संसद का बजट सत्र 28 जनवरी को शुरू हुआ था और 2 अप्रैल को समाप्त होने वाला था। हालांकि, सरकार इसे कुछ दिनों के अंतराल के साथ दो-तीन दिन और बढ़ाने पर विचार कर रही है।
संसद का बजट सत्र 28 जनवरी को शुरू हुआ था और 2 अप्रैल को समाप्त होने वाला था। हालांकि, सरकार इसे कुछ दिनों के अंतराल के साथ दो-तीन दिन और बढ़ाने पर विचार कर रही है। जानकारी के अनुसार, गुरुवार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों के पीठासीन अधिकारी सदनों को स्थगित करेंगे और घोषणा करेंगे कि वे एक खास तारीख पर फिर मिलेंगे। एक सूत्र ने बताया, "सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित नहीं होगा, बल्कि इस घोषणा के साथ स्थगित होगा कि एक खास तारीख को फिर से सदन की बैठक होगी। हम इसी महीने बहुत जल्द फिर मिलेंगे।" सूत्रों के अनुसार, अप्रैल के तीसरे सप्ताह में संभवित रूप से दो से तीन दिनों की बैठक बुलाई जा सकती है। हालांकि, सरकार की इन योजनाओं पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। सूत्रों का मानना है कि बढ़ी हुई अवधि के दौश्रान सरकार संसद में संविधान संशोधन विधेयक पेश कर सकती है। यह विधेयक नारी शक्ति वंदन अधिनियम , जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण कानून के नाम से जाना जाता है में संशोधन करेगा। जानकारी के अनुसार पिछले पखवाड़े, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस मसले पर कुछ राजग घटकों और गैर-कांग्रेसी विपक्षी नेताओं के साथ चर्चा की थी। लेकिन प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस और एक अन्य प्रमुख दल तृणमूल कांग्रेस के साथ अभी तक परामर्श नहीं हुआ है। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण प्रदान करने का प्रावधान 2023 में संविधान संशोधन द्वारा लाया गया था, लेकिन यह परिसीमन अभ्यास पूरा होने के बाद ही प्रभावी होगा। लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने की तैयारी जानकारी के अनुसार, परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों की संख्या वर्तमान 543 से बढ़ाकर 816 की जाएगी। इनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। आरक्षण के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटें आवंटित होंगी। निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन प्रस्तावित 2027 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा। इसी तरह का अभ्यास राज्य विधानसभाओं के लिए भी किया जाएगा, जहां सीटों को आनुपातिक आधार पर आरक्षित किया जाएगा। अगले लोकसभा चुनावों तक नारी शक्ति वंदन अधिनियम अमल में आएगा सूत्रों के अनुसार, एक संविधान संशोधन विधेयक नारी शक्ति वंदन अधिनियम में बदलाव करेगा। एक अन्य सामान्य विधेयक परिसीमन अधिनियम में संशोधन करेगा। संसद द्वारा अनुमोदित होने के बाद, प्रस्तावित कानून 31 मार्च, 2029 को लागू होंगे। यह अगले लोकसभा चुनावों और ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम व आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनावों में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने में मदद करेगा। सूत्रों ने यह भी बताया कि एक परिसीमन आयोग एक तटस्थ निकाय है। यह लोकसभा और विधानसभा के निर्वाचन क्षेत्रों को फिर से बनाने के लिए अनिवार्य है और इसके निर्णयों को सर्वोच्च न्यायालय में भी चुनौती नहीं दी जा सकती है। क्या है परिसीमन आयोग की भूमिका? सूत्रों ने कहा कि एक तटस्थ निकाय परिसीमन को विश्वसनीय बनाएगा। चुनाव आयोग एक और स्वतंत्र संस्था है, लेकिन इसे अखिल भारतीय स्तर पर परिसीमन करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।एक सरकारी अधिकारी ने बताया, "यह अधिकतम, यह एक या कुछ राज्यों का परिसीमन कर सकता है, जैसा कि इसने हाल ही में असम में किया था।" परिसीमन आयोग भारत सरकार द्वारा गठित एक स्वतंत्र, उच्च-शक्ति प्राप्त अर्ध-न्यायिक निकाय है। इसका मुख्य कार्य लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण करना है, ताकि प्रत्येक क्षेत्र को न्यायपूर्ण प्रतिनिधित्व मिल सके। इसके आदेश कानूनी रूप से बाध्यकारी होते हैं और इन्हें किसी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती। सितंबर 2023 में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नारी शक्ति वंदन विधेयक को अपनी सहमति दी थी। यह कानून आधिकारिक तौर पर संविधान अधिनियम के रूप में जाना जाता है।.
संसद का बजट सत्र 28 जनवरी को शुरू हुआ था और 2 अप्रैल को समाप्त होने वाला था। हालांकि, सरकार इसे कुछ दिनों के अंतराल के साथ दो-तीन दिन और बढ़ाने पर विचार कर रही है। जानकारी के अनुसार, गुरुवार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों के पीठासीन अधिकारी सदनों को स्थगित करेंगे और घोषणा करेंगे कि वे एक खास तारीख पर फिर मिलेंगे। एक सूत्र ने बताया, "सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित नहीं होगा, बल्कि इस घोषणा के साथ स्थगित होगा कि एक खास तारीख को फिर से सदन की बैठक होगी। हम इसी महीने बहुत जल्द फिर मिलेंगे।" सूत्रों के अनुसार, अप्रैल के तीसरे सप्ताह में संभवित रूप से दो से तीन दिनों की बैठक बुलाई जा सकती है। हालांकि, सरकार की इन योजनाओं पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। सूत्रों का मानना है कि बढ़ी हुई अवधि के दौश्रान सरकार संसद में संविधान संशोधन विधेयक पेश कर सकती है। यह विधेयक नारी शक्ति वंदन अधिनियम, जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण कानून के नाम से जाना जाता है में संशोधन करेगा। जानकारी के अनुसार पिछले पखवाड़े, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस मसले पर कुछ राजग घटकों और गैर-कांग्रेसी विपक्षी नेताओं के साथ चर्चा की थी। लेकिन प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस और एक अन्य प्रमुख दल तृणमूल कांग्रेस के साथ अभी तक परामर्श नहीं हुआ है। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण प्रदान करने का प्रावधान 2023 में संविधान संशोधन द्वारा लाया गया था, लेकिन यह परिसीमन अभ्यास पूरा होने के बाद ही प्रभावी होगा। लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने की तैयारी जानकारी के अनुसार, परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों की संख्या वर्तमान 543 से बढ़ाकर 816 की जाएगी। इनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। आरक्षण के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटें आवंटित होंगी। निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन प्रस्तावित 2027 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा। इसी तरह का अभ्यास राज्य विधानसभाओं के लिए भी किया जाएगा, जहां सीटों को आनुपातिक आधार पर आरक्षित किया जाएगा। अगले लोकसभा चुनावों तक नारी शक्ति वंदन अधिनियम अमल में आएगा सूत्रों के अनुसार, एक संविधान संशोधन विधेयक नारी शक्ति वंदन अधिनियम में बदलाव करेगा। एक अन्य सामान्य विधेयक परिसीमन अधिनियम में संशोधन करेगा। संसद द्वारा अनुमोदित होने के बाद, प्रस्तावित कानून 31 मार्च, 2029 को लागू होंगे। यह अगले लोकसभा चुनावों और ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम व आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनावों में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने में मदद करेगा। सूत्रों ने यह भी बताया कि एक परिसीमन आयोग एक तटस्थ निकाय है। यह लोकसभा और विधानसभा के निर्वाचन क्षेत्रों को फिर से बनाने के लिए अनिवार्य है और इसके निर्णयों को सर्वोच्च न्यायालय में भी चुनौती नहीं दी जा सकती है। क्या है परिसीमन आयोग की भूमिका? सूत्रों ने कहा कि एक तटस्थ निकाय परिसीमन को विश्वसनीय बनाएगा। चुनाव आयोग एक और स्वतंत्र संस्था है, लेकिन इसे अखिल भारतीय स्तर पर परिसीमन करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।एक सरकारी अधिकारी ने बताया, "यह अधिकतम, यह एक या कुछ राज्यों का परिसीमन कर सकता है, जैसा कि इसने हाल ही में असम में किया था।" परिसीमन आयोग भारत सरकार द्वारा गठित एक स्वतंत्र, उच्च-शक्ति प्राप्त अर्ध-न्यायिक निकाय है। इसका मुख्य कार्य लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण करना है, ताकि प्रत्येक क्षेत्र को न्यायपूर्ण प्रतिनिधित्व मिल सके। इसके आदेश कानूनी रूप से बाध्यकारी होते हैं और इन्हें किसी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती। सितंबर 2023 में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नारी शक्ति वंदन विधेयक को अपनी सहमति दी थी। यह कानून आधिकारिक तौर पर संविधान अधिनियम के रूप में जाना जाता है।
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