Ghaziabad AQI: गाजियाबाद में सांस लेना भी मुश्किल, प्रदूषण स्तर पहली बार गंभीर श्रेणी में, लोनी का AQI 449 पर

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Ghaziabad AQI: गाजियाबाद में सांस लेना भी मुश्किल, प्रदूषण स्तर पहली बार गंभीर श्रेणी में, लोनी का AQI 449 पर
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Ghaziabad Air Pollution: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में वायु प्रदूषण की स्थिति बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। दिल्ली-एनसीआर से सटा गाजियाबाद खराब एक्यूआई के मामले में लगातार पहले या दूसरे नंबर पर रह रहा है।

गाजियाबाद: दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की स्थिति हर दिन बद से बदतर होती जा रही है और अब गाजियाबाद की हवा ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। जिले का प्रदूषण स्तर पहली बार सीवियर कैटिगरी में पहुंच गया है, जो बेहद खतरनाक माना जाता है। रविवार को गाजियाबाद का एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 419 दर्ज किया गया, जो चिंताजनक स्तर है। बीते 10 दिनों से जिले की हवा लगातार 300 के खतरनाक स्तर से ऊपर बनी हुई थी।शनिवार को यह अधिकतम 392 रिकॉर्ड किया गया था, लेकिन रविवार को इसने 400 का आंकड़ा भी पार कर गया। इन आंकड़ों के साथ गाजियाबाद देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। यह स्थिति तब और बिगड़ जाती है, जब हम देखते हैं कि गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा का AQI 419 बराबर दर्ज किया गया। देश में सबसे ज्यादा एक्यूआई बहादुरगढ़ का रहा, जो 439 दर्ज किया गया।इसलिए बढ़ रहा प्रदूषणविशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण के इस तरह अचानक बढ़ने का मुख्य कारण हवा की गति का थम जाना है। हवा न चलने की वजह से धूल, धुआं और अन्य प्रदूषण कण एक ही जगह जमा हो रहे हैं और ऊपर नहीं उठ पा रहे। इससे अगले कुछ दिनों तक हालात और खराब बने रहने की आशंका है। अगर आने वाले दिनों में हवा चलती है, तो बढ़े हुए प्रदूषण से थोड़ी-बहुत राहत मिल सकती है, लेकिन जब तक ऐसा नहीं होता, लोगों को घर से बाहर निकलते समय विशेष सावधानी बरतनी होगी।यह है एक्यआई की सीवियर कैटिगरीएक्यूआई का 401 से 500 के बीच होना सीवियर यानी गंभीर कैटिगरी कहलाता है। इस स्थिति में स्वस्थ लोगों को भी सांस लेने में दिक्कत, आखों मे जलन और फेफड़ों से जुड़ी गभीर बीमारियां होने का खतरा रहता है। हृदय और फेफड़ों की बीमारी वाले लोगों के लिए यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है। इस दौरान लोगों को घर के अदर रहने और बाहरी गतिविधियों से बचने की सलाह दी जाती है।शहर के प्रमुख इलाकों का हालपूरे गाजियाबाद जिले में प्रदूषण का स्तर बहुत ऊंचा रहा। कुछ प्रमुख इलाकों में तो स्थिति और भी गंभीर रही। लोनी इलाके का एक्यूआई 449 रिकॉर्ड किया गया, जो जिले में सबसे ज्यादा रहा, जबकि सजय नगर में यह 409 दर्ज किया गया। इन दोनों ही जगहों पर हवा की गुणवत्ता 'सीवियर' कैटेगरी में रही। तुलनात्मक रूप से इंदिरापुरम में एक्यूआई 386 रहा, जो कि बहुत खराब कैटेगरी में आता है, लेकिन यह भी स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। वसुंधरा इलाके का डेटा रविवार को जारी नहीं किया गया। शनिवार को यह अधिकतम 392 रेकॉर्ड किया गया था, रविवार को इसने 400 का आंकड़ा भी पार कर दिया। वसुंधरा में सेक्टर-5 में एक ट्रैक्टर में सीएंडडी वेस्ट ढोए जाने पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।बारिश से ही मिल सकती है राहतपर्यावरणविद आकाश वशिष्ठ की माने तो प्रदूषण से तुरत राहत तेज हवा चले या फिर बारिश हो जाए। तेज हवा प्रदूषण के कणों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाती है, जिससे स्थानीय प्रदूषण का स्तर कम हो जाता है। वहीं, बारिश होने पर ये कण धुलकर जमीन पर बैठ जाते है, जिससे हवा साफ हो जाती है। जब तक मौसम साथ नहीं देता, तब तक प्रशासन को कूड़ा जलाने और निर्माण गतिविधियों पर रोक लगानी होगी।.

गाजियाबाद: दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की स्थिति हर दिन बद से बदतर होती जा रही है और अब गाजियाबाद की हवा ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। जिले का प्रदूषण स्तर पहली बार सीवियर कैटिगरी में पहुंच गया है, जो बेहद खतरनाक माना जाता है। रविवार को गाजियाबाद का एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 419 दर्ज किया गया, जो चिंताजनक स्तर है। बीते 10 दिनों से जिले की हवा लगातार 300 के खतरनाक स्तर से ऊपर बनी हुई थी।शनिवार को यह अधिकतम 392 रिकॉर्ड किया गया था, लेकिन रविवार को इसने 400 का आंकड़ा भी पार कर गया। इन आंकड़ों के साथ गाजियाबाद देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। यह स्थिति तब और बिगड़ जाती है, जब हम देखते हैं कि गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा का AQI 419 बराबर दर्ज किया गया। देश में सबसे ज्यादा एक्यूआई बहादुरगढ़ का रहा, जो 439 दर्ज किया गया।इसलिए बढ़ रहा प्रदूषणविशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण के इस तरह अचानक बढ़ने का मुख्य कारण हवा की गति का थम जाना है। हवा न चलने की वजह से धूल, धुआं और अन्य प्रदूषण कण एक ही जगह जमा हो रहे हैं और ऊपर नहीं उठ पा रहे। इससे अगले कुछ दिनों तक हालात और खराब बने रहने की आशंका है। अगर आने वाले दिनों में हवा चलती है, तो बढ़े हुए प्रदूषण से थोड़ी-बहुत राहत मिल सकती है, लेकिन जब तक ऐसा नहीं होता, लोगों को घर से बाहर निकलते समय विशेष सावधानी बरतनी होगी।यह है एक्यआई की सीवियर कैटिगरीएक्यूआई का 401 से 500 के बीच होना सीवियर यानी गंभीर कैटिगरी कहलाता है। इस स्थिति में स्वस्थ लोगों को भी सांस लेने में दिक्कत, आखों मे जलन और फेफड़ों से जुड़ी गभीर बीमारियां होने का खतरा रहता है। हृदय और फेफड़ों की बीमारी वाले लोगों के लिए यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है। इस दौरान लोगों को घर के अदर रहने और बाहरी गतिविधियों से बचने की सलाह दी जाती है।शहर के प्रमुख इलाकों का हालपूरे गाजियाबाद जिले में प्रदूषण का स्तर बहुत ऊंचा रहा। कुछ प्रमुख इलाकों में तो स्थिति और भी गंभीर रही। लोनी इलाके का एक्यूआई 449 रिकॉर्ड किया गया, जो जिले में सबसे ज्यादा रहा, जबकि सजय नगर में यह 409 दर्ज किया गया। इन दोनों ही जगहों पर हवा की गुणवत्ता 'सीवियर' कैटेगरी में रही। तुलनात्मक रूप से इंदिरापुरम में एक्यूआई 386 रहा, जो कि बहुत खराब कैटेगरी में आता है, लेकिन यह भी स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। वसुंधरा इलाके का डेटा रविवार को जारी नहीं किया गया। शनिवार को यह अधिकतम 392 रेकॉर्ड किया गया था, रविवार को इसने 400 का आंकड़ा भी पार कर दिया। वसुंधरा में सेक्टर-5 में एक ट्रैक्टर में सीएंडडी वेस्ट ढोए जाने पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।बारिश से ही मिल सकती है राहतपर्यावरणविद आकाश वशिष्ठ की माने तो प्रदूषण से तुरत राहत तेज हवा चले या फिर बारिश हो जाए। तेज हवा प्रदूषण के कणों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाती है, जिससे स्थानीय प्रदूषण का स्तर कम हो जाता है। वहीं, बारिश होने पर ये कण धुलकर जमीन पर बैठ जाते है, जिससे हवा साफ हो जाती है। जब तक मौसम साथ नहीं देता, तब तक प्रशासन को कूड़ा जलाने और निर्माण गतिविधियों पर रोक लगानी होगी।

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