारी के दौरान सप्लाई चेन में व्यवधान और बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता ने दोनों पक्षों को पुराने मुद्दों पर फिर से विचार करने के लिए प्रेरित किया. इस नई प्रक्रिया में भारत–ईयू ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल के तहत समानांतर बातचीत ने मदद की, जिससे डिजिटल स्टैंडर्ड और तकनीकी नीतियों से जुड़े मुद्दों को तेजी से हल किया जा सका. रिपोर्ट्स के अनुसार, 24 में से 20 वार्ता अध्याय पहले ही बंद हो चुके हैं. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भी इस प्रगति को साझा किया, कहा कि “हम उम्मीद करते हैं कि वार्ता को समाप्त कर समझौता तैयार किया जाएगा,” और अंतिम चरण निर्णायक होंगे. भारत के लिए यह मौका क्यों बहुत खास है? भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध हाल के सालों में तनावपूर्ण होते जा रहे हैं. कृषि क्षेत्र, खासकर अमेरिकी दालों को लेकर विवाद बार-बार उभरते रहे हैं. अमेरिकी सांसद भारत से टैरिफ कम करने का दबाव डाल रहे हैं, लेकिन दिल्ली ने अपने किसानों की सुरक्षा को ‘रेड लाइन’ माना है. इसके अलावा, भारत के ईरान से ऊर्जा संबंधों को लेकर भी 25% टैरिफ की चेतावनी जैसे मुद्दे उठाए गए हैं, जिससे चाय, बासमती चावल और अन्य निर्यातकों में असुरक्षा पैदा हुई है. इन तनावों के कारण भारत–अमेरिका के बीच कोई ठोस व्यापार समझौते में प्रगति धीमी रही है. ऐसे समय में यूरोपीय संघ भारत के लिए एक स्थिर और नियम-आधारित साझेदार के रूप में सामने आता है, खासकर जब भारत अपनी बाहरी आर्थिक साझेदारियों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में भारत और EU के बीच वस्तुओं का व्यापार €120 बिलियन तक पहुंच गया, जबकि भारत के आंकड़ों के अनुसार 2024–25 में निर्यात $75.85 बिलियन और आयात $60.68 बिलियन रहा. इसके अलावा, IT और डिजिटल सेवाओं के कारण सेवाओं का व्यापार लगभग €60 बिलियन अनुमानित है. भारत और EU दोनों को मिलेंगे फायदे ग्लोबल प्रोटेक्शन बढ़ते समय, भारत–EU समझौता भारत को बड़े पैमाने, बाज़ार सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन प्रदान करता है. ये सभी लंबे समय तक भारत की व्यापार नीति के अनुरूप हैं. भारत को क्या लाभ होगा? सबसे तुरंत लाभ लेबर इंटेंसिव सेक्टर को मिलेगा. टेक्सटाइल, कपड़े, चमड़े के सामान और समुद्री उत्पाद जैसे निर्यात वर्तमान में EU में 2–12% टैरिफ के अधीन हैं. शुल्क में कमी या समाप्ति से भारत के निर्यातकों की कॉम्टिशन बढ़ेगा. अधिक मूल्य वाले सेक्टर जैसे फार्मास्यूटिकल्स और रसायन उद्योग को फायदे होंगे. रेगुलेटरी ट्रैक और मानकों की मान्यता से जेनेरिक दवाइयां और स्पेशलिटी केमिकल्स यूरोपीय बाजार में तेज़ी से प्रवेश कर पाएंगे. मशीनरी, पेट्रोलियम उत्पाद और इलेक्ट्रिकल उपकरण पहले ही यूरोप में अच्छी स्थिति में हैं, और टैरिफ में कमी इसे और मजबूत करेगी. उन्नत निर्माण और यूरोपीय कंपनियों के चीन से बाहर आपूर्ति श्रृंखलाओं की तलाश से भी अवसर बढ़ेंगे. भारत ने कृषि और डेयरी क्षेत्रों में अपनी कड़ी स्थिति बरकरार रखी है. समझौते की प्रारंभिक रूपरेखा से स्पष्ट है कि संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को खोलने की आवश्यकता नहीं है, जिससे घरेलू किसानों की सुरक्षा बनी रहती है. कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज़्म का मसला अभी सुलझा नहीं है. CBAM कुछ आयातों पर 20–35% अतिरिक्त लागत लगाता है, जो भारतीय इस्पात, एल्यूमिनियम और सीमेंट निर्यात को प्रभावित कर सकता है. भारत अस्थायी व्यवस्था या छूट पर बातचीत कर रहा है. स्किल्ड वर्कर्स की मोबिलिटी भी एक अहम प्राथमिकता है. हालांकि कई EU देशों में यह राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, बेहतर स्टक्चर भारत के IT, इंजीनियरिंग और पेशेवर सेवाओं के क्षेत्र में लाभ देगा. EU को क्या लाभ होगा? EU इस समझौते को चीन पर अधिक निर्भरता कम करने और बड़े, हाई डेवेलोप वाले बाजार के साथ संबंध गहरा करने की रणनीति का हिस्सा मानता है. यूरोपीय वाइन, स्पिरिट्स और लक्ज़री कार निर्माताओं को बेहतर बाजार पहुंच मिलेगी. मशीनरी, रसायन, चिकित्सा से जुड़े सामानों और इंडस्ट्रियल सामानों के एक्सपोर्ट के रेगुलेशन में आसानी और टैरिफ में कमी से फायदा होगा. सिर्फ़ व्यापार नहीं, बल्कि EU भारत में ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और हाई निर्माण में निवेश भी बढ़ाएगा. 2000 से अब तक यूरोपीय कंपनियों ने भारत में $117 बिलियन से अधिक निवेश किया है, और यह समझौता इसे और तेज़ करेगा. क्यों यह भारत के लिए गेम चेंजर हो सकता है? यदि यह समझौता निष्कर्ष पर पहुंचता है, तो यह भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल देगा. यह भारत को दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक ब्लॉक से जोड़ेगा, बढ़ते टैरिफ दबाव के समय बाज़ार सुरक्षा देगा और भारतीय कंपनियों को वैश्विक सप्लाई लिस्ट में गहराई से शामिल करेगा. व्यापार सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा है कि भारत “अंतिम चरण के बहुत करीब” है. चाहे यह समझौता आगामी शिखर सम्मेलन में घोषित हो या उसके तुरंत बाद अंतिम रूप ले, यह भारत–EU आर्थिक रिश्तों में एक खास कदम होगा और आने वाले सालों में दोनों पक्षों के व्यापार और निवेश संरचना को नया आकार देने की संभावना रखता है.

We have summarized this news so that you can read it quickly. If you are interested in the news, you can read the full text here. Read more:

News18 India /  🏆 21. in İN

India-EU Free Trade Agreement Fta Deal India-European Uniontrade Deal India EU Free Trade Agreement India EU Trade Deal India EU FTA India EU Economic Partnership India EU Trade Negotiations India EU Tariff Reduction India EU Investment India EU Strategic Partnership

 

United States Latest News, United States Headlines

Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.

India-EU FTA: भारत 18 साल से कर रहा था कोशिश, अब अंजाम बहुत करीब, क‍िस बात का अभी भी सता रहा डर?India-EU FTA: भारत 18 साल से कर रहा था कोशिश, अब अंजाम बहुत करीब, क‍िस बात का अभी भी सता रहा डर?India-EU Free Trade Agreement: भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच जल्द ही एक बड़ा मुक्त व्यापार समझौता होने वाला है। यह समझौता दोनों पक्षों के लिए आर्थिक विकास के नए अवसर खोलेगा। इसमें वस्तुओं, सेवाओं और व्यापार नियमों को शामिल किया जाएगा। कुछ अनसुलझे मुद्दे समझौते के अंतिम स्वरूप को तय...
Read more »

US-EU Tariff War India Gain: अमेरिका-ईयू में टैरिफ की जंग, भारत को बंपर फायदाUS-EU Tariff War India Gain: अमेरिका-ईयू में टैरिफ की जंग, भारत को बंपर फायदाIndia-EU FTA: ग्रीनलैंड पर कब्जे की मंशा के चलते अमेरिका के यूरोपीय संघ के बीच व्यापार विवाद में कड़वाहट आ रही है। इससे भारत के निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है और यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते को मजबूती मिल सकती है। यूरोपीय देशों पर अमेरिका द्वारा लगाया गया नया शुल्क यूरोपीय संघ को भारत जैसे स्थिर व्यापार साझेदारों की ओर धकेल सकता...
Read more »

‘Mother Of All Deals’: EU Chief On Trade Deal With India Ahead Of India-EU Summit‘Mother Of All Deals’: EU Chief On Trade Deal With India Ahead Of India-EU SummitAhead of the January 27 India-EU Summit in New Delhi, EU Commission President Ursula von der Leyen called the nearing EU-India free trade agreement the mother of all deals at Davos World Economic Forum.
Read more »

India-EU FTA: 'मदर ऑफ ऑल डील्स' की दहलीज पर भारत; 27 जनवरी को ऐतिहासिक समझौते के आसार, जानिए क्या फायदा होगा?India-EU FTA: 'मदर ऑफ ऑल डील्स' की दहलीज पर भारत; 27 जनवरी को ऐतिहासिक समझौते के आसार, जानिए क्या फायदा होगा?वैश्विक व्यापार में अनिश्चितताओं के बीच भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) एक &39;ऐतिहासिक व्यापार समझौते&39; के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने दावोस में विश्व आर्थिक
Read more »

India EU Trade Deal: 27 को होगा सबसे बड़ा सौदा, 2000000000 लोगों के लिए बनेगा बाजार, भारत-ईयू के बीच ट्रेड डील खास क्यों?India EU Trade Deal: 27 को होगा सबसे बड़ा सौदा, 2000000000 लोगों के लिए बनेगा बाजार, भारत-ईयू के बीच ट्रेड डील खास क्यों?India EU FTA Deal: भारत और ईयू एक एफटीए डील के करीब हैं। माना जा रहा है कि यह डील 27 जनवरी को हो सकती है। ईयू के मुताबिक इससे 2 अरब लोगों के लिए बाजार बनेगा।
Read more »

India-EU Trade Deal: ट्रंप टैरिफ गेम में उलझे, इधर भारत ने कर दिया खेल... होने वाली है सबसे बड़ी डील!India-EU Trade Deal: ट्रंप टैरिफ गेम में उलझे, इधर भारत ने कर दिया खेल... होने वाली है सबसे बड़ी डील!Donald Trump का टैरिफ बम फोड़ने में व्यस्त हैं, तो वहीं भारत लगातार नए व्यापार समझौतों को अंजाम तक पहुंचाने में लगा हुए हैं. अब India-EU FTA को लेकर बड़े संकेत मिले है और यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर ने इसे सबसे बड़ी डील बताया है.
Read more »



Render Time: 2026-04-02 20:10:58