लोकसभा चुनाव 2019: उत्तर प्रदेश में बीजेपी के लिए आसान नहीं होगी जंग, इन सीटों पर मुश्किल-Navbharat Times

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लोकसभा चुनाव 2019: उत्तर प्रदेश में बीजेपी के लिए आसान नहीं होगी जंग, इन सीटों पर मुश्किल

राकेश मोहन चतुर्वेदी, नई दिल्ली लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश में एसपी-बीएसपी-आरएलडी का गठबंधन और कांग्रेस के मजबूत होने से बीजेपी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बीजेपी ने 2014 के पिछले लोकसभा चुनाव में राज्य में 80 में से 71 सीटें जीती थी और यह प्रदर्शन दोहराना लगभग असंभव है। सत्ता विरोधी लहर से निपटने के लिए बीजेपी अपने कुछ मौजूदा लोकसभा सांसदों को बदल सकती है। हालांकि, टिकट न पाने वालों के विद्रोही के तौर पर खड़े होने की आशंका भी पार्टी के लिए एक चिंता है। ईटी ने उन कुछ सीटों का जायजा लिया है जिन पर बीजेपी ने 2014 में जीत हासिल की थी और जहां 2019 में उसके लिए मुकाबला आसान नहीं होगा। एसपी-बीएसपी गठबंधन में आरएलडी के जुड़ने से बीजेपी के लिए बागपत सीट को बरकरार रखने की संभावना घट गई है। इस सीट से जयंत चौधरी खड़े हो सकते हैं। पढ़ें: वेस्ट यूपी में चुनावी पिच तैयार, खिलाड़ी तय नहीं बीजेपी को इलाहाबाद सीट पर भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। एसपी के रेवती रमन सिंह ने 2009 में यह सीट जीती थी लेकिन 2014 में बीड़ी के बड़े व्यापारी श्यामा चरण गुप्ता ने उन्हें हरा दिया था। बीजेपी की बागी सावित्री बाई फुले बहराइच आरक्षित सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ेंगी और उनकी जीत की अच्छी संभावना है। बहराइच में कुर्मी समुदाय की बड़ी संख्या है और अगर बेनी प्रसाद वर्मा की ओर से फुले को समर्थन दिया जाता है तो वह दोबारा सांसद बन सकती हैं। कांग्रेस नेता पी एल पुनिया बाराबंकी आरक्षित सीट से अपने बेटे तनुज के लिए टिकट चाहते हैं। राज्यसभा सांसद पुनिया ने 2009 में यह सीट जीती थी। 2014 में बीजेपी की प्रियंका रावत ने यह सीट अपने नाम की थी। उत्तर प्रदेश में कैराना, फूलपुर और गोरखपुर की सीटों पर हुए उपचुनाव में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था। एसपी-बीएसपी-आरएलडी का गठबंधन कैराना में मजबूत दिख रहा है। ऐसी रिपोर्ट है कि बीजेपी फूलपुर सीट वापस हासिल करने के लिए उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को उतार सकती है। बीजेपी के सूत्रों ने बताया कि इस बार कानपुर में भी पार्टी को मुश्किल हो सकती है। अगर मुरली मनोहर जोशी चुनाव नहीं लड़ने का फैसला करते हैं जो पार्टी को इस सीट पर झटका लग सकता है। बीजेपी के लिए एक अन्य विकल्प विनय कटियार को इस सीट से टिकट देने का है क्योंकि कानपुर में कुर्मी जनसंख्या अधिक है। कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए की पिछली सरकार में मंत्री रह चुके श्री प्रकाश जायसवाल कानपुर में बीजेपी को कड़ी टक्कर देंगे। बीएसपी प्रमुख मायावती का अकबरपुर और अंबेडकरनगर की सीटों पर दबदबा है और इससे बीजेपी की राह मुश्किल होगी। इसके अलावा बीजेपी को बलिया, भदोही, चंदौली, फतेहपुर और देवरिया में एसपी कड़ी टक्कर देगी। मथुरा से हेमा मालिनी और सुल्तानपुर से वरुण गांधी को बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर खड़ा किया जाता है या नहीं इसे लेकर भी पार्टी में अटकलें लग रही हैं।.

राकेश मोहन चतुर्वेदी, नई दिल्ली लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश में एसपी-बीएसपी-आरएलडी का गठबंधन और कांग्रेस के मजबूत होने से बीजेपी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बीजेपी ने 2014 के पिछले लोकसभा चुनाव में राज्य में 80 में से 71 सीटें जीती थी और यह प्रदर्शन दोहराना लगभग असंभव है। सत्ता विरोधी लहर से निपटने के लिए बीजेपी अपने कुछ मौजूदा लोकसभा सांसदों को बदल सकती है। हालांकि, टिकट न पाने वालों के विद्रोही के तौर पर खड़े होने की आशंका भी पार्टी के लिए एक चिंता है। ईटी ने उन कुछ सीटों का जायजा लिया है जिन पर बीजेपी ने 2014 में जीत हासिल की थी और जहां 2019 में उसके लिए मुकाबला आसान नहीं होगा। एसपी-बीएसपी गठबंधन में आरएलडी के जुड़ने से बीजेपी के लिए बागपत सीट को बरकरार रखने की संभावना घट गई है। इस सीट से जयंत चौधरी खड़े हो सकते हैं। पढ़ें: वेस्ट यूपी में चुनावी पिच तैयार, खिलाड़ी तय नहीं बीजेपी को इलाहाबाद सीट पर भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। एसपी के रेवती रमन सिंह ने 2009 में यह सीट जीती थी लेकिन 2014 में बीड़ी के बड़े व्यापारी श्यामा चरण गुप्ता ने उन्हें हरा दिया था। बीजेपी की बागी सावित्री बाई फुले बहराइच आरक्षित सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ेंगी और उनकी जीत की अच्छी संभावना है। बहराइच में कुर्मी समुदाय की बड़ी संख्या है और अगर बेनी प्रसाद वर्मा की ओर से फुले को समर्थन दिया जाता है तो वह दोबारा सांसद बन सकती हैं। कांग्रेस नेता पी एल पुनिया बाराबंकी आरक्षित सीट से अपने बेटे तनुज के लिए टिकट चाहते हैं। राज्यसभा सांसद पुनिया ने 2009 में यह सीट जीती थी। 2014 में बीजेपी की प्रियंका रावत ने यह सीट अपने नाम की थी। उत्तर प्रदेश में कैराना, फूलपुर और गोरखपुर की सीटों पर हुए उपचुनाव में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था। एसपी-बीएसपी-आरएलडी का गठबंधन कैराना में मजबूत दिख रहा है। ऐसी रिपोर्ट है कि बीजेपी फूलपुर सीट वापस हासिल करने के लिए उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को उतार सकती है। बीजेपी के सूत्रों ने बताया कि इस बार कानपुर में भी पार्टी को मुश्किल हो सकती है। अगर मुरली मनोहर जोशी चुनाव नहीं लड़ने का फैसला करते हैं जो पार्टी को इस सीट पर झटका लग सकता है। बीजेपी के लिए एक अन्य विकल्प विनय कटियार को इस सीट से टिकट देने का है क्योंकि कानपुर में कुर्मी जनसंख्या अधिक है। कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए की पिछली सरकार में मंत्री रह चुके श्री प्रकाश जायसवाल कानपुर में बीजेपी को कड़ी टक्कर देंगे। बीएसपी प्रमुख मायावती का अकबरपुर और अंबेडकरनगर की सीटों पर दबदबा है और इससे बीजेपी की राह मुश्किल होगी। इसके अलावा बीजेपी को बलिया, भदोही, चंदौली, फतेहपुर और देवरिया में एसपी कड़ी टक्कर देगी। मथुरा से हेमा मालिनी और सुल्तानपुर से वरुण गांधी को बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर खड़ा किया जाता है या नहीं इसे लेकर भी पार्टी में अटकलें लग रही हैं।

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