पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर हो गई है कि वो अपने सैनिक इजरायल को बेचने की कोशिश कर रहा है. हालांकि इजरायल ज्यादा कीमत देने को तैयार नहीं है.
Pakistan i Army On Sale: एक मशहूर पंक्ति है कि अगर मूल्य सही हो तो हर चीज बिकाऊ होती है. और अगर इसका जिक्र पाकिस्तान के संदर्भ में हो तो ये पंक्ति शत प्रतिशत सही साबित होती है. जो पाकिस्तान मुस्लिम देशों का खलीफा बनना चाहता है.
वही पाकिस्तान अब सही कीमत मिलने पर मुसलमानों की जिंदगी का सौदा कर रहा है. पाक आर्मी की कीमत तय आसिम मुनीर ने गाजा के मुसलमानों की जान की कीमत तय कर दी है. पाकिस्तान की जो जल्लाद ब्रिगेड गाजा में तैनात होगी, उसका रेट चार्ट मुनीर ने, इजरायल को ई-मेल कर दिया है. एक सैनिक की तैनाती के बदले मुनीर कई हजार डॉलर मांग रहा है. लेकिन इजरायल ने कौड़ी का भाव लगाया है. रेट खुल चुका है. अभी डील चल रही है. लेकिन ये तय है कि कंगाल मुल्क का सेनाध्यक्ष पैसों के बदले जरूर अपने सैनिकों को गाजा भेजेगा. इसीलिए अब हम इस्लमिक एकता को लेकर पाकिस्तान की पाखंड नीति का DNA टेस्ट करेंगे. जिया-उल-हक ने क्या कहा था? पाकिस्तान का कुख्यात तानाशाह था मुहम्मद जिया-उल-हक. 1970 के दशक में उसने कहा था कि पाकिस्तान इजरायल जैसा वैचारिक राज्य है. इजरायल से यहूदी धर्म निकाल दो तो वो पत्तों की तरह ढह जाएगा. पाकिस्तान से इस्लाम निकालकर इसे धर्मनिरपेक्ष बना दो तो ये भी ढह जाएगा. एक्सट्रीमिज्म की फैक्ट्री पाकिस्तान अतिवाद का प्रयोगशाला बना हुआ है. पाकिस्तान ने कभी इजरायल को मान्यता नहीं दी. उसकी संप्रुभता को स्वीकार नहीं किया. फिलिस्तीन के मुस्लिमों के साथ अपनी वैचारिक दृढता दिखाता रहा. इसके बावजूद इजरायल अपने सिद्धांत पर अटल है. लेकिन उसी इजरायल के पैसों के आगे पाकिस्तान की वैचारिक निष्ठा की दीवार ढह गई है. जिस गाजा को लेकर पाकिस्तान आंसू बहाता रहा है, वहीं पर पाकिस्तानी सैनिक, इजरायल के इशारों पर काम करेंगे. इसके बदले मुनीर ने इजरायल से मोटी रकम की डिमांड की है. एक पाक सैनिक की कीमत कितनी? सूत्रों के मुताबिक आसिम मुनीर ने कहा है कि गाजा में तैनात होने वाले एक पाकिस्तानी सैनिक के बदले उसे 10 हजार डॉलर चाहिए. लेकिन इजरायल एक पाकिस्तानी सैनिक की कीमत सिर्फ सौ डॉलर लगा रहा है. इजरायल को पता है कि जिस मुल्क के सैनिक कायर और बुजदिल हों, उनपर क्यों ज्यादा डॉलर लुटाना. खैर, आसिम मुनीर ने इजरायली अधिकारियों को फिर से विचार करने का आग्रह किया है. पाकिस्तान के करीब 20 हजार फौजियों को गाजा में तैनात किए जाने की चर्चा है. #DNAWithRahulSinha | पाकिस्तानी फौज बिकेगी..इजरायल खरीदेगा! अपने फौजियों को कितने रुपये में बेच रहा मुनीर? PAK फौज के लिए मुनीर की बोली का विश्लेषण#DNA #Pakistan #PakistanArmy #AsimMunir @RahulSinhaTV pic.twitter.comKK8n4kbu0m — Zee News November 3, 2025 मोलभाव जारी है सूत्र बताते हैं कि फिलहाल दोनों तरफ से मोलभाव चल रहा है. कीमत में कुछ ऊपर-नीचे होने की संभावना है. लेकिन ये पक्का है कि पाकिस्तानी सैनिक जल्द ही गाजा में तैनात होंगे. क्योंकि मिस्र में जो बैठक हुई थी, उसमें मोसाद और CIA के सीनियर अधिकारियों के सामने आसिम मुनीर ने गाजा में अपने सैनिकों की तैनाती का वादा किया था. मुनीर वादे से इसलिए नहीं मुकर सकता. क्योंकि इसको लेकर उस पर अमेरिका का भारी दबाव है. वो अच्छी तरह जानता है कि जो हो रहा है वो अमेरिकी राष्ट्रपति की मर्जी से हो रहा है. इस वादाखिलाफी का मतलब ट्रंप को नाराज करना है. और आसिम मुनीर ये रिस्क बिल्कुल भी नहीं ले सकता. पैसे के आगे कुछ नहीं दिख रहा आसिम मुनीर के अपने सैनिकों को गाजा भेजने का दूसरा कारण पैसा है. 20 हजार सैनिकों के बदले उसे मोटी रकम मिल जाएगी. मित्रो, हम आपको यहां ये भी बताना चाहेंगे कि गाजा में जाकर ये पाकिस्तानी सैनिक क्या करेंगे? आसिम मुनीर ने मिस्र में जो सीक्रेट मीटिंग की थी उसमें ये तय हुआ था कि पाकिस्तान की जो सेना गाजा में तैनात होगी उसके पास दो जिम्मेदारियां होंगी. पहली ये कि गाजा की सुरक्षा करनी है. दूसरी ये कि हमास को नियंत्रित करने के लिए पाकिस्तानी सेना, इजरायल की मदद करेगी. इसके बदले इजरायल, पाकिस्तान को डॉलर में भुगतान करेगा. इजरायल का आदेश मानेंगे पाक सैनिक? इसका मतलब बहुत साफ है. गाजा में पाकिस्तानी सैनिक वही करेंगे जो इजरायल चाहेगा. और इजरायल की चाहत क्या है, वो दुनिया भी जानती है और पाकिस्तान भी जानता है. सरल शब्दों में समझिए तो इजरायल, फिलिस्तीन पर अपना नियंत्रण चाहता है. अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए सैन्य कार्रवाई करता है. इजरायल का विरोध करने वाले हमास और जिहादी समूहों पर बम बरसाता है. 71,000 फिलिस्तीनियों की मौत इसमें जिहादियों के अलावा आमलोग भी मारे जा रहे हैं. लाखों लोग बेघर हुए हैं. 7 अक्टूबर 2023 से 3 नवंबर 2025 के बीच 71 हजार फिलिस्तीनी मारे गए हैं. पौने दो लाख लोग जख्मी हैं. 19 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो चुके हैं. और ये आंकड़ा सिर्फ 2 सालों का है. उससे पहले की गितनी जोड़ देंगे ये नंबर और बड़ा हो जाएगा. किस साइड है पाकिस्तान? फिलिस्तीन में जो मारे गए, जो बेघर हुए ये सारे मुसलमान हैं. इन्हीं के नाम पर पाकिस्तान में लोग प्रदर्शन करते हैं. इसी फिलिस्तीनियों की आजादी के लिए हमास लड़ता है. लेकिन अब हमास के लड़ाकों को पाकिस्तान की सेना रोकेगी. जरूरत पड़ी तो इजरायली सैनिक के साथ हमला भी करेगी. फिलिस्तिनियों के आजादी के आजादी के संघर्ष को कुचलेगी. मित्रो, सोचिए कि अब तक पाकिस्तान की नीति इजरायल विरोधी रही है. पाक-इजरायल संबंध 1952 में ही पाकिस्तान ने इजरायल के खिलाफ कट्टर नीति अपनाई थी. तब के पाकिस्तानी विदेश मंत्री मुहम्मद जफरुल्लाह ने इजरायल को आक्रमणकारी करार दिया था. उन्होंने फिलिस्तीन की एकता की मांग की थी. उसके बाद से इजरायल विरोध की तीव्रता बढ़ती गई. 2014 में नवाज शरीफ ने गाजा में इजरायल की कार्रवाई को क्रूर नरसंहार कहा था. उन्होंने फिलिस्तीन के साथ खड़े होने की दृढता जताई थी. 2023 में इमरान ने खान ने कहा था कि फिलिस्तीन में नरसंहार हो रहा है, पूरी दुनिया के मुसलमानों को साथ खड़ा होना चाहिए. मौलवी तकी उस्मानी ने इजरायल के खिलाफ जिहाद की घोषणा की थी. युद्ध अपराधी कहा गया मौलाना फजल उर रहमान ने इजरायल को युद्ध अपराधी कहा था. उसने तो यहां तक कहा था कि पाकिस्तान को फिलिस्तीन के लिए परमाणु हथियार इस्तेमाल करना चाहिए. पाकिस्तान की पाखंड का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि सितंबर में दोहा में मुस्लिम देशों का शिखर सम्मेलन हुआ था. उसमें शहबाज शरीफ ने कहा था कि सभी मुस्लिम देशों को फिलिस्तीन के साथ खड़ा होना चाहिए. पाकिस्तान का हृदय परिवर्तन? लेकिन पैसा देखकर पाकिस्तानियों का हृदय परिवर्तन हो गया है. ये साबित हो गया कि उम्मा एकता ढोंग है. पाखंड है. अब गाजा में पाकिस्तानी सैनिक वही करेंगे, जो इजरायल कहेगा. मुसलमानों को खून बहाने के बदले जो पैसा मिलेगा, उसका पूरा हिसाब किताब जोड़कर मुनीर ने ये फैसला लिया है. उसने पाकिस्तानी सैनिकों को मिलिशिया बना दिया. गाजा में सैनिक उतारने की तैयारी अभी पाकिस्तान अपने 20 हजार सैनिकों को गाजा में उतारेगा. आगे और डिमांड होगी तो भेज सकता है. वैसे भी पाकिस्तानी सैनिक तालिबान से डरे हुए हैं. पाकिस्तान के पास साढ़े छह लाख सैनिक हैं. अगर उसने 5 लाख सैनिकों को किराए पर लगा दिया तो पाकिस्तान को 5 अरब डॉलर की कमाई होगी. IMF को चुकाएगा लोन इससे वो IMF को अगले 4 सालों की किश्त एडवांस में दे सकता है. विदेशी मुद्रा भंडार को 33 फीसदी तक बढ़ा सकता है. पाकिस्तान एयरफोर्स को 3 से 4 F-16 फाइटर जेट मिल सकते हैं. एक महीने के लिए एक करोड़ गरीबों की थाली सस्ती हो जाएगी. बिजली कंपनियों का 60 प्रतिशत पुराना कर्ज चुकता हो जाएगा. पाकिस्तान की आर्थिक हालत सेना की एक्सपोर्ट स्कीम से पाकिस्तान में आटा-प्याज-टमाटर की किल्लत भी कम हो जाएगी. इसमें अगर सैनिकों की जान जाएगी भी तो बहुत अधिक फर्क नहीं पड़ेगा. पाकिस्तान में पैसे लेकर जान देने की पुरानी नीति रही है. अब तक पाकिस्तानी लड़के, मोटी रकम लेकर भारत में आतंकी हमला करते रहे हैं. अब सेना की वर्दी पहनकर वो ये काम करेंगे. करगिल जंग भूल गए? वैसे भी पाकिस्तान में सैनिकों की हैसियत क्या है इस बात को आप ऐसे समझिए कि करगिल युद्ध में पाकिस्तान ने अपने 30 सैनिकों का शव लेने से इनकार कर दिया था. 21 जून 2006 को नॉर्थ वजीरिस्तान में TTP के हमले में हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया, 4 सैनिक मारे गए मगर पाकिस्तान ने स्वीकार नहीं किया. ये आकंड़े पाकिस्तान की डिनायल कल्चर को दर्शाते हैं. अब सोचिए कि जो पाकिस्तान अपने सैनिकों के शव तक को नहीं अपनाता. उसे किसी दूसरे देश के लोगों से कितनी सहानुभूति होगी.पाकिस्तान सिर्फ सैनिकों को किराए पर नहीं दे रहा है, बल्कि अपनी जमीन भी किराए पर देता रहा है. अब खबर है कि इस्लामाबाद का हवाई अड्डे अब वो संयुक्त अरब आमिरात को देने वाला है. नीति विहीन पाक पाकिस्तानियों की ना कोई नीति है. ना कोई निष्ठा है. ना कोई वैचारिक मित्रता है. उसके लिए सिर्फ पैसा ही सबकुछ है. पैसे के लिए ही पाकिस्तान ने अपनी जमीन, चीन के हाथों बेच दी. प्राकृतिक संसाधनों को गिरवी रख दिया. गरीब पाकिस्तानियों के मानव अंगों की सप्लाई की. यहां तक कि पाकिस्तानी लड़कियों की तस्करी तक की. सोचिए कि जो देश पैसों के लिए अपनों को बेच सकता है, उसके लिए दूसरे देशों के लोगों की अहमियत क्या होगी? गाजा और फिलिस्तीन के साथ पाकिस्तान का समर्थन सिर्फ और सिर्फ एक दिखावा है. कीमत मिलते आसिम मुनीर ने फिलिस्तीनी मुसलमानों का भी सौदा कर दिया है.
Asim Munir Israel Gaza Hamas Palestine Pakistani Army
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