US H-1B Visa Story: अमेरिका में नौकरी के लिए सबसे पॉपुलर वर्क वीजा H-1B है। इस पर अमेरिकी कंपनियां दुनियाभर से विदेशी वर्कर्स की हायरिंग करती हैं, जो टेक और फाइनेंस जैसे सेक्टर्स में जॉब करने आते हैं।
US H-1B Visa News: अमेरिका में कंपनियों की पॉलिसी ऐसी होती है कि वे कभी भी वर्कर को बाहर का रास्ता दिखा देती हैं। भले ही वर्कर कितने ही वक्त से उनके यहां काम ही क्यों ना कर रहा हो। ऐसा ही कुछ एक 29 वर्षीय H-1B वीजा होल्डर के साथ हुआ, जिसे अमेरिका में लौटने के एक महीने के भीतर ही नौकरी से निकाल दिया गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर उसने एक पोस्ट के जरिए बताया है कि उसे किस तरह पहले भारत, फिर कनाडा और आखिर में अमेरिका जॉब के लिए बुलाया गया।भारतीय टेक वर्कर ने बताया कि वह 2021 में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद से ही इसी कंपनी में जॉब कर रहा था। जब 2024 में H-1B वीजा के लिए उसका सेलेक्शन नहीं हुआ तो फिर कंपनी ने उसे कनाडा में जॉब के लिए भेज दिया, लेकिन यहां भी वीजा मिलने में समय लग रहा था। इस वजह से उसे भारत भेजे गया और फिर जब कनाडा का वर्क परमिट मिला, तो फिर वहां ट्रांसफर कर दिया। आखिर में जब H-1B वीजा मिला तो उसे अमेरिका बुलाया गया, लेकिन फिर महीने भर में ही छंटनी कर दी गई। पहले कनाडा ट्रांसफर किया, फिर भेज दिया भारतटेक वर्कर ने 'अमेरिका लौटने के एक महीने के भीतर ही हुई छंटनी' नाम से एक पोस्ट की। इसमें उसने कहा, 'आज नौकरी से निकाल दिए जाने के बाद पूरा दिन निराशा महसूस हुई। मैं 2021 में मास्टर्स डिग्री लेने के बाद से ही इसी कंपनी के साथ रहा हूं और जब पिछले साल मुझे वर्क वीजा नहीं मिला तो उन्होंने मुझे कनाडा ट्रांसफर करने का प्रोसेस शुरू कर दिया था। वीजा प्रोसेस में बहुत लंबा समय लग रहा था। उन्होंने मुझे शुरुआत में 3 महीने के लिए भारत में भी ट्रांसफर किया और फिर वीजा आने के बाद मैं कनाडा लौट गया।'खुद से पैसा खर्च कर अमेरिका गयाभारतीय वर्कर ने आगे बताया कि उसने खुद की जेब से पैसे लगाकर प्रीमियम प्रोसेसिंग के लिए अप्लाई किया। तभी कहीं जाकर उसका वीजा जल्दी आया और फिर वह सितंबर के आखिर में अमेरिका काम करने गया। उसने लिखा, 'मेरा H-1B वीजा इस साल की लॉटरी में आया और कंपनी ने गर्मियों में ही उसे भर दिया था। जब मुझे एहसास हुआ कि मेरी टीम ठीक से काम नहीं कर रही है और हम पैसे वसूल नहीं कर पा रहे हैं तो मैंने अपनी जेब से प्रीमियम प्रोसेसिंग में अपग्रेड किया और सितंबर के अंत तक अमेरिका वापस लौट आया।'वफादारी के काबिल नहीं कोई कंपनीटेक वर्कर ने बताया, 'हम अभी भी लगभग कोई बिल-योग्य काम नहीं कर रहे थे और आज सुबह मुझे और मेरे एक और सहकर्मी को नौकरी से निकाल दिया गया। मैं ये नहीं कहूंगा कि मुझे इसकी भनक नहीं थी, लेकिन मुझे उम्मीद नहीं थी कि सबसे पहले मुझे ही नौकरी से निकाल दिया जाएगा, क्योंकि कार्यकाल के हिसाब से मैं दूसरा सबसे उम्रदराज व्यक्ति हूं। कंपनी में बाकी सभी लोग मेरी छंटनी की खबर सुनकर हैरान रह गए।'उसने कहा, 'मुझे सबसे बड़ा अफसोस इस बात का है कि मैंने पहले से ही नौकरियों के लिए आवेदन क्यों नहीं शुरू कर दिए। मुझे डर था कि अमेरिका वापस आते ही नौकरी बदलना बाकियों को बुरा लगेगा। खैर मुझे सबक मिला: कोई भी कंपनी अंधी वफादारी के काबिल नहीं होती और हमेशा अपना ख्याल रखना चाहिए।'.
US H-1B Visa News: अमेरिका में कंपनियों की पॉलिसी ऐसी होती है कि वे कभी भी वर्कर को बाहर का रास्ता दिखा देती हैं। भले ही वर्कर कितने ही वक्त से उनके यहां काम ही क्यों ना कर रहा हो। ऐसा ही कुछ एक 29 वर्षीय H-1B वीजा होल्डर के साथ हुआ, जिसे अमेरिका में लौटने के एक महीने के भीतर ही नौकरी से निकाल दिया गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर उसने एक पोस्ट के जरिए बताया है कि उसे किस तरह पहले भारत, फिर कनाडा और आखिर में अमेरिका जॉब के लिए बुलाया गया।भारतीय टेक वर्कर ने बताया कि वह 2021 में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद से ही इसी कंपनी में जॉब कर रहा था। जब 2024 में H-1B वीजा के लिए उसका सेलेक्शन नहीं हुआ तो फिर कंपनी ने उसे कनाडा में जॉब के लिए भेज दिया, लेकिन यहां भी वीजा मिलने में समय लग रहा था। इस वजह से उसे भारत भेजे गया और फिर जब कनाडा का वर्क परमिट मिला, तो फिर वहां ट्रांसफर कर दिया। आखिर में जब H-1B वीजा मिला तो उसे अमेरिका बुलाया गया, लेकिन फिर महीने भर में ही छंटनी कर दी गई। पहले कनाडा ट्रांसफर किया, फिर भेज दिया भारतटेक वर्कर ने 'अमेरिका लौटने के एक महीने के भीतर ही हुई छंटनी' नाम से एक पोस्ट की। इसमें उसने कहा, 'आज नौकरी से निकाल दिए जाने के बाद पूरा दिन निराशा महसूस हुई। मैं 2021 में मास्टर्स डिग्री लेने के बाद से ही इसी कंपनी के साथ रहा हूं और जब पिछले साल मुझे वर्क वीजा नहीं मिला तो उन्होंने मुझे कनाडा ट्रांसफर करने का प्रोसेस शुरू कर दिया था। वीजा प्रोसेस में बहुत लंबा समय लग रहा था। उन्होंने मुझे शुरुआत में 3 महीने के लिए भारत में भी ट्रांसफर किया और फिर वीजा आने के बाद मैं कनाडा लौट गया।'खुद से पैसा खर्च कर अमेरिका गयाभारतीय वर्कर ने आगे बताया कि उसने खुद की जेब से पैसे लगाकर प्रीमियम प्रोसेसिंग के लिए अप्लाई किया। तभी कहीं जाकर उसका वीजा जल्दी आया और फिर वह सितंबर के आखिर में अमेरिका काम करने गया। उसने लिखा, 'मेरा H-1B वीजा इस साल की लॉटरी में आया और कंपनी ने गर्मियों में ही उसे भर दिया था। जब मुझे एहसास हुआ कि मेरी टीम ठीक से काम नहीं कर रही है और हम पैसे वसूल नहीं कर पा रहे हैं तो मैंने अपनी जेब से प्रीमियम प्रोसेसिंग में अपग्रेड किया और सितंबर के अंत तक अमेरिका वापस लौट आया।'वफादारी के काबिल नहीं कोई कंपनीटेक वर्कर ने बताया, 'हम अभी भी लगभग कोई बिल-योग्य काम नहीं कर रहे थे और आज सुबह मुझे और मेरे एक और सहकर्मी को नौकरी से निकाल दिया गया। मैं ये नहीं कहूंगा कि मुझे इसकी भनक नहीं थी, लेकिन मुझे उम्मीद नहीं थी कि सबसे पहले मुझे ही नौकरी से निकाल दिया जाएगा, क्योंकि कार्यकाल के हिसाब से मैं दूसरा सबसे उम्रदराज व्यक्ति हूं। कंपनी में बाकी सभी लोग मेरी छंटनी की खबर सुनकर हैरान रह गए।'उसने कहा, 'मुझे सबसे बड़ा अफसोस इस बात का है कि मैंने पहले से ही नौकरियों के लिए आवेदन क्यों नहीं शुरू कर दिए। मुझे डर था कि अमेरिका वापस आते ही नौकरी बदलना बाकियों को बुरा लगेगा। खैर मुझे सबक मिला: कोई भी कंपनी अंधी वफादारी के काबिल नहीं होती और हमेशा अपना ख्याल रखना चाहिए।'
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