भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को दवा और कॉस्मेटिक्स अधिनियम के प्रावधानों के कथित उल्लंघन के आरोप में दो कंपनियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को खारिज कर दिया।
भारत के सर्वोच्च न्याय ालय ने गुरुवार को दो कंपनियों के खिलाफ दवा और कॉस्मेटिक्स अधिनियम के प्रावधानों के कथित उल्लंघन के आरोप में किए गए कार्रवाई को खारिज कर दिया। एक कंपनी औद्योगिक और चिकित्सा गैसों का उत्पादन करती थी, जबकि दूसरी दवा उत्पादित करती थी। शीर्ष अदालत ने कंपनियों से जुड़े अलग-अलग फैसले सुनाए। न्याय मूर्ति बीआर गवई और न्याय मूर्ति अगस्टीन जार्ज मसीह की पीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के समन आदेश में नाममात्र के लिए भी कोई कारण नहीं दिया गया था। एक कंपनी से जुड़े मामले में, जो घटिया दवा
बनाने के आरोप में फंस गई थी, पीठ ने कहा कि समन आदेश पूरी तरह गैर-विवेचनात्मक था। शीर्ष अदालत ने यह फैसला आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के अक्टूबर 2023 के फैसले के खिलाफ कंपनी की अपील पर सुनाया। उच्च न्यायालय ने कुरनूल ट्रायल कोर्ट में चल रही कार्रवाई को खारिज करने की उसकी याचिका को खारिज कर दिया था। पीठ ने कंपनी के वकील की दलीलों का उल्लेख करते हुए कहा, ''हम विभिन्न आधारों पर अपीलकर्ताओं की दलीलों पर विचार करना आवश्यक नहीं समझते क्योंकि वर्तमान अपील को मात्र इस आधार पर स्वीकार किया जा सकता है कि मजिस्ट्रेट ने बिना किसी कारण के प्रक्रिया शुरू की है।'' वर्तमान मामले में भी मजिस्ट्रेट ने नाममात्र के लिए कोई कारण नहीं दिया। दूसरी कंपनी, जो मेडिकल गैसों का उत्पादन करती थी, के मामले में शीर्ष कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता की दलीलें रिकार्ड करने के अलावा ट्रायल कोर्ट ने आरोपित के विरुद्ध जारी समन में कोई कारण दर्ज नहीं किया। अपने एक फैसले का जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'इस अदालत ने स्पष्ट कहा था कि आपराधिक मामले में आरोपित को समन करना एक गंभीर मामला है। यह कहा जा चुका है कि आरोपित को समन करने वाले मजिस्ट्रेट के आदेश में यह प्रदर्शित होना चाहिए कि उन्होंने मामले के तथ्यों एवं उसमें लागू प्रविधानों में दिमाग का प्रयोग किया है।' कोर्ट ने फैसले में कहा था कि आरोपित को समन करने से पहले प्रारंभिक साक्ष्यों को रिकॉर्ड करते समय मजिस्ट्रेट मूकदर्शक नहीं रह सकता
सुप्रीम कोर्ट दवा कॉस्मेटिक्स अधिनियम कंपनियां कार्रवाई खारिज
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