मुरादाबाद के मैनाठेर बवाल 6 जुलाई 2011 में डीआइजी अशोक कुमार सिंह पर हुए हमले की भयावहता मेडिकल रिपोर्ट से सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, उनके सिर, चेहरे और सीने पर गंभीर चोटें थीं, साथ ही कई जगह फ्रैक्चर भी। दाहिने कान का पर्दा फटा था और पसलियां टूटी थीं। चिकित्सकों ने इन चोटों को जानलेवा इरादे से किया गया 'गंभीर प्रकृति' का हमला बताया, जो कानून...
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। मैनाठेर बवाल की वह खौफनाक शाम सिर्फ कानून व्यवस्था पर हमला नहीं थी, बल्कि वर्दी पर ऐसा बर्बर वार था जिसने पूरे सिस्टम को हिला दिया था। छह जुलाई 2011 को हुए इस हमले में डीआइजी अशोक कुमार सिंह को जिस तरह निशाना बनाया गया, उसकी भयावह तस्वीर कोर्ट में पेश मेडिकल रिपोर्ट से साफ हो गई है। यह रिपोर्ट सिर्फ चोटों का विवरण नहीं, बल्कि उस दिन की हिंसा की पूरी कहानी बयान कर रही है। घटना के दिन सांई अस्पताल में तैनात आकस्मिक चिकित्सा अधिकारी डा.
प्रीतम बाला के अनुसार, जब डीआइजी को इमरजेंसी में लाया गया तो उनका शरीर गंभीर जख्मों से भरा हुआ था। सिर पर कई जगह गहरे कटे और फटे घाव थे। सिर पर कई लेसरेटेड और अब्रेडेड घाव थे, जिनका आकार लगभग दो से तीन सेंटीमीटर तक था। इससे साफ है कि हमला बेहद करीब से और पूरी ताकत के साथ किया गया। चेहरे की स्थिति भी बेहद गंभीर थी। दाहिने कान के पीछे गहरा घाव, आंख के ऊपर कट, होंठों पर फटे जख्म और पूरे चेहरे पर सूजन व खरोंच के निशान मिले। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि दाहिने कान का पर्दा फट गया था, जिसे डाक्टरों ने गंभीर चोट की श्रेणी में रखा। यह चोट इस बात का संकेत है कि हमला बेहद हिंसक और जानलेवा स्तर का था। चिकित्सक के मुताबिक, डीआइजी के दोनों हाथों, कंधों और सीने पर भी गंभीर चोटें थीं। एक्स-रे और सीटी स्कैन के बाद जो तथ्य सामने आए, उन्होंने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। दाहिनी तरफ की छठी और सातवीं पसली टूटी हुई पाई गईं। बाएं कंधे की हड्डी में फ्रैक्चर था। इसके अलावा दाहिने हाथ की उंगलियों और बाएं हाथ की कलाई में भी कई जगह फ्रैक्चर पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार, पेट में दर्द की शिकायत के चलते पूरे एब्डामेन का अल्ट्रासाउंड कराया गया। चिकित्सकों ने तत्काल न्यूरो सर्जन और आर्थो सर्जन की निगरानी में इलाज की सलाह दी। इससे स्पष्ट होता है कि चोटें सिर्फ बाहरी नहीं थीं, बल्कि शरीर के अंदर भी गंभीर नुकसान हुआ था। कोर्ट में पेश सप्लीमेंट्री रिपोर्ट में चिकित्सकों ने साफ तौर पर कहा कि डीआइजी को कई चोटें ग्रीवियस यानी गंभीर प्रकृति की थीं। खासकर सिर, पसलियों और हाथों में हुए फ्रैक्चर इस बात का प्रमाण हैं कि हमला जानलेवा इरादे से किया गया था। इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम पहलू यह भी उभरकर सामने आया कि हमला सिर्फ एक अधिकारी पर नहीं, बल्कि वर्दी और कानून व्यवस्था पर सीधा वार था। जिस तरह से एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को निशाना बनाया गया, वह प्रशासनिक व्यवस्था को खुली चुनौती देने जैसा था। चिकित्सकों की गवाही के दौरान बचाव पक्ष ने कई सवाल उठाए, लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में कोई विरोधाभास सामने नहीं आया। इससे यह साबित हो गया कि घटना के दौरान जो कुछ हुआ, वह पूरी तरह चिकित्सकीय साक्ष्यों से पुष्ट है। मैनाठेर कांड की यह मेडिकल रिपोर्ट बताती है कि उस दिन सिर्फ लाठी-डंडे नहीं चले थे, बल्कि कानून के रक्षक को खत्म करने की कोशिश की गई थी। डीआइजी के शरीर पर लगे जख्म आज भी उस बर्बरता की गवाही दे रहे हैं, जिसने पूरे सिस्टम को झकझोर कर रख दिया। यह भी पढ़ें- मुरादाबाद का वो काला बुधवार: जब DIG को 'मरा' समझकर भीड़ छोड़ गई, 6 घंटे तक जलता रहा था शहर यह भी पढ़ें- DM राजशेखर गाड़ी में बैठकर भाग निकले और मुझे 500 की भीड़ में अकेला छोड़ दिया... ADG अशोक सिंह का दर्दनाक खुलासा!
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