हनुमान जन्मोत्सव पर बजरंगबली की पूजा के दौरान किन बातों का ध्यान रखें? पढ़ें महिलाओं के लिए पूजा के विशेष नियम, प्रिय भोग और पूजा विधि में क्या करें क्या न करें।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। 2 अप्रैल 2026 को हम सभी संकट मोचन हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाने जा रहे हैं। बजरंगबली की भक्ति में इतनी शक्ति है कि जो एक बार उनके चरणों में झुक गया, उसके जीवन के सारे संकट पल भर में दूर हो जाते हैं। अक्सर हम जोश और उत्साह में पूजा तो करते हैं, लेकिन कुछ ऐसी बारीक गलतियां कर बैठते हैं जिससे हमें पूजा का पूरा फल नहीं मिल पाता। शास्त्रों में हनुमान जी की पूजा के कुछ खास नियम बताए गए हैं, खासकर महिलाओं के लिए और पूजा सामग्री को लेकर। आइए जानते हैं कि इस दिन आपको क्या करना चाहिए और किन बातों से बचना चाहिए। हनुमान जन्मोत्सव: क्या करें सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और बजरंगबली के प्रिय लाल या पीले रंग के वस्त्र पहनें। अगर आप व्रत रख रहे हैं, तो हाथ में जल लेकर शुद्ध मन से व्रत का संकल्प लें। हनुमान जी को बेसन के लड्डू, केला, गुड़ और भुने हुए चने का भोग जरूर लगाएं। इस दिन कम से कम एक बार हनुमान चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। बजरंगबली को मीठा पान अर्पित करें, इससे संकट दूर होते हैं। हनुमान जी को चमेली के तेल में मिला हुआ सिंदूर चढ़ाएं, यह आत्मविश्वास बढ़ाता है। 108 तुलसी के पत्तों पर 'राम' लिखकर उनकी माला बनाकर अर्पित करें। इस पूरे दिन मन, वचन और कर्म से ब्रह्मचर्य का सख्ती से पालन करें। हनुमान जन्मोत्सव पर क्या न करें महिलाओं को हनुमान जी की मूर्ति को स्पर्श नहीं करना चाहिए, क्योंकि वे बाल ब्रह्मचारी हैं। महिलाएं सीधे तौर पर वस्त्र, जनेऊ या चोला अर्पित न करें, इसके लिए घर के किसी पुरुष की सहायता लें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाओं को हनुमान जी की पूजा में बजरंगबाण का पाठ नहीं करना चाहिए। पूजा के दिन किसी के प्रति मन में क्रोध, ईर्ष्या या बुरे विचार न लाएं। इस पावन दिन पर मांस-मदिरा या तामसिक भोजन का सेवन भूलकर भी न करें। इन नियमों और परंपराओं का आधार 'शिव पुराण' और 'स्कंद पुराण' जैसे ग्रंथ हैं। शास्त्रों के अनुसार, हनुमान जी ने प्रभु राम के प्रति अपना प्रेम और समर्पण दिखाने के लिए अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगाया था, इसीलिए उन्हें 'चोला' चढ़ाने की परंपरा है। 'धर्म सिंधु' जैसे ग्रंथों में भी व्रत के संकल्प और पूजा की शुद्धता पर जोर दिया गया है। यह भी पढ़ें- हनुमान जन्मोत्सव पर भूलकर भी इस समय न करें सुंदरकांड का पाठ, पहले जान लें सही नियम और विधि यह भी पढ़ें- Hanuman Janmotsav 2026 : 2 अप्रैल को हनुमान जी को चढ़ाएं ये 5 प्रिय भोग, पार लग जाएगी डूबती नैया अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।.
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। 2 अप्रैल 2026 को हम सभी संकट मोचन हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाने जा रहे हैं। बजरंगबली की भक्ति में इतनी शक्ति है कि जो एक बार उनके चरणों में झुक गया, उसके जीवन के सारे संकट पल भर में दूर हो जाते हैं। अक्सर हम जोश और उत्साह में पूजा तो करते हैं, लेकिन कुछ ऐसी बारीक गलतियां कर बैठते हैं जिससे हमें पूजा का पूरा फल नहीं मिल पाता। शास्त्रों में हनुमान जी की पूजा के कुछ खास नियम बताए गए हैं, खासकर महिलाओं के लिए और पूजा सामग्री को लेकर। आइए जानते हैं कि इस दिन आपको क्या करना चाहिए और किन बातों से बचना चाहिए। हनुमान जन्मोत्सव: क्या करें सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और बजरंगबली के प्रिय लाल या पीले रंग के वस्त्र पहनें। अगर आप व्रत रख रहे हैं, तो हाथ में जल लेकर शुद्ध मन से व्रत का संकल्प लें। हनुमान जी को बेसन के लड्डू, केला, गुड़ और भुने हुए चने का भोग जरूर लगाएं। इस दिन कम से कम एक बार हनुमान चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। बजरंगबली को मीठा पान अर्पित करें, इससे संकट दूर होते हैं। हनुमान जी को चमेली के तेल में मिला हुआ सिंदूर चढ़ाएं, यह आत्मविश्वास बढ़ाता है। 108 तुलसी के पत्तों पर 'राम' लिखकर उनकी माला बनाकर अर्पित करें। इस पूरे दिन मन, वचन और कर्म से ब्रह्मचर्य का सख्ती से पालन करें। हनुमान जन्मोत्सव पर क्या न करें महिलाओं को हनुमान जी की मूर्ति को स्पर्श नहीं करना चाहिए, क्योंकि वे बाल ब्रह्मचारी हैं। महिलाएं सीधे तौर पर वस्त्र, जनेऊ या चोला अर्पित न करें, इसके लिए घर के किसी पुरुष की सहायता लें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाओं को हनुमान जी की पूजा में बजरंगबाण का पाठ नहीं करना चाहिए। पूजा के दिन किसी के प्रति मन में क्रोध, ईर्ष्या या बुरे विचार न लाएं। इस पावन दिन पर मांस-मदिरा या तामसिक भोजन का सेवन भूलकर भी न करें। इन नियमों और परंपराओं का आधार 'शिव पुराण' और 'स्कंद पुराण' जैसे ग्रंथ हैं। शास्त्रों के अनुसार, हनुमान जी ने प्रभु राम के प्रति अपना प्रेम और समर्पण दिखाने के लिए अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगाया था, इसीलिए उन्हें 'चोला' चढ़ाने की परंपरा है। 'धर्म सिंधु' जैसे ग्रंथों में भी व्रत के संकल्प और पूजा की शुद्धता पर जोर दिया गया है। यह भी पढ़ें- हनुमान जन्मोत्सव पर भूलकर भी इस समय न करें सुंदरकांड का पाठ, पहले जान लें सही नियम और विधि यह भी पढ़ें- Hanuman Janmotsav 2026: 2 अप्रैल को हनुमान जी को चढ़ाएं ये 5 प्रिय भोग, पार लग जाएगी डूबती नैया अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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